`दीपावली' हाइकु एवं हाइगा

 प्रस्तुत हैं वरिष्ठ  साहित्यकार डॉ . रमा द्विवेदी  जी के हायकू .एवं हाइगा ........






 
- अँधेरी रात 
     अकेला है जलता 
    माटी का दीया ।


१ ..............

२ ............
-दीप लघु हूँ 
अंधेरों को पीता हूँ 
तन्हा जीता हूँ ।






३ .................
-उजालों में भी 
पलते हैं अँधेरे
दीपक तले ।
 



४ ..................
  रंगोली सजी 
हर देहरी द्वार 
दीपों के साथ । 



                                                                           ५ ..............


-उजाले देता 
मुफलिसी में जीता 
अँधेरे पीता । 


डॉ रमा द्विवेदी 
संपादक -पुष्पक ,साहित्यिक पत्रिका 
हैदराबाद ,तेलंगाना 



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atoot bandhan

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  1. `आओ जलाएं साहित्य दीप ' के अंर्तगत मेरे हाइकु और हाइगा प्रकाशित करने के लिए `अटूट बंधन ' के प्रधान संपादक श्री ओंकारमणि त्रिपाठी जी एवं कार्यकारी संपादक वंदना वाजपेई जी का बहुत -बहुत हार्दिक आभार प्रेषित करती हूँ । आप सभी को आलोक पर्व की हार्दिक मंगलकामनाएँ :)
    Dr.Rama Dwivedi

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