March 2016
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आज विश्व जल संरक्षण दिवस पर मुझे कवि रहीम का दोहा.......
      रहिमन पानी राखिये, बिनु पानी सब सून।
      पानी गए न उबरे, मोती, मानुस चून।।

बरबस याद आ रहा है, क्योंकि अरुणाचल प्रदेश के शिक्षा विभाग में अध्यापिका के रूप में बिताये चौबीस वर्षों में जल के महत्त्व को मैंने बखूबी समझा और यही मूलमंत्र जीवन में पाया कि सोने-चांदी, हीरे-मोती से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण और अमूल्य है जल। वहाँ की स्मृतियों में जब-तब मैं डूबती-उतराती रहती हूँ। आज विश्व जल संरक्षण दिवस पर उन स्मृतियों को साझा करने की मन में हिलोर उठी। लगा कि इन स्मृतियों को शब्दों में पिरोना चाहिए। अरुणाचल प्रदेश में हम जहाँ भी रहे वहाँ दूर-दूर हैंडपंप लगे होते थे। पहाड़ी जगहों में पानी के स्रोत पर पाइप लाइन फिट करके,पाइप बिछाते हुए जगह-जगह, पर दूर-दूर नल लगा दिए जाते थे।
सृजन व् विनाश


एक बीज जब बढ़ता है तो
कोई शोर नहीं करता
एक पेड़ जब गिरता है तो
बहुत आवाज़ होती है

विनाश की पहचान शोर
 व्
सृजन की मौन है 
होलिका दहन-वर्ण पिरामिड




1--
हो
दर्प
दहन
खिलें रंग
अपनों संग
प्रेम विश्वास के
होली के उल्लास में।
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सही शब्द


एक शब्द
और एक सही शब्द में
उतना ही अंतर है
जितना रोशिनी व्
जुगुनू में

-मार्क ट्वेन 
रिश्तों की परवाह



आप जिन रिश्तों की परवाह करते हैं
उनके सामने
अपनी भावनाओं की स्वीकारोक्ति में
देर मत करिए
क्योंकि
उनके जाने के बाद
चाहे आप
जितनी जोर से चिल्लाएं
वो सुन नहीं पायेंगे

.





मेरी बचपन की प्यारी सखी गौरैया! तुम्हें पता है आज विश्व गोरैया दिवस है। इसे एक तरह से इसे मैं तुम्हारा जन्मदिवस ही मानती हूँ। सो मेरी प्यारी सखी!जन्मदिवस की बहुत बहुत शुभकामनाएँ। तुम्हें याद होगा, बचपन में माँ से आलू-प्याज रखने वाली टोकरी माँग कर ,पापा से उसमें सुतली बंधवाती थी । एक लकड़ी की सहायता से उसे खड़ा करते, उसके नीचे चावल के दाने बिखेर कर, मैं पापा के साथ सुतली पकड़ कर तुम्हारे इंतज़ार में छिप कर बैठ जाती थी। तुम आती और चावल खा कर फुर्र से उड़ जाती, और मैं देखने के चक्कर में सुतली खींचना ही भूल जाती थी। माँ अलग डाँटती कि खाना छोड़ कर चिड़िया के चक्कर में लगे हो।


होली स्पेशल - होली की ठिठोली


जल्दी से कर लीजिये हंसने का अभ्यास
इस बार की होली तो होगी खासमखास 

दाँतन बीच दबाइए लौंग इलायची सौंफ 
बत्तीसी जब दिखे तो मुँह से आये न बास