" ब्लू व्हेल " का अंतिम टास्क

पापा मेरे मैथ्स के सवाल हल करने में मुझे आपकी मदद चाहिए | नहीं बेटा आज तो मैं बहुत बिजी हूँ , ऐसा करो संडे  को  तुम्हारे साथ बैठूँगा...





पापा मेरे मैथ्स के सवाल हल करने में मुझे आपकी मदद चाहिए |
नहीं बेटा आज तो मैं बहुत बिजी हूँ , ऐसा करो संडे  को  तुम्हारे साथ बैठूँगा |
पापा , न जाने ये संडे कब आएगा | पिछले एक साल से तो आया नहीं |
बहुत फ़ालतू बाते करने लगा है | अभी इतना बड़ा नहीं हुआ है की पिता से जुबान लड़ाए | देखते नहीं दिन - रात तुम्हारे लिए ही कमाता रहता हूँ | वर्ना मुझे क्या जरूरत है नौकरी करने की |

मम्मा रोज चीज ब्रेड ले स्कूल लंच में ले जाते हुए ऊब होने लगी है ,दोस्त भी हँसी उड़ाते हैं |  क्या आप मेरे लिए आज कुछ अच्छा बना देंगीं |
नहीं बेटा , तुम्हें पता है न सुबह सात बजे तक तुम्हारा लंच तैयार करना पड़ता हैं | फिर मुझे तैयार हो कर ऑफिस जाना होता है | शाम को लौटते समय घर का सामान लाना , फिर खाना बनाना | कितने काम हैं मेरी जान पर अकेली क्या क्या करु | आखिर ये नौकरी तुम्हारे लिए ही तो कर रही हूँ | ताकि तुम्हें बेहतर भविष्य दे सकूँ | कम से कम तुम सुबह के नाश्ते में तो एडजस्ट कर सकते हो |
                                                                                                               सुपर बिजी रागिनी और विक्रम का अपने १२ वर्षीय पुत्र देवांश से ये वार्तालाप सामान्य लग सकता है | पर इस सामान्य से वार्तालाप से देवांश के मन में उपजे एकाकीपन को  उसके माता - पिता नहीं समझ पा रहे थे | तो किसी और से क्या उम्मीद की जा सकती है |
स्कूल से आने के बाद देवांश घर में बिलकुल अकेला होता | कभी सोफे पर पड़ा रहता , तो कभी मोबाइल लैपटॉप पर कुछ खंगालता , कभी रिमोट से टी वी चैनल बदलता | उसे घर एक कैद खाना सा लगता पर माता - पिता की अपने एकलौते पुत्र की सुरक्षा के लिए  घर से बाहर न निकलने की इच्छा उसे मन या बेमन से माननी ही पड़ती | बाहर दोस्त खेलने को बुलाते पर वो  कोई बहाना बना कर मोबाइल में बिजी हो जाता | देवांश पढाई में भी पिछड़  रहा था | ये ऊब भरी जिंदगी उसे निर्थक लग रही थी | उसके लिए जिंदगी बोरिंग हो चुकी थी | जहाँ कोई एक्साईटमेंट नहीं था |

                                           जिन्दगी की लौ फिर से जलाने के लिए वो नए - नए मोबाइल गेम्स खेलता रहता | ऐसे ही  उसकी नज़र पड़ी एक नए गेम पर , जिसका नाम था ब्लू व्हेल | यूँ तो ब्लू व्हेल संसार का सबसे बड़ा जीव है | पर इस गेम का नाम उस पर रखने के पीछे एक ख़ास मकसद था | क्योंकि ये ब्लू व्हेल समुद्र मैं तैरती नहीं थी | जिन्दिगियाँ निगलती थी ,पूरी की पूरी | इसका आसान शिकार थे जिन्दगी से ऊबे हुए लोग | खासकर किशोर व् बच्चे | इस गेम में प्रतियोगियों को ५० दिन में ५० अलग - अलग टास्क पूरे करने होते हैं |और हर टास्क के बाद अपने हाथ पर एक निशान बनाना होता है | इस गेम का आखिरी टास्क होता है आत्महत्या | 
                               जिंदगी की चिंगारी जलाने की चाह  ब्लास्ट तक ले जा सकती है इस बात से अनभिज्ञ देवांश ने यह गेम खेलना शुरू किया | उसे बहुत मजा आ रहा था | पहला टास्क जो उसे मिला वो था रात में हॉरर मूवी देखने का | वो भी अकेले | देवांश सबके सो जाने के बाद चुपचाप दूसरे कमरे में जा कर फिल्म  देखने लगा | डर से उसके रोंगटे खड़े हो गए | पर  आखिरकार उसने फिल्म देख ही ली | जीत के अहसास के साथ उसने अपने हाथ पर निशान बना दिया | सुबह रागिनी ने हाथ देखा तो देवांश ने उसे बताया माँ ट्रुथ एंड डेयर का एक खेल खेल रहा था " ब्लू व्हेल " बहुत मजा आया | रागिनी सुरक्षा के साथ खेल खेलने की ताकीद दे कर अपने काम में लग गयी | इससे ज्यादा कुछ कहने  का समय रागिनी के पास कहाँ होता था | 

                                देवांश का व्यवहार बदल रहा था | रागिनी व् विक्रम  महसूस कर रहे थे | कुछ टोंकते तो भी देवांश उनकी बात अनसुनी कर देता | रागिनी ने उसे पढाई के बहाने टोंका तो देवांश ने बताया ," मम्मा आज मेरे गेम का अंतिम टास्क है | यह पूरा हो जाए फिर कल से पढूंगा | रागिनी  निश्चिन्त हो कर ऑफिस चली गयी | ऑफिस में आज माहौल  कुछ दूसरा ही था | सभी लोग कुछ चिंतित थे | रागिनी ने महसूस किया की आज वो ऑफिस के सहकर्मी नहीं बस माता - पिता थे | जो अपने बच्चों के वीडियो गेम्स खेलने पर चिंतित थे | अब बच्चे हैं तो वीडियो गेम खेलेंगे ही यह सोंच कर रागिनी ने उनकी बातों पर ध्यान न देकर अपने काम पर फोकस करने का मन बनाया | आखिर माता - पिता हैं तो चिंता तो करेंगे ही | 

                   एक बजे लंच ब्रेक में उसने अपनी सहकर्मी मोहिनी से कहा ," क्या बात है आज सभी को अपने बच्चों की टेंशन है | मोहिनी दीवार पर आँखे गड़ा कर लंबी सांस लेते हुए बोली ," क्यों न हो , आज हम सब यहाँ पैसा कमाने में जुटे  हैं , की बच्चों भविष्य सुनहरा हो , वहां घर पर हमारे बच्चे मोबाइल , लैप टॉप पर अपनी जान खतरे में डाल रहे हैं | क्या मतलब ? मोबाइल लैप टॉप पर समय की बर्बादी तो समझ आती है पर जान खतरे में डालना , रागिनी ने प्रतिप्रश्न किया | मोहिनी आश्चर्य से उसकी और देखती हुई बोली , क्या तुमने अखबार नहीं पढ़ा ? मुंबई के एक १४ साल के छात्र ने एक वीडियो गेम के टास्क को पूरा करने के लिए आत्महत्या कर ली | उस गेम का अंतिम टास्क आत्महत्या  ही होता है | जानती हो उस गेम का नाम है " ब्लू व्हेल " 

                             रागिनी को जोर का झटका लगा | मुँह का कौर जैसे गले में अटक गया | कांपते हाथों से विक्रम को फोन मिलाया | पर गला रुंध गया | शब्द मुँह की देहरी पार करने से इनकार करने लगे | बहुत हिम्मत जुटा कर बोली ," विक्रम अभी के अभी मेरे ऑफिस आ जाओ , फिर घर चलते हैं | व्हाट ,विक्रम ने आश्चर्य से कहा , " तुम्हे पता है ना की आज मेरी कितनी जरूरी मीटिंग है | बात क्या है ?तुम अकेली ही चली जाओ | रागिनी अपने आंसुओं का सैलाब रोकते हुए बोली ," जिंदगी की दौड़ में हम सब अकेले ही हो गए हैं विक्रम | पर अपने अपने वृत्त में भागते हुए भी यह अहसास तो रहता ही है की हमारे वृत्त देवांश पर आकर ओवरलैप करते हैं | आज उसी देवांश को हमारी जरूरत है | वो स्कूल से आ गया होगा | और खाना खा  कर वीडियो गेम खेलने लगा होगा | तो इसमें नया क्या है ? विक्रम ने बात बीच में काटते हुए कहा | नया है उसका डेडली गेम ब्लू व्हेल , जिसका आज अंतिम टास्क वो खेलने जा रहा है | क्याआआअ ? विक्रम ने लगभग चीखते हुए कहा , ब्लू व्हेल की चर्चा आज उसके ऑफिस में भी थी | ठीक है , ठीक है मैं अभी आता हूँ | विक्रम ने अपने घुमड़ते हुए मन को नियंत्रित करते हुए कहा | 

                                     बाहर बारिश हो रही थी | आसमान में इतने काले बादल घिरे हुए थे की दोपहर में रात का अहसास हो रहा था | रागिनी और विक्रम के ऑफिस का फासला आधे घंटे का था पर रागिनी को लग रहा था की जैसे विक्रम के आने में युगों बीते जा रहे हैं | सारा ऑफिस रागिनी को घेरे खड़ा था | सब उसकी मनो दशा समझ रहे थे | किसी ने देवांश को फोन करने को कहा | रागिनी ने फोन मिलाया | घंटी जाती रही , जाती रही पर देवांश  ने फोन नहीं उठाया | रागिनी के सब्र का बाँध टूट गया |नेत्रों की गंगा जमुना में बाढ़ आ गयी | विक्रम के आते ही रागिनी उससे  लिपट  कर रो पड़ी ,' विक्रम मेरे देवांश को बचा लो , बचा लो | विक्रम अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रख कर उसके सैर पर हाथ फेरते हुए बोला , कुछ नहीं होगा देवांश को , कुछ भी नहीं | 

              दोनों गाडी में बैठ गए | विक्रम ने गाडी चलाना शुरू किया | पर ये क्या , गाडी के वाइपर चल ही नहीं रहे थे |  गाडी का शीशा उनके मन की तरह धुंधला था | तेज बारिश में उन्हें बाहर का कुछ दिखाई नहीं दे रहा था | गाडी रेंग - रेंग कर ही चल पा रही थी | विक्रम  और रागिनी के दिल की धडकने भय से बढती ही जा रही थीं | बीच - बीच में रागिनी देवांश को फोन मिला रही थी | पर देवांश उठा ही नहीं रहा था | यह बात उनके भय को और बढ़ा  रही थी | रागिनी ने  पड़ोस में फोन किया | पर वो लोग तो आउट ऑफ़ स्टेशन थे | उन्होंने अपनी असर्मथता जताते हुए माफ़ी मांग ली | आज ही रागिनी को पता चला की पड़ोस के दो लोग आउट ऑफ़  स्टेशन हैं , एक बीमार हैं और हॉस्पिटल में हैं | व् अन्य एक की आज बेटी की सगाई है इसलिए वो गेस्ट हाउस में हैं | क्या है शहरी जीवन की लाचारी , हमें अपने ही पडोस  की कोई खबर नहीं रहती और दुनिया बदलने के ऊपर घंटों तर्क करते हैं | आज भी रागिनी ने अपने ही मतलब से फोन मिलाया था | पर कोई फायदा नहीं हुआ | देवांश की कुछ भी जानकारी नहीं मिल रही थी | 

                                तभी एक बस स्टॉप  पड़ा | रागिनी ने विक्रम से कहा ," चलो गाडी यही लॉक कर देते हैं व् यहाँ से 172 नम्बर  की बस पकड़ लेते हैं | वो सीधा कॉलोनी के गेट  पर उतारेगी | विक्रम ने हां में हाँ मिलाई |  जिस गाडी के एक स्क्रेच पर उसका मूड ख़राब हो जाता , आज उसी गाडी की उसे कोई चिंता नहीं थी | बस कालोनी के गेट पर रुकी | लाईट नहीं आ रही थी | बाहर का अँधेरा अंदर के अँधेरे से टक्कर ले रहा था | फ्लैट की सीढियां चढ़ते  हुए रागिनी ने मोबाइल की टॉर्च  जला ली | धडकते दिल से रागिनी ने गेट खटखटाया | कोई आवाज़ नहीं आई | रागिनी रोने लगी | विक्रम जोर जोर से दरवाजा खटखटाने लगा | 

                                 कोई आवाज़ न आने पर रागिनी को अपनी आशंका सच में बदलती हुई नज़र आई | वो वहीँ जमीन पर पसर गयी और दहाड़े मार मार कर रोने लगी | विक्रम ने दरवाजा तोड़ने का मन बनाया | वो पूरी ताकत से अपने कंधे दरवाजे पर मारने लगा | तभी दरवाज़ा खुला | देवांश अपनी उनींदी पलकों को मलते हुए उन्हें आश्चर्य से देख रहा था |मम्मा पापा आप इतनी जल्दी ? रागिनी और विक्रम की जैसे जान में जान आ गयी | उन्होंने उसे दौड़कर गले से लगा लिया | रागिनी देवांश को बार - बार चूमे जा रही थी व् बुदबुदाते हुए भगवान् का धन्यवाद दे रही थी | विक्रम धीरे - धीरे अपने रुमाल से अपने आंसुओं को पोंछ रहा था | एक बड़ी विपदा आते - आते टल  गयी थी | 

                         थोड़ी ही देर में लाईट आ गयी | उनके रोते हुए चेहरे देखकर देवांश ने पूंछा ," मम्मी - पापा क्या बात है ?आप लोग रो क्यों रहे थे ? रागिनी देवांश के सर पर हाथ फेरते हुए बोली ," बेटा हम बहुत डर गए थे | वो तुम्हारा गेम " ब्लू व्हेल " आज उसके बारे में खबर पढ़ी | फिर तुम्हारा फोन भी नहीं लगा | हम घबरा गए | कहीं तुम उसका अंतिम टास्क तो नहीं खेल रहे हो | हां , मम्मा आज उसका अंतिम टास्क खेलना था | पर न लाईट आ रही थी न इन्टरनेट | तो फिर मैं फोन को म्यूट पर कर के सो गया | मुझे पता था , आप लोग तो फोन करते नहीं पर मेरे दोस्त बार - बार फोन करके मुझे बाहर खेलने को बुलायेंगे और मैं जाऊँगा नहीं | विक्रम बोले ," देवांश आज  ईश्वर ने बहुत बड़ी कृपा की | तुम्हें पता है आत्महत्या के लिए उकसाने वाला ये गेम अपराधिक मानसिकता वाले लोंगों ने बनाया हैं | जिसमें से एक पकड़ा गया है | जिसका नाम फिलिप है | वो २१ साल का रूस का रहने वाला है | सबसे खतरनाक बात यह है की अपने कृत्य पर वो शर्मिंदा नहीं है | अपनी गवाही में उसने साफ़ - साफ़ कहा है की उसके पीड़ित " जैविक कूड़ा हैं " समाज की सफाई के लिए जिनका मर जाना ही अच्छा है | 
                               देवांश बड़े गौर से पिता की बाते सुन रहा था | फिर आँखें नीची कर के बोला ," पापा मैं आत्महत्या नहीं करना चाहता था | मैं तो जिन्दगी की ऊब में बस थोडा ऐडवेंचर चाहता था | आप और मम्मा पूरे दिन के लिए काम पर चले जाते हो | मैं अकेला  रह जाता हूँ | बोर होता रहता हूँ | क्या करु ? रागिनी ने उसका माथा  चूमते हुए कहा ," नहीं देवांश , अब हम ओवर टाइम नहीं करेंगे | जिसके लिए हम इतना कामकर   रहे हैं अगर वो ही साथ छोड़ कर चला जाए तो फिर यह रुपया - पैसा किस काम का ? अब हम अपना टाइम ऐसे मेनेज करेंगे की तुम्हें ज्यादा देर तक अकेला न रहना पड़े | मेरे बच्चे तुम से ज्यादा कीमती हमारे लिए कुछ नहीं | देवांश की आँखों में ख़ुशी के आँसूं थे | उसने धीरे से कहा ," थैंक यू मम्मा , थैंक यूँ पापा | 

                              देवांश के सोने के बाद भी रागिनी की आँखों में नींद नहीं थी | विक्रम भी बार - बार करवट बदल रहे थे | रागिनी ने ही पूंछा ," विक्रम सोये  नहीं क्या ? नहीं रागिनी नींद नहीं आ रही | ईश्वर की कृपा से हमारा देवांश तो बच गया पर न जाने कितने बच्चे ऐसे जानलेवा खेलों की गिरफ्त में फंसे होंगे | हम माता - पिता बच्चों के लिए कमाने के चक्कर में इतना व्यस्त हो जाते हैं की ये भी नहीं सोंच पाते की बच्चों को माता - पिता का समय भी चाहिए सिर्फ सुविधाएं ही नहीं |विक्रम  ने कहा | पर हम क्या कर सकते है , रागिनी ने गहरी सांस लेते हुए कहा | विक्रम थोड़ी देर तक रागिनी को एक तक  देखते हुए बोला ," रागिनी हम अवेयरनेस तो फैला सकते हैं दोस्तों सहकर्मियों में फेसबुक , ब्लॉग ,ट्विटर  के माध्यम से , अपने अपने स्तर पर | रागिनी की आँखों में चमक आ गयी ," सही कह रहे हो तुम ये अवेयर नेस जरूरी है की माता - पिता अपने बच्चों को मंहगे मोबाइल के हवाले न कर दे ताकि बच्चे किसी सेल्फ हर्मिंग गेम के चंगुल में न फँस जाए | न ही कोई ब्लू व्हेल निगल ले किसी मासूम की जिन्दगी |विक्रम ने सहमती से सर हिलाया |
वंदना बाजपेयी 



नोट - जैसा की आप सब को पता है की ब्लू व्हेल गेम एक सेल्फ हार्मिंग गेम है | मुंबई के एक बच्चे ने इसी गेम को खेलते हुए आत्म हत्या कर ली थी | यह खबर हर अखबार में थी | जी . टी वी के  डीएनए में भी इसकी चर्चा हुई थी | माता - पिता को न सिर्फ अपने बच्चों को समय देना चाहिए बल्कि उनके ऊपर निगरानी रखना भी जरूरी है की वो क्या खेल रहे हैं | ये कहानी इसी अवेयरनेस मुहिम का हिस्सा है | 

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“मतवाला” #NaturalSelfi 15 अगस्त २६ जनवरी अंजू शर्मा अंतर्राष्ट्रीय बिटिया दिवस अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस अकेलापन अक्षय तृतीया अखिल राज शाह अगला कदम अजय कुमार अजय कुमार श्रीवास्तव अजय कुमार श्रीवास्तव (दीपू) अजय चंद्रवंशी अटूट बंधन अटूट बंधन अंक -१० अनुक्रमाणिका अटूट बंधन कवर पेज अटूट बंधन विशिष्ट रत्न सम्मान अटूट बंधन सम्पादकीय अनामिका अनामिका चक्रवर्ती अनुपमा सरकार अन्तराष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) अपर्णा साह अम्बरीष त्रिपाठी अरविन्द कुमार खेड़े अर्चना नायडु अर्चना बाजपेयी अर्जुन सिंह अर्थ डे अशोक कुमार अशोक के परुथी आत्महत्या आध्यात्मिक लेख आभा दुबे आयुष झा "आस्तीक " आलोक कुमार सातपुते आशा पाण्डेय ओझा आसाढ़ पूर्णिमा इंजी .आशा शर्मा इंदु सिंह इमोशनल ट्रिगर्स ई बुक ईद उत्पल शर्मा "पार्थ" उपासना सियाग उमा अग्रवाल उम्मीदें उषा अवस्थी एकता शारदा एम्पैथी ओमकार मणि त्रिपाठी ओशो औरत कंगना रानौत कंचन पाठक कंचन लता जायसवाल कबीर करवाचौथ कर्म कल्पना मिश्रा बाजपेयी कवि मनोज कुमार कविता बिंदल कहानी कहानी संग्रह कार्ल मार्क्स काव्य जगत काव्यजगत किरण आर्य किरण सिंह कुमार गौरव कुसुम पालीवाल कृष्ण कुमार यादव कैंसर ग़ज़ल गणेश चतुर्थी गहरा दुःख गाँधी जयंती गिरीश चन्द्र पाण्डेय गीता गुरु गुरु दक्षिणा गुरु पूर्णिमा गुस्सा चंद्रेश कुमार छतलानी चन्द्र प्रभा सूद चन्द्र मौली पाण्डेय चीन चेतन भगत जन्माष्टमी जय कन्हैया लाल की जिनपिंग जी एस टी जैन ज्योतिष झगडे टफ टाइम टीचर टीचर्स डे डाॅ.भारती गाँधी डिम्पल गौड़ 'अनन्या ' डिम्पल गौड़ 'अनन्या' डॉ . आशुतोष शुक्ला डॉ .संगीता गाँधी डॉ अब्दुल कलाम डॉ अलका अग्रवाल डॉ जगदीश गाँधी डॉ भारती वर्मा बौड़ाई डॉ मधु त्रिवेदी डॉ रमा द्विवेदी डॉ लक्ष्मी बाजपेयी डॉ संगीता गांधी डॉ. भारती गांधी डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई डॉ.जगदीश गाँधी डॉली अग्रवाल ढिंगली तीज तीन तलाक तृप्ति वर्मा त्यौहार दशहरा दीपावली स्पेशल दीपिका कुमारी दीप्ति दीपेन्द्र कपूर दुर्गा अष्टमी देवशयनी एकादशी देश -दुनिया देश भक्ति की कवितायें धर्म नंदा पाण्डेय नन्हा गुरु नवरात्र नवीन मणि त्रिपाठी नागेश्वरी राव नारी निधि जैन निबंध निशा कुलश्रेष्ठ नीलम गुप्ता नेहा अग्रवाल नेहा नाहटा नेहा बाजपेयी पंकज प्रखर पंखुरी सिन्हा पंडित दीनदयाल उपाध्याय परिचर्चा -१ परिचर्चा -१ कवितायेँ पर्व त्यौहार पारदर्शिता पार्थ शर्मा पूनम पाठक प्रतिभा पाण्डेय प्रदीप कुमार सिंह ‘पाल’ प्रिंसेस डायना प्रिया मिश्रा प्रेम कवितायेँ प्रेम रंजन अनिमेष प्रेरक कथाएँ प्रेरक प्रसंग प्रेरक विचार फादर्स डे फीलिंग लॉस्ट फुंसियाँ फेसबुक फॉरगिवनेस फ्रेंडशिप डे फ्रेडरिक नीत्से बहादुर शाह जफ़र बाल कहानी बाल जगत बाल दिवस बीनू भटनागर बुजुर्ग बेगम अख्तर ब्लू व्हेल ब्लॉगिंग भाई बहन भाग्य भावना तिवारी भोले बाबा मई दिवस मदर्स डे मम्मी महात्मा गाँधी महान व्यक्तित्व महेंद्र सिंह माँ माँ उषा लाल माँ सरस्वती माता - पिता मानव शरीर माया मृग मित्रता मित्रता दिवस मित्रता दिवस पर विशेष लेख मीना कुमारी मीना पाठक मीना पाण्डेय मुंशी प्रेमचन्द्र . कहानी मुकेश कुमार ऋषि वर्मा मृत्यु मृदुल यकीन रंगनाथ द्विवेदी रक्षा बंधन रचना व्यास रजनी भारद्वाज रमा द्विवेदी रश्मि प्रभा रश्मि बंसल रश्मि सिन्हा राजा सिंह राधा कृष्ण "अमितेन्द्र " राधा क्षत्रिय राधा शर्मा रितु गुलाटी रिया स्पीक्स रिश्ते रिश्ते -नाते रूचि भल्ला रूपलाल बेदिया रेप रोचिका शर्मा लघु कथाएँ लता मंगेशकर लली लेख लेबर डे वंदना गुप्ता वंदना बाजपेयी वसंत पंचमी विजयारतनम विनीता शुक्ला विनोद खनगवाल विभा रानी श्रीवास्तव विशेष दिवस विश्व हास्य दिवस विश्वजीत 'सपन ' वीणा वत्सल वीरू सोनकर वैलेंटाइन डे व्यंग शरद पूर्णिमा शशि बंसल शशि श्रीवास्तव शांति पुरोहित शान्ति पाल शान्ति पुरोहित नोखा शायरी शिक्षक दिवस शिखा सिंह शिव शिवलिंग शिवा पुत्र शिवानी कोहली शिवानी जैन शर्मा श्राद्ध पक्ष श्रीमती एम डी त्रिपाठी संगम वर्मा संगीता पाण्डेय संगीता सिंह "भावना " संजना तिवारी संजय कुमार अविनाश संजय कुमार गिरि संजय वर्मा संजय वर्मा "दृष्टी " संजीत शुक्ला संध्या तिवारी संवेदनशीलता संस्मरण सकारात्मक चिंतन सक्सेस स्टोरीज सतीश राठी सत्या शर्मा 'कीर्ति ' सद्विचार सन्यास सपना मांगलिक सफलता समीक्षा सरबानी सेनगुप्ता सराह सरिता जैन सविता मिश्रा साक्षात्कार साधना सिंह सामाजिक लेख सावन का पहला सोमवार साहित्यिक लेख सीताराम गुप्ता सीमा सिंह सुधीर द्विवेदी सुनीता त्यागी सुमित्रा गुप्ता सुशांत सुप्रिय सुशील यादव सूर्य सूर्योदय सेल्फ केयर स्ट्रेस ईटिंग डिसऑर्डर स्त्री देह और बाजारवाद स्त्री विमर्श स्मिता दात्ये स्मिता शुक्ला स्वतंत्रता दिवस स्वामी विवेकानंद स्वास्थ्य जगत स्वेता मिश्रा हलचल आस -पास हलचल आसपास हामिद हास्य योग हिंदी दिवस हेडी लेमार होली की ठिठोली aforestation agla kadam astrology atoot bandhan atoot bandhan cover page atoot bandhan editorial cancer children issues children's day deepawali special E.book family&relatives father's day fb feeling lost friendship day general article GST guru health hindi divas hindi poetry hindi stories id immortal personalities interview janmashtami karvachauth literary articles memoirs mother's day motivational quotes motivational stories nanha guru positive thinking pragnency raksha bandhan rape religion riviews Riya speaks sarahah app satire short stories social articles spiritual articles stress eating sucesses sucesses stories swantantrta divas valentine day vandana bajpai women issues
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अटूट बंधन : " ब्लू व्हेल " का अंतिम टास्क
" ब्लू व्हेल " का अंतिम टास्क
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