कहीं आपको फेसबुक का नशा तो नहीं ?

संजीत शुक्ला     (कानपुर )                         ऍफ़ बी  या फेस बुक  विधाता कि बनाई दुनियाँ के अन्दर एक और दुनियाँ ......... ...




संजीत शुक्ला 
 (कानपुर )
                        ऍफ़ बी  या फेस बुक  विधाता कि बनाई दुनियाँ के अन्दर एक और दुनियाँ ......... जीती जागती सजीव ...कहते है कभी भारतीय ऋषि परशुराम ने विधाता कि सृष्टि के के अन्दर एक और सृष्टि बनाने कि कोशिश कि थी .... नारियल  के रूप में |उन्होंने आखें ,मुंह बना कर चेहरे का आकार दे दिया था ....... पर किसी कारण वश उस काम को रोक दिया | पर युगों बाद मार्क जुकरबर्ग ने उसे पूरा कर दिखाया फेस बुक या मुख पुस्तिका के रूप में | बस एक अँगुली का ईशारा और प्रोफाइल पिक के साथ  पूरी जीती –जागती दुनियाँ आपके सामने हाज़िर हो जाती है |भारत ,अमरीका ,इंगलैंड या पकिस्तान सब एक साथ एक ही जगह पर आ जाते हैं और वो जगह होती है आप के घर में आपका कंप्यूटर ,लैपटॉप या मोबाइल | कितना आश्चर्य जनक कितना सुखद | इंसान का अकेलापन दूर करने वाली ,लोगों को लोगों से जोड़ने वाली साइट इतनी लोकप्रिय होगी इसकी कल्पना तो शायद मार्क जुकरबर्ग ने भी नहीं कि थी | आज फेस बुक दुनियाँ कि सेकंड नम्बर कि विजिट की  जाने वाली साइट है |पहली गूगल है | इसकी लोकप्रियता का आलम यह है कि आज इसके लगभग एक बिलियन रजिस्टर्ड यूजर्स हैं | यानी कि दुनियाँ का हर सातवाँ आदमी ऍफ़ बी पर है ........... आप भी उन्हीं में से एक हैं ,हैं ना ? आज अगर आप किसी से मिलते हैं तो  औपचारिक बातों के बाद उसका पहला प्रश्न यही होता है “क्या आप ऍफ़ बी  पर हैं और अगर आप नहीं कहते हैं तो अगला आप को ऊपर से नीचे तक ऐसे देखता है “ जैसे आप सामान्य मनुष्य नहीं हैं बल्कि चिड़ियाघर से छूटे कोई जीव हों |

                       अब आप अगर सामान्य मनुष्य है ,चिड़ियाघर से छूटे  जानवर नहीं तो इतना तो तय है कि आप भी ऍफ़ बी यूज( इस्तेमाल ) कर रहे होंगे |पर सोचने वाली बात यह है  कि आप ऍफ़ बी इस्तेमाल   कर रहे हैं या जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं|
यहाँ ओवर यूज से मेरा मतलब है आप दिन भर में एक घंटे से ज्यादा ऍफ़ बी यूज तो नहीं कर रहे हैं ..... यहाँ केवल वही  समय नहीं देखना है जो आप ऑनलाइन रहते है बल्कि वो समय भी जोड़ना है जब आप ऍफ़ बी ,उसके लाइक कमेंट ,स्टेटस के बारे में सोचने में बिताते हैं और मानसिक रूप से ऍफ़ बी पर ही रहते हैं क्योंकि वस्तुतः हम वहीँ होते हैं जहाँ हमारा मन होता है | ऐसे समय में हाथों से किया जाने वाला काम प्रभावित होता है |और अगर ऐसा है तो सतर्क हो जाइए क्योंकि  अकेलापन दूर करने वाली ,लोगों को लोगों से जोड़ने वाली इस साइट का एक खतरनाक असर भी है ........ कि ये बहुत जल्दी ही आप को एडिक्ट बना लेती है |
क्या मैं ऍफ़ बी एडिक्ट हूँ -  
                   ऊपर कि पंक्तियाँ पढ़ कर जरूर आप के मन में यह सवाल उठा होगा | आप जानना चाहते होंगे कि कहीं मैं ऍफ़ बी एडिक्ट तो नहीं हो गया | उत्तर आसान है ......... जैसे हर बीमारी के सिमटम्स होते हैं वैसे ही ऍफ़ बी एडिकसन  के कुछ सिमटम्स हैं | जरा गौर करिए कहीं आप में इनमें से कोई चिन्ह तो नहीं है |
*आप के हाथ कहीं भी व्यस्त हो आपके दिमाग में एक अजीब सी बेचैनी रहती है कि मैंने आज जो स्टेटस डाला था उस पर कितने लाइक कमेंट आये होंगे |
* आप बार –बार अपने मित्रों के स्टेटस और अपने स्टेटस में होने वाले लाइक कमेंट कि तुलना करते रहते हैं.... अपने स्टेटस पर कम लाइक कमेंट देख कर आप का मूड उखड जाता हैं और आप बच्चों और घरवालों पर बेवजह झल्लाने लगते हैं |
*आप कहीं भी हों कुछ भी कर रहे हो थोड़ी –थोड़ी देर में मोबाइल खोल कर देख लेते हैं कहीं कुछ नया स्टेटस तो नहीं आया है ?
*अगर आप का इंटरनेट नहीं चल रहा है तो या तो आप पास पड़ोस में जाकर ऍफ़ बी देखते हैं या अपने दोस्तों से फोन कर –कर के पूंछते हैं कि आपके स्टेटस पर कितने लाइक कमेंट हैं |
* रात को सोते समय आप ऍफ़ बी देख कर ही सोते हैं और कोशिश करते हैं कि गुड नाईट का स्टेटस डाल दे
* सुबह आँख खुलने के बाद आप सबसे पहले ऍफ़ बी देखते हैं
* आप को अपने आस –पास कि घटनाओं से उतना फर्क नहीं पड़ने लगता जितना ऍफ़ बी कि घटनाओं से
*आप को लगने लगता है कि अब अप दुनियाँ के सबसे व्यस्त इंसान हो गए हैं जिसके पास अब अपने जिगरी दोस्त से बात करने के लिए १० मिनट भी नहीं हैं जिसके साथ कभी आपकी घंटों बातें ही ख़त्म नहीं होती थी |
* और सबसे खतरनाक आप टॉयलेट में भी मोबाइल ले जाकर  स्टेटस चेक करने लगे हैं |
                      अगर आप में इनमें से कोई लक्षण है तो सावधान  आप ऍफ़ बी एडिक्ट हो गए हैं | वैसे भी अगर मोटे तौर पर देखा जाए जो लोग एक घंटे से ज्यादा ऍफ़ बी प्रयोग करते हैं उन सब में एडिक्ट होने कि प्रबल संभावना रहती है |इस नियम में केवल उन लोगों को छूट है जो व्यावसायिक तौर पर ऍफ़ बी का प्रयोग करते हैं .... जैसे अपने सामान के  प्रचार के लिए , किसी सामाजिक कारण के लिए या किसी मुद्दे पर जन जागरण के लिए ...
 आपके ऍफ़  बी अडिक्ट होने कि संभावना ज्यादा है अगर ......
क )अगर आप ने जीवन में कोई लक्ष्य नहीं बनाया है
                           इन्हें आप घुमंतू भी कह सकते हैं | इनमें से ज्यादातर वो किशोर व् युवा आते हैं जो  लक्ष्य विहीन सिर्फ पास होने के लिए पढ़ रहे है ..... जाहिर है वो इम्तिहान के आस –पास ही पढेंगे बाकी समय कुछ मौज –मस्ती करने कि इरादे से ऍफ़ बी पर आते हैं और फिर यही के हो कर रह जाते हैं |
ख ) जो दूसरों का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं
                          आप इन्हें हीन भावना ग्रस्त या कुछ हद तक अवसाद में भी कह सकते हैं | इसमें भारी संख्या में घरेलू औरतें होती हैं .... जो बच्चों के बड़े हो जाने व् पति के ऑफिस में ज्यादा व्यस्त हो जाने कि वजह से  एकाकी व् उपेक्षित  महसूस करती हैं और ख़ुशी  व् दोस्तों की  तलाश में ऍफ़ बी  पर आती हैं और बुरी तरह इसके चुगल में फंस जाती है | इनमें से ज्यादातर का ऍफ़ बी अकाउंट उनके बच्चों ने ही बनाया होता है जो बाद में पछताते हैं क्यों मम्मी का अकाउंट बना दिया .......... अब वो घर के कामों पर ध्यान नहीं देती बस दिन भर अपनी पिक्स व् स्टेटस शेयर करती रहती हैं |
ग )जिन्हें अपने से ज्यादा दूसरों में दिलचस्पी रहती है
                                आम भाषा में ऐसे लोगों को खबरनबीस भी कह सकते हैं | इनको अपने से ज्यादा दूसरों कि जिंदगी में दिलचस्पी रहती है |मुहल्ले में कहाँ क्या पक रहा है ,किसकी किस से निभ रही है ,किसकी किससे टूट रही है ,हर एक  बात पर इनकी नजर रहती है | ऍफ़ बी अकाउंट बनाते ही इनका कैनवास विकसित हो जाता है |इनको लगता है इनके हाथ कारू का खजाना लग गया है | ये पूरी तल्लीनता  से दूसरों कि निजी जिंदगी कि जानकारी ईकठ्ठा करने में जुट जाते हैं और अपनी निजी जिंदगी से दूर होते जाते हैं |   
 ऍफ़ .बी एडिक्ट होने के नुक्सान –
                  नशा जिस चीज का भी हो गलत ही होता है  ऍफ़ बी भी उनमें से ही एक है |आप पूँछ सकते है “ अरे ऍफ़ बी एडिक्ट हूँ तो हूँ इसमें गलत क्या है .क्या फर्क पड़ता है ? चलिए आज मैं आप को बताता   हूँ कि ऍफ़ बी एडिक्सन कैसे आपके चेहरे कि हंसी और परिवार कि खुशियाँ चुरा लेता है | अभी कुछ दिनों पहले ऍफ़ बी पर ही मैंने पढ़ा था ...............
“ जब से ऍफ़ बी का पास वर्ड याद हुआ
जिंदगी का पास वर्ड जाने कैसे भूल गया “
१  ) आपको दूसरों कि खुशियाँ और अपने जीवन कि कमियाँ नजर आने लगती हैं
                                जो आप के ऍफ़ बी मित्र हैं न वो आप के शहर के हैं न आप उन्हें ठीक से जानते हैं तो आप उनके बारे में वही सोचेंगे जो वो दिखने कि कोशिश कर रहे हैं | जाहिर सी बात है हर इंसान दूसरे के सामने अच्छा दिखना चाहता है और अगर पकडे जाने का खतरा न हो तो वो झूठ  कि एक पूरी दुनियाँ ही परोस देता है | आप वही देखते हैं जो दूसरा दिखाता है | एक हंसती मुस्कुराती पारिवारिक पिक देख कर आप को लगने लगता है इनका जीवन कितना सुखी है |ये तो चौबीसों घंटे हँसते रहते हैं | पर क्या वास्तविकता में किसी घर में ये संभव है ?मैं और मेरी नयी कार का स्टेटस देखते ही आप को अपनी खटारा स्कूटर कि तो याद आ जाती है पर उसकी कार के साथ आने वाली इ ऍम आई का आप को ख़याल भी नहीं आता |  आप को दूसरों कि बड़ी पोस्ट तो दिखाई देती है पर उस पोस्ट के साथ आई हज़ारों जिम्मेदारियां व् तनाव नहीं | परिणाम स्वरुप आप दुखी रहने लगते हैं | फिर आप भी अपना कद ऊँचा करने के लिए नए –नए झूठ गढ़ने लगते हैं ,जबकि आप हर पल अन्दर से यह महसूस कर रहे होते हैं कि आप झूठ बोल रहे हैं और अगला सच बोल रहा है |  ढाक  के तीन पात आप दिन प्रति दिन निराशा में डूबने लगते हैं  | हाल के शोधों में पाया गया है कि ऍफ़ बी प्रयोग करने वाले लोगों में अवसाद  की बिमारी बहुत बढ़ रही है |
२  ) आपके वास्तविक मित्र और रिश्ते आप से दूर होने लगते हैं
                             बच्चों को राइम बहुत रटाई जाती हैं | एक प्रचलन है |अभी कुछ दिन पहले कि बात है मैं अपने  एक डॉ मित्र के साथ उसके क्लिनिक पर बैठा हुआ था  | वही एक माँ अपने छोटे बच्चे के साथ आई और बोलने लगी “ डॉ साहब ,मेरा बेटा गणित में बिलकुल भी रूचि नहीं लेता बस हर समय टी वी | डॉ मुस्कुराई “ अरे टी वी का रिमोट अपने पास रखो ,मत देखने दो ,समय तो उतना ही है टीवी में उलझा रहेगा तो गणित को समय कब देगा और कैसे सीखेगा |हां ! हर दिन समय तो उतना ही है पर अफ़सोस हम अपने जीवन का वो अनमोल समय ऍफ़ बी के फेक रिश्तों को दे देते हैं | जो समय माँ का हाल –चाल पूंछने  में लगाना चाहिए था , जो समय बच्चों के साथ खेलने में लगाना चाहिए था जो समय पत्नी के साथ हंसी – ख़ुशी में बिताना चाहिए था वो समय आप फ़ालतू की  चैटिंग  व् लाइक कमेंट गिनने में लगा देते हैं | आप के अपने रिश्ते आपके समय के लिए तरसते –तरसते कोई न कोई आल्टरनेटिव ढूढ़ लेते हैं| फेक रिश्तों में खुशियाँ ढूँढने वाले ५००० दोस्तों और १५००० फोलोवेर्स के होते हुए भी धीरे -=धीरे बहुत एकाकी हो जाते है |
 ३ ) आप की खुशियों का स्विच दूसरों के हाथ में चला जाता है –
                       एक बहुत ही खूबसूरत कोटेशन याद आ रहा है “ आप को केवल एक ही व्यक्ति कर सकता है वो है आप खुद “ | आज व्यक्तित्व विकास की हर पाठशाला में पढ़ाया जाता है अगर आप अपने जीवन के लक्ष्य हांसिल करना चाहते हैं तो खुश रहने के लिए दूसरों की निर्भरता छोडनी पड़ेगी | परतु ऍफ़ बी एडिक्ट होते ही जाने –अनजाने आप अपनी खुशियों का स्विच दूसरों के हाथ में चला जाता है | आप पूछेंगे कैसे ?दरअसल आप कि ख़ुशी दूसरों पर निर्भर करने लगती है | ऍफ़ बी एडिक्ट होते ही आप लाइक कमेंट क्रेजी होने लगते हैं | अगर आप ने कोई नयी चीज आप खरीद कर लाते हैं और उसका फोटो ऍफ़ बी पर डालते हैं पर उस पर लाइक कम होते हैं या कोई उस चीज का उपहास उड़ाते हुए खराब कमेंट कर देता है | या आप का कोई प्रिय मित्र उस पोस्ट पर आता ही नहीं है तो आप का मूड एकदम से खराब हो जाता है | आप दुखी हो जाते हैं | दूसरी तरफ जब अचानक से किसी बात पर बहुत तारीफ़ मिल जाती है तो बहुत खुश हो जाते हैं यानी कहीं न कहीं आपने अपनी खुशियों का स्विच अपने ऍफ़ बी के मित्रों के हाथ में दे दिया है |
४  ) आपकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है
                      अगर आप जयादा देर तक ऍफ़ बी इस्तेमाल करने के लिए बैठे रहते हैं तो आप को कमर कि मांस पेशियाँ अकड  सकती हैं  | बढती उम्र के साथ लम्बर या सर्वाइकल स्पोंडलाईटिस होने का खतरा बना रहता है | आँखें कमजोर हो जाती हैं |सर दर्द ,बदन दर्द कि समस्या तो आम है | साथ ही लगातार बैठे  रहने से कोई शारीरिक व्यायाम नहीं होता जिससे पहले मोटापा फिर उससे जुड़े रोग चले आते हैं |
५  ) आपको सामजिक रूप से व्यस्त होने का भ्रम हो जाता है
                         बड़ी विचित्र बात है १००० -१५०० अपरिचित लोगों से बात शुरू होते ही आपको यह अहसास होने लगता है कि कि आप सामाजिक रूप से बहुत व्यस्त व्यक्ति हैं | आप को बहुत लोग जानते हैं | आप गर्म जोशी से हाय ,हेलो करते है और बदले में आप को भी  वही व्यवहार मिलता है | आप किसी के स्टेटस पर लाइक कमेंट करते हैं आप को भी लाइक कमेंट मिलते हैं | पर धीरे –धीरे आप को महसूस होता है यहाँ भावनाओ का मशीनीकरण हो गया है .... शब्द भावनाओं के बिना बेजान हो गए हैं | जब आप अपने किसी मित्र से जो आप के साथ ऑफिस में भी काम करता है या स्कूल में पढता है तो आप हाय करने से भी बचने लगते हैं क्योंकि आप को लगता है सुबह ऍफ़ बी पर हाय –हेलो कि खाना पूरी तो हो ही गयी है अब क्या करना | वो गर्मजोशी वो प्यार घटने लगता है | जहाँ एक तरफ आपको भ्रम होने लगता है कि आप ज्यादा सामाजिक हो रहे हैं वहीं वास्तव में आपका दायरा सिमटता जा रहा होता है |
६  ) आप ज्यादातर उन्हीं लोगो से बातें करते है जो एडिक्ट हैं
                 बड़ी विचित्र बात है......पर है सच| अगर आप ऍफ़ बी एडिक्ट हैं तो जयादातर ऍफ़ बी पर रहते होंगे | इसमें जो लोग आप को ज्यादातर दिखाई पड़ते होगे वो लोग भी ऍफ़ बी एडिक्ट ही होंगे | आप कि ज्यादा दोस्ती ज्यादा वार्तालाप उन्हीं से होता है ........... कहावत है एक तो करेला ऊपर  से नीम चढ़ा | अपने जैसे एडिक्ट लोगों के बीच रहते –रहते आप को कभी अहसास ही नहीं होता कि आप कुछ गलत कर रहे हैं | उलटे अगर घर में आप को कोई रोके –टोंके तो आप उदाहरण देते हुए कहते हैं “ सब तो यही कर रहे हैं ,इसमें गलत क्या है? जो खुद डूबा हुआ है वो किसी को क्या बचाएगा?  और रोग घटने के स्थान पर बढ़ने लगता है |
७ ) आपका अनमोल जीवन एक आलस्य भरे मनोरंजन कि भेंट चढ़ जाता है
                  ८४ लाख योनियों के बाद मानव जन्म मिला है कितना कुछ करा जा सकता है ,कितना कुछ सोचा जा सकता है ,न सिर्फ अपने लिए  बल्कि अपनों के लिए भी | पर अफ़सोस ऍफ़ बी ज्यादा प्रयोग करने वालों में ज्यादातर किशोर व् युवा है जिन्हें जीवन में कुछ बनना है वो अपने जीवन के स्वर्णिम वर्ष आलस भरे मनोरंजन में लगा कर स्वास्थ्य व् भविष्य दोनों चौपट कर रहे है | बच्चो के बड़े हो जाने के बाद औरतें अपने जीवन कि दूसरी पारी में रंग भर सकती हैं ,अपने अधूरे सपनों को पूरा कर सकती है |कोई सामाजिक संगठन ज्वाइन कर सकती है | बच्चों को टयुशन पढ़ा सकती है वो पूरा –पूरा दिन बर्बाद कर देती हैं | कहते हैं गया वक्त फिर आता नहीं | और बाद में अफ़सोस ही रह जाता है | आपको अपनी समय और ऊर्जा का निवेश सही जगह करना चाहिए न कि गलत जगह |
                    और चलते चलते मैं इतना ही कहना चाहूंगा  अगर चाहे –अनचाहे आप ऍफ़ बी एडिक्ट हो भी गए हैं तो कोई बात नहीं कौन सी ऐसी आदत है जो छोड़ी न जा सके | अगर आप चाहे तो इस आदत पर भी लगाम लगा सकते हैं बस आप में समस्या को समझने और संकल्प शक्ति पर विश्वास का माद्दा होना चाहिए | यहाँ मैं यह नहीं कह रहा  हूँ कि आप ऍफ़ बी पूरी तरह से छोड़ दे |  पर कहावत है न “ अति का भला न बोलना अति कि भली न चूप “ अति हर चीज कि बुरी होती है अति से बचे | बाकी ऍफ़ बी के  कुछ फायदे भी हैं | दिन में एक बार आधा- एक घंटे के लिए आना बुरा भी नहीं है पर याद रहे ऍफ़ बी एक झील है जिसमें थोड़ी देर तैरा  तो जा सकता है .... पर वहाँ  रहा नहीं जा सकता हैं | नहीं तो डूबना निश्चित है |

तो शुभ काम में देर कैसी ,थोड़ी देर को ऍफ़ बी पर आइये बाकी समय अपने काम परिवार और रियल मित्रों को दीजिये | फिर देखिये आपके अपने आप को कितना लाइक करेंगे और कमेंट में लिखेंगे ........ वाह ! क्या बात है और साथ में बनायेंगे  स्माइली |देखिएगा आप कि  असली जिंदगी खिल उठेगी |





COMMENTS

BLOGGER: 2
Loading...
नाम

“मतवाला” #NaturalSelfi 15 अगस्त २६ जनवरी अंजू शर्मा अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस अंतर्राष्ट्रीय बिटिया दिवस अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस अकेलापन अक्षय तृतीया अखिल राज शाह अगला कदम अजय कुमार अजय कुमार श्रीवास्तव अजय कुमार श्रीवास्तव (दीपू) अजय चंद्रवंशी अटूट बंधन अटूट बंधन अंक -१० अनुक्रमाणिका अटूट बंधन कवर पेज अटूट बंधन विशिष्ट रत्न सम्मान अटूट बंधन सम्पादकीय अनामिका अनामिका चक्रवर्ती अनुपमा सरकार अन्तर करवड़े अन्तराष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) अपर्णा परवीन कुमार अपर्णा साह अम्बरीष त्रिपाठी अरविन्द कुमार खेड़े अर्चना नायडु अर्चना बाजपेयी अर्जुन सिंह अर्थ डे अशोक कुमार अशोक के परुथी आत्महत्या आध्यात्मिक लेख आभा दुबे आयुष झा "आस्तीक " आलोक कुमार सातपुते आशा पाण्डेय ओझा आसाढ़ पूर्णिमा इंजी .आशा शर्मा इंदु सिंह इमरान रिजवी इमोशनल ट्रिगर्स ई बुक ईद उत्पल शर्मा "पार्थ" उपवास उपासना सियाग उमा अग्रवाल उम्मीदें उषा अवस्थी एकता शारदा एम्पैथी ओमकार मणि त्रिपाठी ओशो औरत कंगना रानौत कंचन पाठक कंचन लता जायसवाल कबीर करवाचौथ कर्म कल्पना मिश्रा बाजपेयी कवि मनोज कुमार कविता बिंदल कहानी कहानी संग्रह कार्ल मार्क्स काव्य जगत काव्यजगत किरण आर्य किरण सिंह कुमार गौरव कुसुम पालीवाल कृष्ण कुमार यादव कैंसर ग़ज़ल गणेश चतुर्थी गहरा दुःख गाँधी जयंती गिरीश चन्द्र पाण्डेय गीता गुरु गुरु दक्षिणा गुरु पूर्णिमा गुस्सा चंद्रेश कुमार छतलानी चन्द्र प्रभा सूद चन्द्र मौली पाण्डेय चीन चेतन भगत छठ जन्माष्टमी जय कन्हैया लाल की जिनपिंग जी एस टी जैन ज्योतिष झगडे टफ टाइम टीचर टीचर्स डे ठुमरी समाज्ञ्री गिरजा देवी डाॅ.भारती गाँधी डिम्पल गौड़ 'अनन्या ' डिम्पल गौड़ 'अनन्या' डॉ . आशुतोष शुक्ला डॉ .जगदीश गाँधी डॉ .संगीता गाँधी डॉ अब्दुल कलाम डॉ अलका अग्रवाल डॉ जगदीश गाँधी डॉ भारती वर्मा बौड़ाई डॉ मधु त्रिवेदी डॉ रमा द्विवेदी डॉ लक्ष्मी बाजपेयी डॉ संगीता गांधी डॉ. भारती गांधी डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई डॉ.जगदीश गाँधी डॉली अग्रवाल ढिंगली तीज तीन तलाक तृप्ति वर्मा त्यौहार दशहरा दीपावली स्पेशल दीपिका कुमारी दीप्ति दीपेन्द्र कपूर दुर्गा अष्टमी देवशयनी एकादशी देश -दुनिया देश भक्ति की कवितायें धर्म नंदा पाण्डेय नन्हा गुरु नवरात्र नवीन मणि त्रिपाठी नागेश्वरी राव नारी निधि जैन निबंध निशा कुलश्रेष्ठ नीता मेहरोत्रा नीलम गुप्ता नेहा अग्रवाल नेहा नाहटा नेहा बाजपेयी पंकज प्रखर पंखुरी सिन्हा पंडित दीनदयाल उपाध्याय परिचर्चा -१ परिचर्चा -१ कवितायेँ पर्व त्यौहार पारदर्शिता पार्थ शर्मा पूनम डोंगरा पूनम पाठक प्रतिभा पाण्डेय प्रदीप कुमार सिंह ‘पाल’ प्रिंसेस डायना प्रिया मिश्रा प्रेम कवितायेँ प्रेम रंजन अनिमेष प्रेरक कथाएँ प्रेरक प्रसंग प्रेरक विचार फादर्स डे फीलिंग लॉस्ट फुंसियाँ फेसबुक फॉरगिवनेस फ्रेंडशिप डे फ्रेडरिक नीत्से बहादुर शाह जफ़र बाल कहानी बाल जगत बाल दिवस बाल मनो विज्ञान बाल-मन बिल गेट्स बीनू भटनागर बुजुर्ग बेगम अख्तर ब्लू व्हेल ब्लॉगिंग भाई - बहन भाई बहन भाग्य भावना तिवारी भोले बाबा मई दिवस मदर्स डे मम्मी महात्मा गाँधी महान व्यक्तित्व महेंद्र सिंह माँ माँ उषा लाल माँ सरस्वती माता - पिता माता -पिता मानव शरीर माया मृग मित्रता मित्रता दिवस मित्रता दिवस पर विशेष लेख मीना कुमारी मीना पाठक मीना पाण्डेय मुंशी प्रेमचन्द्र . कहानी मुकेश कुमार ऋषि वर्मा मृत्यु मृदुल यकीन रंगनाथ द्विवेदी रक्षा बंधन रचना व्यास रजनी भारद्वाज रमा द्विवेदी रश्मि प्रभा रश्मि बंसल रश्मि सिन्हा राजा सिंह राधा कृष्ण "अमितेन्द्र " राधा क्षत्रिय राधा शर्मा रितु गुलाटी रिया स्पीक्स रिश्ते रिश्ते -नाते रूचि भल्ला रूपलाल बेदिया रेप रोचिका शर्मा लघु कथाएँ लता मंगेशकर लली लेख लेबर डे वंदना गुप्ता वंदना बाजपेयी वसंत पंचमी विजयारतनम विनीता शुक्ला विनोद खनगवाल विभा रानी श्रीवास्तव विशेष दिवस विश्व हास्य दिवस विश्वजीत 'सपन ' वीणा वत्सल वीरू सोनकर वृद्धजन विमर्श वैलेंटाइन डे व्यंग शरद पूर्णिमा शशि बंसल शशि श्रीवास्तव शांति पुरोहित शान्ति पाल शान्ति पुरोहित नोखा शायरी शिक्षक दिवस शिखा सिंह शिव शिवलिंग शिवा पुत्र शिवानी कोहली शिवानी जैन शर्मा श्राद्ध पक्ष श्रीमती एम डी त्रिपाठी संगम वर्मा संगीता पाण्डेय संगीता सिंह "भावना " संजना तिवारी संजय कुमार अविनाश संजय कुमार गिरि संजय वर्मा संजय वर्मा "दृष्टी " संजीत शुक्ला संध्या तिवारी संवेदनशीलता संस्मरण सकारात्मक चिंतन सक्सेस स्टोरीज सतीश राठी सत्या शर्मा 'कीर्ति ' सद्विचार सन्यास सपना मांगलिक सफलता समीक्षा सरबानी सेनगुप्ता सराह सरिता जैन सविता मिश्रा साक्षात्कार साधना सिंह सामाजिक लेख सावन का पहला सोमवार साहित्यिक लेख सीताराम गुप्ता सीमा सिंह सुधीर द्विवेदी सुनीता त्यागी सुमित्रा गुप्ता सुशांत सुप्रिय सुशील यादव सूर्य सूर्योदय सेल्फ केयर स्ट्रेस ईटिंग डिसऑर्डर स्त्री देह और बाजारवाद स्त्री विमर्श स्मिता दात्ये स्मिता शुक्ला स्वतंत्रता दिवस स्वामी विवेकानंद स्वास्थ्य जगत स्वेता मिश्रा हलचल आस -पास हलचल आसपास हामिद हास्य योग हिंदी दिवस हेडी लेमार हेल्थ होली की ठिठोली aforestation agla kadam astrology atoot bandhan atoot bandhan cover page atoot bandhan editorial cancer children issues clingy behaviour deepawali special E.book family and relationship issues father's day fb feeling lost friendship day general article GST guru health hindi divas hindi poetry hindi stories hindi story id immortal personalities interview janmashtami karvachauth literary articles memoirs mother's day motivational quotes motivational stories nanha guru positive thinking pragnency raksha bandhan rape religion riviews Riya speaks sarahah app satire senior citizen issues short stories social articles spiritual articles stress eating sucesses sucesses stories swantantrta divas valentine day vandana bajpai women issues
false
ltr
item
अटूट बंधन : कहीं आपको फेसबुक का नशा तो नहीं ?
कहीं आपको फेसबुक का नशा तो नहीं ?
https://3.bp.blogspot.com/-oC07JHMeMuc/WUk7RsRrNaI/AAAAAAAAEzQ/VCTOjUMcawc98SsbtGkMVMh6RRZWC-AqACLcBGAs/s640/Facebook%2Baddiction%2Bhas%2Bno%2Bcure.jpg
https://3.bp.blogspot.com/-oC07JHMeMuc/WUk7RsRrNaI/AAAAAAAAEzQ/VCTOjUMcawc98SsbtGkMVMh6RRZWC-AqACLcBGAs/s72-c/Facebook%2Baddiction%2Bhas%2Bno%2Bcure.jpg
अटूट बंधन
http://www.atootbandhann.com/2017/06/blog-post_83.html
http://www.atootbandhann.com/
http://www.atootbandhann.com/
http://www.atootbandhann.com/2017/06/blog-post_83.html
true
1089704805750007414
UTF-8
Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy