क्या आप वास्तव में खुश रहना चाहते हैं? :) :)

सीताराम गुप्ता कौन है जो प्रसन्न रहना नहीं चाहता? हम सभी प्रसन्न रहना चाहते हैं। प्रसन्न रहने के लिए क्या कुछ नहीं करते लेकिन फिर ...






सीताराम गुप्ता
कौन है जो प्रसन्न रहना नहीं चाहता? हम सभी प्रसन्न रहना चाहते हैं। प्रसन्न रहने के लिए क्या कुछ नहीं करते लेकिन फिर भी कई बार सफलता नहीं मिलती। जितना प्रसन्नता की तरफ़ दौड़ते हैं प्रसन्नता और हममें अंतर बढ़ता जाता है। यदि जीवन में सचमुच प्रसन्न रहना चाहते हैं और हमेशा प्रसन्न रहना चाहते हैं तो निम्नलिखित बातों पर ध्यान देने का प्रयास करेंः



अपनी स्वीकार्यता को बढा़एँ:

वास्तव में कोई भी स्थिति बहुत अच्छी या बहुत बुरी नहीं होती। हर स्थिति को स्वीकार कर उससे प्रसन्नता पाने का प्रयास करें। हमें अपने मन की कंडीशनिंग के कारण ही कोई भी स्थिति या वस्तु अच्छी या बुरी लगती है। अपने मन की इस कंडीशनिंग अथवा बंधन को तोड़कर हर स्थिति को स्वीकार करें। इससे हमारी परेशानी कम होकर प्रसन्नता में वृद्धि होगी। हम प्रायः सरदी में गरमी की, गरमी में बरसात की और बरसात में सूखे की कामना करते हैं जो हमारी प्रसन्नता को कम कर देता है। हर ऋतु का अपना आनंद है। हर ऋतु के मौसम व खानपान का आनंद लीजिए। जेठ जितना तपता है सावन उतना ही अधिक बरसता है। सावन का आनंद लेना है तो जेठ की चिलचिलरती घूप को स्वीकार करना अनिवार्य है। भयंकर शीत ऋतु के उपरांत ही वसंत का आनंद उठाना संभव है। जीवन में हमारी जितनी अधिक स्वीकार्यता होगी उतना ही अधिक आनंद हम पाएँगे क्योंकि अप्रिय या विषम परिस्थितियाँ सदैव नहीं रहतीं।

दृष्टिकोण में परिवर्तन करें:

प्रसन्न रहने के लिए अपने दृष्टिकोण में परिवर्तन करना अनिवार्य है। सकारात्मक दृष्टिकोण से युक्त व्यक्ति ही वास्तव में प्रसन्न रह सकता है। किसी भी वस्तु या स्थिति से कोई भी व्यक्ति ख़ुश रह सकता है तो मैं और आप क्यों नहीं रह सकते? दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन द्वारा ही यह संभव है। हमें अपनी सीमाओं को स्वीकार करने से नहीं घबराना चाहिए। ये भी ज़रूरी है कि हम अपनी परिस्थितियों को बदलने की भरपूर कोशिश करें लेकिन ये भी तभी संभव है जब हम वर्तमान को स्वीकार कर उससे संतुष्ट रहने का प्रयास करें। वर्तमान परिस्थितियों में हमेशा असंतुष्ट रहने वाला व्यक्ति कभी भी परिस्थितियों को अपने नियंत्रण में लेकर उनमें सुधार नहीं कर सकता। बच्चे प्रायः छोटी-छोटी चीज़ों में ख़ुशी ढूंढ लेते हैं और हर हाल में प्रसन्न रह सकते हैं। यदि वास्तव में प्रसन्नता चाहिए तो उन चीज़ों से अवश्य प्रसन्न होने का प्रयास कीजिए जिनसे बच्चों को प्रसन्नता मिलती है। जीवन में दृष्टिकोण में परिवर्तन द्वारा यह आसानी से किया जा सकता है।

प्रकृति के सान्निध्य में अधिक समय व्यतीत करें:

जब भी मौक़ा मिले प्रकृति के निकट जाने का प्रयास करें। पर्वतीय स्थानों की यात्राएँ करें। ट्रैकिंग करें। समुद्र तट अथवा नदियों के किनारे घूमें। शहरों में रहते हैं और बाहर जाने का कम अवसर मिलता है तो अपने आसपास के बड़े पार्कों व झीलों की सैर करने जाएँ व झालों में नौकाविहार करें। फूल-पत्तियों का अवलोकन करें। उनकी बनावट व रंगों को ध्यानपूर्वक देखें। पेड़ों के पास बैठें। बागबानी अथवा किचन गार्डनिंग करना न केवल हमारी रचनात्मकता में वृद्धि करता है अपितु उस रनात्मकता से प्रसन्नता भी मिलती हे। अँधेरी व चाँदनी रातों में छत पर बैठकर चाँद-तारों का अवलोकन करें। घर में कृत्रिम सजावटी वस्तुओं का ढेर लगाने की बजाय घर को प्राकृतिक वस्तुओं व ताज़ा फूलों से सजाएँ। लिविंग रूम में फूलों के गमले रखें।


बच्चों के साथ समय व्यतीत करें:

बच्चों के साथ समय व्यतीत करना प्रसन्न रहने का अचूक नुस्ख़ा है। हम अपना बचपन वापस नहीं लौटा सकते लेकिन बच्चों के साथ समय गुज़ारने पर उसका आनंद अवश्य ले सकते हैं। बच्चे बड़े सरल हृदय होते हैं। उन्हीं की तरह सरल हृदय बनकर उनसे बात कीजिए। जब हम अपनी कुटिलता या अत्यधिक चतुराई का त्याग करके सीधे-सच्चे बन जाते हैं तो हमें सचमुच प्रसन्नता की अनुभूति होती है। बच्चों के साथ समय बिताना प्रसन्नतादायक होता है। बच्चों से कुछ सुनिए और उन्हें भी सुनाइए। बच्चों के साथ उनके ही खेल खेलिए। उनके साथ कोई प्रतियोगिता कीजिए। आप हारें या जीतें प्रसन्नता अवश्य मिलेगी।

दूसरों की प्रसन्नता का ध्यान रखें:

यदि वास्तव में स्वयं प्रसन्न रहना चाहते हैं तो दूसरों की प्रसन्नता का ध्यान रखना भी ज़रूरी है। यदि हमारे आसपास गरमी होगी तो हमें भी गरमी लगेगी और ठंड होने पर ठंड लगेगी। यदि हमारे आसपास के लोग प्रसन्न नहीं होंगे तो प्रसन्नता हमसे भी कोसों दूर रहेगी। यदि हम समृद्ध हैं लेकिन हमारे आसपास के लोग अभावग्रस्त हैं तो हमारी समृद्धि को भी ख़तरा बना रहेगा। यदि हमारे मित्र व संबंधी हमसे अधिक समृद्ध हैं तो कम से कम हमें तो परेशान नहीं करेंगे। इसी तरह यदि हमारे परिवार के सदस्य, मित्र व रिश्तेदार प्रसन्न हैं तो वो हमारी प्रसन्नता में बाधा नहीं बनेंगे। हमें भी चाहिए कि हम उनकी ख़ुशियों के बीच रोड़ा बनने की बजाय उनकी प्रसन्नता में वृद्धि के प्रयास करते रहें। उनकी प्रसन्नता भी हमारे ही हित में होगी।

आसपास की सुंदरता से आनंदित होना सीखें:

हमारा घर व बाल्कनी बहुत सुंदर नहीं है तो कोई दुख की बात नहीं लेकिन यदि हमारे पड़ौसियों के घर व उनकी बाल्कनियाँ सुंदर हैं और उनमें रंग-बिरंगे फूल खिले हुए हैं तो सचमुच प्रसन्नता की बात है क्योंकि हम अपने घर पर या अपनी बाल्कनी में खड़े होकर आसपास के दृष्य ही देखते हैं। इस प्रसन्नता को स्थायित्व प्रदान करने के लिए अपने आसपास के लोगों को अच्छी क़िस्म के रंग-बिरंगे व आकर्षक फूलों के बीज उपलब्ध करवाने का प्रयास करें। जब फूल खिलेंगे तो फूलों को बोने वाले ही नहीं आप भी प्रसन्नता का अनुभव करेंगे। उनकी सुगंध आप तक भी अवश्य ही पहुँचेगी।

सबसे प्रेम करें:

प्रेम जीवन का अनिवार्य तत्त्व है। इसका मूल्य आँकना असंभव है। संसार में जितना प्रेम बढ़ेगा लोग उतने ही अधिक संतुष्ट व सुखी अनुभव करेंगे। सबसे प्रेम कीजिए। मन से प्रेम कीजिए। प्रेम में कोई लेनदेन न हो अपितु वह निस्स्वार्थ भाव से किया गया हो। जब हम निस्स्वार्थ व निष्छल प्रेम करेंगे तो अन्य लोग भी हमें वैसा ही प्रेम देंगेे जिससे हमारी प्रसन्नता में वृद्धि ही होगी। हमारा प्रेम संकुचित नहीं होना चाहिए। हम अपने हृदय की गहराई से प्रेम करें। सब भेदभाव भूल कर सबको गले लगाएँ। दुआ-सलाम में कोताही न बरतें। जो भी मिले उसका अभिवादन करते चलें। किसी अजनबी को देखकर भी चेहरे पर तटस्थता अथवा सख़्ती के भाव न लाएँ। हर हाल में हर समय चेहरे पर मुसकुराहट बनी रहे। आपका ये प्रयास ही आपको प्रसन्नता से सराबोर करने में सक्षम होगा।

बड़े-बुजुर्गों की मदद करें:

बड़े-बुजुर्गों और बच्चों की मदद करना हमारा दायित्व है। ये कार्य घर से ही प्रारंभ कर दीजिए। बड़े-बुजुर्गों की सेवा करने से असीम सुख की प्राप्ति होती है। उनके आशीर्वाद से आरोग्य एवं दीघार्यु की प्राप्ति होती है। जो लोग बड़े-बुजुर्गों की मदद करते हैं समाज में उनको सम्मान मिलता है। ये सम्मान भी प्रसन्नताप्रदायक होता है। यदि हम किसी की मदद करने को आगे आते हैं तो अन्य लोग हमारी मदद करने के लिए भी तत्पर रहते हैं। समाज में एक दूसरे की सहायता व सहयोग का उपयोगी चक्र निर्मित हो जाता है जिससे सभी को प्रसन्नता मिलती है।

शिष्टाचार व नम्रतापूर्ण व्यवहार करें:

शिष्टाचार व नम्रतापूर्ण व्यवहार भी व्यक्ति की प्रसन्नता के लिए अनिवार्य है। इससे न केवल घर-परिवार में अपितु कार्य स्थल व समाज में भी अच्छा माहौल बनता है। निरर्थक विवाद उत्पन्न नहीं होते जिससे व्यक्ति गुस्से व तनाव से बचा रहता है। शिष्टाचार व नम्रतापूर्ण व्यवहार से व्यक्ति की मित्रता का दायरा भी विस्तृत होता है जो उसके सामाजिक जीवन के विकास के साथ-साथ व्यावसायिक हितों में भी सहायक होता है। एक शिष्ट व विनम्र व्यक्ति अपने व्यवसाय में भी अपेक्षाकृत अधिक सफलता प्राप्त करता है। जीवन में अच्छे संबंधों के विकास व व्यावसायिक सफलता से कौन प्रसन्न नहीं होगा? जीवन में यथासंभव शिष्टाचार व नम्रता का पालन करें और सफलता के साथ-साथ प्रसन्नता भी सुनिश्चित करें।

जीवन में सहजता व सरलता अपनाएँ :

जीवन में सहजता व सरलता का बहुत महत्त्व है। हम जितने सहज व सरल होते हैं उतने ही अधिक प्रसन्न रह सकते हैं। जीवन में असहजता व कृत्रिमता से तनाव उत्पन्न होता है जो हमारी प्रसन्नता का सबसे बड़ा शत्रु है। कई बार किसी कार्य को करने के लिए हम एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा देते हैं लेकिन सफलता नहीं मिलती क्योंकि हम प्रकृति के विरुद्ध जाने का प्रयास करते हैं। कहा गया है कि गीदड़ की उतावली से बेर नहीं पकते। कबीर ने ठीक ही कहा है:
धीरे-धीरे  रे मना,   धीरे सब कुछ होय,
मली सींचे सौ घड़ा, रितु आए फल होय।

स्वच्छता व सुंदरता का ध्यान रखें:

स्वच्छता न केवल हमें रोगमुक्त रखने में सहायक होती है अपितु स्वच्छता से व्यक्ति को सुकून भी मिलता है। साफ-सुथरा व व्यवस्थित घर तथा बैडरूम व्यक्ति को तनावमुक्त रखने में सहायक होता है। उसे अच्छी नींद आती है जो प्रसन्नचित्तता प्रदान करने में सक्षम होती है। साफ-सुथरे व व्यवस्थित कार्यस्थल से व्यक्ति की कार्य क्षमता, कार्यकुशलता व कार्य की गुणवत्ता में वृद्धि होती है। इससे व्यक्ति को स्वाभाविक रूप से प्रसन्नता मिलती है। पूर्ण रूप से स्वस्थ व प्रसन्न बने रहने के लिए व्यक्ति को घर के कूड़े-कचरे से ही नहीं मन के कूड़े-कचरे अर्थात् नकारात्मक भावों से भी मुक्त होकर उसे सकारात्मक भावों से ओतप्रोत कर लेना चाहिए।

रचनात्मकता व सर्जनात्मकता का विकास करें:

रचनात्मकता के अनेक रूप हैं। हर कला में रचनात्मकता होती है। संगीत, नृत्य, पेंटिंग, अभिनय, गायन-वादन, लेखन, स्पोर्टस व हाॅबीज़ ये सभी व्यक्ति की सर्जनात्मकता विकसित कर उसे प्रसन्नता प्रदान करने में सक्षम  हैं। स्थापित कलाओं में ही नहीं हर कार्य में रचनात्मकता उत्पन्न की जा सकती है यदि हम उसे मनोयोग से करें व उसमें कुछ विशिष्टता उत्पन्न करने का प्रयास करें। किसी भी काम को कुछ बेहतर तरीके से करने अथवा नए ढंग से करने में व्यक्ति को ख़ुशी हासिल होती है इसमें संदेह नहीं। किसी नए कार्य, शिल्प अथवा नई भाषा को सीखना प्रारंभ करें। निश्चित रूप से प्रसन्नता मिलेगी।

केवल अच्छा साहित्य पढ़ें:

ये ख़ूबसूरत दुनिया टाइमपास करने के लिए नहीं है। प्रेरणास्पद, ज्ञानवर्धक व उपयोगी साहित्य ही पढ़ें। ऐसा साहित्य जीवन में सकारात्मकता का विकास करेगा व हमारे अंदर उत्साह का संचार करेगा। इससे हमें आगे बढ़ने में सहायता मिलेगी। जो लोग घटिया साहित्य पढ़ते हैं उनकी मानसिकता भी वैसी ही हो जाती है। हमें किसी भी सूरत में अंधविश्वास और भाग्यवादिता उत्पन्न करने वाला साहित्य नहीं पढ़ना चाहिए। केवल पढ़ने के लिए कुछ भी पढ़ना घातक हो सकता है। हम केवल ऐसा साहित्य ही पढ़ें जो आगे बढ़ने के लिए उत्प्रेरक तत्त्व का कार्य करे। ऐसा करने से ही हमें वास्तविक प्रसन्नता मिल सकती है।

दिल खोलकर हँसे:

जब भी मौक़ा मिले दिल खोलकर हँसें। गंभीरता व मायूसी रूपी व्याधियों को जड़ से मिटाकर प्रसन्नता प्रदान करने में हँसी से बढ़कर औषधि नहीं। विभिन्न चिंताओं को अलविदा कहने का श्रेष्ट उपाय है हँसी। सब हँसने-हँसाने वाले व्यक्ति के नज़दीक जाना चाहते हैं उससे मित्रता करना चाहते हैं। हमेशा रोना-धोना करने वालों से सब बचना चाहते हैं अतः सदैव हँसते-मुसकुराते रहें। प्रसन्नता आपसे दूर नहीं रह सकेेगी। हँसना न केवल एक अच्छा व्यायाम है अपितु हँसने से अनेक बीमारियों से भी मुक्ति मिलना संभव है। एक स्वस्थ व्यक्ति ही प्रसन्न रह सकता है बीमार व्यक्ति नहीं।

समाज को सुंदर बनाने का प्रयास करें:

थियोसोफ़िकल सोसायटी की स्थापना करने वाली रूसी महिला हेलन पेत्रोव्ना ब्लावात्स्की जहाँ जाती थीं रंग-बिरंगे, ख़ुशबूदार फूलों के बीजों से भरा एक थैला हमेशा उनके साथ होता था। वे जहाँ कहीं से भी गुज़रतीं और खाली ज़मीन पातीं वहीं वे फूलों के कुछ बीज मिट्टी में दबा देतीं। लोग उनसे पूछते कि जब ये बीज उगेंगे तथा पौधे बड़े होकर फूलों से लद जाएँगे तब आप तो यहाँ नहीं होंगी। आप उन फूलों की ख़ुशबू और रंगों का आनंद नहीं ले पाएँगी तो फिर क्यों जगह-जगह फूलों के बीज बोती फिरती हैं?
     मेडम ब्लावात्स्की जवाब देतीं, ‘‘यदि मैं इन फूलों को देखकर आनन्दित नहीं हो पाऊँगी तो क्या? आप सब तो इन फूलों को देखकर अवश्य प्रसन्न होंगे। अन्य जो लोग उस समय यहाँ आएँगे वे तो आनन्दित होंगे। फूल तो सब लोगों के लिए खिलेंगे और अपनी सुगंध बिखेरेंगे।’ जो लोग दूसरों के जीवन में आनंद भर देने का प्रयास करते हैं प्रसन्नता उनके अपने जीवन से कैसे दूर रह सकती है? व्यक्ति समाज का अभिन्न अंग है। वह जैसे समाज की रचना करेगा उसी में ही उसे रहना भी होगा। हर तरह से समाज को अच्छा बनाने का प्रयास कीजिए। अच्छे समाज में रहेंगे तो न केवल उसके लाभ मिलेंगे अपितु प्रसन्नता भी प्राप्त होगी।
सीताराम गुप्ता
दिल्ली


रिलेटेड पोस्ट

अच्छा सोंचो , अच्छा ही होगा

जो मिला नहीं उसे भूल जा

आदमी सोंच तो ले उसका इरादा क्या है

जरूरी है मन का अँधेरा दूर होना

COMMENTS

BLOGGER: 1
Loading...
नाम

“मतवाला” #NaturalSelfi 15 अगस्त २६ जनवरी अंजू शर्मा अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस अंतर्राष्ट्रीय बिटिया दिवस अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस अकेलापन अक्षय तृतीया अखिल राज शाह अगला कदम अजय कुमार अजय कुमार श्रीवास्तव अजय कुमार श्रीवास्तव (दीपू) अजय चंद्रवंशी अटूट बंधन अटूट बंधन अंक -१० अनुक्रमाणिका अटूट बंधन कवर पेज अटूट बंधन विशिष्ट रत्न सम्मान अटूट बंधन सम्पादकीय अनामिका अनामिका चक्रवर्ती अनुपमा सरकार अन्तर करवड़े अन्तराष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) अपर्णा परवीन कुमार अपर्णा साह अम्बरीष त्रिपाठी अरविन्द कुमार खेड़े अर्चना नायडु अर्चना बाजपेयी अर्जुन सिंह अर्थ डे अशोक कुमार अशोक के परुथी आत्महत्या आध्यात्मिक लेख आभा दुबे आयुष झा "आस्तीक " आराधना सिंह आलोक कुमार सातपुते आशा पाण्डेय ओझा आसाढ़ पूर्णिमा इंजी .आशा शर्मा इंदु सिंह इमरान रिजवी इमोशनल ट्रिगर्स ई बुक ईद उत्पल शर्मा "पार्थ" उपवास उपासना सियाग उमा अग्रवाल उम्मीदें उषा अवस्थी एकता शारदा एम्पैथी ओमकार मणि त्रिपाठी ओशो औरत कंगना रानौत कंचन पाठक कंचन लता जायसवाल कबीर करवाचौथ कर्म कल्पना मिश्रा बाजपेयी कवि मनोज कुमार कविता बिंदल कहानी कहानी संग्रह कार्ल मार्क्स काव्य जगत काव्यजगत किरण आर्य किरण सिंह कु. शान्ति पाल ‘प्रीति’ कुमार गौरव कुसुम पालीवाल कृष्ण कुमार यादव कैंसर ग़ज़ल गणेश चतुर्थी गहरा दुःख गाँधी जयंती गिरीश चन्द्र पाण्डेय गीता गुरु गुरु दक्षिणा गुरु पूर्णिमा गुस्सा चंद्रेश कुमार छतलानी चन्द्र प्रभा सूद चन्द्र मौली पाण्डेय चीन चेतन भगत छठ जन्माष्टमी जय कन्हैया लाल की जिनपिंग जी एस टी जीवनी जैन ज्योतिष झगडे टफ टाइम टीचर टीचर्स डे ठुमरी समाज्ञ्री गिरजा देवी डाॅ.भारती गाँधी डिम्पल गौड़ 'अनन्या ' डिम्पल गौड़ 'अनन्या' डॉ . आशुतोष शुक्ला डॉ .जगदीश गाँधी डॉ .संगीता गाँधी डॉ अब्दुल कलाम डॉ अलका अग्रवाल डॉ जगदीश गाँधी डॉ भारती वर्मा बौड़ाई डॉ मधु त्रिवेदी डॉ रमा द्विवेदी डॉ लक्ष्मी बाजपेयी डॉ संगीता गांधी डॉ. भारती गांधी डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई डॉ.जगदीश गाँधी डॉली अग्रवाल ढिंगली तरसेम कौर तीज तीन तलाक तृप्ति वर्मा त्यौहार दशहरा दहेज़ प्रथा दीपावली स्पेशल दीपिका कुमारी दीप्ति दीपेन्द्र कपूर दुर्गा अष्टमी देवशयनी एकादशी देश -दुनिया देश भक्ति की कवितायें धर्म नंदा पाण्डेय नन्हा गुरु नवरात्र नवीन मणि त्रिपाठी नागेश्वरी राव नारी निधि जैन निबंध निशा कुलश्रेष्ठ नीता मेहरोत्रा नीलम गुप्ता नेहा अग्रवाल नेहा नाहटा नेहा बाजपेयी पंकज प्रखर पंखुरी सिन्हा पंडित दीनदयाल उपाध्याय परिचर्चा -१ परिचर्चा -१ कवितायेँ पर्यावरण पर्व त्यौहार पारदर्शिता पार्थ शर्मा पूनम डोंगरा पूनम पाठक प्रतिभा पाण्डेय प्रदीप कुमार सिंह ‘पाल’ प्रमिला श्री तिवारी प्रिंसेस डायना प्रिया मिश्रा प्रेम कवितायेँ प्रेम रंजन अनिमेष प्रेरक कथाएँ प्रेरक प्रसंग प्रेरक विचार फादर्स डे फीलिंग लॉस्ट फुंसियाँ फेसबुक फॉरगिवनेस फ्रेंडशिप डे फ्रेडरिक नीत्से बहादुर शाह जफ़र बाबु लाल बाबू लाल बाल कहानी बाल जगत बाल दिवस बाल मनो विज्ञान बाल-मन बिल गेट्स बीनू भटनागर बुजुर्ग बेगम अख्तर ब्लू व्हेल ब्लॉगिंग भगवान् भाई - बहन भाई बहन भाग्य भावना तिवारी भोले बाबा मई दिवस मदर्स डे मम्मी महात्मा गाँधी महान व्यक्तित्व महेंद्र सिंह माँ माँ उषा लाल माँ सरस्वती माता - पिता माता -पिता मानव शरीर माया मृग मित्रता मित्रता दिवस मित्रता दिवस पर विशेष लेख मीना कुमारी मीना पाठक मीना पाण्डेय मुंशी प्रेमचन्द्र . कहानी मुकेश कुमार ऋषि वर्मा मृत्यु मृदुल मैत्रेयी पुष्पा यकीन रंगनाथ द्विवेदी रक्षा बंधन रचना व्यास रजनी भारद्वाज रमा द्विवेदी रश्मि प्रभा रश्मि बंसल रश्मि रविजा रश्मि सिन्हा राजा सिंह राधा कृष्ण "अमितेन्द्र " राधा क्षत्रिय राधा शर्मा रितु गुलाटी रिया स्पीक्स रिश्ते रिश्ते -नाते रूचि भल्ला रूपलाल बेदिया रेप रोचिका शर्मा लघु कथाएँ लघुकथा लता मंगेशकर लली लेख लेबर डे वंदना वंदना गुप्ता वंदना बाजपेयी वसंत पंचमी विजयारतनम विनीता शुक्ला विनोद खनगवाल विभा रानी श्रीवास्तव विशेष दिवस विश्व हास्य दिवस विश्वजीत 'सपन ' वीणा वत्सल वीरू सोनकर वृद्धजन विमर्श वैलेंटाइन डे व्यंग शरद पूर्णिमा शशि बंसल शशि श्रीवास्तव शांति पुरोहित शान्ति पाल शान्ति पुरोहित नोखा शायरी शिक्षक दिवस शिखा सिंह शिव शिवलिंग शिवा पुत्र शिवानी कोहली शिवानी जैन शर्मा श्राद्ध पक्ष श्रीमती एम डी त्रिपाठी संगम वर्मा संगीता पाण्डेय संगीता सिंह "भावना " संजना तिवारी संजय कुमार अविनाश संजय कुमार गिरि संजय वर्मा संजय वर्मा "दृष्टी " संजीत शुक्ला संदीप माहेश्वरी संध्या तिवारी संवेदनशीलता संस्मरण सकारात्मक चिंतन सक्सेस स्टोरीज सतीश राठी सत्या शर्मा 'कीर्ति ' सद्विचार सन्यास सपना मांगलिक सफलता समीक्षा सरबानी सेनगुप्ता सराह सरिता जैन सविता मिश्रा साक्षात्कार साधना सिंह सामाजिक लेख सावन का पहला सोमवार साहित्यिक लेख सीताराम गुप्ता सीमा सिंह सुधीर द्विवेदी सुनीता त्यागी सुबोध मिश्रा सुमित्रा गुप्ता सुशांत सुप्रिय सुशील यादव सूर्य सूर्योदय सेल्फ केयर स्ट्रेस ईटिंग डिसऑर्डर स्त्री देह और बाजारवाद स्त्री विमर्श स्मिता दात्ये स्मिता शुक्ला स्वतंत्रता दिवस स्वामी विवेकानंद स्वास्थ्य जगत स्वेता मिश्रा हरकीरत 'हीर' हलचल आस -पास हलचल आसपास हामिद हास्य योग हिंदी दिवस हेडी लेमार हेल्थ होली की ठिठोली aforestation agla kadam astrology atoot bandhan atoot bandhan cover page atoot bandhan editorial biography cancer children issues clingy behaviour deepawali special E.book family and relationship issues father's day fb feeling lost friendship day general article GST guru health hindi divas hindi poetry hindi stories hindi story id immortal personalities interview janmashtami karvachauth literary articles memoirs mother's day motivational quotes motivational stories nanha guru pollution positive thinking pragnency raksha bandhan rape religion riviews Riya speaks sarahah app satire senior citizen issues short stories social articles spiritual articles stress eating sucesses sucesses stories swantantrta divas valentine day vandana bajpai women issues
false
ltr
item
अटूट बंधन : जो अटूट बंधन में बांधे आपके रिश्तों को : क्या आप वास्तव में खुश रहना चाहते हैं? :) :)
क्या आप वास्तव में खुश रहना चाहते हैं? :) :)
https://3.bp.blogspot.com/-3RlSLV6lMk0/WW8SLUMysVI/AAAAAAAAFSU/pFBNhFSAUc8HHI9J-IV96EDnPFFb6v7NACLcBGAs/s640/be-contented-of-something.jpg
https://3.bp.blogspot.com/-3RlSLV6lMk0/WW8SLUMysVI/AAAAAAAAFSU/pFBNhFSAUc8HHI9J-IV96EDnPFFb6v7NACLcBGAs/s72-c/be-contented-of-something.jpg
अटूट बंधन : जो अटूट बंधन में बांधे आपके रिश्तों को
http://www.atootbandhann.com/2017/07/blog-post_19.html
http://www.atootbandhann.com/
http://www.atootbandhann.com/
http://www.atootbandhann.com/2017/07/blog-post_19.html
true
1089704805750007414
UTF-8
Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy