October 2015


करवाचौथ ...
क्या ये उपवास
लोटा सकता है ?
उस विधवा के मांग का सिंदूर
जो कुछ दिन पहले
सीमा के पास रह रहे
उस नवेली दुल्हन की
सितारो वाली चुंदङी
उङा कर ले गये
क्या ये उपवास



गठबंधन की पावन गाँठों से यूँ खुद को बाँध लिया
मन वचनों से और कर्म से तन को मन साध लिया

याचक बन कर मात-पिता से सुता दान में माँगी थी
तेरे उसी भरोसे पर मैंने वो देहरी लाँघी थी

तू सूरज मैं धरा दीवानी अनुगामिनी संग चली
हँसी तुम्हारी भोर सुहानी तू रूठे तो साँझ ढली

चूड़ी, बिंदिया, कुमकुम, मेहँदी तुमसे सब सिंगार सजे
सांस की सरगम, धुन धड़कन की तुम झांझरिया संग बजे

माँग सजाई अरमानों से आँचल में ममता भर दी
आधा अंग बना कर अपना कमी सभी पूरी कर दी

तेरे साथ ही पूरा आँखों का हर सपन सलोना हो
प्रेम जोत से रोशन मेरे मन का कोना-कोना हो

चातक को केवल स्वाति की बूँदों का अभ्यास है
मेरे मन को भी बस तेरी स्नेह-सुधा की प्यास है

मेरी किन्हीं दुआओं से गर उम्र सुहाग पर चढ़ती है
पूजा और अर्चना से सांसों की डोरी बढ़ती है

एक नहीं सौ बार तुम्हारी खातिर मैं उपवास करूँ
माँनूँ सारी परम्परा हर रीति पर विश्वास करूँ

करवा चौथ का चाँद गवाही देगा अपने प्यार की
इस निश्छल से नाते पर ही नींव टिकी संसार की



इंजी. आशा शर्मा



"एक झलक चंदा की "
, बदली तुम न बनो चिलमन
हो जाने दो दीदार
दिख जाने दो एक झलक
उस स्वर्णिम सजीले चाँद की
दे दूं मैं अरग और
माँग लूँ  संग
मेरे प्रिय का
यूँ तो हर दिन माँग लेती हूँ
                       

करवाचौथ के दिन पत्नी सज धज के पति का इंतजार कर रही  शाम को घर आएंगे तो  छत पर जाकर चलनी में चाँद /पति  का चेहरा देखूँगी । पत्नी ने गेहूँ की कोठी मे से धीरे से चलनी निकाल कर छत पर रख दी थी । चूँकि गांव में पर्दा प्रथा एवं सास-ससुर  से ज्यादातर काम सलाह लेकर ही करना होता है संयुक्त परिवार में सब  का ध्यान भी  होता है । और आँखों में शर्म का  पर्दा भी   होता है { पति को कोई कार्य के लिए बुलाना हो तो पायल ,चूड़ियों की खनक के इशारों  ,या खांस  कर ,या बच्चों के जरिये ही खबर देना होती । पति घर आये तो साहित्यकार के हिसाब से वो पत्नी से मिले तो कविता के रूप में करवा चौथ पे पत्नी को कविता की लाइन सुनाने लगे -"आकाश की आँखों में /रातों का सूरमा /सितारों की गलियों में /गुजरते रहे मेहमां/ मचलते हुए चाँद


       मैं सदा उन अंकल-आंटी को साथ-साथ देखा करती थी। सब्जी लानी हो, डॉक्टर के पास जाना हो, पोस्टऑफिस, बैंक, बाज़ार जाना हो या अपनी बेटी के यहाँ जाना हो......हर जगह दोनों साथ जाते थे।उन्हें देख कर लगता था मानो एक प्राण दो शरीर हों। आज के भौतिकवादी समय को देखते हुए विश्वास नहीं होता था कि वृद्धावस्था में भी एक-दूसरे के प्रति इतना समर्पित प्रेम हो सकता है।
कूड़ा गाड़ी


एक बार की बात है एक यात्री ने एयरपोर्ट जाने के लिए टैक्सी की |

रात का समय था टैक्सी वाला बड़े इत्मीनान से गाडी चला रहा था | वो धीरे – धीरे गुनगुना रहा था | यात्री आदमी भी निश्चित हो सड़क पर इधर – ऊधर  देख रहा था | तभी एक मोड़ पर अचानक से तेजी से गाड़ी आई | टैक्सी वाले ने जल्दी से ब्रेक लगाया | दोनों गाड़ियाँ बस टकराते – टकराते बची | यात्री को तेज झटका लगा | उसे बहुत गुस्सा आया | नियम के अनुसार मोड़ पर गाड़ियां धीमी ही चलानी चाहिए | वर्ना एक्सीडेंट का खतरा रहता है | इन दो गाड़ियों का एक्सीडेंट होते-होते ही बचा था |
                 
तभी यात्री ने देखा की उस गाडी वाले ने भी गाडी रोक ली है | और उतर कर इस तरफ आ रहा है | क्योंकि सरासर उसकी गलती थी | इसलिए यात्री ने सोंचा कि लगता है वो माफ़ी मांगने आ रहा है | अब टैक्सी ड्राइवर जरूर उसे खूब सुनाएगा | यह भी कोई तरीका है गाडी चलाने का |

यात्री को बहुत आश्चर्य हुआ जब वो आदमी सॉरी बोलने के स्थान पर टैक्सी ड्राइवर को भला बुरा कहने लगा | अपनी गलती होते हुए भी वो दोष उस भले ड्राइवर पर लगा रहा था | इससे पहले की यात्री उसके पक्ष में कुछ कहता टैक्सी ड्राइवर ने मुस्कुरा कर हाथ हिलाते बाय – बाय की मुद्रा में आते  हुए टैक्सी आगे बढ़ा दी |


अब तो यात्री को बहुत गुस्सा आया | उसने ड्राइवर से पूंछा ,” ये भी कोई बात है की गलती उसकी थी , फिर भी वो आदमी  तुमको सुना कर चला गया | और तुमने एक शब्द भी कहने के स्थान पर मुस्कुरा कर उसे बाय कर दिया |


टैक्सी ड्राइवर  ने मुस्कुरा कर कहा ,” सर वो देखिये वो कूड़ा गाडी है | वो अगर किसी से टकरा जाए तो अपना कूड़ा ही दूसरों पर डालेगी |अब ये आप की जिम्मेदारी है की आप उससे बच कर चलें | नहीं तो कूड़ा आप  पर ही गिरेगा | ऐसे ही अगर कोई व्यक्ति कूड़ा यानी ज़माने भर की नकारात्मकता अपने ऊपर ले कर चलेगा तो वो उसे दूसरों पर डालेगा |अगर आप उसे डालने देंगे तो आप भी कूड़ा  गाडी बन जायेंगे और दूसरों  पर वही फेंकते हुए घूमेंगे | इसलिए बेहतर है उन्हें बाय – बाय कर दें और कूड़े को आगे फैलने से रोकें |

टैक्सी ड्राइवर का उत्तर सुन कर यात्री उसकी समझदारी का कायल हो गया और मंद – मंद मुस्कुराने लगा |

दोस्तों , उसी टैक्सी ड्राइवर की तरह हम सब को भी समझदार बनना है की अगर कोई अपनी नकारात्मकता हमारे ऊपर फेंकने की कोशिश करे तो हम वहां न रुके रहे बल्कि वहां से उठी के चल दे | इससे नकारात्मकता का चक्र रुक जाएगा | या यूँ कहे की कम से कम हम तो अपने को नकारात्मकता से बचाए रखेंगे और सकारात्मक रहेंगे | 

टीम ABC

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keywords: Negativity, positivity, garbage 



                      करवाचौथ पर विशेष " अटल रहे सुहाग " में  आइये आज पढ़ते हैं किरण सिंह की कवितायें ........
आसमाँ से चाँद
आसमाँ से चाँद फिर
लगा रहा है कक्षा
देना है आज हमें
धैर्य की परीक्षा
सोलह श्रॄंगार कर
व्रत उपवास कर

रिया,,,, ,,, रिया,,,,,, बेटा सारा सामान रख लिया न पूजा का, बेटा सब इकट्ठा करो एक जगह ,,,,, थाली में, ,, तुमको जाना है न ,, पार्क में पूजा के वास्ते, ,,, हाँ , माँ मैने सब कुछ रख लिया, ,, माँ, आप कितनी अच्छी हो,,, सारी चीजों का ध्यान रखती हो,,,,,, ये कहते-कहते रिया माँ से लिपट गई थी । अनुराधा जो रिया की सास थीं, ,, वाकई में सास हो तो अनुराधा जैसी, ,,,,,,,।कितना ध्यान रखती थी रिया का,,,, क्योंकि बेटा सिद्धार्थ बाहर नेवी में जाॅव करता था, और नेवी वाले हर करवाचौथ पर पास में ही हो , ये संभव नहीं था ।अनुराधा इस व्रत की भावना को बहुत अच्छी तरह पहचानती थी,,,, इसी कारण, उसका उसका व्यवहार भी रिया के लिए पूर्ण समर्पित था ,,,।रिया उसकी बहू ही नहीं, ,,, एक बेटी, सहेली और हर सुख दुःख की साथी थी ,,,, आज दो दिनों से उसकी तैयारी करवा रहीं थी अनुराधा, ,।अच्छे से अच्छे मेहंदी वाले से मेहंदी लगवाना तो उनका सबसे बडा शौक था
भावों की खूसुरती


हर तस्वीर अपूर्ण है
क्योंकि
भावों की ख़ूबसूरती को
कोई तस्वीर
व्यक्त नहीं कर सकती 
असली सुन्दरता

हर कोई जिसके चेहरे पर
स्टे और इमानदारी लिखा होता है
वो कितना भी साधारण हो
बेहद खूबसूरत
नज़र आता है 


" मीनू ! जल्दी से अपने पापा की थाली लगा दो," घर में कदम धरते ही आदेशात्मक स्वर में कहा मृणाल ने।
" पर मां ! मैंने तो खाना बनाया ही नहीं। भैया पिज्ज़ा ले आए थे," मीनू ने सहज स्वर में कहा तो मृणाल भड़क उठी ," एक दिन खाना न बना सकी तुम? हद है कामचोरी की।"
" आपने ही तो कहा था माँ कि लौटने में १२ या१ बज जायेंगे रात के ,इसलिए....."
जो है उसका आनंद
आपकी ख़ुशी इस बात पर
निर्भर नहीं करती की
आपके पास कितना है
बल्कि
इस बात पर निर्भर करती है किआप के पास
जो है
उसका आनंद आप कैसे उठाते है 
जीवन की वास्तविकता
जीवन कोई समस्या नहीं
जिसका हल ढूंढना हो
ये एक वास्तविकता है
जिसे स्वीकार करना है 



वो गांव के बहार की तरफ टीलों से होते हुए भैरों जी के स्थान पर धोक देने और नए जीवन के लिए उनका आशीर्वाद लेने अपने बींद के पीछे पीछे आगे बढ़ रही थी और साथ ही पूरे दिल से अपने मन के ईश्वर को बार बार धन्यवाद भी दे रही थी .. उस ख़ुशी के लिए, उस अनुभव के लिए..... लाल प्योर जॉर्जट पर गोटा तारी के काम वाला उसका बेस (दुल्हन की पोशाक), ठेठ राजस्थानी स्टाइल में बने आड़, बाजूबंद, हथफूल, राखड़ी, शीशफूल, पाजेब अंगूठियां, लाल गोटे जड़ी जूतियां, और नाक के कांटे में जड़ा हीरा...... उस घडी वो  नायिका थी वहां कीउस गावं की, उन पगडंडियों की, और उन रेत के  टीलों की भी........ अपने बींद के पीछे पीछे वो  बिलकुल वैसे चल रही थी जैसे गावं में लाल जोड़े में,घूंघट में किसी नै नवीली बींदणी को चलना चाहिए था...




बस अब इन दिनो मे और जमकर मेहनत करनी है ये सोचता हुआ रामू अपना साईकिल रिक्शा खींचे  जा रहा था।पिछले 8-10हफ्तो से वो ज्यादा समय तक सवारी ले लेकर और पैसे कमाना चाह रहा था।अपनी धुन मे वो पिछले कितने समय से लगा हुआ था।
ले भाई !तेरे पैसे ये कहते हुए सवारी वाले ने उसे पैसे दिये।आज के कमाऐ  हुए पैसो  मे से कुछ रुपये अपने मित्र कन्हैया को देते हुआ बोला और कितने इकट्ठे करने होंगे? कन्हैया बोला यार कम से कम 1200-1300 रुपये तो होने चाहिये।अभी तो 950ही एकत्रित हुऐ है।और अब करवाचौथ को बचे भी दो दिन है।ठीक है कोई नही इन दो दिनो मे और ज्यादा मेहनत करुंगा कहकर रामू घर को चल पङा।

जीवन की प्राथमिकताएं

हम सब के जीवन में प्राथमिकताएं निर्धारित करना बहुत जरूरी है | प्राथमिकताएं चाहे वो कैरियर  में हों | रिश्तों में हों या जीवन के अन्य आयामों में | अगर हम प्राथमिकताएं निर्धारित नहीं करेंगे तो जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता नहीं हासिल कर पायेंगे और हम बस पछताते रहेंगे |

Motivational story in hindi priorities in life

                  एक बार की बात है एक अध्यापक अपने क्लास में एक खाली गिलास और कुछ सामान ले कर गए | उन्होंने स्टूडेंट्स को खली गिलास दिखया और कहा आज मैं आपको एक प्रयोग कर के दिखाऊंगा | स्टूडेंट्स ध्यान से उनका प्रयोग देखने लगे |

अध्यापक ने गिलास में बड़े - बड़े कंकण भरना शुरू कर दिया | थोड़ी ही देर में वो गिलास भर गया | अब उन्होंने बच्चों को दिखा कर पूंछा  क्या अब इस गिलास में कुछ और आ सकता है ?
नहीं सर ये पूरा भर गया है | अब इसमें कुछ नहीं आ सकता ,बच्चे एक स्वर में बोले |

अध्यापक ने फिर उस गिलास में छोटे - छोटे कंकण  भरना शुरू किया | छोटे कंकण  ने बड़े कंकण के बीच जगह बना ली | फिर उन्होंने और छोटे कंकण भरना शुरू किया उन्होंने पहले और दूसरे कंकण के बीच में जगह बना ली | अब अध्यापक ने फिर गिलास दिखा कर सबसे पूंछा ," क्या अब इसमें कुछ आ सकता है ?"

बच्चे बोले सर पहले ह्म् गलत  थे | पर अब ये गिलास इतना भर गया है की इसमें कुछ नहीं आ सकता |

अध्यापक ने अब गिलास में रेत भरना शुरू किया | रेत ने कंकण के बीच में जगह बना ली | फिर गिलास पूरा भर गया | अध्यापक ने फिर वही प्रश्न  दोहराया | बच्चों ने पूरे विश्वास के साथ कहा ," सर अब तो ये जरूरत से ज्यादा भर गया है | अब इसमें कुछ नहीं आ सकता |

अध्यापक ने पास में एक जग से पानी गिलास में डालना शुरू किया | पानी ने सब के बीच में जगह बना ली |

अध्यापक बच्चों की और देखते हुए बोले ," देखो जो गिलास बड़े कंकण से ही भरा दिखाई दे रहा था | अब उस  गिलास में बड़े कंकण , छोटे कंकण , बहुत छोटे कंकण , रेत और पानी है | इतना सब कुछ इसमें इसलिए आ सका क्योंकि मैंने चीजों को सही क्रम में भरा | अगर रेत पहले भर लेते तो क्या बड़े कंकण गिलास में आ सकते थे | या पानी पहले बी हर लेते तो बड़े कंकन डालते ही वो छलकने लगता | दरसल ये गिलास हमारा जीवन है और इसमें डाली  जाने वाली चीजें हमारी प्राथमिकताएं |  अगर आप  अपनी जिन्दगी में सही प्राथमिकताएं तय करते हैं तो इसमें बहुत कुछ भरा जा सकता है | | लेकिन गलत प्राथमिकताएं तय करने से आपके पास मौका होते हुए भी आप का गिलास पूरी तरीके से नहीं भर सकता | कुछ न कुछ खाली ही रह जाएगा | उदाहरण के लिए ..

अगर आप विद्यार्थी हैं तो सबसे पहली प्राथमिकता पढाई है |
पढाई में एग्जाम टाइम और रेगुलर टाइम में आपकी प्राथमिकता  अलग - अलग होती है |
अगर आप नौकरी करते हैं तो सबसे पहली प्राथमिकता अपना काम अच्छे से करते हैं |
अगर आप माता - पिता हैं तो पहली प्राथमिकता बच्चे हैं |
माता -पिता वृद्ध होने पर वो पहली प्राथमिकता हैं |
 अगर आप सही तरीके से आपनी प्राथमिकताएं तय करते हैं तो न केवल आप का जीवन सफल होगा बल्कि खुशहाल भी होगा |

टीम ABC

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अहंकार का नाश

उंचा  वही उठता है जो
अपने अन्दर से अहंकार को निकाल कर खुद को हल्का कर लेता है


स्वेटर से रिश्ते


स्वेटर का सीधा -उल्टा फंदा
कहता है की रिश्तों की गर्माहट
 विपरीत विचारों का उचित समन्वय ही तो है



रिया के घर में सन्नाटा पसरा हुआ है | रिया के माता पिता की आँखों में आँसू  हैं | उन्हें समझ नहीं आ रहा है ,आखिर माजी ने ऐसा फैसला किया तो क्यों किया ? कितना फक्र था उन्हें अपने पर | बाल काले से सफ़ेद हो गए  , आँखें धस गयी , दो की जगह तीन पैर हो गए | इतना सब कुछ बदल गया पर नहीं बदला तो सिर्फ  उनके मुंह से हर आने -जाने वाले के सामने गर्व से कहा जाने वाला ये वाक्य "  तुम आज कल के बच्चे हमें क्या पढाओगे हमको ऐसा वैसा नहीं समझो ,हमें भी उतरी -पूरा साहित्य पुरोधा सम्मान मिल चुका है | पर अब वो उसे ही वापस करने पर तुली हैं | आखिर क्यों ? रिया से अपने माता -पिता का दुःख और अपने मन में उठते प्रश्न सहे नहीं गए तो उसने दादी से डायरेक्ट पूंछने का मन बना लिया |
रिया दादी के कमरे में घुसते हुए : दादी मेरी प्यारी दादी आप पुरुस्कार क्यों लौटा रही है | मम्मी -पापा कितने दुखी हैं |
दादी : पेपर दिखाते हुए , हे ! शिव , शिव ,शिव , देखा नहीं सब लौटा रहे है |हम सब का साथ देंगे |  यही चलन है | रिया : हां दादी पर वो तो ........




ढोलक की थाप पर बजता एक लोक गीत तो आप ने जरूर सुना होगा ...........
"
बन्नी पीली कैसे पड गयी पीहर में रह के 
रे ! बन्ने आई तेरी याद फिकर कर के "
या फिर अंग्रेगी की कहावत "येल्लो -येल्लो डर्टी फेलो "इन सब को सुन कर तो ऐसा लगता है कि पीला रंग तकलीफ बीमारी या दुःख का प्रतीक है........... पर जरा रुकिए याद करिए पीली सरसों के खेत.....जो समृधि और प्रेम की दास्ताँ है ,सूरजमुखी और गेंदे के पीले फूल जो चहरे पर बसबस ही मुस्कान ले आते है और तो और हिन्दू धर्म के सारे भगवान् पीताम्बरधारी हैं पीला पटुका ओढ़े हैं यहाँ तक की उनके चित्रों में सर के पीछे स्वर्णिम पीला चक्र है .तो कुछ तो ख़ास है इस पीले रंग में तो आइये जानते है ..... "पीले रंग के गुण ....


जिंदगी को समझें


जिंदगी बदलने के लिए लड़ना पड़ता है
और आसान करने के लिए समझना पड़ता है 
उलटी शिक्षा



बचपन में जब याद किया हुआ भूल जाते थे
तब कहा जाता था
याद रखोगे तभी
आगे बढोगे



अब , बड़े होने पर
सब याद रहता है तो
कहते हैं की
भूलो अतीत को
वर्ना आगे
कैसे बढोगे 


वैसे तो ज्योतिष में ज्यादातर लोग कुंडली और चंद्र राशि के अनुसार रत्न पहनते हैं। लेकिन कुछ लोगों को अपनी राशि नही मालूम होती और उनके पास कुंडली भी नही होती है इसलिए ज्योतिष में सूर्य राशि यानी जन्म तारिख के अनुसार रत्न पहने जा सकते हैं।
14 अप्रेल से 14 मई के बीच जन्म लेने वालों की राशि मेष होती है इसके अनुसार अगर मूंगा पहने तो किस्मत हमेशा साथ रहती है।
निर्णयात्मक रवैया


किसी के प्रति
निर्णयात्मक रवैया
इस कदर न इख्तियार करिए
की आपके पास
किसी को
प्रेम करने के लिए
समय ही न बचे

मदर टेरसा

इलज़ाम
किसी पर इलज़ाम लगाना ये सिद्ध नहीं करता की वो कैसा है
वो ये बताता है की
आप कैसे हैं 
सबसे बड़ा धनवान
वो सबसे धनवान है जो कम से कम में संतुष्ट है
क्योंकि संतुष्टि विश्व की सबसे बड़ी दौलत है 



                                        ट्रेजिडी क्वीन मीना कुमारी जी के अभिनय का भला कौन मुरीद न होगा | पर परदे  की ट्रेजिडी क्वीन मीना कुमारी की निजी जिंदगी भी दुखों से भरी थी | इन्हीं ग़मों को जब वो कागज़ पर उतारती जो जैसे हर शब्द आँसुओ से भीगा हुआ लगता | उनकी वेदना पढने वाले को अन्दर तक झकझोर देती | ये कहना  अतिश्योक्ति नहीं होगी की वो जितनी अच्छी अदाकारा थी उतनी ही अच्छी ग़ज़ल कारा भी | आज हम उनकी कुछ चुनिन्दा गजलें आप के लिए लाये हैं ........ पढ़िए और शब्दों की गहराई में डूब जाइए 


सहानभूति का ऋण

धन तो वापस किया जा सकता है पर सहानुभूति के शब्द
वो ऋण हैं
जिन्हें वापस करना
मनुष्य की शक्ति के बाहर हैं 
झोपड़े के द्वार पर बाप और बेटा दोनों एक बुझे हुए अलाव के पास और अन्दर बेटे कि जवान बीवी बुधिया प्रसव-वेदना से पछाड़ खा रही थी। रह-रहकर उसके मुँह से ऐसी दिल हिला देने वाली आवाज़ निकलती थी, कि दोनों कलेजा थाम लेते थे। जाड़े की रात थी, प्रकृति सन्नाटे में डूबी हुई, सारा गाँव अन्धकार में लय हो गया था।
घीसू ने कहा मालूम होता है, बचेगी नहीं। सारा दिन दौड़ते ही गया, ज़रा देख तो आ।
माधव चिढ़कर बोला मरना ही है तो जल्दी मर क्यों नही जाती ? देखकर क्या करूं?
तू बड़ा बेदर्द है बे ! साल-भर जिसके साथ सुख-चैन से रहा, उसी के साथ इतनी बेवफाई!’ ‘तो मुझसे तो उसका तड़पना और हाथ-पाँव पटकना नहीं देखा जाता।