January 2015


तौबा इस संसार में ...... भांति- भांति के प्रेम



                    वसन्त ऋतु तो अपनी दस्तक दे चुकी है , वातावरण खुशनुमा है ,पीली सरसों से खेत भर गए है, कोयले कूक रहीं हैं पूरा वातावरण सुगन्धित और मादक हो गया है ....उस पर १४ फरवरी भी आने वाली है .... जोश खरोश पूरे जोर शोर पर है ,सभी बच्चे बच्चियाँ ,नव युवक युवतियाँ नव प्रौढ़ प्रौढ़ाये ,बाज़ार ,टी .वी चैनल ,पत्र पत्रिकाएँ आदि आदि प्रेम प्रेम चिल्लाने में मगन हैं | हमारे मन में यह जानने  की तीव्र इक्षा हो रही है कि ये प्रेम आखिर कितने प्रकार होते  है ,दरसल जब हम १७ ,१८ के हुए तभी चोटी पकड़ कर मंडप में बिठा दिए गए .... बाई गॉड की कसम जब तक समझते कि प्रेम क्या है तब तक नन्हे बबलू के पोतड़े बदलने के दिन आ गए फिर तो बेलन और प्रेम साथ साथ चलता रहा ....( समझदार को ईशारा काफी है ) हां तो मुद्दे की बात यह है  रोमांटिक  फिल्मे देख देख कर और प्रेम प्रेम सुन कर हमारे कान पक गए हैं और हमने सोचा की मरने से पहले हम भी जान ले की ये प्रेम आखिर कितने प्रकार का  होता है इसीलिए अपना आधुनिक इकतारा (  मोबाइल )उठा कर निकल पड़े सड़क पर (आखिर साठ  की उम्र में सठियाना तो बनता ही है) |सड़कों पर हमें तरह तरह के प्रेम देखने को मिले ,प्रेम के यह अनेकों रंग हमें मोबाईल की बदलती रिंग टोन  की तरह कंफ्यूज करने वाले लगे .... सब वैसे का वैसा आप के सामने परोस रही हूँ ..................
१ )छुपाना भी नहीं आता ,जताना भी नहीं आता  :-
                                       ये थोडा शर्मीले किस्म का प्रेम होता है इसमें प्रेमी ,प्रेमिका प्यार तो करते पर इजहार करने में कतराते हैं पहले आप ,पहले आप की लखनवी गाडी में सवारी करने की कोशिश में अक्सर वो प्लेटफार्म पर ही रह जाते हैं |ये तो बिहारी के नायक नायिका से भी ज्यादा कच्चे दिल के होते हैं जो कम से कम भरे भवन में नैनों से तो बात कर लेते थे खैर आपको ज्यादा निराश होने की जरूरत नहीं है ....आजकल ऐसा प्रेम ढूढना दुलभ है आप चाहे तो www.google.प्रेम आर्काइव पर जा कर इसके बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं |
२ )हमारे सिवा तुम्हारे और कितने दीवाने हैं :-
                      ये कुछ ज्यादा समझदार  वाले प्रेमी /प्रेमिका होते हैं ...  इनको इस बात की इतनी खबर  रहती है कि भगवन न करे कोई दिन ऐसा आजाये की इन्हें बिना पार्टनर के रहना पड़े  इसलिए ये सेफ गेम खलने में विश्वास करते हैं .... इनकी इन्वोल्वमेंट  इक साथ कई के साथ रहती है
तू नहीं तो तू सही  की तर्ज पर |इसके लिए ये काफी मेहनत  भी करते हैं इनके खर्चे भी बढ़ जाते हैं .... पर अपनी घबराहट दूर करने के लिए ये हर जोखिम उठाने को तैयार रहते हैं |पर बहुधा इनके मोबाईल व् खर्चों के बिल देखकर इनके माता पिता का दिल साथ देना छोड़ देता  है |सुलभ दैनिक द्वारा कराये गए सर्वे के अनुसार युवा बच्चों के माता पिता को हार्ट अटैक आने का कारण अक्सर यही पाया गया है |
३ )तुम्हारा चाहने वाला खुदा की दुनियाँ में मेरे सिवा भी कोई और हो खुदा न करे :-
                                ये थोडा पजेसिव टाइप के होते हैं अग्निसाक्षी के नाना पाटेकर की तरह इन्हें बिलकुल भी बर्दास्त  नहीं होता कि उनके साथी को कोई दूसरा पसंद करे ... इन्हें दोस्त तो दोस्त माता पिता भाई बहन भी अखरते हैं किसी ने भी अगर साथी की जरा सी भी तारीफ कर दी तो हो गए आग बबूला और शुरू हो गयी ढिशुम ढिशुम |ये अपने साथी को डिब्बे में बंद करने में यकीन करते हैं ,सुविधानुसार निकाला ,प्रेम व्रेम किया वापस फिर डब्बे में बंद |अफ़सोस यह है कि इतना प्यार करने के बाद भी इन प्रेम कहानियों का अंत ,हत्या ,आत्महत्या या अलगाव से ही होता है
४ )मिलो न तुम तो हम घबराए :-
                    ये थोडा शक्की किस्म का प्रेम होता है |इसमें बार बार मोबाइल से फोन कर इनफार्मेशन ली जाती है अब कहाँ हो ,अब कहाँ हो ?मिलने पर कपडे चेक किये जाते हैं कपड़ों पर पाए जाने वाले बाल ,बालों की लम्बाई उनका द्रव्यमान ,घनत्व आदि शोध के विषय होते हैं .... तकरार ,मनुहार और  प्यार इसका मुख्य हिस्सा होते हैं ,साथ ही साथ इस प्रकार प्रेम करने वाले इंटेलिजेंट  भी होते हैं कभी कभी अपने साथी पर नज़र रखने के लिए अपनी सहेलियों ,दोस्तों आदि का सहारा भी लेता हैं आजकल तमाम जासूसी संस्थाएं यह सेवा उपलब्ध  करा रही हैं .........जैसे महानगर साथी जासूसी निगम  आदि कुछ मोबाइल कम्पनियां साल में दो बार जासूसी करवाने पर तीसरी सेवा मुफ्त देती हैं


                         
५ )जो मैं कहूंगा करेगी .... राईट :-
                          ये थोडा डिक्टेटर टाइप के होते हैं |इन्हें लगता है की ये सही हैं और अगला गलत ,इनसे कितनी भी बहस कर लो अंत में अपनी ही बात मनवा लेते हैं ,उस पर तुर्रा यह कि कहते हैं कि प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ है |प्रेमी प्रेमिका का रिश्ता बिलकुल ग्रेगर जॉन  मेंडल (पहला नियम ) की पीज (मटर ) की तरह डोमिनेंट व् रेसिसिव की तरह चलता है और खुदा न खास्ता इनकी शादी करवा दी जाए तो इनके बच्चे भी ३ :१ के अनुपात में डोमिनेंट व् दब्बू पाए जाते हैं |
६ )खुल्लम खुल्ला प्यार करेंगे हम दोनों :
                           यह नए ज़माने का प्यार आजकल बहुतायत से पाया जाता है |महानगरों में पार्कों ,सडको के किनारे ,माल्स ,रेस्त्रों आदि में आप यह आम नज़ारा देख सकते है |आप की वहां से गुजरते समय भले शर्म  से आँखें झुक जाए पर यह निर्भीक  युगल अपने सार्वजानिक  प्रेम प्रदर्शन में व्यस्त ही रहते हैं | वैधानिक चेतावनी :ऐसे प्रेमी युगलों को देख कर पुराने ज़माने के बुजुर्गों की सचेत करने वाली खांसी की तरह खासने का प्रयास न करे ..... ईश्वर गवाह है खांसते खांसते टेटुआ बाहर निकल आएगा पर इनकी कान पर जूं भी न रेंगेगा |




७ )ना उम्र की सीमा हो ना जन्म का हो बंधन :-
                              इसे एक नया नाम मिला है ४० +प्रेम जिसके बारे में आजकल तमाम कवितायेँ यहाँ तक विवादस्पद सम्पादकीय भी लिखे जा रहे हैं | , होता यह है कि जब बाल सफ़ेद होने लगते हैं ,दांत और आंत के हालत थोड़े बिगड़ने लगते हैं तो अपनी उम्र को धत्ता बताने  की कोशिश में दिल तो बच्चा है जी की तर्ज पर कई नव प्रौढ़ प्रौढाए इस दिशा में बढ़ने  लगते हैं |ना उम्र की सीमा हो न जन्म का हो बधन कह कर प्रेम की शुरुआत करने वाले इन जोड़ों के प्रेम की उम्र बहुत छोटी होती है .... फेस बुक से शुरू हुआ यह प्रेम  अक्सर ट्विटर तक आते आते दम तोड़ देता है और दोनों अपने अपने बच्चों की शादी की तैयारियों  में मगन हो जाते हो ...जो इक्षुक हो वो फर्जी आई डी से फेस बुक की शरण में जा सकते हैं |
                          खैर ! यह तो थी प्रेम की विभिन्न किस्मे जिनके बारे में  मैंने सुबह से शाम तक घूम घूम कर काफी जानकारी ईकट्ठी की है |अब तो मेरे इकतारे की बैटरी भी जवाब दे गयी है .... ऊपर से ये ६० की उम्र जिसमें दिमाग तो सठियाने ही लगता है साथ ही साथ परिया भी परपराने लगती हैं....अब घर चलती हूँ पर मेरी शोध जारी है ,आगे भी बताती रहूंगी .....
वंदना बाजपेयी 


गणतंत्र दिवस पर विशेष - भारत की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाना होगा



गणतन्त्र दिवस यानी की पूर्ण स्वराज्य दिवस ये केवल एक दिन याद की जाने वाली देश भक्ति नही है बल्कि अपने देश के गौरव ,गरिमा की रक्षा के लिए मर  मिटने की उद्दात भावना है | राष्ट्र हित में मर मिटने वाले देश भक्तों से भारत का इतिहास भरा पड़ा है अपने राष्ट्र से प्रेम होना सहज-स्वाभाविक है। देश का चाहे राजनेता हो योगी हो सन्यासी हो रंक से लेकर रजा तक का सबसे पहला धर्म रास्त्र की रक्षा के लिए अपने प्राणों को आहूत करने के लिए तत्पर रहना ही है | देशप्रेम से जुड़ी असंख्य कथाएं इतिहास के पन्नों में दर्ज है। भारत जैसे विशाल देश में इसके असंख्य उदाहरण दृषिटगोचर होते हैं। 

जानिये गौरवशाली राष्ट्र का गौरवशाली गणतांत्रिक इतिहास


हम अपने इतिहास के पन्नों में झांक कर देखें तो प्राचीन काल से ही अनेक वीर योद्धा हुए जिन्होंने भारतभूमि की रक्षा हेतु अपने प्राण तक को न्योछावर कर दिए। पृथ्वीराज चौहाण, महाराणा प्रताप, टीपू सुल्तान, बाजीराव,झांसी की रानी लक्ष्मीबार्इ, वीर कुंवर सिंह, नाना साहेब, तांत्या टोपे, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, राजगुरू, खुदीराम बोस, सुभाषचंद्रबोस, सरदार बल्लभ भार्इ पटेल, रामप्रसाद विसिमल जैसे असंख्य वीरों के योगदान को हम कभी नहीं भूल सकते। इन्होंने मातृभूमि की रक्षा हेतु हंसते-हंसते अपने प्राण न्योछावर कर दिए। विदेशियों को देश  से दूर रखने और फिर स्वतंत्रता हासिल करने में इनका अभिन्न योगदान रहा। आज हम स्वतंत्र परिवेश में रह रहे हैं। आजादी ही हवा में हम सांस ले रहे हैं, यह सब संभव हो पाया है अनगिनत क्रांतिकारियों और देशप्रेमियों के योगदान के फलस्वरूप। लेखकों और कवियों, गीतकारों आदि के माध्यम से समाज में देशप्रेम की भावना को प्रफुल्लित करने का अनवरत प्रयास किया जाता है।रामचरित मानस में राम जी जब वनवास को निकले तो अपने साथ अपने देश की मिट्टी को लेकर गये जिसकी वो नित्य प्रति पूजा करते थे | राष्ट्रप्रेम की भावना इतनी उदात और व्यापक है कि राष्ट्रप्रेमी समय आने पर प्राणों की बलि देकर भी अपने राष्ट्र की रक्षा करता है। महर्षि दधीचि की त्याग-गाथा कौन नहीं जानता, जिन्होंने समाज के कल्याण के लिए अपनी हड्डियों तक का दान दे दिया था। सिख गुरूओं का इतिहास राष्ट्र की बलिवेदी पर कुर्बान होने वाली शमाओं से ही बना है। गुरू गोविंद सिंह के बच्चों को जिंदा दीवारों में चिनवा दिया गया। उनके पिता को भी दिल्ली के शीशगंज गुरूद्वारे के स्थान पर बलिदान कर दिया गया। उनके चारों बच्चें जब देश-प्रेम की ज्वाला पर होम हो गए तो उन्होंने यही कहा-चार गए तो क्या हुआ, जब जीवित कई हज़ार।ऐसे देशप्रेमियों के लिए हमारी भावनाओं को माखनलाल चतुर्वेदी ने पुष्प के माध्यम से व्यक्त किया है--

मुझे तोड़ लेना बनमाली, उस पथ पर तुम देना फेंक,
मातृभूमि पर शीश चढ़ने, जिस पथ जाएँ वीर अनेक।


देश  प्रति हमारा स्वाभाविक कर्तव्य


जिस मिट्टी का हम अन्न खाते हैं, उसके प्रति हमारा स्वाभाविक कर्तव्य हो जाता है कि हम उसकी आन-बान-मान की रक्षा करें। उसके लिए चाहें हमें अपना सर्वस्व भी लुटाना पड़े तो लुटा दें। सच्चे प्रेमी का यही कर्तव्य है कि वह बलिदान के अवसर पर सोच-विचार न करे, मन में लाभ-हानि का विचार न लाए, अपितु प्रभु-इच्छा मानकर कुर्बान हो जाए।
 सच्चा देशभक्त वही है, जो देश के लिए जिए और उसी के लिए मरे। 'देश के लिए मरना' उतनी बड़ी बात नहीं, जितनी कि 'देश के लिए जीना'। एक दिन आवेश, जोश और उत्साह की आँधी में बहकर कुर्बान हो जाना फिर भी सरल है, क्योंकि उसके दोनों हाथों में लाभ है। मरने पर यश की कमाई और मरते वक्त देश-प्रेम का नशा। किंतु जब देश के लिए क्षण-क्षण, तिल-तिल कर जलना पड़ता है, अपनी इच्छाओं-आकांक्षाओं की नित्य बलि देनी पड़ती है, रोज़-रोज़ भग़तसिंह बनना पड़ता है, तब यह मार्ग बहुत कठिन हो जाता है।

  आज का युवा चाहे तो क्या नही क्र सकता परन्तु पश्चिम की बयार में खोया हुआ युवा अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीन नज़र आता है |आज दुर्भाग्य से व्यक्ति इतना आत्मकेंद्रित हो गया है कि वह चाहता है कि सारा राष्ट्र मिलकर उसकी सेवा में जुट जाए। 'पूरा वेतन, आधा काम' उसका नारा बन गया है। आज देश में किसी को यह परवाह नहीं है कि उसके किसी कर्म का सारे देश के हित पर क्या प्रभाव पड़ेगा। हर व्यक्ति अपना स्वार्थ सिद्ध करने में लगा हुआ है  यही कारण है कि भारतवर्ष नित्य समस्याओं के अजगरों से घिरता चला जा रहा हैं। जब तक हम भारतवासी यह संकल्प नहीं लेते कि हम देश के विकास में अपना सर्वस्व लगा देंगे, तब तक देश का सर्वांगीण विकास नहीं हो सकता, और जब तक देश का विकास नहीं होता, तब तक व्यक्ति सुखी नहीं हो सकता। अतः हमें मिलकर यही निश्य करना चाहिए कि आओ, हम राष्ट्र के लिए जियें।


 हमारा देश भारत अत्यन्त महान् एवं सुन्दर है


यह देश इतना पावन एवं गौरवमय है कि यहाँ देवता भी जन्म लेने को लालायित रहते हैं। विश्व मव इतना गौरवशाली इतिहास किसी देश का नही मिलता जितना की भारत का है हमारी यह जन्मभूमी स्वर्ग से भी बढ़कर है। कहा गया है - 'जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी' अर्थात जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है। हमारे देश का नाम भारत है, जो महाराज दुष्यंत एवं शकुंतला के प्रतापि पुत्र 'भरत' के नाम पर रखा गया। पहले इसे 'आर्यावर्त' कहा जाता था। इस देश में राम, कृष्ण, महात्मा बुद्ध, वर्धमान महावीर आदि महापुरूषों ने जन्म लिया। इस देश में अशोक जैसे प्रतापी सम्राट भी हुए हैं। इस देश के स्वतंत्रता संग्राम में लाखों वीर जवानों ने लोकमान्य तिलक, गोपाल कृष्ण गोखले, लाला लाजपत राय, नेताजी सुभाषचन्द्र बोस, सरोजिनी नयाडू आदि से कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष किया।
हिमालय हमारे देश का सशक्त प्रहरी है, तो हिन्द महासागर इस भारतमाता के चरणों को निरंतर धोता रहता है। हमारा यह विशाल देश उत्तर में कश्मीर से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक और पुर्व में असम से लेकर पश्चिम में गुजरात तक फैला हुआ है। इस देश की प्राकृतिक सुषमा का वर्णन करते हुए कवि रामनरेश त्रिपाठी लिखते हैं-''शोभित है सर्वोच्च मुकुट से, जिनके दिव्य देश का मस्तक।


गूँज रही हैं सकल दिशाएँ, जिनके जयगीतों से अब तक।''हमारे देश में 'विभिन्नता में एकता' की भावना निहित है। यहां प्राकृतिक दृष्टि से तो विभिन्नताएं हैं ही, इसके साथ-साथ खान-पान, वेशभूषा, भाषा-धर्म आदि में भी विभिन्नताएं दृष्टिगोचर होती हैं। ये विभिन्नताएँ ऊपरी है, ह्नदय से हम सब भारतीय हैं। भारतवासी उदार ह्नदय वाले हैं और वसुधैव कुटुम्बम्की भावना में विश्वास करते है। यहां के निवासियों के ह्नदय में स्वदेश-प्रेम की धारा प्रवाहित होती रहती है।  हमारे देश भारत की संस्कृति अत्यंत महान् है। यह एक ऐसे मजबूत आधार पर टिकी है जिसे कोई अभी तक हिला नहीं पाया है। कवि इकबाल कह गए हैं-


'यूनान मिस्त्र रोम, सब मिट गए जहाँ से, बाकी मगर है अब तक नामोशियां हमारा।कुछ बात कि हस्ती मिटती नहीं हमारी, सदियों रहा है दुश्मन दौरे जमा हमारा।'



युवा प्रयास करें की देश के गौरव को बढ़ाएंगे 


वर्तमान समय में हमारा देश अभी तक आध्याम्कि जगत् का अगुआ बना हुआ है। स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका के विश्व धर्म सम्मेलन में भारतीय संस्कृति के जिस स्वरूप से पाश्चात्य जगत् को परिचित कराया था, उसकी अनुगूँज अभी तक सुनाई पड़ती है। भारतीयों ने अस्त्र-शस्त्र के बल पर नहीं बल्कि प्रेम के बल पर लोगों के ह्नदय पर विजय प्राप्त की। वैसे तो हर व्यकित में अपने देश के प्रति देशप्रेम की भावना किसी न किसी रूप में मौजूद होती ही है, अपितु हर व्यकित इसे जाहिर नहीं कर पाता। हमें अपने देशप्रेम की भावना को अवश्य उजागर करना चाहिए। इसी भावना से ओत-प्रोत होकर खिलाड़ी खेल के मैदानों पर और सैनिक सीमा पर असाधारण प्रदर्शन कर जाते हैं। अगर हर व्यकित अपने दायित्वों का निर्वाह भलीभांति करेगा और न खुद से तथा न किसी अन्य के साथ गलत करेगा तो यह उसका अपने देश के लिए एक उपहार ही होगा। इसे भी देशप्रेम के रूप में चिन्हित किया जा सकता है। भारतवर्ष का लोकतंत्र आज भी विश्व में अनोखा है।अतः देश के हर निवासी को कुछ ऐसा करना चाहिए कि हमारे देश के इतिहास में हमारा नाम सदा सर्वदा के लिए अमर हो जाए और लोग हमेशा हमारे योगदान की सराहना करें।


पंकज प्रखर 

लेखक





ये ख़ुशी आखिर छिपी है कहाँ

कौन है जो खुश नहीं रहना चाहता, पर हम जितना ख़ुशी के पास जाने की कोशिश करते हैं वो उतना ही दूर भाग जाती है | तो क्या ऐसे में मन नहीं करता कि ये जाने " ये ख़ुशी आखिर छिपी कहाँ है?

                                       ------------------------------------------------------------------------

गुडियाँ हम से रूठी रहोगी 
कब तक न हंसोगी 
देखोजी किरण सी लहराई 
आई रे आई रे  हंसी आई 
                                आज पुरानी  फिल्म का ये गाना याद आ रहा है|  गाने की शुरुआत में गुड़ियाँ रूठी होती है पर अंत तक खुश हो कर हंसने लगती है …आखिर कोई कितनी देर नाराज या दुखी रह सकता है  दरसल  खुश  रहना  मनुष्य  का जन्मजात  स्वाभाव  होता  है, आखिर  एक  छोटा  बच्चा  अक्सर  खुश  क्यों  रहता  है ? बिलकुल अपने में मस्त ,बस भूख ,प्यास के लिए थोडा रोया ,कुनकुनाया फिर  हँसने खेलने में मगन।  क्यों  हम  कहते  हैं  कि   "बचपन के दिन भी क्या दिन थे "…बचपन  राजमहल में बीते या झोपड़े में वो इंसान की जिंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा होता है।
 खुश रहना मनुष्य का जन्मगत स्वाभाव होता है |  जैसे -जैसे  हम  बड़े  होते  हैं  हमारा  समाज ,हमारा ,वातावरण हमारे अन्दर विकृतियाँ बढाने लगता हैं ,और हम अपनी सदा खुश रहने की आदत भूल जाते हैं और तो और हममे से कई सदा दुखी रहने का रोग पाल लेते हैं ,जीवन बस काटने के लिए जिया जाने लगता है.पर कुछ लोग अपनी प्राकृतिक विरासत बचाए रखते हैं ,और सदा खुश रहते हैं| प्रश्न उठता है क्या उनको विधाता ने अलग मिटटी से बनाया है ,या पिछले जन्म के कर्मों की वजह से उनके जीवन में कोई दुःख आया ही नहीं है। उत्तर आसन है …  नहीं , औरों  की  तरह  उनके  जीवन  में  भी  दुःख-सुख  का  आना  जाना  लगा  रहता  है ,  पर  आम तौर  पर  ऐसे  व्यक्ति  व्यर्थ की   चिंता  में  नहीं  पड़ते और  अक्सर  हँसते -मुस्कुराते  और  खुश  रहते  हैं |
तो  सवाल  ये  उठता  है  कि  जब  ये  लोग  खुश  रह  सकते  हैं  तो बाकी  सब  क्यों  नहीं ?आखिर उनकी ऐसी कौन सी आदतें हैं जो  उन्हें दुनिया भर की चिंताओं से मुक्त रखती है और दुःख -दर्द  के बीच भी खुशहाल बनाये रखती हैं ? आज  इस  लेख  के  जरिये  मैं  आपके  साथ  खुशहाल लोगों की कुछ  आदतें बताने जा रही हूँ  जो  शायद  आपको  भी  खुश  रहने  में  मदद  करें .तो  आइये  जानते  हैं उन ख़ास  आदतों को : 

ख़ुशी का फार्मूला न. 1-जो है सब अच्छा है  

                                        बड़ी मामूली सी बात है पर है बहुत  उपयोगी|  हम अक्सर अपने आस -पास के लोगों की बुराइयां खोजते हैं। हमने तो इतना किया था पर उसने तो मेरे साथ ये तक नहीं किया , हमने तो उसके सारे  अपशब्द बर्दाश्त कर लिए पर वो तो एक बात में ही बुरा मान कर चला गया आदि -आदि मनोवैज्ञानिक इसे "नकारात्मक पूर्वधारणा "भी कहते  हैं | अधिकतर  लोग  दूसरों  में  जो कमी  होती  है  उसे  जल्दी देख  लेते  हैं  और  अच्छाई  की  तरफ  उतना  ध्यान  नहीं  देते  पर  खुश  रहने  वाले  तो  हर एक चीज  में , हर एक  परिस्थिति  में  अच्छाई  खोजते  हैं , वो  ये  मानते  हैं  कि  जो  होता  है  अच्छा  होता  है .  किसी  भी  व्यक्ति  में  अच्छाई  देखना  बहुत  आसान  है ,बस  आपको  खुद  से  एक  प्रश्न  करना  है , कि , “ आखिर  क्यों  यह  व्यक्ति  अच्छा  है ?” , और  यकीन  जानिये  आपका  मस्तिष्क  आपको  ऐसी  कई  अनुभव और  बातें  गिना  देगा  की  आप  उस  व्यक्ति  में  अच्छाई  दिखने  लगेगी |यहाँ पर ध्यान देने की ब  बात  यह है कि, आपको  अच्छाई  सिर्फ  लोगों  में  ही  नहीं  खोजनी  है , बल्कि  हर एक  परिस्थिति  में  खोजनी है और सकारात्मक  रहना  है  और  उसमे  क्या  अच्छा  है  ये  देखना  है| सुप्रसिद्ध कवि हरिवंश  राय बच्चन का अपने पुत्र अमिताभ बच्चन को समझाने का एक बहुत विख्यात वाक्य है ....

अगर मन की हो रही है तो खुश रहो ,और अगर मन की न हो रही हो तो और खुश रहो क्योंकि वह ईश्वर के मन की हो रही है 


ईश्वर अपने बच्चों के साथ कभी अन्याय नहीं करता।  उदाहरण के तौर पर  अगर  आप  को कोई नौकरी या सफलता नहीं मिली   तो  आपको  ये  सोचना  चाहिए  कि  शायद  भागवान  ने  आपके  लिए  उससे  भी  अच्छी  नौकरी या सफलता छुपा कर रखी  है जो आपको देर-सबेर  मिलेगी, और आप किसी अनुभवी व्यक्ति से पूछ भी सकते हैं, वो भी आपको यही बताएगा .

ख़ुशी का फार्मूला न.2-कही -सुनी सब मॉफ  करे 

                                  हम सब अपने सर पर कितना बड़ा पिटारा लिए घूम रहे हैं | लोगों की कही -सुनी बातों का हर रोज़ पिटारा खोलते हैं ,उन बातों को निकालते हैं,सहलाते हैं और फिर पिटारा बंद कर देते हैं और उस पिटारे में बंद कर देते हैं अपनी खुशियाँ  ....  है न सही ,सच तो  यह है कि हर  किसी  का  अपना -अपना अहंकार  होता  है , जो  जाने -अनजाने  औरों  द्वारा  घायल  हो  सकता  है , पर  खुश  रहने  वाले  छोटी छोटी  बातों को  दिल  से  नहीं  लगाते  वो   माफ़  करना  जानते  हैं , सिर्फ  दूसरों  को  नहीं  बल्कि  खुद  को  भी |  इसके  उलट  यदि  ऐसे  लोगों  से  कोई  गलती  हो  जाती  है , तो  वो  माफ़ी  मांगने  से  भी  नहीं  कतराते | वो  जानते  हैं  कि  मिथ्याभिमान  उनकी  जिंदगी की परेशानियां बढ़ा देगा बन इसलिए  वो  अरे मॉफ कर दीजिये या सॉरी  बोलने  में  कभी  कतराते नहीं | माफ़  करना  और  माफ़ी  माँगना  आपके  दिमाग  को  हल्का  रखता   है , आपको  बेकार   की  उलझन  और  परेशान  करने  वाली  नकारात्मक विचारों  से  बचाता  है , और   आप  खुश  रहते  हैं |
                                                 

ख़ुशी का फार्मूला न.3-तुम मेरे साथ हो 

                    अकेला हूँ मैं इस दुनियाँ में ,साथी है तो मेरा साया ……ये गाना सुनने में जितना अच्छा लगता है भोगने में उतना ही भयावह।अगर हम हर समय अपने को तन्हाँ महसूस करेंगे तो हर आने वाली विपरीत परिस्थिति  से जरूरत से जयादा घबरा जायेंगे या फिर विपरीत परिस्थितियों  की कल्पना करके अपने को अकेला और दुखी महसूस करेंगे। इससे निकलने का एक ही तरीका है अपना एक इमोशनल आधार बनाए। यह आधार दो खम्बों पर टिका होता है … हमारे मित्र और हमारा परिवार | ज़िन्दगी  में  खुश  रहने  के  लिए  इस आधार का  बहुत  बड़ा  योगदान  होता  है | भले  आपके  पास  दुनिया  भर  की  दौलत  हो  , शोहरत  हो  लेकिन  अगर  मजबूत इमोशनल ग्राउंड   नहीं  है  तो  आप  ज्यादा  समय  तक  खुश  नहीं  रह  पायेंगे |  ये वो लोग हो जिन्हें आप रात के तीन बजे भी किसी मुसीबत के समय फ़ोन कर के बुला सकते हैं या अपने दिल की हर सही -गलत ,अच्छी -बुरी बात बेझिझक कह सके | 
                                               इसके लिए ध्यान रखने की बात है कि हमें अपने मित्रों और परिवार को   हलके में नहीं  लेना  चाहिए , एक  मजबूत रिश्ता  बनाने  के  लिए  हमें   अपने  हितों  से  ऊपर  उठ  कर  देखना  होता है  , दूसरे  की देखभाल  करनी  होती  है , और  उन्हें   दिल से पसंद  करना  होता  है |  जितना  हो  सके  अपने  रिश्तों  को  बेहतर  बनाएं  , छोटी -छोटी  चीजें  जैसे  कि  जन्मदिन की मुबारकबाद देना  , सफलता की बधाई  देना , सच्ची  प्रशंशा  करना , मुस्कुराते  हुए  मिलना , गर्मजोशी  से  हाथ  मिलाना , गले  लगना  आपके  संबंधों  को  प्रगाढ़  बनता  है, और  जब  आप  ऐसा  करते  हैं  तो  बदले  में  आपको  भी  वही  मिलता  है।  याद रखिये भले ही दिल में कितना प्यार हो पर उसे अभिव्यक्त करना भी जरूरी है। मान कर चलिए अगला भगवन नहीं है जो आप के दिल की बात खुद ब  खुद जान ले।  एक दूसरे को ख़ुशी देने का सिद्धांत  दूसरों और   आपकी  ज़िन्दगी  को  खुशहाल  बनाता  है |

ख़ुशी का फार्मूला न.4-काम वही  जो मन को भाये 


                                 पापा ने कहा था इंजिनीयर बन जाओ अब मशीनों को देखकर डर लगता है  फिजिक्स में तो पास होना ही मुश्किल है। दादी की इच्छा  थी पोती डॉक्टर बने ,पढने में अच्छी थी बन तो गयी ,पर अब रोज़ ,रोज़ वही  मरीज वही  क्लिनिक देखकर बोरियत होती हैऔर दवाइयों की महक से तो मुझे उलटी आती है। दादी तो अपनी इच्छा  पूरी कर के खुश हैं पर मेरे लिए तो जिंदगी गले में फंसी हड्डी हो गयी जो निगलते बनती है न उगलते  | दुनिया में कितने लोग हैं जो अपने काम से खुश हैं ? यदि  आप  अपने  मन  का  काम  करते  हैं  तो  जरूर आप खुश होंगे  ,  लेकिन  ज्यादातर  लोग  इतने  भाग्यशाली नहीं  होते , उन्हें  ऐसे काम को करना पड़ता है    जो  उनके  रूचि  के  हिसाब  से  नहीं  होता | कुछ प्रतिशत यह सच  है  खुश  रहने  वाले  लोग  जो  काम  करते  हैं  उसी  में  अपना  मन  लगा  लेते  हैं , भले  ही  साथ -साथ वो  अपना  पसंदीदा  काम   पाने  का  प्रयास  करते  रहे| चौबीसों घंटे अपने काम अपनी कंपनी की बुराई करना आप की जिंदगी को कठिन व् दुखद बना देता है| यह सच है कि बेमन से करे गए काम को अच्छा समझना सबके लिए आसान नहीं होता। अत :अपने कैरियर  का चुनाव करते समय सतर्क रहे … आपका काम आप का दूसरा जीवन साथी होता है ,मन का न हो तो जिंदगी बोरिंग हो जाती है. … कैरियर के चुनाव के समय सबकी राय अवश्य सुने पर करे वही  जिसमें आप का मन रमता हो तभी सच में आप खुश रह सकते हैं।  

ख़ुशी का फार्मूला न.5-जब सोचों अच्छा सोचो 

                                                विज्ञान कहता है हमरे दिमाग में हर  रोज़  60,000 विचार आते  है  ,इसमें से जिन विचारों की प्रधानता होती है वही हमारा स्वाभाव होता है  और  एक  आम  आदमी  के मन में  इनमे  से  अधिकतर  नकारात्मक होते   हैं , अगर  आप  रोज़ -रोज़  अपने दिमाग को  हज़ारों  नकारात्मक विचारों से भरते रहेंगे ,या  एक तरह से नकारात्मक विचारों की खेती करने लगेंगे तो, नकारात्मक विचार हमारी आदत बन जाएगे ,जो और नकारात्मक विचारों ,परिस्थितियों  को अपनी तरफ खेंचेंगे और निराशा में अपने विचारों पर यकीन गहरा होने लगेगा ,और लगने लगेगा जो हम सोचते हैं वो हो जाता है ये हमारा दुर्भाग्य है ऐसे में    तो  खुश  रहना  तो  मुश्किल  होगा  ही| 

  खुश  रहने  वाले  व्यक्ति   दिमाग  में  आ  रहे     बुरे  विचारों  को  अधिक  देर  तक  पनपने  नहीं  देते . वो " शक के आधार पर बरी करना जानते हैं "देना   जानते  हैं , वो  जानते  हैं  कि  हो  सकता  है  जो  वो  सोच  रहे  हैं  वो  गलत  हो  , जिसे  वो  बुरा  समझ  रहे  हैं  वो  अच्छा  हो . ऐसा  कह कर   के  मन शांत कर लेते हैं  , दरअसल  हमारी  सोच  के  हिसाब  से  हमारे मष्तिष्क  में  ऐसे  खास किस्म के रसायन निकलते  हैं  जो  हमारे  मूड  को  खुश  या  दुखी  करते।तो जब भी नकारात्मक विचार आये उसे सकारात्मक विचार से धीरे से हटा दे या कम से कम ये सोचे की जरूरी नहीं की ऐसा हो ही ,जिससे मन में वो नकारात्मक विचार गहरे न उतरे। 

ख़ुशी का फार्मूला न.6-अपने लिए जिए तो क्या जिए 

                                        एक बार की बात है तीन बच्चे पढ़ रहे थे .... अध्यापिका बारी -बारी से तीनों के पास गयी।  उसने पहले बच्चे से पूंछा "तुम क्यों पढ़ रहे हो ?बच्चों ने निम्न उत्तर दिए…… 
पहला बच्चा :मैडम इम्तहान पास करना है पढना तो पड़ेगा ही। 
दूसरा बच्चा :मैडम पढ़ -लिख ले कभी न कभी तो रोटी कमानी ही पड़ेगी। आखिर पिताजी कब तक खिलाएंगे
तीसरा बच्चा :मैडम मुझे वैज्ञानिक बनना है ,नए -नए आविष्कार करने हैं ताकि मानवता की सेवा कर सकू  
आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इन तीनों में से कौन  सबसे अधिक खुश होगा!तीसरे बच्चे  की  तरह  ही  खुश  रहने  वाले  व्यक्ति  अपने  काम   को  किसी  बड़े  उद्देश्य   से  जोड़   कर  देखते  हैं , और   ऐसा  करना  वाकई  हमें   आपार  ख़ुशी  देता  है . ऐसा  मैं  इसलिए  भी  कह पा रही हूँ   क्योंकि  जब मैंने और "अटूट बंधन के पूरे  संपादक मंडल ने यह निर्णय लिया की हम "अटूट बंधन" में सकारात्मक सोच और व्यक्तित्व विकास को स्थान देंगे जिसके माध्यम से हम   हज़ारों ,लाखों   लोगों  की  ज़िन्दगी  को  बेहतर  बना  सकते हैं ,उन्हें निराशा से निकाल सकते हैं या कम से कम कुछ देर के लिए अच्छा महसूस करा सकते हैं तो काम  के प्रति उत्त्साह बढ़ गया ,एक नेक विचार और बड़े उद्देश्य ने सारी  थकान मिटा दी … यहाँ तक की संघर्ष के दिनों में भी संतुष्टि प्रदान की | अगर खुश रहना है तो अपने काम को किसी बड़े उद्देश्य से जोड़िये । 

ख़ुशी का फार्मूला न.7-अपनी हर गलती  की जिम्मेदारी मेरी है  

                                  अक्सर मुझे याद आ जाती है "जब वी मेट " की नायिका जो एक बार कहती है "हां जिंदगी ! ये मेरा फेवरेट गेम है जिसे मैं अपने तरीके से खेलती हूँ .... ताकि बाद में अफ़सोस न हो कि मेरी जिंदगी इसकी -उसकी वजह से खराब हो गयी।  जब भी कुछ बुरा होगा तो मुझे पक्का पता होगा कि ये मेरी वजह से हुआ है। बात भले ही फ़िल्मी है पर है गहरी।  जब आप अपने आस -पास देखेंगे तो पाएंगे खुश  रहने वाले व्यक्ति  सही -गलत परिस्थितियों की जिम्मेदारी लेना जानते हैं | अगर  उनके  साथ  कुछ  बुरा  होता  है  तो  वो  इसका  दोषारोपण  दूसरों  पर  नहीं  करते , बल्कि  खुद  को  इसके  लिए  जिम्मेदार  मानते  हैं .उदहारण के तौर पर   वो  ऑफिस  के किसी काम में देर होने के   लिए  अपने अधीनस्थ कर्मचारियों पर नहीं झल्लाते अपितु अपने समय प्रबंधन को और दुरुस्त करने का प्रयास करते हैं | अपनी  सफलता  का  श्रेय भले ही  दूसरों   दे  दें  लेकिन  अपनी  हर असफलता के लिए स्वयं को जिम्मेदार मानते हैं  जान लीजिये …  जब  आप  अपने  साथ  होने  वाली  बुरी  चीजों  के  लिए  दूसरों  को  दोष  देते  हैं  तो  आपके  अन्दर  क्रोध  आता  है , पर  जब  आप  खुद  को  जिम्मेदार  मान  लेते  हैं  तो  आप  थोडा निराश तो  होते  हैं पर  फिर चीजों  को  सही करने के प्रयास में जुट जाते हैं , और देर सवेर काम सही भी हो जाता है जो सच्ची ख़ुशी देता है 
                            तो ये थी वो बातें जिन्हें वो लोग अपनाते हैं जो सदा खुश रहते हैं। इनमें से कई बातें आप भी  मानते होंगे ,कई नहीं तो प्रयास करिए इन सारी बातों  को मानने का .... जिससे जीवन में खुशियों का ईजाफा हो और आप इत्मीनान से कह सके 
       ये ख़ुशी हमसे बच कर कहाँ जाएगी …
वंदना बाजपेयी 
   यह भी पढ़ें ...

आपको  लेख ". ये ख़ुशी आखिर छिपी है कहाँ .?. " कैसा लगा  | अपनी राय अवश्य व्यक्त करें | हमारा फेसबुक पेज लाइक करें | अगर आपको "अटूट बंधन " की रचनाएँ पसंद आती हैं तो कृपया हमारा  फ्री इ मेल लैटर सबस्क्राइब कराये ताकि हम "अटूट बंधन"की लेटेस्ट  पोस्ट सीधे आपके email पर भेज सकें 

keywords: happy, happiness, life   , happy person                                    
     
राधा क्षत्रिय की कवितायेँ

प्रेम मानव मन का सबसे  खूबसूरत अहसास है प्रेम एक बहुत ही व्यापक शब्द है इसमें न जाने कितने भाव तिरोहित होते हैं ये शब्द जितना साधारण लगता है उतना है नहीं इसको समझ पाना  और शब्दों में उतार पाना आसान नहीं है फिर भी यही वो मदुधुर अहसास है  जो  जीवन सही को अर्थ देता है, आज हम अटूट बंधन पर राधा क्षत्रिय जी  प्रेम  विषय पर लिखी हुई कवितायेँ  पढ़ेंगे 


 फ़र्क 
मोहब्बत ओर इबादत में,
फ़र्क बस इतना जाना है!
मोहब्बत में खुद को खोकर
चाहत को पाना है,
इबादत में खुद को खोकर,
पार उतर जाना है!




 तन्हाईयाँ
तुमसे मिलने के बाद,
तन्हाईयों से,
प्यार हो गया हमें----
जहाँ सिवा तुम्हारे,
और मेरे ,कोई नहीं आता------




बूँदों का संगीत
बारिश का तो, बहाना है,
तुम्हारे ओर करीब ,
आना है!
रिम-झिम गिरती,
बूंदों का,
संगीत बडा, सुहाना है!
तुम साथ, हो मेरे,
मुझे अंर्तमन तक,
भीग जाना है !



ख्वाब 
सारी रात वो मुझको 
ख्वावों में बुना
करता है
और हर सुबह एक
नयी ग़जल लिखा
करता है



"निगाहें"
जब पहली बार उनसे 
निगाहें मिलीं पता 
नहीं क्या हुआ
हमने शरमा कर पलकें
झुका ली
जब हमने पलकें उठाई
तो वो एकटक हमें ही
देखे जा रहे थे
और जब निगाहें
निगाहों से मिली
हम अपना दिल 
हार गये
पता नहीं क्या जादू कर
दिया था उन्होने हम पर
हमें तो पूरी दुनीयाँ 
बदली-बदली नजर 
आने लगी
फ़िर महसूस हुआ
बिना उनके प्यार 
के जिदंगी कितनी
अधूरी थी...


" दिल" 
जब तन्हाँ बैठे तो तुम्हारा
ख्याल आया और दिल आया
हमारी नजरों की ओस 
से भीगी यादें
दर -परत-दर खुलती
चली गई
और दिल भर आया
जो अफ़साने अंजाम 
तक न पहूँचें और दिल में
दफ़न हो गये
जेहन में दस्तक दे उठे
वो एहसास फ़िर मचल उठे
और दिल भर आया
बहुत कोशिश की
दिल के बंद दरवाजे न खोलें
पर नाकाम रहे
जो वादा तुमसे किया था
वो टूट गया
और दिल भर आया---




हमसफ़र 

तुम हमसफर क्या बने
जहाँ भर की खुशियाँ
हमार नसीब बन गयीं
जिदंगी फूलों की 
खुशबू की तरह 
हसीन ,साज पर छिड़े
संगीत की तरह सुरीली
तितलीयों के पंखों
जितनी रंगीन बन गई
उस पर तुम्हारी बेपनाह
मोहब्बत हमारा नसीब
बन गई.
रात एक हसीन ख्बाब 
की तरह चाँद तारों से
सज गई.
हवाओं में तुम्हारे प्यार
की खुशबू बिखर गई
हम पर तुम्हारी 
मोहब्बत का नशा
इस कदर छा गया
हमने खुदा को भी
भुला दिया
और तुम्हें अपना खुदा
बना लिया
तुम्हारी चाहत ही 
हमारी इबादत 
बन गई---


रिश्ते 

प्यार और रिश्तों का तो,
जन्म से ही साथ होता है !
वक्त की आँच पर तपकर,
ये सोने की तरह निखर उठता है!
पर कुछ रिश्ते ,
सब से जुदा होते हैं !
इन्हें किसी संबधों में,
परिभाषित नहीं किया जा सकता !
इनका संबध तो सीधा ,
अंर्तमन से होता है !
ये तो मन की डोर से ,
बँधे होते हैं !
अपनेपन का एहसास इनमें,
फूलों सी ताजगी भर देता है !
ऊपर वाले से माँगी हुई,
हर दुआ जैसे,
जो हौंसलों का दामन ,
हमेशा थामके रखते हैं !
और उनकी माँगी हुई दुआओं पर,
खुदा भी नज़रे -इनायत करता है !
और मांझी विपरीत बहाव में भी,
नाव चलाने का साहस कर लेता है !



 


 प्यार के पंख 
मेरी ख्वाईशें क्यों ,
इस कदर
मचल रही हैं!
जैसे कोई
बरसाती नदिया!
जो तोड़
अपने तटों को,
तीव्र गति से,
बहना,
चाहती हो!
हृदय सरिता ,
प्यार की बर्षा से
तट तक ,
भर गयी है!
सरिता का जल,
रोशनी से
झिलमिल
और हवा से
छ्प-छप
कर रहा है!
अरमानों को पंख,
लग गये हैं!
मन पूरा अंबर ,
बाँहों मैं,
लेने को आतुर है!
दिल की धड़कनें,
बेकाबू हो,
मचल रही हैं!
लगता है मेरी,
ख्वाईशों मैं,
तुम्हारे प्यार के
पंख लग गये हैं!


भूल 

हमने उनको इस कदर 
टूटकर चाहा कि खुद 
को ही भूल गये
अगर हमें पता होता 
किसी को चाहना
हमें हमसे जुदा 
कर देगा
तो हम भूल से भी ये
भूल न करते
पर जब भूल 
से ये भूल हो गयी तो
इस भूल की सजा भी
हमको ही मिली
अब तो ये आलम हे 
कि आईने में भी
अपनी पहचान 
भूल गये
बस उनकी ही सूरत 
हमारी आँखों में है
और हम उनकी 
आँखों में खो गये


सर्वप्रथमप्रकाशित रचना..रिश्तों की डोर (चलते-चलते) । 
स्त्री, धूप का टुकडा , दैनिक जनपथ हरियाणा । 
..प्रेम -पत्र.-दैनिक अवध 
लखनऊ । "माँ" - साहित्य समीर दस्तक वार्षिकांक। 
जन संवेदना पत्रिका हैवानियत का खेल,आशियाना,
करुनावती साहित्य धारा ,में प्रकाशित कविता - नया सबेरा.
मेघ तुम कब आओगे,इंतजार. तीसरी जंग,साप्ताहिक । 
१५ जून से नवसंचार समाचार .कॉम. में नियमित । 
"आगमन साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समूह " भोपाल के तत्वावधान में साहित्यिक चर्चा कार्यक्रम में कविता पाठ " नज़रों की ओस," "एक नारी की सीमा रेखा"
आगमन बार्षिकांक काव्य शाला में कविता प्रकाशित​..

आपको    "राधा क्षत्रिय की कवितायेँ     " कैसे लगी  | अपनी राय अवश्य व्यक्त करें | हमारा फेसबुक पेज लाइक करें | अगर आपको "अटूट बंधन " की रचनाएँ पसंद आती हैं तो कृपया हमारा  फ्री इ मेल लैटर सबस्क्राइब कराये ताकि हम "अटूट बंधन"की लेटेस्ट  पोस्ट सीधे आपके इ मेल पर भेज सकें |


filed under: , poetry, hindi poetry, kavita