मेरे पिता रमाकांत सिनारी पुर्तगाल से गोवा की मुक्ति के आंदोलन से जुड़े थे। पिता की स्वतंत्रता सेनानी के रूप में पहचान ने ही मुझे देश सेवा के लिए प्रेरित किया। लेकिन देश की पहली महिला कमांडो टेªनर बनने का मेरा सफर इतना आसान नहीं था। मेरे सपने को पहली सीढ़ी मुझे 16 साल की उम्र में मिली, जब मैं डाॅ. दीपक राव से मिली। दीपक से मार्शल आर्ट सीखते-सीखते मैंने उन्हें ही अपना जीवन साथी बनाने का फैसला किया।
मैंने खुद भी पारंपरिक चिकित्सा की पढ़ाई की है। हम दोनों की जिंदगी का एक ही मकसद था। मार्शल आर्ट की कला के माध्यम से देश की सेवा ही हमारा लक्ष्य था। इसी को ध्यान में रखते हुए 1996 में मेरे पति ने सेना, नौसेना, बीएसजी और एनएसजी प्रमुखों से संपर्क किया। वे हमारे समर्पण से प्रभावित हुए, और इस तरह हमारा असली सफर शुरू हुआ।

हमने उसके बाद 20 सालों तक लगभग सभी भारतीय सशस्त्र बलों को बिना किसी शुल्क के प्रशिक्षण दिया। हमें अपनी शादी के शुरूआती वर्षों में कई वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। मैं दुनिया के उन लोगों में शामिल हूं, जो एक विशिष्ट मार्शल आर्ट ‘जीत कुने डो’ का प्रशिक्षण देने के लिए अधिकृत हैं। खात बात यह है कि मैंने गै्रडमास्टर रिचर्ड बुस्तिलो से प्रशिक्षण लिया है, जो ब्रूस ली के स्टूडेंट थे। शायद इसी प्रशिक्षण का परिणाम है कि मैं आज 50 गज दूर खड़े व्यक्ति के सिर पर रखे सेब निशाना लगा सकती हूं और अपने सिर को लक्ष्य बनाकर आ रही गोली की मार से आसानी से बच सकती हूं।
मेरी अब तक की एक बड़ी उपलब्धि यह है कि हमने करीब से लड़ी जाने वाली लड़ाइयों के लिए एक विशिष्ट तरीका ईजाद किया है। ‘सीक्यूबी’ यानी क्लोज क्वाटर बैटल नामक इस तरीके को मैंने खासतौर पर भारतीय सेना के लिए बनाया है। 2009 में ‘गरूड़’ कमांड़ो को प्रशिक्षण करने के बाद वायु सेना के चीफ ने आधिकारिक आईएएफ पैरा जंप कोर्स के लिए मुझे आमंत्रित किया था।
एक एंडवांस्ड कमांडो काॅम्बैट सिस्टम के बारे में शोध करने के बाद हम पति-पत्नी ने शूटिंग के तरीके का भी ईजाद किया, जिसका नाम पेड़ा- ‘राव सिस्टम आॅफ रिफ्लेक्स फायर’। कम दूरी की लड़ाई में इसे आजमाया जा सकता है, क्योंकि ऐसी शूटिंग में सटीक उद्देश्य के लिए बहुत कम समय लगता है, जबकि परंपरागत तरीकों से लंबी दूरी से लड़ा जा सकता है। आधुनिक युद्ध में इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए हमने ‘राव सिस्टम आॅफ रिफ्लेक्स फायर’ तैयार किया है।
मैंने भारतीय बलों को प्रशिक्षण देने और प्रशिक्षण पुस्तकें प्रकाशित करने के लक्ष्य के साथ ‘द अनआम्र्ड एंड कमांडो काॅम्बैंट अकादमी’ (यूसीसीए) की स्थापना भी की है। कभी कभार कुछ लोगों को एक महिला से टेªनिंग लेना असहज लगा, लेकिन बाद में उन्हें मेरी सिखाने की क्षमता पर भरोसा करना पड़ा। एक बार सिर में चोट लगने की वजह से कुछ समय के लिए अपनी याददाश्त भी खो चुकी हूं। काम की वजह से मैं अपने पिता के अंतिम संस्कार में भी भाग नहीं ले सकी। अपने काम के कारण गर्भधारण मेरे लिए असंभव था, इसलिए मैंने अपने पति की रजामंदी से एक लड़की को गोद लिया। मैंने करीब आधा दर्जन किताबें या तो लिखी है या तो उसे लिखने में मदद की है। मेरी किताब ‘एन्साइक्लोपीडिया आॅफ क्लोज काॅम्बैट आॅप्स’ दुनिया की पहली सीक्यूबी टेªनिंग की एन्साइक्लोपीडिया है। मेरी सारी किताबें विश्व भर के पुस्तकालयों में उपलब्ध है। मैंने फिल्म, ‘हाथापाई’ में अभिनय भी किया है।

साभार- अमर उजाला
विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित



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atoot bandhan

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