खिलो बच्चो , की मेरे सपनों की कैद से आज़ाद हो तुम्हारे सपने

ये जिंदगी हमेशा नहीं रहने वाली है | वो क्षण जो अभी आपके हाथ में सितारे की तरह चमक रहा है ,ओस की बूँद की तरह पिघल जाने वाला है | इसल...



ये जिंदगी हमेशा नहीं रहने वाली है | वो क्षण जो अभी आपके हाथ में सितारे की तरह चमक रहा है ,ओस की बूँद की तरह पिघल जाने वाला है | इसलिए वही काम, वही चुने जिसे आप सच में प्यार करते हों - नीना सिमोन 

                       जीवनसाथी  साथ केवल वो व्यक्ति ही नहीं होता जिसके साथ हम सात फेरे ले कर जीवन भर साथ निभाने की कसमें खाते हैं | जीवन साथी वो काम भी होता है जिससे न सिर्फ हमारा घर चलता है बल्कि उसे करने में हमें आनंद भी आता हियो और संतोष भी मिलता है | परन्तु ऐसा हमेशा नहीं हो पाता क्योंकि माँ - पिता ने अपने बच्चों के लिए सपने देखे होते हैं और वो उसे उसी दिशा में मोड़ना चाहते हैं | कई बार ये दवाब इतना ज्यादा होता है की नन्ही
आँखें अपने सपने आँखों में ही कैद करे रहती हैं उन्हें बाहर निकालने की हिम्मत भी नहीं कर पाती हैं | ये सपने उनकी आँखों में पानी बन  तैरते रहते हैं और डबडबायी आँखों से उनका जीवन पथ धुंधला करते रहते हैं | क्या ये जरूरी नहीं की पेरेंट्स अपने बच्चों का दर्द समझे और उन्हें उनके सपने पूरा करने में सहयोग दें | अगर ऐसा हो जाता है तो दोनों का ही जीवन बहुत खुशनुमा बहुत आसान हो जाता है | ऐसी ही हिम्मत प्रिया ने दिखाई | जिसने अपनी बेटी को वो पथ चुनने दिया जो उनके लिए बिलकुल अनजान था | उससे भी बड़ी बात ये थी की प्रिया के सपनों के पथ पर कुछ साल चल चुकी थी | अब  अपने सपने पाने के लिए उसे उतना ही वापस लौटना था | ये फैसला दोनों के लिए आसान नहीं था पर उसको लेते ही दोनों की जिंदगी आसान बन गयी | प्रिया अपनी कहानी कुछ इस तरह से सुनाती हैं ....



जब मोटिवेशन , डीमोटिवेट करे
कई सालपहले की बात है जब प्रिया के भाई की शादी थी | उसने बड़े मन से तैयारी की थी | एक - एक कपडा मैचिंग ज्वेलरी खरीदने के लिए उसने घंटों कड़ी धुप भरे दिन बाज़ार में बिताये थे | पर सबसे ज्यादा उत्साहित थी वो उस लहंगे के लिए जो उसने अपनी ६ साल की बेटी पिंकी  के लिए खरीदा था | मेजेंटा कलर का | जिसमें उतनी ही करीने हुआ जरी का काम व् टाँके गए मोती , मानिक | उसी से मैचिंग चूड़ियाँ , हेयर क्लिप व् गले व् कान के जेवर यहाँ तक की मैचिंग सैंडिल भी खरीद कर लायी थी | वो चाहती थी की मामा की शादी में उसकी परी सबसे अलग लगे | जिसने भी वो लहंगा देखा | तारीफों के पुल बाँध देता तो  प्रिया की ख़ुशी कई गुना बढ़ जाती | शादी का दिन भी आया | निक्ररौसी से एक घंटा पहले पिंकी लहंगा पहनते कर तैयार हो गयी | लहंगा पहनते ही पिंकी ने शिकायत की माँ ये तो बहुत भारी है , चुभ रहा है | प्रिया  ने उसकी बात काटते हुए कहा ,” चुप पगली कितनी प्यारी लग रही है , नज़र न लग जाए | उपस्तिथित सभी रिश्तेदार भी कहने लगे ,” वाह पिंकी तुम तो परी लग रही हो |एक क्षण के लिए तो पिंकी खुश हुई | फिर अगले ही क्षण बोलने लगी , माँ लहंगा बहुत चुभ रहा है भारी है | प्रिया  फिर पिंकी को समझा कर दूसरे कामों में लग गयी | पर पिंकी की शिकायत बदस्तूर जारी रही | बरात प्रस्थान के समय तक तो उसने रोना शुरू कर दिया | वो प्रिया  का हाथ पकड़ कर बोली माँ मैं ठीक से चल नहीं पा रही हूँ मैं शादी क्या एन्जॉय करुँगी | प्रिया  को समझ नहीं आ रहा था वो क्या करे | अगर पिंकी लहंगा नहीं पहनेगी तो इतने सारे पैसे बर्बाद हो जायेंगे , जो उसने लहंगा खरीदने के लिए खर्च किये थे | फिर वो इस अवसर पर पहनने के लिए कोई दूसरा कपडा भी तो नहीं लायी है | नाक कट जायेगी | पर उससे पिंकी के आँसूं भी तो नहीं देखे जा रहे थे | अंतत : उसने निर्णय  लिया और पिंकी का लहंगा बदलवा कर साधारण सी फ्रॉक पहना दी | पिंकी माँ से चिपक गयी | प्रिया  भी मुस्कुरा कर बोली ,”जा पिंकी अपनी आज़ादी एन्जॉय कर “ फिर तो पूरी शादी में पिंकी छाई  रही | हर बात में बढ़ – चढ़ कर हिस्सा लिया | क्या डांस किया था उसने | सब उसी की तारीफ़ करते रहे |

 नाउम्मीद करती उम्मीदें
                                  बरसों बाद आज माँ बेटी उसी मोड़ पर खड़े थे | पिंकी मेडिकल सेकंड ईयर की स्टूडेंट है |उसको डॉक्टर बनाने का सपना प्रिया  का ही था | पिंकी का मन तो रंगमंच में लगता था , फिर भी उसने माँ का मन रखने के लिए जम कर पढाई की और इंट्रेंस क्लीयर किया | कितनी वह वाही हुई थी प्रिया की | कितनी भाग्यशाली है | कितना त्याग किया होगा तभी बेटी एंट्रेंस क्लीयर कर पायी | प्रिया गर्व से फूली न समाती | परन्तु पिंकी ने इधर मेडिकल कॉलेज जाना शुरू किया उधर उसका रंगमंच से प्रेम उसे वापस बुलाने लगा | उसने माँ से  कहा भी पर प्रिया ने उसे समझा – बुझा कर वापस पढाई में लगा दिया | पिंकी थोड़े दिन तो शांत  रहती | फिर वापस उसका मन रंगमंच की तरफ दौड़ता | करते – करते दो साल पार हो गए | पिंकी थर्ड इयर में आ गयी | अब उसका मन पढ़ाई में बिलकुल नहीं लगने लगा | वो अवसाद में रहने लगी | प्रिया को भय बैठ गया | अगर इसने पढ़ाई छोड़ दी तो समाज को क्या मुँह दिखायेगी | सब चक – चक   करेंगे | फिर दो साल में पढाई में इतने पैसे भी तो लगे हैं उनका क्या होगा | वो तो पूरे के पूरे बर्बाद हो जायेंगे | पर बेटी का अवसाद से भरा चेहरा व् गिरती सेहत भी उससे नहीं देखी  जा रही थी | अंतत : उसने निर्णय लिया और एक कागज़ पर लिख कर पिंकी के सिरहाने रख दिया | उसने लिखा था , “ पिंकी , मैं जानती हूँ एक बार फिर मेरे पहनाये लहंगे का बोझ बहुत ज्यादा हो गया है | मैं जानती हूँ तुम तकलीफ में हो , तुमसे ठीक से चला भी नहीं जा रहा है | मैं तुम्हे एक बार फिर इसके बोझ से आज़ाद करती हूँ | जाओ अपनी मर्जी की फ्रॉक पहनो और लाइफ एन्जॉय करो |  पिंकी जब सो कर उठी तो उसकी निगाह कागज़ कर गयी | जिसे पढ़ते ही वो एकदम खुश हो गयी | आ कर प्रिया के गले से लग कर बोली ,” थैंक्स माँ , थैंक यू सोमच |
“ आज पिंकी रंगमंच की उभरती हुई कलाकार है | उसके कई शोज हो चुके हैं | उसे भविष्य से बहुत सी उम्मीदें है और वो अपनी लाइफ का एक – एक लम्हा एन्जॉय कर रही है |


जब लगे सब खत्म हो गया है  


अगर आप और आप के बच्चे भी ऐसे ही कठिन मोड़ से गुज़र रहे हैं और आप कोई निर्णय नहीं  ले पा रही हैं तो प्रिया जी की आप को सलाह है की ..
बच्चों के सपने ज्यादा महवपूर्ण हैं
                       हम सब अपने बच्चों के लिए बहुत सारे सपने देखते हैं | देखने भी चाहिए | परन्तु अगर हमारे सपने हमारे बच्चों के सपनों से टकराते हैं तो हमें अपने बच्चों के सपनों को तरजीह देनी चाहिए | क्योंकि हमारे बच्चे को उस काम के साथ जिंदगी गुजारनी है | हम अपनी जिन्दगी अपने या अपने माँ –पिता की मर्जी से गुज़र चुके हैं | हमें अपने से प्रश्न करना चाहिए की क्या हम इस लाइफ से खुश हैं | क्या अपने बारे में मेरी यही मर्जी थी | अगर उत्तर हां में मिलता है तो हमें अपने बच्चे को भी मौका देना चाहिए | अगर उत्तर न में मिलता है तो हमें पता होगा की हम खुश नहीं है | तो क्या हम अपने बच्चे के लिए भी ऐसी ही नाखुश जिंदगी की कल्पना कर रहे हैं \ मुझे यकीन है हर पेरेंट्स का उत्तर  न ही होगा | ये सच है की अगर बच्चा आधा रास्ता छोड़ कर पीछे लौटता है तो पासों का भारी नुक्सान होता है | पर यह नुक्सान बच्चों की ख़ुशी के आगे कुछ नहीं | आखिरकार हम पैसा कम और बचा उन्ही के लिए तो रहे हैं |
अगर आप अपने बच्चे को उसका बेस्ट वर्जन बनाना चाहते हैं
                      हम जो काम करते हैं | उसमें हमारे दिन का एक बड़ा हिस्सा जाता है | अगर हम उसमें खुश हैं तो हम जिंदगी में कुश रहेंगे | जिसके कारण हमारे आदर अन्य गुण खुद ही आ जाते हैं | क्योंकि सकारात्मकता अन्य गुणों को खींच लेती है | व् नकार्त्मकता क्रोध , घृणा , जलन आदि भावों को उत्पन्न करती है | स्वाभाव को चिडचिडा बनती है | अगर हम कहते हैं की हमारा बच्चा सकारात्मक हो खुश हो व् उसका बेस्ट वर्जन सामने आ सके तो हमें उसके मन की राह चुनने में सहयोग देना चाहिए |
लचीला होना ज्यादा फायदेमंद है  
                        जो डाल लचीली होती है वो आँधियों में भी टिकी रहती है जो द्रण होती है वो टूट जाती है | द्रनता एक अच्छा गुण है | पर जबरदस्ती कहीं टिके रहना सही नहीं है | आपको पसंद आ रहा हो या न आ रहा हो पर आपने एक बार फैसला ले लिया तो अब आप को उसे निभाना ही है | चाहे जिन्दगी अवसाद में ही क्यों न भर जाए | तो इसमें नुकसान किसका है | जाहिर है आपका और आप के बच्चे का | जिंदगी लक्ष्य बनाने और उसे प्राप्त करने का ही तो नाम है | हमारे ज़माने में नौकरी या काम पैसा कमाने का जरिया होते थे | और लक्ष्य होते थे , मकान , कार , जेवर आदि | जमाना बदलने के साथ मनपसंद काम भी लक्ष्य हो गया है |वो उसके बिना खुश नहीं रह पाते |  कई बच्चों को उनका लक्ष्य शुरू में ही मिल जाता है | या समझ आजाता है | कई हिट एंड ट्रायल से सीखते हैं | अगर बच्चे ने किसी काम में अपना मन लगाया , उसे काम पसंद नहीं आया | तो वो असफल नहीं है बस यह उस काम को बदले का इशारा भर है |
बढ़ता है आत्मविश्वास  
                जिंदगी इतनी अनसर्टेन है | पता नहीं कल क्या होने वाला है तो उसमें एक दो साल की अनसर्टेनटी  और उठायी जा सकती है | ये सच है की आगे कुछ अच्छा नहीं भी हो सकता है पर आपके बच्चे को ये विश्वास तो रहेगा की आपने उसे उसके सपनों की दिशा में छलांग लगाने का अवसर दिया | उस पर , उसके सपनों पर विश्वास किया | यकीन मानिए ये विश्वास  उसे जीवन में कुछ अच्छा पाने की दिशा में सहायक होगा | देखा जाए तो हर बच्चे में प्रतिभा है पर हर बच्चे में अपनी प्रतिभा पर विश्वास नहीं होता | अगर वो अनसर्टेनति की दिशा में आगे बढ़ने का निर्णय लेता है तो इसका मतलब है की उसे अपने पर विश्वास है | आपको बस उसके विश्वास पर विश्वास करना है |
अवांछित को ना कहना वांछित को हां कहना है
                                  ना कहना कठिन है पर ना कहते ही बहुत सारे दवाब हट जाते हैं |  तब आप उन चीजों को हां कह सकते हैं जो आपको पसंद हैं | मेडिकल में पढ़ते हुए पिंकी के पास बिलकुल समय नहीं था | वो अपनी पसंद की चीजों को यह कह कर टाल देती की समय जब होगा तब करुँगी | परन्तु जब उसका काम ही उसकी पसंद का हो गया तो उसे कभी ऊब ही नहीं होती | काम के बाद भी वो तरोताजा रहती है व् वो सब कर पाती है जो उसे करने में मजा आता है | चाहे वो स्विमिंग हो , पेंटिंग हो या सिंगिंग |
                             याद रखिये बच्चे एक फूल की तरह हैं वो तभी खिलेंगे जब उन्हें उनकी मर्जी की मिटटी मिलेगी |
रियल स्टोरी – प्रिया सिंह  , फरीदाबाद
लेखिका – वंदना बाजपेयी
                       


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#अगला_कदम के बारे में 
हमारा जीवन अनेकों प्रकार की तकलीफों से भरा हुआ है | जब कोई तकलीफ अचानक से आती है तो लगता है काश कोई हमें इस मुसीबत से उबार ले , काश कोई रास्ता दिखा दे | परिस्तिथियों से लड़ते हुए कुछ टूट जाते हैं और कुछ अपनी समस्याओं पर कुछ हद तक काबू पा लेते हैं और दूसरों के लिए पथ प्रदर्शक भी साबित होते हैं |
जीवन की रातों से गुज़र कर ही जाना जा सकता है की एक दिया जलना ही काफी होता है , जो रास्ता दिखाता है | बाकी सबको स्वयं परिस्तिथियों से लड़ना पड़ता है | बहुत समय से इसी दिशा में कुछ करने की योजना बन रही थी | उसी का मूर्त रूप लेकर आ रहा है
" अगला कदम "
जिसके अंतर्गत हमने कैरियर , रिश्ते , स्वास्थ्य , प्रियजन की मृत्यु , पैशन , अतीत में जीने आदि विभिन्न मुद्दों को उठाने का प्रयास कर रहे हैं | हर मंगलवार और शुक्रवार को इसकी कड़ी आप अटूट बंधन ब्लॉग पर पढ़ सकते हैं | हमें ख़ुशी है की इस फोरम में हमारे साथ अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ व् कॉपी राइटर जुड़े हैं |आशा है हमेशा की तरह आप का स्नेह व् आशीर्वाद हमें मिलेगा व् हम समस्याग्रस्त जीवन में दिया जला कर कुछ हद अँधेरा मिटाने के प्रयास में सफल होंगे



" बदलें विचार ,बदलें दुनिया " 

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“मतवाला” #NaturalSelfi 15 अगस्त २६ जनवरी अंजू शर्मा अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस अंतर्राष्ट्रीय बिटिया दिवस अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस अकेलापन अक्षय तृतीया अखिल राज शाह अगला कदम अजय कुमार अजय कुमार श्रीवास्तव अजय कुमार श्रीवास्तव (दीपू) अजय चंद्रवंशी अटूट बंधन अटूट बंधन अंक -१० अनुक्रमाणिका अटूट बंधन कवर पेज अटूट बंधन विशिष्ट रत्न सम्मान अटूट बंधन सम्पादकीय अनामिका अनामिका चक्रवर्ती अनुपमा सरकार अन्तर करवड़े अन्तराष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) अपर्णा परवीन कुमार अपर्णा साह अम्बरीष त्रिपाठी अरविन्द कुमार खेड़े अर्चना नायडु अर्चना बाजपेयी अर्जुन सिंह अर्थ डे अशोक कुमार अशोक के परुथी आत्महत्या आध्यात्मिक लेख आभा दुबे आयुष झा "आस्तीक " आलोक कुमार सातपुते आशा पाण्डेय ओझा आसाढ़ पूर्णिमा इंजी .आशा शर्मा इंदु सिंह इमरान रिजवी इमोशनल ट्रिगर्स ई बुक ईद उत्पल शर्मा "पार्थ" उपवास उपासना सियाग उमा अग्रवाल उम्मीदें उषा अवस्थी एकता शारदा एम्पैथी ओमकार मणि त्रिपाठी ओशो औरत कंगना रानौत कंचन पाठक कंचन लता जायसवाल कबीर करवाचौथ कर्म कल्पना मिश्रा बाजपेयी कवि मनोज कुमार कविता बिंदल कहानी कहानी संग्रह कार्ल मार्क्स काव्य जगत काव्यजगत किरण आर्य किरण सिंह कुमार गौरव कुसुम पालीवाल कृष्ण कुमार यादव कैंसर ग़ज़ल गणेश चतुर्थी गहरा दुःख गाँधी जयंती गिरीश चन्द्र पाण्डेय गीता गुरु गुरु दक्षिणा गुरु पूर्णिमा गुस्सा चंद्रेश कुमार छतलानी चन्द्र प्रभा सूद चन्द्र मौली पाण्डेय चीन चेतन भगत छठ जन्माष्टमी जय कन्हैया लाल की जिनपिंग जी एस टी जैन ज्योतिष झगडे टफ टाइम टीचर टीचर्स डे ठुमरी समाज्ञ्री गिरजा देवी डाॅ.भारती गाँधी डिम्पल गौड़ 'अनन्या ' डिम्पल गौड़ 'अनन्या' डॉ . आशुतोष शुक्ला डॉ .जगदीश गाँधी डॉ .संगीता गाँधी डॉ अब्दुल कलाम डॉ अलका अग्रवाल डॉ जगदीश गाँधी डॉ भारती वर्मा बौड़ाई डॉ मधु त्रिवेदी डॉ रमा द्विवेदी डॉ लक्ष्मी बाजपेयी डॉ संगीता गांधी डॉ. भारती गांधी डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई डॉ.जगदीश गाँधी डॉली अग्रवाल ढिंगली तरसेम कौर तीज तीन तलाक तृप्ति वर्मा त्यौहार दशहरा दीपावली स्पेशल दीपिका कुमारी दीप्ति दीपेन्द्र कपूर दुर्गा अष्टमी देवशयनी एकादशी देश -दुनिया देश भक्ति की कवितायें धर्म नंदा पाण्डेय नन्हा गुरु नवरात्र नवीन मणि त्रिपाठी नागेश्वरी राव नारी निधि जैन निबंध निशा कुलश्रेष्ठ नीता मेहरोत्रा नीलम गुप्ता नेहा अग्रवाल नेहा नाहटा नेहा बाजपेयी पंकज प्रखर पंखुरी सिन्हा पंडित दीनदयाल उपाध्याय परिचर्चा -१ परिचर्चा -१ कवितायेँ पर्व त्यौहार पारदर्शिता पार्थ शर्मा पूनम डोंगरा पूनम पाठक प्रतिभा पाण्डेय प्रदीप कुमार सिंह ‘पाल’ प्रिंसेस डायना प्रिया मिश्रा प्रेम कवितायेँ प्रेम रंजन अनिमेष प्रेरक कथाएँ प्रेरक प्रसंग प्रेरक विचार फादर्स डे फीलिंग लॉस्ट फुंसियाँ फेसबुक फॉरगिवनेस फ्रेंडशिप डे फ्रेडरिक नीत्से बहादुर शाह जफ़र बाल कहानी बाल जगत बाल दिवस बाल मनो विज्ञान बाल-मन बिल गेट्स बीनू भटनागर बुजुर्ग बेगम अख्तर ब्लू व्हेल ब्लॉगिंग भाई - 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अटूट बंधन : खिलो बच्चो , की मेरे सपनों की कैद से आज़ाद हो तुम्हारे सपने
खिलो बच्चो , की मेरे सपनों की कैद से आज़ाद हो तुम्हारे सपने
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