धन उपार्जन और आपका विवेक - सोंच समझ कर खर्च करें

पंकज“प्रखर” पिछले दिनों अमीरी को इज्जत का माध्यम माना जाता रहा है।  इज्जत पाना हर मनुष्य की स्वाभाविक इच्छा है। इसलिये प्रचलित...





पंकज“प्रखर”
पिछले दिनों अमीरी को इज्जत का माध्यम माना जाता रहा है। इज्जत पाना हर मनुष्य की स्वाभाविक इच्छा है। इसलिये प्रचलित मान्यताओं के अनुसार हर मनुष्य अमीरी का इच्छुक रहता है, ताकि उसे दूसरे लोग बड़ा आदमी समझें और इज्जत करें। अमीरी सीधे रास्ते नहीं आ सकती। उसके लिए टेड़े रास्ते अपनाने पड़ते हैं। हर समाज और देश की अर्थ व्यवस्था एक स्तर होता है। उत्पादन, श्रम और क्षमता के आधार पर दौलत बढ़ती है। देश में वैसे साधन न हों तो सर्वसाधारण के गुजारे भर के लिए ही मिल सकता है। अपने देश की स्थिति आज ऐसी ही है, जिसमें किसी प्रकार निर्वाह चलता रहे तो पर्याप्त है। औसत देशवासी की परिस्थिति से अपने को मिलाकर काम चलाऊ आजीविका से सन्तोष करना चाहिये। हम सब एक तरह का जीवन जीते हैं और ईर्ष्या, असन्तोष का अवसर नहीं आने देते इतना ही सोचना पर्याप्त है।
अमीरी की ललक पैदा करना सीधा मार्ग छोड़कर टेढ़ा अपनाने का कदम बढ़ाना है। पिछले दिनों अनैतिक मार्ग अपनाने वाले-अमीरों इकट्ठी कर लेने वाले इज्जत आबरू वाले बड़े आदमी माने जाते रहे होंगे। पर अब वे दिन लद चुके। अब समझदारी बढ़ रही है। दौलत अब बेइज्जती की निशानी बनती चली जा रही है। लोग सोचते हैं, यह आधे मार्ग अपनाने वाला आदमी है। यदि सीधे मार्ग से कमाता है तो भी ईमानदारी का लोभ है कि देश-वासियों ने औसत वर्ग की तरह जिये और बचत को लोक मंगल के लिए लौटा दे। यदि ऐसा नहीं किया जाता, बढ़ी हुई कमाई को ऐयाशों में बड़प्पन के अहंकारी प्रदर्शन में खर्च किया जाता है अथवा बेटे-पोतों के लिए जोड़ा जमा किया जाता है तो ऐसा कर्तव्य विचारशीलता की कसौटी पर अवांछनीय ही माना जाएगा अमीरी अब निस्सन्देह एवं निष्ठुर वर्ग माना जाएगा हमें सन्देह है कि अमीरी अब पचास वर्ष भी जीवित रह सकेगी। विवेकशीलता उसे छोड़ने के लिए बाध्य करेंगी अन्यथा कानून विद्रोह उसका अन्त कर देगा।

अमीरी इकट्ठी तो कोई बिरले ही कर पाते हैं पर उसकी नकल बनाने वाले विदूषक हर जगह भरे पड़े हैं। चूँकि अमीरी इज्जत का प्रतीक बनी हुई थी, इसलिए इज्जत पाने के लिये अमीरी इकट्ठी करनी चाहिये और यदि वह न मिले तो कम से कम उसका ढोंग ही बना लेना चाहिये, यह बात नासमझ वर्ग में धर कर गई है और वह इस नकलची मन पर बेतरह अपने आपको बर्बाद करता और अर्थ संकट के दल-दल में धँसता चला जाता है। लोग सोचते हैं कि हम अपना ठाठ-बाठ अमीरों जैसा बना लें तो दूसरे यह समझेंगे कि यह अमीर और बड़ा आदमी है और चटपट उसकी इज्जत करने लगेंगे, इसी नासमझी के शिकार असंख्य ऐसे व्यक्ति, जिनकी आर्थिक स्थिति सामान्य जीवन यापन के भी उपयुक्त नहीं, अमीरी का ठाठ-बाठ बनायें फिरते हैं। कपड़े जेवर, फर्नीचर, सुसज्जा आदि को प्रदर्शनात्मक बनाने में इतना खर्च करते रहते हैं कि उनकी आर्थिक कमर ही टूट जाती है। दोस्तों के सामने अपनी अमीरी का पाखण्ड प्रदर्शित करने के लिए पान-सिगरेट सिनेमा, होटल आदि के खर्च बढ़ाते हैं और उसमें उन्हें भी शामिल करते हैं ताकि उन पर अपनी अमीरी का रौब बैठ जाय और इज्जत मिलने लगे। कैसी झाड़ी समझ है यह और कैसा फूहड़ तरीका है। कोई समझदार व्यक्ति उस नासमझी पर हँस ही सकता है। पर असंख्य लोग इसी बहम में फँसे फिजूल खर्ची और फैशन में पैसा उड़ाते रहते हैं और अपनी आर्थिक स्थिरता को खोखली करते चलते हैं।
मामूली आमदनी के लोग जब अपनी स्त्रियों के बक्से कीमती साड़ियों से भरते हैं और जेवरों में धन गँवाते हैं, तब उसके पीछे यही ओछापन काम करता है कि ऐसी सजी-धजी हमारी औरत को देखकर हमें अमीर मानेंगे। पुरुष साड़ी, जेवर तो नहीं पहनते पर सूट-बूट घड़ी, छड़ी उनकी भी कीमती होती है, ताकि मित्रों के आगे बढ़-चढ़कर शेखी मार सकें। विवाह-शादियों के वक्त यह ओछापन हद दर्जे तक पहुँच जाता है। स्त्रियाँ ऐसे कपड़े लटकाये फिरती हैं, जैसे सिनेमा, नाटक के नट लोग पहनते हैं। बारातियों का औघड़पन देखते ही बनता है। ऐसा ठाठ-बाठ बनाते हैं मानों कोई बड़े मिल मालिक, जागीरदार अफसर अथवा सेठ-साहूकार हों। जानने वाले जब जानते हैं कि जरा-सी आमदनी वाला यह ढोंग बनाये फिरता है तो हर कोई असलियत समझ जाता है और दो ही अनुमान लगाता है या तो यह कर्जदार रहता होगा या बेईमानी से कमाता होगा। यह दोनों ही बातें बेइज्जती की हैं। सोचा यह गया था कि ठाठ-बाठ वाले बाबू को गैर सरकारी नौकरी नहीं मिलती। मालिक जानता है, इतना वेतन तो ठाठ-बाठ में ही उड़ जाएगा, फिर बच्चों को खिलाने के लिए इस हमारे यहाँ चोरी का जाल फैलाना पड़ेगा।
यही बात स्त्रियाँ के सम्बन्ध में है। बहुत फैशन बनाने वाली महिलायें दो छाप छोड़कर जाती हैं या तो इनके घर में अनुचित पैसा आता है अथवा इनका चरित्र एवं स्वभाव ओछा है। यह दोनों ही लाँछन किसी कुलीन महिला की इज्जत बढ़ाते नहीं घटाते हैं।घर परिवार में यह सज-धज की प्रवृत्ति मनोमालिन्य पैदा करती है। अपव्यय हर किसी को बुरा लगता है। जो पैसा परिवार के शिक्षा, चिकित्सा, व्यवसाय, विनोद, पौष्टिक आहार आदि में लग सकता था, उसे फैशन में खर्च किया जाने लगे तो प्रत्यक्षतः परिवार के अन्य सदस्यों की सुख का अपहरण है। ठाठ-बाठ की कोई बाहर से प्रशंसा कर दे किसी को कुछ समय के लिये भ्रम में डाल दे यह हो सकता है पर साथियों में घृणा और ईर्ष्या ही पैदा होगी, वहाँ इज्जत बढ़ेगी नहीं घटेगी। बढ़े चढ़े खर्चों की पूर्ति के लिए अवांछनीय मार्ग ही अपनाने पड़ेंगे। कर्जदार और निष्ठुर जीवन जीना पड़ेगा। आमदनी सही भी है तो भी उसे व्यक्तिगत व्यय में सामाजिक स्तर के अनुरूप ही खर्च करना चाहिये। अधिक खर्च लोक-मुगल का हक मारना है।
अच्छा हो हम समझदारी और सज्जनता से भरा हुआ, सादगी का जीवन जिये अपनी बाह्य सुसज्जा वाले खर्च को तुरन्त घटा दें और उस बचत से अपनी-अपने परिवार की तथा समाज की वास्तविक आवश्यकताओं को पूरा करने में लगाने लगें। सादगी सज्जनता का प्रतिनिधित्व करती है। जिसका देश विन्यास सादगी पूर्ण है, उसे अधिक प्रामाणिक एवं विश्वस्त माना जा सकता है। जो जितना ही उद्दीपन दिखायेगा, समझदारों की दृष्टि में उतना ही इज्जत गिरा लेगा। इसलिये उचित यही है कि हम अपने वस्त्र सादा रखें, उनकी सिलाई भले मानसी जैसी करायें, जेवर न झनकारें, नाखून और होंठ न रंगे, बालों को इस तरह न सजाये, जिससे दूसरों को दिखाने का उपक्रम करना पड़े। नर-नारी के बीच मानसिक व्यभिचार का बहुत कुछ सृजन इस फैशन-परस्ती में होता है।
सादगी-शालीनता और सज्जनता का सृजन करती है। उसके पीछे गम्भीरता और प्रामाणिकता, विवेक शीलता और बौद्धिक परिपक्वता झाँकती है। वस्तुतः इसी में इज्जत के सूत्र सन्निहित हैं। सादगी घोषणा करती है कि यह व्यक्ति दूसरों को आकर्षित या प्रभावित करने की चालबाजी नहीं, अपनी वास्तविकता विदित करने में सन्तुष्ट है। यही ईमानदारी और सच्चाई की राह है। यह आमदनी बढ़ाने का भी एक तरीका है फिजूलखर्ची विदित करने में संतुष्ट है। यही ईमानदारी और सच्चाई की राह है। यह आमदनी बढ़ाने का भी एक तरीका है। फिजूलखर्ची रोकना अर्थात् आमदनी बढ़ाना। विवाह-शादियाँ उत्सव, आयोजन, प्रीति-भोजों और अमन-चलनों में अपना पैसा बुरी तरह कटता है, उसके पीछे यही ओछी प्रवृत्ति काम करती है कि जितना अधिक पैसा खर्च होगा, उतना ही अमीरी का रौब जमेगा और उसी हिसाब में इज्जत बढ़ेगी। समय आ गया कि इस बाल-बुद्धि को छोड़ कर प्रौढ़ता का दृष्टिकोण अपनाया जाय। हम गरीब देश के निवासी हैं। सर्वसाधारण को सामान्य सुसज्जा और परिमित खर्च के काम चलाना पड़ता है। अपनी वस्तुस्थिति यही है। अपने करोड़ों भाई-बहिनों की पंक्ति में ही हमें खड़े होना चाहिये और उन्हीं की तरह रहन-सहन का तरीका अपनाना चाहिये। इस समझदारी में ही इज्जत पाने के सूत्र सन्निहित हैं। फैशन परस्ती और अपव्यय की राह अपनाकर हम आर्थिक संकट को तो निमन्त्रित करते ही हैं।
स्वच्छता के साथ जुड़ी हुई सादगी अपने आपमें एक उत्कृष्ट स्तर का फैशन है। उसमें गरीबी का नहीं महानताका पुट है। सादा वेश भूषा और सुसज्जा वाला व्यक्ति अपनी स्वतन्त्र प्रतिभा और स्वतन्त्र चिन्तन का परिचय देता है। भेड़चाल को तोड़कर जो विवेकशीलता का रास्ता अपनाता है, वह बहादुर है। अपनी संस्कृति और परम्परा के अनुरूप यदि हमारा आचरण है तो कोई भी परखने वाला हमें दूरदर्शी, विवेकशील एवं दृढ़ चरित्र ही कहेगा। सादगी हमें फिजूल-खर्ची से बचाकर आर्थिक स्थिरता में ही समर्थ नहीं करती वरन् हमारी चारित्रिक दृढ़ता भी प्रमाणित करती है। अकारण उत्पन्न होने वाली ईर्ष्या और लाँछना से बचने का भी यही सल मार्ग है।


COMMENTS

Name

#Metoo 15 अगस्त 26जनवरी agla kadam anger astrology atoot bandhan atoot bandhan cover page atoot bandhan editorial biography BIRTH cancer children issues christmas clingy behaviour competition Creativity dating tips decision deepawali special E.book emoji emotional management examination series family and relationship issues father's day fb feeling lost friendship day general article ghost Go Grey green GST guru happy new year health hindi divas hindi poetry hindi stories id immortal personalities inferiority complex interview janmashtami karm karvachauth karwaan law of karma literary articles louis braille love memoirs mental health mind set mising tile mother's day motivational quotes motivational stories nanha guru negative new peace personality development pollution positive positive thinking power of words pragnency raksha bandhan rape Regret religion reviews Riya speaks sarahah app satire science fiction self satisfaction senior citizen issues short stories social articles SOULMATE spiritual articles story stress eating success sucesses sucesses stories swantantrta divas tension to-do-list train tree valentine day vandana bajpai warren buffett women issues year resolution अकेलापन अक्षत शुक्ला अक्षय तृतीया अगला कदम अजय कुमार अजय कुमार श्रीवास्तव अजय कुमार श्रीवास्तव (दीपू) अजय चंद्रवंशी अंजू शर्मा अटल बिहारी बाजपेयी अटूट बंधन अटूट बंधन अंक -१० अनुक्रमाणिका अटूट बंधन कवर पेज अटूट बंधन विशिष्ट रत्न सम्मान अटूट बंधन सम्पादकीय अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस अंतर्राष्ट्रीय बिटिया दिवस अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस अनन्य गौड़ अनामिका अनामिका चक्रवर्ती अनुपमा सरकार अनूप शुक्ला अन्तर करवड़े अन्तराष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस अन्तराष्ट्रीय हास्य दिवस अन्तर्राष्ट्रीय खुशी दिवस अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) अन्नदा पाटनी अपर्णा परवीन कुमार अपर्णा साह अप्रैल फूल अमृता प्रीतम की जीवनी अम्बरीष त्रिपाठी अरविन्द कुमार खेड़े अर्चना नायडु अर्चना बाजपेयी अर्जुन सिंह अर्थ डे अविनीश त्रिपाठी अशोक कुमार अशोक के परुथी आत्महत्या आध्यात्मिक लेख आभा खरे आभा दुबे आयुष झा "आस्तीक " आराधना सिंह आलोक कुमार सातपुते आशा पाण्डेय ओझा आसाढ़ पूर्णिमा इंजी .आशा शर्मा इंतजार इंदु सिंह इमरान रिजवी इमोशनल ट्रिगर्स ई बुक ईद उत्पल शर्मा "पार्थ" उपवास उपासना सियाग उमा अग्रवाल उम्मीदें उषा अवस्थी एकता शारदा एम्पैथी ऐब्युसिव रिश्ते ओपरा विनफ्रे ओमकार मणि त्रिपाठी ओशो औरत कंगना रानौत कंचन पाठक कंचन लता जायसवाल कबीर कमलेश मिश्रा करवाचौथ कर्म कर्मका सिद्धांत कल्पना मिश्रा बाजपेयी कवि मनोज कुमार कविता बिंदल कविता विकास कहानियाँ कहानी कहानी संग्रह कारवाँ फिल्म समीक्षा कार्ल मार्क्स काव्य जगत काव्यजगत किरण आर्य किरण सिंह किस्सा टाइम्स कु. शान्ति पाल ‘प्रीति’ कुमार गौरव कुसुम पालीवाल कृष्ण कुमार यादव कैंसर क्रिसमस क्लास टेंथ क्षितिज संस्था गंगा ग़ज़ल गणतंत्र दिवस गणेश चतुर्थी गहरा दुःख गाँधी जयंती गाय ग़ालिब गिरीश चन्द्र पाण्डेय गीता गीतांजलि एक्सप्रेस गुरु गुरु दक्षिणा गुरु पूर्णिमा गुस्सा चंद्रेश कुमार छतलानी चन्द्र प्रभा सूद चन्द्र मौली पाण्डेय चरित्रहीन चार्ली चैपलिन चिट्ठी चीन चेतन भगत चॉकलेट केक छठ छाया सिंह जन्माष्टमी जय कन्हैया लाल की जरा सोचिये जल जिनपिंग जी एस टी जीवन जीवनी जे के रोलिंग जैन ज्योति पाठक ज्योतिष झगडे टफ टाइम टीचर टीचर्स डे टेंशन ट्रेन ठुमरी समाज्ञ्री गिरजा देवी डाॅ.भारती गाँधी डिम्पल गौड़ 'अनन्या ' डिम्पल गौड़ 'अनन्या' डेजी नेहरा डेटिंग टिप्स डॉ . आशुतोष शुक्ला डॉ .जगदीश गाँधी डॉ .संगीता गाँधी डॉ अब्दुल कलाम डॉ अलका अग्रवाल डॉ जगदीश गाँधी डॉ भारती वर्मा बौड़ाई डॉ मधु त्रिवेदी डॉ रमा द्विवेदी डॉ लक्ष्मी बाजपेयी डॉ संगीता गांधी डॉ. भारती गांधी डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई डॉ.अलका अग्रवाल डॉ.जगदीश गाँधी डॉली अग्रवाल ढिंगली तरसेम कौर तीज तीन तलाक तृप्ति वर्मा तोहफा त्यौहार दशहरा दहेज़ प्रथा दीपक मित्तल दीपक शर्मा दीपावली स्पेशल दीपिका कुमारी दीप्ति दीपेन्द्र कपूर दीप्ति दुबे दीप्ति निगम दुर्गा अष्टमी देवशयनी एकादशी देश -दुनिया देश गान धर्म नंदा पाण्डेय नन्हा गुरु नया साल नव वर्ष नवरात्र नवीन मणि त्रिपाठी नागेश्वरी राव नारी नितिन मेनारिया निधि जैन निबंध निशा कुलश्रेष्ठ नीता मेहरोत्रा नीलम गुप्ता नेहा अग्रवाल नेहा नाहटा नेहा बाजपेयी न्यू इयर रेसोल्युशन पंकज प्रखर पंखुरी सिन्हा पंडित दीनदयाल उपाध्याय पतंग पद्मा मनुज परिचर्चा -१ परिचर्चा -१ कवितायेँ पर्यावरण पर्व त्यौहार पारदर्शिता पार्थ शर्मा पूनम डोंगरा पूनम पाठक प्रतिभा पाण्डेय प्रतियोगिता प्रथम पोस्ट प्रदीप कुमार सिंह ‘पाल’ प्रमिला श्री तिवारी प्रिया मिश्रा प्रिंसेस डायना प्रेम कवितायेँ प्रेम रंजन अनिमेष प्रेरक कथाएँ प्रेरक प्रसंग प्रेरक विचार फादर्स डे फीलिंग लॉस्ट फुंसियाँ फेसबुक फेसबुक की दोस्ती फॉरगिवनेस फ्रेडरिक नीत्से फ्रेंडशिप डे बच्चों से बातचीत बहादुर शाह जफ़र बहु बाइबल बाबु लाल बाबुल बाबू लाल बाबूलाल बाल कहानी बाल जगत बाल दिवस बाल मनो विज्ञान बाल-मन बिल गेट्स बीनू भटनागर बुजुर्ग बुद्ध पूर्णिमा बेगम अख्तर बेटी ब्रेल लिपि ब्लू व्हेल ब्लैक डॉट भगवन बुद्ध भगवान् भाई - बहन भाई बहन भाग्य भावना तिवारी भोले बाबा मई दिवस मदर्स डे मनीषा जैन मम्मी महात्मा गाँधी महान व्यक्तित्व महाशिवरात्रि महेंद्र सिंह माँ माँ उषा लाल माँ सरस्वती माता - पिता माता -पिता मानव शरीर माया एंजिलो माया मृग मालिनी वर्मा मित्रता मित्रता दिवस मित्रता दिवस पर विशेष लेख मीना कुमारी मीना पाठक मीना पाण्डेय मुकेश कुमार ऋषि वर्मा मुंशी प्रेमचन्द्र . कहानी मृत्यु मृदुल मेंटल हेल्थ मैत्रेयी पुष्पा मोनिका शर्मा यकीन रक्षा बंधन रंगनाथ दुबे रंगनाथ द्विवेदी रचना व्यास रजनी भारद्वाज रमा द्विवेदी रश्मि प्रभा रश्मि बंसल रश्मि रविजा रश्मि सिन्हा राजगोपाल सिंह वर्मा राजगोपाल सिंह वर्मा की कवितायें राजा सिंह राज़ी -फिल्म समीक्षा राधा कृष्ण "अमितेन्द्र " राधा क्षत्रिय राधा शर्मा राम रितु गुलाटी रिया स्पीक्स रिश्ते रिश्ते -नाते रिश्ते नाते रीता गुप्ता रूचि भल्ला रूपलाल बेदिया रेप रेल रोचिका शर्मा लघु कथाएँ लता मंगेशकर लप्रेक लली लिव इन रिलेशन लुइ ब्रेल लेख लेबर डे वंदना वंदना गुप्ता वंदना दुबे वंदना बाजपेयी वसंत पंचमी विजयारतनम विनय कुमार सिंह विनीता शुक्ला विनोद खनगवाल विभा रानी श्रीवास्तव विशेष दिवस विश्व गौरैया दिवस विश्व जल संरक्षण दिवस विश्व पर्यावरण दिवस विश्व हास्य दिवस विश्वजीत 'सपन ' वीणा वत्सल वीरू सोनकर वृद्धजन विमर्श वैलेंटाइन डे वॉरेन बफे व्यक्तिव विकास व्यंग शब्द शरद पूर्णिमा शशि बंसल शशि श्रीवास्तव शहीद दिवस शांति पुरोहित शादी शान्ति पाल शान्ति पुरोहित नोखा शायरी शिक्षक दिवस शिखा सिंह शिव शिवलिंग शिवा पुत्र शिवानी शिवानी कोहली शिवानी जैन शर्मा श्राद्ध पक्ष श्रीदेवी श्रीमती एम डी त्रिपाठी सकारात्मक चिंतन सकारात्मक सोंच सक्सेस स्टोरीज संगम वर्मा संगीता पाण्डेय संगीता सिंह "भावना " संजना तिवारी संजय कुमार अविनाश संजय कुमार गिरि संजय वर्मा संजय वर्मा "दृष्टी " संजीत शुक्ला सतीश राठी सत्या शर्मा 'कीर्ति ' संदीप माहेश्वरी सद्विचार संध्या तिवारी सन्यास सपना मांगलिक सपने सफलता सफाई समीक्षा सरबानी सेनगुप्ता सराह सरिता जैन सविता मिश्रा संवेदनशीलता संस्मरण साक्षात्कार साड़ी साधना सिंह साधु सामाजिक लेख सावन का पहला सोमवार साहित्यिक लेख सिनीवाली शर्मा सीताराम गुप्ता सीमा असीम सीमा सिंह सुकून सुधा गोस्वामी सुधीर द्विवेदी सुनीता त्यागी सुबोध मिश्रा सुमित्रा गुप्ता सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा सुशांत सुप्रिय सुशील यादव सुहागरात सूफी रूमी सूर्य सूर्योदय सेंटा क्लॉज सेल्फ केयर सेल्फी सोनी पाण्डेय सोलमेट स्ट्रेस ईटिंग डिसऑर्डर स्त्री देह और बाजारवाद स्त्री लेखन स्त्री विमर्श स्मिता दात्ये स्मिता शुक्ला स्वतंत्रता दिवस स्वामी विवेकानंद स्वास्थ्य जगत स्वेता मिश्रा हरकीरत 'हीर' हलचल आस -पास हलचल आसपास हामिद हास्य योग हिंदी दिवस हीन भावना हेडी लेमार हेल्थ होली होली की ठिठोली
false
ltr
item
अटूट बंधन : जो अटूट बंधन में बांधे आपके रिश्तों को : धन उपार्जन और आपका विवेक - सोंच समझ कर खर्च करें
धन उपार्जन और आपका विवेक - सोंच समझ कर खर्च करें
https://2.bp.blogspot.com/-9Bd-3pSvt00/WT1oUxVMN3I/AAAAAAAAEtE/p_Z76tph3yklAu4_O_4GnLD4bLbNkkd3gCLcB/s640/2016_4image_10_45_4546854841.1-ll-600x250.jpg
https://2.bp.blogspot.com/-9Bd-3pSvt00/WT1oUxVMN3I/AAAAAAAAEtE/p_Z76tph3yklAu4_O_4GnLD4bLbNkkd3gCLcB/s72-c/2016_4image_10_45_4546854841.1-ll-600x250.jpg
अटूट बंधन : जो अटूट बंधन में बांधे आपके रिश्तों को
http://www.atootbandhann.com/2017/06/blog-post_29.html
http://www.atootbandhann.com/
http://www.atootbandhann.com/
http://www.atootbandhann.com/2017/06/blog-post_29.html
true
1089704805750007414
UTF-8
Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy