पुराने जमाने में राज़ दरबारों में तरह - तरह की प्रतियोगिताएं हुआ करती थी | इससे लोगों केज्ञान का विकास तो होता ही था |उनको एक शिक्षा भी मिलती थी | वो शिक्षाएं आज भी हमारे काम आ रही हैं | तो आज भी आपसे एक ऐसी ही कहानी शेयर कर रहा हूँ | 

तो कहानी यह है की एक राजा था | उसके राज्य में बहुत सारे विद्वान लोग थे | अक्सर उनके दरबार में दूसरे राज्यों के लोग आते व् दोनों के बीच विद्वता  की परीक्षा होती | ज्यादातर उसी के राज्य के लोग जीतते | इसलिए राजा को गर्व तो रहता ही | उसके राज्य की ख्याति भी दूर - दूर तक फ़ैल रही थी | 

एक बार उसके दरबार में एक हीरों का व्यापारी आया | उसने राजा को दो हीरे दिए और कहा ,” इनमें से एक असली है और एक नकली | आप ऐसा करिए की इसे अपने पूरे राज्य में घुमाइए |  अगर कोई बता देगा की कौन सा नकली है तो यह हीरा उसका |


 और अगर नहीं बता पाता  है तो आप उस हीरे के मूल्य से दोगुना धन मुझे दीजिये | हीरे तो देखने में वाकई  एक जैसे थे | राजा असमंजस में पड़  गया | राज्य में ढिंढोरा पिटवा  दिया गया , “ आइये –आइये और असली हीरा पहचान कर उसे घर  ले जाइए |


 भीड़ लग गयी लोग आते गए हीरा देखते गए पर  पहचानने में असफल रहे | तभी एक अँधा व्यक्ति आया | उसने दोनों हीरे अपने हाथ में लिए और एक को वापस करते हुए बोला , “ ये है असली हीरा , जो मेरे हाथ में है वो तो निरा कांच है | 

हीरे का व्यापारी असमंजस  में पड़ गया ,” वाकई उसने सही पहचाना था , पर कैसे ? उसे तो दिखाई ही नहीं देता | अँधा व्यक्ति मुस्कुराया , हमें छू कर पता चला सरकार | इस धूप  में जो गर्म हो गया वो कांच जो ठंडा ही रहा वो हीरा |

अब राजा ने व्यापारी से पूंछा क्या आप का भी यही तरीका था | व्यापारी ने कहा , “ नहीं महाराज , कह कर उसने दोनों टुकड़े जमीन पर पटक दिए | कांच बिखर गया | पर हीरा  जैसे का तैसा ही रहा | 
राजा बहुत खुश हुआ | उसने शर्त के मुताबिक़  उस अंधे व्यक्ति को हीरा दे दिया व् व्यापारी को सम्मान के साथ उसके राज्य  भेज दिया  | 

                         दोस्तों इस छोटी सी कहानी से हमें बहुत बड़ी सीख मिलती है | जिसे हम अपनी जिंदगी में इस्तेमाल कर सकते हैं | दरसल हीरा सफलता है | जैसा ही सभी जानते हैं की सफल होने के मार्ग में बार - बार असफल होना पड़ता है | जो लोग आज सफल है न और जो असफल हैं उनमें बस इतना अंतर है की सफल लोगों ने असफल होने के बाद भी प्रयास करना नहीं छोड़ा |  उन्होंने अपनी कमियाँ ढूंढी उन्हें दूर किया और उस काम को अलग तरीके से करा शुरू किया | 

पर करना इतना आसन भी नहीं है उसके लिए पोजिटिव  एटीट्युड रखना पड़ता है | असफलताएं या तो व्यक्ति को तोड़ देती हैं या व्यक्ति अपना ध्यान व् शक्ति  काम पर लगाने के स्थान पर गुस्से और झुन्झुलाने में लगा देता हैं | जिससे तापमान इतना बढ़ा जाता है की व्यक्ति रोगी हो जाता है | दोनों ही परिस्तिथियों में सफलता का हीरा नहीं मिलता |इसलिए अगर सफलता चाहिए तो अपने को सकारात्मक या पॉजिटिव रखना होगा | तभी सफलता का असली हीरा मिलेगा | 

दीपक मित्तल 

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