भावनाओं की सरहदें कब होंगी

अ पना देश हो या विदेश , सुबह की जगमगाहट में कमी नहीं आती । चिड़ियाँ अपने नियत समय पर रोजगार के लिए जाना नहीं भूलतीं । पवन हौले-हौले...




पना देश हो या विदेश , सुबह की जगमगाहट में कमी नहीं आती । चिड़ियाँ अपने नियत समय पर रोजगार के लिए जाना नहीं भूलतीं । पवन हौले-हौले वीणा की धुन सी अपने प्रियतम बावरे से लिपटना नहीं भूलती , कलियाँ मुस्कुराना और तितलियाँ मटकना नहीं भूलती । ठीक उसी तरह कम्जर्फ़ इंसान अपनी ईर्ष्या , दरिंदगी और वाहियात स्वभाव को नहीं भूलते । कोई नई सुबह उनको सुकूं नहीं देती और कोई रात प्यार से उनके पहलू में नहीं सोती । रिहाना का भी कुछ ऐसा ही हाल था । जब से मोहम्मद ने आंध्रा से आई लक्ष्मी को घर में रख लिया था उसकी रगों का खूं वहशी हो गया था । हालांकि रिहाना के लिए ये कोई नई बात नहीं थी, अलग-अलग औरतों की अलग-अलग खूबी उसे हमेशा बेचैन कर देती हैं लेकिन इस बार........लक्ष्मी के लम्बे बाल, ऊँचा कद , पर्वत सी उठी सीने की गोलाइयां , केसरी रंग , पलकों के बोझ से दबी आँखे और आवाज़ उसे कई-कई मौत मार रहे थे । दिन और रात बस एक ही ख़्वाब उसे डस रहा था की मोहम्मद लक्ष्मी की ओर झुके जा रहे हैं ।
"लक्ष्मी sssssssss साली तेरी सुबहो नहीं हुई ??अपने अब्बा के घर ऐश को आई है तू ? उठ....."
       रोज सुबह का यही हाल था । रिहाना रोज लक्ष्मी को अगली सुबह उठने का नया समय देती और खुद उस समय से पूर्व उसके सिर पर खड़ी हो जाती । कभी गालियों से गुड मोर्निंग कहती तो कभी जान बुझ कर हाई हिल पहनकर जाती और सोती हुई लक्ष्मी के हाथ पैर पर चड़ जाती । दर्द और डर से सिसकती लक्ष्मी को देखकर उसे आत्मिक संतोष की प्राप्ति होती ।
लक्ष्मी लाख चाहकर भी रिहाना की ऩजर में अच्छी नहीं बन पाती थी और वापिस घर जाना अब केवल सपना था क्यूंकि मोहम्मद ने उसका पासपोर्ट ज़ब्त कर रखा था ।कुवैत में जाकर काम करने वालों की ये आम कहानी थी ।अक्सर मालिक लेबर्स का पासपोर्ट रख लिया करते थे और वीज़ा की तारीख खत्म होने तक मजबूरन रोके रखते थे ।लक्ष्मी भी अपना वीज़ा खत्म होने का इन्तजार कर रही थी । चाचा ने बड़ी मुश्किलों से उसे पांच साल का वीज़ा लगवाकर दिया था लेकिन तीन सालों में ही उसकी अंतड़ियाँ मुहं को आ गई थीं ।
जब -जब मोहम्मद उससे दिल बहलाता था, रिहाना उसे तीन-चार दिन के लिए खाना नहीं देती थी । रिहाना की जूतियों से देह की मरम्मत और लातों की बरसात लक्ष्मी के लिए रोज की खुराक बन गयी थी ।इस बार भी.....
" लक्ष्मी....तुम कहाँ गायब रहता है सारा दिन ? हूँ.......मैं जब भी गर (घर) में गुस्ता (घुसता)हूँ सबसे पहले तुम्हें देखना चाहता हूँ । मैं तुमसे मोह्ब्ब्त करता हूँ और एक तुम हो जो मुझे बहुत तरसाती हो । चलो आ जाओ , मैं ऊपर रूम में तुम्हारा इन्तजार कर रहा हूँ ।"
"साब (साहब) , हमको डेट आई है "
"चुप हराम.....!!!! तुम क्यों गाली खाने का काम करता है ।हमने कहा ऊपर आओ तो ऊपर आओ , समझी ?"
"जी"
"कितना हसीन बाल है तुमको और ये कद ....माशा अल्लाह , हमको बाँध लो अपनी जुल्फों में लक्ष्मी.....आओ जल्दी आओ" मोहम्मद घिनौनी नजरों से उसके जिस्म का एक -एक इंच नाप कर ऊपर चला गया और पीछे लक्ष्मी आने वाले दिनों को सोचकर भयभीत हो गयी लेकिन चारा भी क्या था ? मोहम्मद के पास जाने से पहले रिहाना को बताना जरुरी था वरना उसकी ज्यादती और भयंकर हो जाती थी...
"मैम ,हमें साहब बुला रहे हैं "
" तो खड़ी क्यूँ है जाओ....सुन.....साली ख़बिज तुझमें ऐसा क्या है जो मोहम्मद मुझे छोड़कर तेरे पीछे.....जा ....अभी तो जा....लौट कर तो यहीं आना है !"रिहाना नशे में चूर थी
" मैम हमको डेट है"
" तो मखमल की चादर मंगवाऊं क्या बेगम साहिब के लिए ? जा मेरी नज़रों से दूर हो जा वर्ना .....मेरे खाविंद को बस में कर लिया है तूने...डायन...."
रिहाना का चिल्लाना देखकर लक्ष्मी भीतर तक डर से काँप गयी । आगे कुआँ था और पीछे खाई.....आख़िर उसने अपनी जिन्दा लाश घसीट कर ऊपर की ओर बढ़ जाना ही मुनासिब समझा।
रिहाना थोड़ी देर इधर उधर जलती निगाहों से देखती रही और फिर झटके से सीढियों की तरफ दौड़ी । फिर कुछ सोच कर रुक गयी और मोहम्मद के कमरे के बाहर यहाँ वहां टहलने लगी । जब उससे रहा नहीं गया तो वो की होल से भीतर झाँकने लगी । अंदर लक्ष्मी अधनंगे कपड़ो में हिंदी गाने पर नृत्य पेश कर रही थी ।मोहम्मद सोफे पर ढुलका हुआ था और शराब के जाम खींच रहा था । बीच - बीच में वो जोर से गाने के बोल कहते हुए नोट लुटाता...
"ओ बेबी डौल तू सोने दी, डौल तू सोने दी...sss"
रिहाना का गुस्से से दिमाग फटने लगा, उसका मन हो रहा था की अभी जाकर दोनों को शूट कर दे । जिस मोहम्मद से प्यार निभाने के लिए वो अपने अम्मी अब्बू को छोड़ आई थी वही मोहम्मद दूसरी लड़कियों के साथ अपनी रातें हसीं करता था ।
रिहाना ने जेब से सिगार निकाल कर लम्बे कश लगाना शुरू कर दिया , फिर बेचैन सी बार की तरफ चल दी । पन्द्रह मिनट में ही उसने तीन हार्ड पैक मारे और गाड़ी की चाभी उठा कर बाहर निकल गयी ।
***************


तना बड़ा एयर पोर्ट देख कर चिन्ना रेड्डी की आँखे चुंधिया रही थी ।एक छोटे गाँव से निकल कर सीधा कुवैत की जमीं पर साँस लेने में उसके फेफड़े दुगने साइज के हो गए थे । उसकी आँखों ने दो पहचान के चेहरों को तो ढूंढ़ लिया था लेकिन जिस चेहरे की उसे तलाश थी वो कहीं नहीं था ।
" लक्ष्मी एकड़ा पंडू (लक्ष्मी कहाँ है पंडू )" चिन्ना ने बेचैनी से अपने बचपन के दोस्त पंडू से पूछा
" लक्ष्मी रा लेदु , सेल्वू दोरकालेदेमो(लक्ष्मी नहीं आई , हो सकता है उसे छुट्टी न मिली हो)
" तनु नाकू फ़ोन लो वस्तानु अनि चेपंदी (वो फोन पर बोली थी की आऊँगी) "
" इन्टिकी वेल्ली लक्ष्मी की फ़ोन चेदामले (घर चलो फिर लक्ष्मी को फोन करेंगे ) "पंडू ने चिन्ना को समझाते हुए कहा
"ओके"
तक़रीबन आधे घंटे के सफ़र के बाद चिन्ना पंडू और युसूफ के साथ एजेंसी के दिए हुए घर पहुंचा । घर क्या ?, लगभग दड़बे के जैसा कमरा था । ऊँची बिल्डिंग आसमान को छूती हुई , जिसके पन्द्रहवे माले पर उनका दस बाई बारह का कमरा था । एक ओर टेबल लगाकर किचन का रूप दिया हुआ था ,उसके ठीक दूसरे कोने पर एक छोटा टीवी और वी सी डी प्लेयर रखा हुआ था ।कुछ कम घिसा हुआ कालीन फ्लोर की शोभा बड़ा रहा था और दीवारों पर चिपका हुआ वाल पेपर जगह-जगह से फटा हुआ अपने पुराने अवशेषों की झलक दे रहा था ।एक छोटी सी खिड़की तीसरी दीवार पर चिपकी हुई थी जो यहाँ के बाशिंदों के लिए एक मात्र वेंटिलेशन का जरिया थी । बाहर की तेज गर्मी से बचाव के लिए एक टन का ए सी भी था लेकिन बारह लोगो की ठंडक के लिए वो बेचारा नाकाफ़ी था ।
चिन्ना को ऐजंसी के जरिये एक साल का वीजा और ड्राइवर का काम मिला था लेकिन वो इस नौकरी में ज्यादा दिन टिकना नहीं चाहता था ।उसने अपनी बड़ी बहन लक्ष्मी को कई बार कहा था की अपने सेठ के यहाँ ड्राइवर की नौकरी दिलवा दे ।उसका सेठ चिन्ना को आसानी से खाविंद वीजा पांच साल के लिए दिलवा सकता था ,फिर एक ही घर में बहन के साथ रहना भी हो जाता लेकिन लक्ष्मी ने कभी उसे गंभीरता से नहीं लिया । हमेशा कुछ ना कुछ कह कर टाल देती । चिन्ना ने मन ही मन कुवैत आकर नौकरी करने की ठान ली थी । बड़ी कोशिशों के बाद उसे एक एजंसी ने वीजा और पासपोर्ट बनवा दिया था लेकिन लक्ष्मी के लिए उसके मन मे एक गांठ पड़ गयी थी । जिस काम को लक्ष्मी आसानी से करवा  सकती थी उसी काम के लिए चिन्ना को बहुत जुगत लगानी पड़ी थी । आज एयरपोर्ट पर लक्ष्मी का ना आना चिन्ना को गहरी चोट दे गया था । तीन साल हो गए थे लक्ष्मी को यहाँ आए लेकिन वो केवल एक ही बार रमजान पर मिलने वाली छुट्टी पर घर आई थी । फोन भी बहुत कम करती थी । पैसे हर महीने समय से भेज दिया करती थी लेकिन घर वालों से एकदम कट सी गयी थी । गाँव मे सभी लोग कहने लगे थे की उसे पैसे का घमंड हो गया है । नशा चड़ गया है दीनारों का , आखिर एक दिनार की कीमत भारतीय रुपए के हिसाब से दौ सौ दस रुपए के करीब थी । ऊपर से सोने पर सुहागा उसका सेठ बहुत ही अच्छा था जिसने पहले ही साल में लक्ष्मी को अलग से हजार दिनार दिये थे जिससे उसने गाँव आकर अपना पक्का मकान बनवा दिया था । चिन्ना को भी पढ़ने के लिए हैदराबाद के श्री चैतन्या प्राइवेट स्कूल में भेज दिया था । माँ कितनी खुश थी , साल भीतर ही घर बन गया था । बढ़िया खाना और आधुनिक इलैक्ट्रोनिक सामान से उनकी रंगत निखर आई थी । अब गाँव में उनकी गिनती पैसे वालों में होने लगी थी । सभी हैरान थे की लक्ष्मी ने साल भर में इतना कमा लिया था जिसे कमाने में लोगों को कई बरस लग जाते थे लेकिन धीरे - धीरे लक्ष्मी का उन लोगों से कटते जाना परेशानी का कारण बन गया था । माँ भीतर ही भीतर बेटी के गम में उदास रहने लगी थी , लोगों की अनर्गल बातें और कटाक्ष उसे दुख देते थे । उसे महसूस होता था की लक्ष्मी जरूर कुछ छिपा रही है , कहीं वो किसी मुसीबत में तो नहीं ? पर चिन्ना माँ से बिल्कुल अलग सोचता था , उसे लगने लगा था की उसकी बड़ी बहन दीनारों और सोने की चमक में खो गयी है । लक्ष्मी अक्सर कुवैत से गाँव आने वाले रिश्तेदारों के हाथ तंख्वाह से हटकर दीनार और सोने के आभूषण भेजती थी लेकिन खुद दो साल से चेहरा दिखाने नहीं आई थी । रिश्तेदार बताते थे की वो पहले से और सुंदर और तंदुरुस्त हो गयी है । कपड़े भी खूब आधुनिक पहनने लगी है । एक महंगा मोबाइल हमेशा उसके पास रहता है और उसके मालिक मालकिन बहुत ही अच्छे हैं । वे लोग लक्ष्मी को अपने घर  के सदस्य की तरह प्यार करते हैं और लक्ष्मी भी उनमे रच बस गयी है ।

यही कारण था की आज बड़ी बहन का अपने छोटे भाई को एयरपोर्ट पर ना लेने आना चिन्ना को अखर गया था । दो साल बाद अपनी बहन को देखने के लिए वो बहुत बेचैन था । उससे ढेर सारी बातें करना चाहता था । बचपन की बाते याद करना चाहता था । घर का आँगन , माँ के हाथ की पायसम और खुमानी के मीठे का स्वाद  याद करना चाहता था । माँ ने अपने हाथो से सीलकर उसके लिए जो हाफ साड़ी भेजा था उसे देकर निहाल हो जाना चाहता था । बड़ी बहन की गोद में सिर रखकर माँ की ढेर सारी बाते बताना चाहता था , पर अब क्या ?तीन चार बार फोन करने पर भी ना लक्ष्मी ने फोन उठाया था और ना वापिस काल किया था । चिन्ना को बहुत गुस्सा आ रहा था , अब लक्ष्मी से केवल शुक्रवार को ही मिला जा सकता था । कुवैत में केवल जुम्मे को ही साप्ताहिक अवकाश मिलता था और उसे खुद भी तो कल से काम पर जाना था । नयी जगह ,नयी सड़कें और नए लोगों में बसने  के लिए कुछ समय तो चाहिए था फिर उसे अरबी भी बहुत कम आती थी ।
चिन्ना ने रसम से थोड़ा भात खाया और वहीं कमरे में जगह देखकर लेट गया ।


***********


अंधेरा घना छाया हुआ था लेकिन उससे भी घना अंधकार लक्ष्मी को लील रहा था । मोहम्म्द अपनी प्यास बुझाकर निकला ही था की नशे में धुत रिहाना कमरे में घुस आई थी । उसने लक्ष्मी को कपड़े भी नहीं पहनने दिये और बेंथ से उसकी खूब पिटाई की । जहां- जहाँ मोहम्मद ने अपने दांतों के निशान छोड़े थे, वहाँ - वहाँ रिहाना ने शराब डालकर उसे बहुत तड़पाया था । इन चोटों के निशानों के साथ अब वो कुछ दिन और अपने भाई से नहीं मिल सकती थी । चिन्ना के मिस काल देखकर भी उसमें वापिस काल करने की हिम्मत नहीं थी , क्या जाने कब  भाई को दूसरी तरफ पाकर आवाज़ उसके दुख की चुगली कर दे । अपने के आगे लाख छुपाओ पर ना आँसू रुकते हैं और ना आवाज़ साथ देती है और वो कैसे अपने प्यारे छोटे भाई को आते ही दुख दे सकती थी ।
नहीं .... नहीं जब तक चिन्ना किसी अच्छी जगह नौकरी पर नहीं लग जाता उसे चिन्ना से दूरी बनाकर रखनी पड़ेगी । उसकी आंखे अंधकार में माँ और चिन्ना के चित्र बुनने लगीं । माँ का मजबूर चेहरा , चिन्ना की मासूमीयत और पिता का असमय उन्हे छोड़ कर चले जाना । चिन्ना और उसकी एक साथ पढ़ाई का खर्चा उठाना माँ के लिए मुश्किल हो गया था । माँ ने सब्जी की एक रेहड़ी लगा ली थी लेकिन घर के किराए और खाने के खर्च के बाद ज्यादा कुछ बच पाना मुश्किल था । ऐसे में कुवैत से चाचा उम्मीद की किरण बन कर आए थे । चाचा के सेठ  के यहाँ हाउस मेड की जरूरत थी । सेठ बहुत अमीर था , उसके कई तेल के कुएं थे और तंख्वाह भी अच्छी थी । शुरुआत में ही महीने के  एक सौ अस्सी दिनार मिल रहे थे जो आंध्रा जाकर सैंतीस हजार के करीब हो जाने वाले थे । वीजा और पासपोर्ट का सारा इंतजाम सेठ ने कर दिया था और वो भी पाँच साल का खाविंद वीजा ! जब वीजा नंबर बीस उसके हाथ में आया तो उसकी इन्ही आँखों ने रोशनाई से भरे चित्र बुने थे लेकिन आज सिर्फ अंधेरें मे डूबे , ख़ून में लथपथ सपनों के चिथड़े रह गए थे । चाचा को सेठ से उसे यहाँ तक पहुंचाने के लिए इनाम में डेड़ हजार दिनार मिले थे जिसे लेने के बाद चाचा ने कभी अपनी शक्ल नहीं दिखाई थी ।
मोहम्मद पैसे देने में परेशान नहीं करता था लेकिन उसके जिस्म को नोच डालता था । रिहाना से उसने प्रेमविवाह किया था लेकिन वो जल्द ही उससे ऊब गया था । लक्ष्मी को पहली बार देखकर ही वो लट्टू हो गया था । लक्ष्मी का कद रिहाना से ज्यादा था और उसके लंबे बाल भी बेहद खूबसूरत थे । रिहाना मोहम्म्द के साथ खड़ी होती थी तो उसकी बच्ची जैसी लगती थी । मोहम्म्द का कद छ फुट से ऊपर था जबकि रिहाना मात्र पाँच फुट थी । ऊपर से उसका दुबला शरीर उसे खासा नापसंद था । रिहाना भरे पूरे शरीर की दूसरी औरतों से मन ही मन जलती रहती थी । मोहम्म्द का अय्याश व्यवहार उसके लिए असुरक्षा की भावना का कारण बन गया था । लक्ष्मी आ जाना उसके जख्मों पर नमक का काम कर रहा था , इसीलिए वो अपनी जलन को मिटाने के लिए लक्ष्मी को जानवर की तरह पीटती थी ।
मोहम्मद रिहाना को कुछ नहीं बोलता था लेकिन अपनी हरकतों से बाज़ भी नहीं आता था ।  
लक्ष्मी सोच रही थी की उसको अब कोई ऐसा उपाय खोज निकालना होगा जिससे वो चिन्ना को बिना दुख पहुंचाए उससे दूरी बना सके लेकिन अगले जुम्मे को तो उससे मिलने जरूर जाऊँगी वरना चिन्ना का मन और भी टूट जाएगा । भाई से ना मिल पाने की कसक उसे रात भर जख्मों से भी ज़्यादा लीलती रही ।
रात आँखों में कब कट गयी उसे पता ही नहीं चला , आज सुबह वो रिहाना से पहले उठ गयी थी और रिहाना के प्रपंच से बच गयी थी ।
आज मोहम्म्द को जल्दी जाना था । तेल के कुओं के कारोबार के साथ - साथ वो अब सब्जियों की कृत्रिम खेती में भी हाथ आज़माना चाहता था । लक्ष्मी उसके लिए नाश्ता तैयार करके डाइनिंग हाल में पहुंची क्योंकि अपनी जरूरत की बात कहने के लिए  यही समय सबसे उपयुक्त रहता था । अक्सर रिहाना इस समय नामौजूद रहती थी .........
" साहब ....."उसने नाश्ता परोसते हुए कहा
" हाँ लक्ष्मी कहो .... कुछ चाहिए ? घर पैसा भेजना है क्या ?"
" नहीं साहब , जुम्मे के रोज छुट्टी चाहिए "
" छुट्टी ? कहीं जाना है ? हमें छोड़कर भागने का इरादा तो नहीं है ना ? कसम से मैं मर जाऊंगा "
" नहीं साब , मैं कहाँ जाऊँगी । मेरा छोटा भाई कुवैत काम के लिए आया है उससे मिलना है "
" तुम्हारा छोटा भाई चिन्ना ? अरे वाह ! यहीं बुला लो , हम ही किसी काम पर रख लेंगे "
" नहीं साब ,उसका काम लग गया है । आप बस मिलने जाने दें "
" ठीक है चली जाना लेकिन शाम से पहले घर आ जाना , कोई ऐसी हरकत ना हो जिससे मुझे तकलीफ उठानी पड़े । तुम जानती हो मेरी पहुँच इंडियन अमबैसी तक है । मेरी इजाज़त के बिना तुम यहाँ से कहीं भी हिल नहीं सकती "
" जी साब , ऐसा कुछ नहीं है । दो साल हुआ भाई को देखे । अब यहाँ है तो बस मिलकर आना चाहती हूँ "
" जाओ , शौक से जाओ , मैं रिहाना से कह दूंगा । लो ये दस दीनार रख लो उसके लिए कुछ ले जाना । वैसे कल रात मजा आया ना .....? तुम ख़ूब नाचती हो "
लक्ष्मी कुछ नहीं बोली , बस मन ही मन घृणा से भर गयी । सोचने लगी की पैसा हो तो आदमी कुछ भी कर सकता है । अपने ही जैसे दूसरे आदमी को अपना कुत्ता बना सकता है । अपने आगे नाक रगड़वा कर अपना थूक चटा सकता है ।
हम जैसे लोग मजबूरी में कुत्ते बन भी जाते हैं लेकिन बस अब कुछ दिन और ...... हाँ ....अब चिन्ना समझदार हो गया है । अपने बलबूते यहाँ तक पहुँच भी गया है ।कल को शादी होगी तो अपने बीवी बच्चों के ख़र्चे भर बढ़िया कमा ही लेगा । मैंने जो पैसा जोड़ा है उससे आंध्रा जाकर चिट फंड का काम किया जा सकता है ।.ब्याज की आमदनी से माँ और मेरा खर्चा निकल जाएगा ।
************


जुम्मे की सुबह लक्ष्मी के लिए खुशियों की सुबह थी । जल्दी से काम निपटा कर उसने पंडू के मोबाइल पर फोन किया और उससे एजेंसी के कमरे का एड्रेस ले लिया । वो चिन्ना को सरप्राइज़ देना चाहती थी । रास्ते से उसने चिन्ना के लिए दो टीशर्ट और मिठाइयाँ खरीदी और फ्लैट पर पहुंची .... चिन्ना उसे देखकर थोड़ी देर के लिए सुन्न हो गया फिर धीरे से बोला ....
" अक्का ( दीदी ) सब लोग कहते थे की तू मोटी और सुंदर हो गयी है लेकिन तू तो हड्डियों का ढांचा लग रही है " चिन्ना अपने आँसू ना रोक सका
" नहीं .... नहीं वो लोग सही कह रहे थे । महीना दो महीना से मैं बीमार हूँ , तबीयत बहुत बिगड़ गयी थी इसलिए वजन बहुत कम हो गया है । जल्द ही फिर मोटी हो जाऊँगी । "
" और कोई बात तो नहीं है ना ?"
" नहीं चिन्ना , कुछ नहीं । मेरे साब लोग बहुत अच्छे हैं । चलो कहीं बाहर चलते हैं तुमसे बहुत बात करनी है और आज तो यहाँ भी सबकी छुट्टी होगी , आराम करना होगा ?"
" हाँ दी  चलो " चिन्ना ने जल्दी से बहन की लाई हुई टी शर्ट पहनी और खुशी से तैयार हो गया
दोनों  पार्क मे आकर बैठ गए और तीन चार घंटे तक घर- गाँव , माँ की बाते करते रहे । लक्ष्मी सतर्कता से चिन्ना को बहला रही थी । उसने चिन्ना को बताया की उसके साहब छ महीने के लिए अमेरिका गए हुए हैं इसलिए उसकी नौकरी की बात करना या ज़्यादा मिलने आना मुश्किल होगा । मेमसाहब थोड़ी बीमार रहती हैं और माँ बनने वाली हैं ।
चिन्ना बहल तो गया लेकिन उसके मन की गांठ और मज़बूत हो गयी । उसे लगा की लक्ष्मी जान बूझकर उसे अपने यहाँ काम नहीं दिलवाना चाहती है । उसे तो पता था की वो आने वाला है , फिर साहब के जाने से पहले ही उनसे बात क्यों नहीं की ? फिर मेमसाहब के लिए इस हालत में तो फालतू नौकर जरूरी होंगे ? लेकिन लक्ष्मी ऐसा क्यूँ कर रही है यही उसे समझ नहीं आ रहा था । उसने मन ही मन निर्णय लिया की अब अक्का से नौकरी की बात नहीं करूंगा , यहाँ और लोग भी तो हैं । उन्ही के जरिये कोई अच्छा काम ढूंढ लूँगा । आने से पहले वो अपनी मंगेतर कविथा से साल भर में ही अच्छा सैटल होकर शादी का वादा कर आया था और उसे किसी भी तरह ये वादा निभाना था ।
*************



चिन्ना को कुवैत आए सात महीने बीत चुके थे लेकिन इस बीच लक्ष्मी केवल दो बार उससे मिलने आई थी और फोन भी वो बहुत कम करती थी , उसके इस व्यवहार के कारण से अनभिज्ञ चिन्ना उससे चिड़ने लगा था । विदेश मे अपनी सगी बहन के होते हुए भी वो अकेलापन महसूस करता था । अब उसने भी लक्ष्मी को फोन करना लगभग बंद कर दिया था । उसका वीजा ख़त्म होने में पाँच महीने शेष थे लेकिन अब तक उसे मनमाफ़िक काम नहीं मिल पाया था । जिस कंपनी में वो ड्राइवर था वे लोग दिन भर दौड़ाते थे , कभी कभी रात में भी ड्यूटी पर जाना पड़ता था । कंपनी का मालिक अच्छा था लेकिन अपने काम के मामले में वो कोई बहाना नहीं सुनता था । अक्सर उसे सच की बीमारी भी बहाना लगती थी ऐसे में काम पर जाना मजबूरी हो जाता था । पगार भी बहुत कम थी , अपने खर्चे के साथ घर के लिए कुछ बचा पाना बहुत मुश्किल था ।  उसे ये भी समझ नहीं आ रहा था की मदद किससे ले । उसके बचपन का दोस्त पंडू तो खुद दो साल से यहाँ एड़ियाँ रगड़ रहा था । बाकी लोगो में कुछ लोग मजदूर थे ,तो कुछ इलैक्ट्रीशियन जिनकी पगार उससे भी कम थी । इन सब के बीच पंडू का दोस्त युसुफ ही एक ऐसा था जिसने जल्दी तरक्की की थी ।युसुफ बांग्लादेश का रहने वाला था और उसे कुवैत आए अभी बस नौ महीने ही हुए थे ।  उसने कंपनी छोड़ दी थी और अपना अलग कमरा लेकर एक लड़की के साथ रह रहा था । पैसा भी उसने खूब बना किया था लेकिन वो करता क्या है ये चिन्ना को कभी समझ नहीं आया । वो जब भी पंडू से उसके बारे में जानना चाहता वो किस्से सुनाकर बात घूमा देता था ।
एक बार  पंडू काफी बीमार पड़ गया और उसे देखने युसुफ भी आया था । इस मौके को चिन्ना हाथ से जाने नहीं दे सकता था वो सारा दिन उससे अकेले में बात करने के मौके ढूँढता रहा और जैसे की कहावत है " जहां चाह वहाँ राह " उसे मौका मिल ही गया ।
" युसुफ तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है यार "
" यही ना की मैं क्या करता हूँ और तुम्हें भी अच्छा काम चाहिए "
" अ ..... हाँ , प्लीज मेरी भी थोड़ी मदद कर दो । मेरा वीजा भी खतम होने वाला है "
" देखो चिन्ना जो मैं करता हूँ वो तुम नहीं कर सकते , उसके लिए हौसला चाहिए "
" बोल कर तो देखो , मैं कुछ भी कर सकता हूँ पर मुझे पैसा कमाना है । कब तक बहन की कमाई पर रहेंगे "
" ठीक है मैं फोन करूंगा और जहां बुलाऊँ आ जाना , फिर समझाऊंगा । ठीक अब चलता हूँ लेकिन इस बारे में पंडू को मत बताना " युसुफ कह कर चला गया और पीछे से चिन्ना के मन में उम्मीद छोड़ गया ।
                                एक दिन बीता , फिर दो , फिर हफ्ता और फिर दस दिन हो गए लेकिन युसुफ का फोन नहीं आया । चिन्ना को अब लगने लगा की उसका कुछ नहीं हो सकता ।
शाम को जब वो ड्यूटी से लौटा तो पंडू बहुत रो रहा था , उसे काबू करना मुश्किल हो रहा था । जब सारा माजरा सामने आया तो उसके होश उड़ गए । दरअसल युसुफ शराब की तस्करी में लिप्त था , उस दिन यहाँ से निकल कर गया था तभी पुलिस की चपेट में आ गया था । किस्मत उस पर इस बार मेहरबान नहीं थी , उसे कुवैत के कानून के हिसाब से फांसी की सजा सुनाई गयी थी ।
कुछ साल पहले तक तो ऐसे मामलों में खुले आम सजा दी जाती थी लेकिन अब ये सब सजाएँ जेल के परिसर में ही दी जाने लगी थी । आम जनता के लिए जेल के दरवाजे खुले रहते हैं , जो चाहे इन सब सजाओं को होते वहाँ जाकर देख सकता है । उनके कमरे के लोगों में से भी दो लोग युसुफ की फांसी देखने जाने वाले थे ।
चिन्ना ने कमरे से बाहर आकर कई दफा वेंकटेश्वर स्वामी ( भगवान ) का शुक्र मनाया की उन्होने उसे बचा लिया । कहीं वो भी युसुफ की बातों में आ जाता तो .......
उसने पंडू को किसी तरह संभाला और लक्ष्मी को भी इस सब की खबर दी , मगर आज लक्ष्मी की आवाज भी कुछ और ही कह रही थी । वो बहुत उदास और भयभीत लग रही थी । कल मिलने की बात कहकर उसने कुछ नही बताया था और चिन्ना को मिलने भी बाहर ही बुलाया था ।


       *************


नियत समय पर चिन्ना पार्क पहुंचा था लेकिन लक्ष्मी तो उससे भी पहले वहाँ पहुंची हुई थी ।
" अक्का क्या हुआ ? अरे ये क्या , ये चेहरे पर क्या हुआ ?" लक्ष्मी के चेहरे और हाथों पर बहुत से चोट के निशान देखकर चिन्ना विचलित हो गया
" चिन्ना मैंने आज तक तुमसे छुपाया है  , मेरे सेठ लोग अच्छे नहीं है । " लक्ष्मी सिसकने लगी फिर खुद को संभालते हुए बोली
" बस अब सहन नहीं होता , मुझे घर जाना है । तुम भी चलो ......"
" हुआ क्या अक्का खुल कर बताओ , मेरा दिल बैठा जा रहा है " चिन्ना बौखला गया , वैसे भी वो युसुफ के बारे में जानने के बाद से परेशान था
" चिन्ना मेरा सेठ तीन साल से हर तरह से मुझे इस्तेमाल करता है पर घर की मजबूरी के चलते मैं सहती रही । अब तुम बड़े हो गए हो । मैं घर जा सकती हूँ लेकिन वो सेठ अब मुझसे निकाह करना चाहता है । मैं फंस गयी हूँ । मेरा पासपोर्ट उसके पास है और निकाह की खबर सुनने के बाद से उसकी बीवी मुझे बहुत परेशान कर रही है । मुझे वापिस जाना है .....चिन्ना मुझे माँ के पास जाना है " लक्ष्मी हलकान हो रही थी और चिन्ना के पैरों तले जमीं खिसक चुकी थी ।
अपनी बहन की मजबूरी जानकार उसे खुद पर गुस्सा आने लगा , वो अब तक उसे कुछ और ही समझ कर कोसता रहता था । उसने लक्ष्मी को समझा बूझाकर चुप करवाया और कल उसके सेठ के पास आकर बात करने का दिलासा दिया ।
वो जानता था ऐसे सेठों से सीधे तरीके से निपटा नहीं जा सकता है उसे मदद जुटानी होगी और अगर लक्ष्मी को रोक लेता है तो मोहम्मद खबरदार हो जाएगा । उसने लक्ष्मी को वापिस जाकर सामान्य व्यवहार करने को कहा ।
" अक्का मैं कल भारतीय दूतावास जाकर मदद माँगूँगा , ऐसे में बस वो ही डुप्लीकेट  पासपोर्ट बनवाकर तुम्हें भेज सकते हैं । तब तक तू शांत रहना और अपना ध्यान रखना । भारतीय दूतावास से काम हो जाने पर मैं तुझे खबर करूंगा ।
लक्ष्मी को उसके घर छोड़कर चिन्ना ने पंडू से बात की और अगले दिन सुबह वे दोनों भारतीय दूतावास जा पहुंचे । दूतावास में उन्हें संजीदगी से लिया गया और चार पाँच दिन में ही दूसरा  वीजा की बात कहकर दिलासा दिया गया । फार्म वैगरह की औपचारिकता पूरी करके वे शाम तक घर आ गए और लक्ष्मी को फोन करने लगे लेकिन ना लक्ष्मी ने फोन उठाया और ना किया ।
चिन्ना घबरा रहा था लेकिन सीधे जाकर वो लक्ष्मी के लिए कोई मुसीबत नहीं खड़ी करना चाहता था । अगले दिन भी वही हाल रहा , ना फोन उठाया गया और ना लक्ष्मी ने किया । देखते - देखते चार दिन बीत गए । दूतावास भी जाना था इसलिए आज चिन्ना ने मोहम्मद के घर जाने का फैसला किया । पंडू भी मामले की संजीदगी को समझ रहा था इसलिए वो चिन्ना के साथ जाने की जिद्द करने लगा । चिन्ना के अकेले जाने पर बात ना बिगड़े इसका उसे भय था । दोनों मोहम्म्द के घर पहुंचे और काफी देर बेल बजाने पर रिहाना ने दरवाजा खोला ......
" कौन..... ?"....."
" मेरा नाम चिन्ना है , लक्ष्मी का छोटा भाई । उससे मिलना है "
" लक्ष्मी  ????? तुम्हें नहीं पता ?"
" क्या नहीं पता ? कहाँ है लक्ष्मी ?"
" लक्ष्मी ने चार दिन पहले छत से कूद कर आत्महत्या कर ली , उसकी बाडी पुलिस के पास है । वहीं जाओ "
" क्या ??????????????????? नहीं ....... नहीं  वो ऐसा नहीं कर सकती ............लक्ष्मी......... कहाँ .........छुपाया है उसे .... बोलो ...... मुझे सब मालूम है तुम लोग मेरी बहन के साथ क्या - क्या करते थे ...... बुलाओ मेरी बहन को .........." चिन्ना ज़ोर - ज़ोर से चीखने लगा ,उसका शोर सुनकर अंदर से मोहम्मद बाहर आ गया और गुस्से से तमतमा गया
" क्यों चिल्ला रहा है..... कह दिया .ना मर गयी ..... या मार दिया , कुछ भी समझ ले । साली मुझसे निकाह नहीं करेगी वापिस जाना था , एक ही बार मे वापिस भेज दिया "
" मैं तुम्हें छोड़ूँगा नहीं मोहम्मद ....." चिन्ना गुर्राया  और उसका गुस्सा देखकर मोहम्मद आग बबूला हो गया, उसने अपनी जूती निकाली और चिन्ना को पीट पीट कर घर से बाहर धक्के देकर निकाल दिया । चिन्ना चिल्लाता रहा , मोहम्मद से भिड़ता रहा ... पीटता रहा लेकिन चुप ना हुआ ..
पंडू ने जबरदस्ती चिन्ना को किसी तरह काबू किया और बाहर ले आया ...... रोड के किनारे बने लेन पर बैठकर चिन्ना दहाड़े मारकर रोने लगा और पंडू असहाय सा उसे देखता रहा ................................................................................................................................................................................................................................................................ काश की भावनाओं की कुछ सरहदें होती जो इंसान को इंसान ही बनाए रखतीं , जानवर ना होने देतीं .................................................जानवर ना होने देती .......................


**************

                                                    संजना तिवारी





COMMENTS

BLOGGER: 2
Loading...
नाम

“मतवाला” #NaturalSelfi 15 अगस्त २६ जनवरी अंजू शर्मा अंतर्राष्ट्रीय बिटिया दिवस अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस अकेलापन अक्षय तृतीया अखिल राज शाह अगला कदम अजय कुमार अजय कुमार श्रीवास्तव अजय कुमार श्रीवास्तव (दीपू) अजय चंद्रवंशी अटूट बंधन अटूट बंधन अंक -१० अनुक्रमाणिका अटूट बंधन कवर पेज अटूट बंधन विशिष्ट रत्न सम्मान अटूट बंधन सम्पादकीय अनामिका अनामिका चक्रवर्ती अनुपमा सरकार अन्तर करवड़े अन्तराष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) अपर्णा परवीन कुमार अपर्णा साह अम्बरीष त्रिपाठी अरविन्द कुमार खेड़े अर्चना नायडु अर्चना बाजपेयी अर्जुन सिंह अर्थ डे अशोक कुमार अशोक के परुथी आत्महत्या आध्यात्मिक लेख आभा दुबे आयुष झा "आस्तीक " आलोक कुमार सातपुते आशा पाण्डेय ओझा आसाढ़ पूर्णिमा इंजी .आशा शर्मा इंदु सिंह इमरान रिजवी इमोशनल ट्रिगर्स ई बुक ईद उत्पल शर्मा "पार्थ" उपवास उपासना सियाग उमा अग्रवाल उम्मीदें उषा अवस्थी एकता शारदा एम्पैथी ओमकार मणि त्रिपाठी ओशो औरत कंगना रानौत कंचन पाठक कंचन लता जायसवाल कबीर करवाचौथ कर्म कल्पना मिश्रा बाजपेयी कवि मनोज कुमार कविता बिंदल कहानी कहानी संग्रह कार्ल मार्क्स काव्य जगत काव्यजगत किरण आर्य किरण सिंह कुमार गौरव कुसुम पालीवाल कृष्ण कुमार यादव कैंसर ग़ज़ल गणेश चतुर्थी गहरा दुःख गाँधी जयंती गिरीश चन्द्र पाण्डेय गीता गुरु गुरु दक्षिणा गुरु पूर्णिमा गुस्सा चंद्रेश कुमार छतलानी चन्द्र प्रभा सूद चन्द्र मौली पाण्डेय चीन चेतन भगत छठ जन्माष्टमी जय कन्हैया लाल की जिनपिंग जी एस टी जैन ज्योतिष झगडे टफ टाइम टीचर टीचर्स डे ठुमरी समाज्ञ्री गिरजा देवी डाॅ.भारती गाँधी डिम्पल गौड़ 'अनन्या ' डिम्पल गौड़ 'अनन्या' डॉ . आशुतोष शुक्ला डॉ .संगीता गाँधी डॉ अब्दुल कलाम डॉ अलका अग्रवाल डॉ जगदीश गाँधी डॉ भारती वर्मा बौड़ाई डॉ मधु त्रिवेदी डॉ रमा द्विवेदी डॉ लक्ष्मी बाजपेयी डॉ संगीता गांधी डॉ. भारती गांधी डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई डॉ.जगदीश गाँधी डॉली अग्रवाल ढिंगली तीज तीन तलाक तृप्ति वर्मा त्यौहार दशहरा दीपावली स्पेशल दीपिका कुमारी दीप्ति दीपेन्द्र कपूर दुर्गा अष्टमी देवशयनी एकादशी देश -दुनिया देश भक्ति की कवितायें धर्म नंदा पाण्डेय नन्हा गुरु नवरात्र नवीन मणि त्रिपाठी नागेश्वरी राव नारी निधि जैन निबंध निशा कुलश्रेष्ठ नीता मेहरोत्रा नीलम गुप्ता नेहा अग्रवाल नेहा नाहटा नेहा बाजपेयी पंकज प्रखर पंखुरी सिन्हा पंडित दीनदयाल उपाध्याय परिचर्चा -१ परिचर्चा -१ कवितायेँ पर्व त्यौहार पारदर्शिता पार्थ शर्मा पूनम डोंगरा पूनम पाठक प्रतिभा पाण्डेय प्रदीप कुमार सिंह ‘पाल’ प्रिंसेस डायना प्रिया मिश्रा प्रेम कवितायेँ प्रेम रंजन अनिमेष प्रेरक कथाएँ प्रेरक प्रसंग प्रेरक विचार फादर्स डे फीलिंग लॉस्ट फुंसियाँ फेसबुक फॉरगिवनेस फ्रेंडशिप डे फ्रेडरिक नीत्से बहादुर शाह जफ़र बाल कहानी बाल जगत बाल दिवस बाल मनो विज्ञान बाल-मन बिल गेट्स बीनू भटनागर बुजुर्ग बेगम अख्तर ब्लू व्हेल ब्लॉगिंग भाई - बहन भाई बहन भाग्य भावना तिवारी भोले बाबा मई दिवस मदर्स डे मम्मी महात्मा गाँधी महान व्यक्तित्व महेंद्र सिंह माँ माँ उषा लाल माँ सरस्वती माता - पिता माता -पिता मानव शरीर माया मृग मित्रता मित्रता दिवस मित्रता दिवस पर विशेष लेख मीना कुमारी मीना पाठक मीना पाण्डेय मुंशी प्रेमचन्द्र . कहानी मुकेश कुमार ऋषि वर्मा मृत्यु मृदुल यकीन रंगनाथ द्विवेदी रक्षा बंधन रचना व्यास रजनी भारद्वाज रमा द्विवेदी रश्मि प्रभा रश्मि बंसल रश्मि सिन्हा राजा सिंह राधा कृष्ण "अमितेन्द्र " राधा क्षत्रिय राधा शर्मा रितु गुलाटी रिया स्पीक्स रिश्ते रिश्ते -नाते रूचि भल्ला रूपलाल बेदिया रेप रोचिका शर्मा लघु कथाएँ लता मंगेशकर लली लेख लेबर डे वंदना गुप्ता वंदना बाजपेयी वसंत पंचमी विजयारतनम विनीता शुक्ला विनोद खनगवाल विभा रानी श्रीवास्तव विशेष दिवस विश्व हास्य दिवस विश्वजीत 'सपन ' वीणा वत्सल वीरू सोनकर वृद्धजन विमर्श वैलेंटाइन डे व्यंग शरद पूर्णिमा शशि बंसल शशि श्रीवास्तव शांति पुरोहित शान्ति पाल शान्ति पुरोहित नोखा शायरी शिक्षक दिवस शिखा सिंह शिव शिवलिंग शिवा पुत्र शिवानी कोहली शिवानी जैन शर्मा श्राद्ध पक्ष श्रीमती एम डी त्रिपाठी संगम वर्मा संगीता पाण्डेय संगीता सिंह "भावना " संजना तिवारी संजय कुमार अविनाश संजय कुमार गिरि संजय वर्मा संजय वर्मा "दृष्टी " संजीत शुक्ला संध्या तिवारी संवेदनशीलता संस्मरण सकारात्मक चिंतन सक्सेस स्टोरीज सतीश राठी सत्या शर्मा 'कीर्ति ' सद्विचार सन्यास सपना मांगलिक सफलता समीक्षा सरबानी सेनगुप्ता सराह सरिता जैन सविता मिश्रा साक्षात्कार साधना सिंह सामाजिक लेख सावन का पहला सोमवार साहित्यिक लेख सीताराम गुप्ता सीमा सिंह सुधीर द्विवेदी सुनीता त्यागी सुमित्रा गुप्ता सुशांत सुप्रिय सुशील यादव सूर्य सूर्योदय सेल्फ केयर स्ट्रेस ईटिंग डिसऑर्डर स्त्री देह और बाजारवाद स्त्री विमर्श स्मिता दात्ये स्मिता शुक्ला स्वतंत्रता दिवस स्वामी विवेकानंद स्वास्थ्य जगत स्वेता मिश्रा हलचल आस -पास हलचल आसपास हामिद हास्य योग हिंदी दिवस हेडी लेमार हेल्थ होली की ठिठोली aforestation agla kadam astrology atoot bandhan atoot bandhan cover page atoot bandhan editorial cancer children issues clingy behaviour deepawali special E.book family and relationship issues father's day fb feeling lost friendship day general article GST guru health hindi divas hindi poetry hindi stories hindi story id immortal personalities interview janmashtami karvachauth literary articles memoirs mother's day motivational quotes motivational stories nanha guru positive thinking pragnency raksha bandhan rape religion riviews Riya speaks sarahah app satire senior citizen issues short stories social articles spiritual articles stress eating sucesses sucesses stories swantantrta divas valentine day vandana bajpai women issues
false
ltr
item
अटूट बंधन : भावनाओं की सरहदें कब होंगी
भावनाओं की सरहदें कब होंगी
https://1.bp.blogspot.com/-Lm0ShblYAcU/WebgF49YC8I/AAAAAAAAHKg/OsDbIBDdw24Oe7GVxQZNvXZuCiyH4hwBwCLcBGAs/s320/pexels-photo-556663.jpeg
https://1.bp.blogspot.com/-Lm0ShblYAcU/WebgF49YC8I/AAAAAAAAHKg/OsDbIBDdw24Oe7GVxQZNvXZuCiyH4hwBwCLcBGAs/s72-c/pexels-photo-556663.jpeg
अटूट बंधन
http://www.atootbandhann.com/2015/11/blog-post_4.html
http://www.atootbandhann.com/
http://www.atootbandhann.com/
http://www.atootbandhann.com/2015/11/blog-post_4.html
true
1089704805750007414
UTF-8
Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy