January 2016


युवा कवियत्री पंखुरी सिन्हा की कलम जब चलती है सहज ही प्रभावित करती है | वह अनूठे विषयों को उठाकर अपने सहज प्रस्तुतीकरण के माध्यम से उन्हें और भी अद्वितीय बना देती हैं | प्रस्तुत हैं उनकी कुछ अनुपम कवितायें ....

साँझ काजल लगाये
और लगा था
कि छोटे शहर के
उस बगीचे वाले घर में
चले जाने के बाद
दम ही घुट जाए
कि खुलता तो है
सूर्योदय की दिशा में



  किशोरावस्था ! संधिकाल..... जहाँ बाल्यावस्था जाने को है और यौवन दस्तक दे रहा है। यह ऐसी अवस्था है कि बचपन पूरी तरह से गया नहीं और योवन द्वार पर आ खड़ा हुआ....ठीक ऐसे कि पहले से आया एक अतिथि गया नहीं कि दूसरे अतिथि ने घर के गेट पर दस्तक दे दी। देखा जाए तो किशोरावस्था ऐसी कोमल अवस्था है जहाँ सब कुछ अच्छा और सुंदर दिखाई देता है, जहाँ अंगड़ाई लेता यौवन सामने होता है, पर बचपन की कोमलता भी बनी रहती है। सतरंगी सपने उड़ान भरने, सीमाएँ तोड़ने को प्रेरित करते रहते हैं। ऐसे में बंधन, उपदेश बिलकुल अच्छे नहीं लगते। अच्छे लगते हैं तो केवल अपने मित्र ! उ

                              आज आप के सामने प्रस्तुत है    कहानी संग्रह ( ई -बुक ) मुट्ठी भर धूप | इसमें हम अटूट बंधन ब्लॉग में प्रकाशित १० श्रेष्ठ कहानियों को ( पाठकों द्वारा पढ़े जाने के आधार पर )  एक ई -बुक के रूप आप के सामने प्रस्तुत कर रहे हैं | इसमें से हर कहानी किसी समस्या को उठती व् उसका समाधान खोजती हुई समाज को दिशा देने वाली है | इसमें आप पढेंगे | शशि श्रीवास्तव , वंदना  बाजपेयी , उपासना सियाग , वंदना गुप्ता , विनीता शुक्ला , शिवानी कोहली , कुसुम पालीवाल ,स्वेता मिश्रा ,सपना मांगलिक व् रोचिका शर्मा की कहानियाँ
नोट ... कृपया कहानी पढने के लिए कहानी के नाम को ( जो लाल रंग से पेंटेड है ) क्लिक करें  


मंगलमय हो नव वर्ष 
पूरब से
उतरी नव किरणें
प्रदीप्त हुआ प्रभाकर नवीन
आज प्रभात के घाट पर
परिदृश्य हैं नवनीत