ब्रेकअप बेल्स - समस्या के बीज बचपन में भी दबे हो सकते हैं

यह ब्रेकअप शब्द है तो छोटा सा पर कडवा इतना की इसकी कडवाहट पूरी जिंदगी में भर जाती हैं |यूँ तो  अलगाव या ब्रेकअप किसी भी रिश्ते का...

ब्रेकअप बेल्स - समस्या  के बीज बचपन में भी दबे हो सकते हैं


यह ब्रेकअप शब्द है तो छोटा सा पर कडवा इतना की इसकी कडवाहट पूरी जिंदगी में भर जाती हैं |यूँ तो  अलगाव या ब्रेकअप किसी भी रिश्ते का हो सकता है | कभी भी हो सकता है |पर कुछ रिश्ते जिन्हें हम सहेजना चाहते हैं , संभालना कहते हैं |चाहते है की उनका अटूट बंधन बना रहे |  उनका ब्रेक अप बहुत पीड़ा दायक होता है | कभी – कभी पूरा ब्रेकअप नहीं होता | फिर भी रिश्ते में पहले जैसी बात नहीं रहती | कुछ ऐसा होता है जो दो लोगों के बीच  स्थिर नहीं रहता | खो जाता है | वो है पहले जैसा प्यार , विश्वास और अपनापन | पर अगर आप किसी भी प्रिय रिश्ते से ब्रेकअप की एनालिसिस करेंगे तो पता चलेगा की कोई भी रिश्ता अचानक से नहीं टूटता | उसके टूटने की बहुत पहले हो चुकी होती है | अन्दर ही अंदर ब्रेक अपबेल्स बजने लगती हैं | जो हमें सुनाई तो दे रही होती हैं पर हम उन्हें अनदेखा करते रहते हैं | शायद तब तक जब तक रिश्ता बिखर न जाए | कितना अच्छा हो अगर हम ब्रेक अप बेल्स सुन सकें और समय रहते अपने रिश्ते को बचा लें | आज मैं एक सच्ची कहनी  कहानी शेयर कर रही हूँ की कैसे उन्होंने  समय रहते ब्रेक अप बेल्स को सुना और  अपने जीवनसाथी के साथ अपने खत्म होते रिश्ते को बचाया | कैसे  समझा की हमारे ताज़ा रिश्तों की  समस्याओं के तार हमारे बचपन में भी छिपे हो सकते है | इस कहानी को शेयर करने का उद्देश्य महज इतना है की अगर आप को भी ब्रेकअप बेल्स सुनाई दे रहीं हैं तो उन्हें अनदेखा न कर समस्या को समझें , समाधान खोजें और अपने खूबसूरत रिश्ते को बचा लें |

ब्रेकअप बेल्स - समस्या  के बीज बचपन में भी दबे हो सकते हैं


                     मैं खिड़की पर बैठी हुई  हुई थी | बाहर अपने ही घर के फ्रंट गार्डन में लगाए हुए कैक्टस देख रही थी | ये कैक्टस कुछ मैंने लगाये थे कुछ भानु ने | शादी के बाद कितना शौक था मुझे व् भानु को की हम अपने घर का गार्डन सबसे यूनीक बनायेंगे | न जाने कहाँ – कहाँ से ढूंढ कर लाये थे हम कैक्टस | पर अफ़सोस उस समय हमें कहाँ पता था की ये कैक्टस देखने में भले ही कितने सुन्दर लगें पर ये कैक्टस चुभते भी हैं | तार – तार कर देते हैं आत्मा को | विचित्र बात ये थी कि मेरे लगाए कैक्टस भानु को चुभ रहे थे और भानु के लगाये मुझको | लेकिन ये वो कैक्टस नहीं थे जो हमने अपने गार्डन में लगाए थे | ये तो हमारे मन की मिटटी में लग गए थे अपने आप न जाने कब , कैसे हमें अहसास ही नहीं हुआ | अहसास तब हुआ जब वो दूसरे को चुभने लगे |


मैं अपने विचारों में डूब उतरा रही थी | तभी भानु मुझे बैग लेकर ऑफिस जाते दिखे | जाते समय बाय करने का रिश्ता तो हमारा कब का खत्म हो गया था | पर आज ... आज मैं नहीं रुकी | दौड़ कर भानु के पास गयी और उससे कहा ,” भानु क्या तुम हमारे रिश्ते को एक मौका और दे सकते हो | भानु ने उड़ती सी नज़र मेरे ऊपर डाल कर कहा ,” देखो  निकिता वैसे तो कुछ होने वाला नहीं है | फिर भी इस आखिरी कोशिश में मैं तुम्हारे साथ हूँ |मैं भी नहीं चाहता की हमारे रिश्ते का ऐसा दर्दनाक अंत हो | कहकर भानु चले गए | मुझे ऐसा लगा जैसे एक – एक सांस के लिए तडपते मरीज को किसी ने ऑक्सीजन मास्क दे दिया है | इस शर्त के साथ जब तक रोग का इलाज हो इस मास्क को पह्ने रखो | अगर रोग का इलाज ढूँढने में असफल रहीं तो मास्क छीन लिया जाएगा | मेरे पास समय कम था | पर इतनी ख़ुशी जरूर थी कि अपने रिश्ते को भानु भी बचाना कहते हैं | मैं समय बर्बाद न करते हुए समस्या की जड़ तक जाने का प्रयास करने लगी |


कमरे में प्रवेश करते ही मैं विंड चाइम से टकरा गयी | घंटियाँ बजने लगीं | ऐसी घंटियाँ तो बहुत दिन से बज रहीं थीं पर मैं ही अनसुना कर रही थी | वो सामान्य घंटियाँ नहीं ब्रेकअप बेल्स थी |


मेरा और भानु प्रेम विवाह था | जब हम अपने एक कॉमन फ्रेंड की शादी में मिले थे तो लगा था जैसे हमें वो मिल गया जिसकी हमें तलाश थी |भानु बिलकुल वैसे ही थे जो मैं एक पुरुष में ढूंढ रही थी | लविंग , केयरिंग , प्रोटेक्टिव | भानु ने अपना व्यवसाय खुद अपने दम पर जमाया था | नया व्यवसाय किसी बच्चे को पालने जैसा होता है | ये मुझे पता था | उनके ऊपर काम का बोझ बहुत था | फिर भी वो मेरे लिए समय निकालते थे |जैसा की भानु कहते थे की मैं वो लड़की थी जिसे भानु तलाश रहे थे | मैं उच्च शिक्षित थी जॉब करती थी | व् अपनी जिंदगी अपने तरीके से संभाल रही थी | हम अपने रिश्ते से बहुत खुश थे | | हमने अपने घर वालों से बात की | उन्होंने हमारे रिश्ते को स्वीकृति दे दी | और दो महीने की जान पहचान के बाद हमने शादी कर ली | मैं भानु के साथ उसके शहर आ गयी | मैंने जॉब छोड़ दिया | सोंचा था एक दो महीने बाद फिर से कर लूंगी | भानु भी राजी थे |वो मुझे आत्मनिर्भर देखना चाहते थे | फिर ऐसा क्या हुआ की शादी के बाद इन दो महीनों में हम बदल गए | हम वो नहीं रह गए जिससे दूसरे ने कभी प्यार किया था |मैं भानु के पास और पास जाने की कोशिश करती और भानु मुझसे दूर बहुत दूर | मेरा करीब आना उन्हें नागवार गुज़रता और उनकी उपेक्षा मुझे |  हम दोनों का रिश्ते में दम घुटने लगा | फिर भी हमने एक साल रिश्ते को खींचा | हमने हर ब्रेक अप बेल को नज़रअंदाज किया |

वो हमारे रिश्ते का आखिरी पड़ाव था जब मैंने हमेशा की तरह भानु को व्हाट्स एप  मेसेज किया ,
” भानु तुम कहाँ हो ?”

seen आ गया पर कोई रिप्लाई नहीं |

मुझे बहुत दर्द हुआ , मैंने कई मेसेज किये पर भानु का कोई रिप्लाई नहीं आया | हाँ  seen आता रहा |

अंत में मैंने मेसेज किया ,” भानु मैं मर भी जाऊँगी  , तब भी क्या तुम एक सेकंड निकाल कर रिप्लाई नहीं करोगे | मुझे तुम्हारी जरूरत है ... प्लीज भानु , भानु प्लीज | ये मेसेज टाइप  करते समय मैं कितना रो रही थी | ये केवल मुझे पता था |इस बात से अनभिज्ञ भानु का संक्षिप्त सा मेसेज आया

मैं बीजी हूँ |

मेरा दिल टूट गया | नहीं अब भानु का इग्नोर करना मैं बर्दाश्त नहीं कर सकती | रोज – रोज मरने से अच्छा है इस रिश्ते को ही खत्म कर दो | मैंने एक लविंग केयरिंग , प्रोटेक्टिव पति चाहा था | क्या ये लव है , केयर है ?

शाम को मैंने भानु से बात की | भानु का  कहना था की इतना इंटरफियरेंस उनके बर्दाश्त के बाहर है | मैंने एक पढ़ी लिखी जॉब करने वाली लड़की से शादी की थी | जो स्वयं अपनी जिंदगी जीती हो व् दूसरे को भी उसकी प्राइवेसी दे | तुमने क्या किया ? जॉब किया ही नहीं | अब हर समय तुम कहा हो ,तुम कहाँ हो करती हो | आखिर कार मैं 24 घंटे तुम्हारे साथ नहीं बिता सकता | हर समय एक दूसरे से चिपके रहो ये मैं नहीं कर सकता | मुझे स्पेस चाहिए | एक दूसरे पर घंटों आरोप – प्रत्यारोप के बाद   आखिरकार हम एक दूसरे से अलग हो जाने के विनाशकारी नतीजे पर पहुँच गए |

हालंकि कहीं न कहीं मेरे मन में था की मैं तो ऐसी नहीं थी ? ऐसा क्या हुआ की शादी के बाद मैं बदल गयी ? क्यों बदल गयी ? शायद भानु को भी ऐसा लगा होगा | तभी तो उन्होंने आज मुझे रिश्ते को एक और मौका देने पर सहमति जताई |

शाम को हम दोनों मनोविज्ञानिक देवेश भटनागर के केबिन में थे | उन्होंने पहले मुझे बुलाया | मेरे बचपन और पास्ट  हिस्ट्री के बारे में जानकारी ली | फिर भानु को बुलाया  और उनसे उनके बचपन व् पास्ट हिस्ट्री के बारे में जानकारी ली | ये सिलसिला कई हफ्ते  चला |  इन सिटिंग्स में अब हम अकेले ही जाते थे | कितनी बार ऐसा होता की हम अपनी बात बताते बताते रोने लगते |
पर आज उन्होंने हम दोनों को साथ – साथ अपने केबिन में बुलाया था | हम दोनों सर झुकाए चुप- चाप किसी गुनाहगार की तरह उन के केबिन में उनके सामने बैठ गए |

डॉ . देवेश भटनागर ने बोलना शुरू किया ...

आप दोनों इस शादी को तोडना कहते हैं | ये आप का निजी फैसला है | पर मेरे हिसाब से इस झगडे में आप दोनों ही दोषी नहीं हैं | आप की समस्या के तार गहरे आप के बचपन में छिपे हैं |
हम दोनों एक दूसरे का मुँह देखने लगे |


डॉ . भटनागर ने भानु की तरफ देख कर कहा ,” भानु जी आप को निकिता के जीवन में गहरे झाँकने की जरूरत है | निकिता अपनि माँ और बड़े भाई के साथ रहती थी | उसके पिता दूसरे शहर में नौकरी करते | कभी – कभी आते | पर उन्हें बेटी से ज्यादा बेटे  से प्यार था | वो उसे  सफल देखना चाहते थे | वो अपने बेटे  के माध्यम से अपने वो सपने पूरे करना चाहते थे जो उन्होंने बचपन में देखे थे |बेटी तो लायबिलिटी है | शादी करो और गंगा नहाओ |  नन्ही निकिता इंतज़ार करती रही अपने पिता के प्रेम का | धीरे – धीरे उसे लगने लगा की शायद सफलता ही सब कुछ है | बेटे सफल होते हैं | नाम ऊँचा करते हैं | इसलिए पापा भाई को ज्यादा प्यार करते हैं | उन्हें लड़कियों की बुद्धि पर शक है | वो उन्हें कम तर  मानते है | नन्ही निकिता ने अपनी पढाई पर ध्यान दिया | उसे लगा एक यही माध्यम है अपने पिता के प्यार को वापस पाने का | वह पढाई में निरंतर सफल हुई उसने नौकरी की पर वो अपने पिता का दृष्टिकोण बदलने व् प्यार पाने में असफल रही | उसके पिता को लगता था की पढाई के कारण उस पर खर्चा ज्यादा हो गया है व् शादी में भी देर हो गयी है | वो सफलता ,वो नौकरी जो निकिता के लिए पिता का प्यार पाने का जरिया था | उसके प्रति निकिता का आकर्षण घट गया | अफ़सोस की निकिता की नौकरी व् आत्मनिर्भरता ही वो वजह थी जिससे तुम उसकी तरफ आकर्षित हुए |


जब निकिता के तपते मन को तुम्हारा प्यार मिला तो उसके अंदर  वो नन्ही बच्ची जाग गयी | जो पिता के प्यार के लिए तरस रही थी | वो इनसिक्योर थी | तुम्हारी जरा सी इग्नोरेंस उसे अन्दर तक हिला देती की कहीं तुम उसे छोड़ न दो | जितना उसके अन्दर भय होता वो तुम्हें और बाँधने की कोशिश करती | इतनी की तुम्हारा दम घुटने लगा |



इससे पहले की हम कुछ कह पाते डॉ . देवेश भटनागर मेरी तरफ मुखातिब हो कर बोले ,” निकता जी आपने जिस भानु से प्यार किया जिससे शादी की क्या आपने कभी उसे समझने की कोशिश की |

भानु की माँ एक narcissist हैं  | वो अपने परिवार को बिलकुल अपने तरीके से चलाना चाह्ती थी | भानु व् उसका छोटा भाई अपनी माँ के बेहेवियर डिफेक्ट से अनजान थे | पर उनके व्यवहार से आजिज़ आ  कर भानु के पिता ने उनसे तलाक ले लिया व् दूसरी शादी कर ली | वो भानु से मिलने आते पर भानु का ज्यादातर समय तो माँ के साथ ही बीतता | वो पूरी तरह  भानु को अपने कंट्रोल में रखती | ऐसे करो , वैसे करों , ये ऐसे क्यों किया वो वैसे क्यों किया | भानु उनकी रोक टोंक से आजिज़ आ गया था | पर उसके पास कोई चारा नहीं था | जब तक वह उस घर में रहा परेशान ही रहा | 

कॉलेज हॉस्टल में जाने के बाद उसे कुछ स्वतंत्रता मिली | फिर उसने अपना व्यवसाय शुरू किया | तभी तुम उसकी जिंदगी में आयीं | एक पढ़ी लिखी समझदार लड़की | जो अपनी जिंदगी के फैसले खुद करती है | भानु को लगा ऐसी लड़की जरूर उसे स्पेस देगी | पर शादी के बाद तुम्हारी इनसिक्योरिटी उसे उसकी बचपन की दर्दनाक यादों में ले जाने लगी | उसका दम घुटने लगा |
वो तुमसे थोडा दूर जाने का प्रयास करता और तुम और पास आने का | निकिता का clingy behaviour भानु को उसे इग्नोर  करने पर विवश करता | और भानु का इग्नोर करना निकिता की असुरक्षा और बढाता |

मेरा निष्कर्ष यही है की अगर आप दोनों इस बात को समझ कर इस समस्या को दूर कर सकते हैं तो हम कुछ सेशन और कर सकते हैं | जिससे आप के रिश्ते को बचाया जा सके | कह कर  डॉ चले गए |
हमारी आँखों में आँसूं थे | ओह , अनजाने ही सही हमने केवल अपनी समस्या समझी थी | दूसरे की नहीं |पर अब और नहीं |  हमने सेशन की स्वीकृति दे दी |

अब हम दोनों को एक दूसरे की परिस्थितियाँ समझनी थी |हमने डॉ . के कहे अनुसार एक दूसरे के घर जा कर रहना शुरू किया | हमें एक दूसरे का स्वाभाव ऐसा क्यों है इस बात को समझने में आसानी हुई | इसके साथ ही मुझे अपने  clingy behaviour या neediness को कंट्रोल करना था | क्योंकि भानु का व्यवहार उसी एक्शन का री एक्शन था | मैंने उस पर काम करना शुरू किया | 

मैंने महसूस किया की मैं जितना neediness दिखाती थी भानु उतनी ही दूर हो जाते | जिससे डर  कर मैं और neediness दिखाती | तो वो और दूर जाते | इसे पजेसिवनेस भी कह सकते हैं जहाँ हमें लगता है की साथी पर केवल मेरा अधिकार हो | और उसके २४ घंटे मेरे नाम हों | अगर वो ऑफिस में भी है तो कम से कम मेरे बारे में सोंच रहा हो | एक नार्मल रिश्ता ऐसा नहीं हो सकता | भानु को थोड़ी स्पेस देने के लिए मैंने जॉब ज्वाइन किया |  हमारी इस मेहनत के अच्छे परिणाम आने लगे | मुझे वापस से अपना शादी से पहले वाला भानु और भानु को शादी से पहले वाली निकता मिल गयी |

हमारा रिश्ता तो संभल गया पर मुझे लगा अगर किसी और का रिश्ता बिखर रहा हो तो उसकी कुछ मदद कर सकूँ |अगर आप या आप का कोई प्रियजन  इस समस्या से गुज़र रहा हो तो इसे अवश्य पढ़े |

जाने रिश्ते में कोई क्यों हो जाता है सुपरनीडी 

             यूँ तो हम किसी से भी गहरा रिश्ता बांधते हैं तो हमारी  इच्छा “अटूट बंधन “ बनाने की होती है | परन्तु एक के ज्यादा चिपकू या नीडी होने से ये बिखरने लगता है | दो लोगों का ये रिश्ता पति – पत्नी का हो सकता है , मित्रों का हो सकता है , माता – पिता और बच्चों का हो सकता है या भाई –बहन का हो सकता है | नीडी बनने  की वजह बचपन में छिपी होती हैं |


  • माता – या पिता में से किसी एक का प्यार पाने के लिए आपको बहुत संघर्ष करना पड़ा हो
  • भाई या बहन इतने श्रेष्ठ हो की उनके बीच परिवार के लोगों में अपने वजूद  का अहसास दिलाने के लिए आप को बहुत मेहनत  करनी पड़े |

  • केवल माँ या पिता एक ही मिले |
  • स्कूल में किसी टीचर का फेवरेट बनाने के लिए बहुत संघर्ष कर रह हों |
  • इन सब से बिलकुल विपरीत आप बहुत ज्यादा लाडले रहे हों | आपको जरूरत से ज्यादा अटेंशन मिला हो जिस कारण आप ये बर्दाश्त ही न कर पाए की आपका साथी आपके आलावा भी कुछ कर या सोंच सके |


  • बचपन में दिल में बहुत सारी  बातें दबा कर अच्छा व्यवहार करने में माहिर हों | हालाँकि आप ये दिखाते हो की आप सामान्य हैं पर अंदर ही अंदर तनाव लेवल बढ़ा हुआ रहता हो | एक तनावग्रस्त बच्चा एक तनाव ग्रस्त बड़ा बनता है |


             अगर इनमें से किसी एक भी समस्या से आप या आप का कोई प्रियजन गुज़रा  हैं तो बहुत संभावना है कि वह अपने उस रिश्ते में चिपकू हो जाये | समस्या का स्तर आपके बचपन में झेले गए स्तर के अनुपात में होगा |यहाँ ख़ास बात ये है की आप उसी रिश्ते में ही चिपकू होंगे जहाँ आप उसके खोने से या विलगाव से भयभीत होंगें | बाकी रिश्तों में आप बिलकुल नार्मल होंगे |ज्यादातर ये एक समय में एक ही रिश्ते तक सीमित रहता है | मुख्य रूप से गर्ल फ्रेंड / बॉय फ्रेंड या जीवन साथी के साथ | शुरू शरू में ऐसे लोगों के साथी को आभास ही नहीं हो पाता की आप किस कदर उसके जीवन से एकाकार होना कहते हैं |


क्या हैं सुपरनीडी साथी के लक्षण

  • नए रिश्ते तेजी से आगे बढ़ाना
  • लगातार मेसेज या फोन करते रहना
  • उसकी प्रतिक्रिया न मिलने पर नर्वस हो जाना ( कई लोग किसी खास का फेसबुक लाइक तक न मिलने से नर्वस हो जाते हैं )
  • हर समय उसके आस पास मौजूद रहने की कोशिश ( clingy behaviour).. यहाँ मैं स्पष्ट करना चाहती हूँ की हम सब अपने साथी का साथ चाहते हैं पर ये नहीं चाहते की उसे हमारी पीठ से सिल दिया जाए |
  • अविश्वास
  • उसकी सामाजिक क्रियाकलापों पर  शत –प्रतिशत ध्यान देना
  • कोशिश करना की उसकी हर इच्छा पूरी कर दे | ( सावधान करना चाहूँगी  की ऐसी स्थिति का अक्सर लड़के फायदा उठाने की कोशिश करते हैं )


clingy behaviour  क्यों हो जाता है नकारात्मक


                किसी भी clingy behaviour करने वाले का पार्टनर  धीरे – धीरे परेशान  हो कर दूर होना शुरू कर देता है  | ये बात clingy व्यक्ति के मन में और घबराहट पैदा करेगी वो और पास जाने की कोशिश करेगा और दूसरा और दूर जाने की | needy पार्टनर अपनी असुरक्षा को शक के दायरों में भी रख कर दूसरे पर इलज़ाम लगा सकता है | हो सकता है की इनका किसी से अफेयर हो इसलिए मुझे इग्नोर कर रहे हैं | इस बात की प्रतिक्रिया दूसरा चीख चिल्ला कर दे सकता है |कई बार वर्बल एब्यूज फिजिकल एब्यूज में भी बदल जाता है | और लाख सँभालने की कोशिश के बाद रिश्तों का अटूट बंधन टूटता  चला जाता है |

clingy behaviour  को कैसे दूर करें



                            सबसे पहले ये समझने के बाद की अत्यधिक चिपकू (clingy behaviour) होना एक गुण नहीं अवगुण है जो प्यार को बढाता नहीं खत्म करता है | अगर आप को लागता  है की आप अपने खास रिश्तों के प्रति चिपकू हो जाते हैं तो आप को कुछ सुधार की जरूरत है |

अपनी पकड़ को ढीला करना सीखिए


                                   यह समझना होगा की clingy व्यक्ति जिसे रिश्तों की मजबूत डोर समझ रहा है उसमें रिश्ते का दम घुट रहा है |एक दूसरे को स्पेस दे | याद रखिये ये छोटी सी दूरी प्यार को बढ़ा देती है | यह सच है की हर समय साथ नहीं रहा जा सकता | अकेले होना और अकेलेपन में अंतर है | अपने साथ एन्जॉय कीजिये | जब आप के पार्टनर को लगेगा की आप अपने साथ खुश हैं तो वो आपको ज्वाइन करने की कोशिश करेगा |  


विश्वास

                   आपको साथी के प्रेम पर विश्वास करना होगा | जो आपको प्यार करता है वो जरूर आपके फोन कॉल्स या टेक्स्ट मेसेज का जवाब देना चाहेगा | पर ये आप को भी  समझना होगा की हो सकता है की वो कुछ जरूरी काम में व्यस्त हो , किसी और कॉल  पर हो , कार ड्राइव कर रहा /रही हो | ऐसे में आप को तुरंत अधीर हो कर बीसियों मेसेज करने के स्थान पर प्रतीक्षा करनी चाहिए | और अविश्वास तब तक न करें जब तक उसके कुछ पुख्ता प्रमाण न मिलें |


सेल्फ लव

         हर मनोवैज्ञानिक समस्या की तरह यहाँ भी सेल्फ लव का स्थान है | आप किसी के प्रति चिपकू इस लिए हो जाते हैं क्योंकि आपको कहीं न कहीं सेल्फ वर्थ तभी महसूस होती है | जब कोई दूसरा यह अहसास कराये | इससे आप अपनी चाबी दूसरे के हाथ दे देते हैं | ऐसे में आपको हर समय दूसरे की स्वीकारोक्ति की आवश्यकता होती है |


थोडा अपने बारे में सोंचिये

               किसी को अपनी जिंदगी में शामिल करने से पहले सोंचिये की आप क्यों ये रिश्ता चाहते हैं | क्या आप चाहते हैं की कोई ऐसा हो जो हमेशा आप को खुश रख सके | अगर ऐसा है तो रिश्ते में आगे बढ़ने से पहले ठहर जाइए | अपने आप से खुश रहना सीखिए फिर कोई रिश्ता शुरू करिए |

बातचीत

      अगर आप को लगता है की आप के साथी का clingy behaviour आप के रिश्ते को खोखला कर रहा है तो आपस में बात करें | जरूरी हो तो मनोवैज्ञानिक की सलाह लें | परन्तु अगर रोज की कलह , मारपीट या वर्बल एब्यूज जारी रहे तो बेहतर है अलग हो जाएँ |



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“मतवाला” #NaturalSelfi 15 अगस्त २६ जनवरी अंजू शर्मा अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस अंतर्राष्ट्रीय बिटिया दिवस अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस अकेलापन अक्षय तृतीया अखिल राज शाह अगला कदम अजय कुमार अजय कुमार श्रीवास्तव अजय कुमार श्रीवास्तव (दीपू) अजय चंद्रवंशी अटूट बंधन अटूट बंधन अंक -१० अनुक्रमाणिका अटूट बंधन कवर पेज अटूट बंधन विशिष्ट रत्न सम्मान अटूट बंधन सम्पादकीय अनामिका अनामिका चक्रवर्ती अनुपमा सरकार अन्तर करवड़े अन्तराष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) अपर्णा परवीन कुमार अपर्णा साह अम्बरीष त्रिपाठी अरविन्द कुमार खेड़े अर्चना नायडु अर्चना बाजपेयी अर्जुन सिंह अर्थ डे अशोक कुमार अशोक के परुथी आत्महत्या आध्यात्मिक लेख आभा दुबे आयुष झा "आस्तीक " आलोक कुमार सातपुते आशा पाण्डेय ओझा आसाढ़ पूर्णिमा इंजी .आशा शर्मा इंदु सिंह इमरान रिजवी इमोशनल ट्रिगर्स ई बुक ईद उत्पल शर्मा "पार्थ" उपवास उपासना सियाग उमा अग्रवाल उम्मीदें उषा अवस्थी एकता शारदा एम्पैथी ओमकार मणि त्रिपाठी ओशो औरत कंगना रानौत कंचन पाठक कंचन लता जायसवाल कबीर करवाचौथ कर्म कल्पना मिश्रा बाजपेयी कवि मनोज कुमार कविता बिंदल कहानी कहानी संग्रह कार्ल मार्क्स काव्य जगत काव्यजगत किरण आर्य किरण सिंह कुमार गौरव कुसुम पालीवाल कृष्ण कुमार यादव कैंसर ग़ज़ल गणेश चतुर्थी गहरा दुःख गाँधी जयंती गिरीश चन्द्र पाण्डेय गीता गुरु गुरु दक्षिणा गुरु पूर्णिमा गुस्सा चंद्रेश कुमार छतलानी चन्द्र प्रभा सूद चन्द्र मौली पाण्डेय चीन चेतन भगत छठ जन्माष्टमी जय कन्हैया लाल की जिनपिंग जी एस टी जैन ज्योतिष झगडे टफ टाइम टीचर टीचर्स डे ठुमरी समाज्ञ्री गिरजा देवी डाॅ.भारती गाँधी डिम्पल गौड़ 'अनन्या ' डिम्पल गौड़ 'अनन्या' डॉ . आशुतोष शुक्ला डॉ .जगदीश गाँधी डॉ .संगीता गाँधी डॉ अब्दुल कलाम डॉ अलका अग्रवाल डॉ जगदीश गाँधी डॉ भारती वर्मा बौड़ाई डॉ मधु त्रिवेदी डॉ रमा द्विवेदी डॉ लक्ष्मी बाजपेयी डॉ संगीता गांधी डॉ. भारती गांधी डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई डॉ.जगदीश गाँधी डॉली अग्रवाल ढिंगली तीज तीन तलाक तृप्ति वर्मा त्यौहार दशहरा दीपावली स्पेशल दीपिका कुमारी दीप्ति दीपेन्द्र कपूर दुर्गा अष्टमी देवशयनी एकादशी देश -दुनिया देश भक्ति की कवितायें धर्म नंदा पाण्डेय नन्हा गुरु नवरात्र नवीन मणि त्रिपाठी नागेश्वरी राव नारी निधि जैन निबंध निशा कुलश्रेष्ठ नीता मेहरोत्रा नीलम गुप्ता नेहा अग्रवाल नेहा नाहटा नेहा बाजपेयी पंकज प्रखर पंखुरी सिन्हा पंडित दीनदयाल उपाध्याय परिचर्चा -१ परिचर्चा -१ कवितायेँ पर्व त्यौहार पारदर्शिता पार्थ शर्मा पूनम डोंगरा पूनम पाठक प्रतिभा पाण्डेय प्रदीप कुमार सिंह ‘पाल’ प्रिंसेस डायना प्रिया मिश्रा प्रेम कवितायेँ प्रेम रंजन अनिमेष प्रेरक कथाएँ प्रेरक प्रसंग प्रेरक विचार फादर्स डे फीलिंग लॉस्ट फुंसियाँ फेसबुक फॉरगिवनेस फ्रेंडशिप डे फ्रेडरिक नीत्से बहादुर शाह जफ़र बाल कहानी बाल जगत बाल दिवस बाल मनो विज्ञान बाल-मन बिल गेट्स बीनू भटनागर बुजुर्ग बेगम अख्तर ब्लू व्हेल ब्लॉगिंग भाई - 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अटूट बंधन : ब्रेकअप बेल्स - समस्या के बीज बचपन में भी दबे हो सकते हैं
ब्रेकअप बेल्स - समस्या के बीज बचपन में भी दबे हो सकते हैं
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अटूट बंधन
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