कौन नहीं है जो अपने जीवनसाथी के साथ अटूट बंधन में विश्वास रखता हो | फिर भी रिश्ते टूट रहे हैं | जरूरी है की डेटिंग पर ही अपने भावी जीवनसाथी को अच्छी तरह से समझ लिया जाए

लडकियाँ भावी जीवन साथी चुनते समय ध्यान रखे ये 7 बातें

 नाजुक , नादान और बेंतहा खूबसूरत सी  रोली एक मेडिकल स्टूडेंट थीं  | कुछ ही समय में उसकी MBBS की डिग्री कम्प्लीट होने वाली थी  | जैसा की आम भारतीय समाज में होता है | माता – पिता उसके लिए सुयोग्य वर खोजने लगे |आम माता –पिता की तरह वो भी टूटती शादियों से अनजान नहीं थे |   माता –पिता जानते थे की रोली पढ़ी – लिखी शिक्षित लड़की है | इसलिए उन्होंने प्रयास किया की जिन लड़कों को उन्होंने पसंद किया है | रोली उनसे कई बार मिले , बातचीत करे व् तब किसी निर्णय पर पहुंचे | आधुनिक समय में इसे डेटिंग भी कहते हैं | रोली ने उनमें से एक लड़के निशांत  से मिलने का फैसला किया | निशांत IIM  पास आउट , देखने में सुन्दर , बातचीत में सभ्य लगा | रोली को वो पहली नज़र में  ही पसंद आ गया | उसने माता – पिता से निशांत के साथ रिश्ते के लिए हाँ कह दिया | उसके बाद वो लोग कई बार मिले पर एक दूसरे के आकर्षण में एक कदर बंधे रहे की आपस की कॉम्पेटिबिलिटी जांचने की कोई जरूरत ही नहीं समझी |
                  
शादी के बाद रोली को निशांत का एक अलग ही रूप नज़र आया | वो रूप जिससे वो बिलकुल अनभिग्य थी | रोज – रोज के झगडे कलह से जीवन दूभर हो रहा था | जैसा कि हमेशा से होता है समाज सारा दोष रोली के सर पर डाल रहा था | अरे , शादी से पहले इतनी बार मिलने का मौका दिया | तब क्यों नहीं देखा | अब सब दोष क्यों दिखाई दे रहे हैं | एक खूबसूरत रिश्ता जिसे "अटूट बंधन" बनना था कुछ समय रोते घिसटते चला और अंत में टूट गया |

                              ये कहानी सिर्फ रोली की नहीं है | आज माता – पिता जहाँ बच्चों को शादी से पहले एक दूसरे को जानने समझने का मौका दे रहे हैं | फिर भी बच्चे उस समय केवल रूप , आकर्षण , पैसे , हास्य बोध के जाल में इस तरह उलझे रहते हैं की वो आपसी साझेदारी के बारे में नहीं सोंचते | बेहतर हो कि वो उस समय आपसी compatibility   जांच ले | फिर शादी का फैसला लें

  लडकियाँ जीवन साथी चुनते समय ध्यान रखे ये 7 बातें

                       
                             आज से  १५ , २० साल पहले की बात थी की माता – पिता अपने बच्चों के लिए जीवन साथी खोजते थे | इसके लिए बाकायदा वो मामा , चाचा , मौसा को साथ ले जाते थे | लड़के वाले देखने आते थे | और लडकियां दिखाई जाती थीं | लडकियाँ  दिखाना एक बहुत बड़ा कार्यक्रम होता था | सजे धजे घर के बीच में ढेरों नाश्तों से लड़के वालों का स्वागत करते हुए  लड़की वाले अपनी लड़की को चाय की ट्रे के साथ बुलाते थे | लडकियां सकुचाती शर्माती सी आती | उन्हें अपने से पूंछे जाने वाले प्रश्नों का संक्षिप्त उत्तर देना होता था | वो जमाना था जब शादियों में लड़केवालों की पसंद अहम् होती थी | लड़कियों को बोलने का अधिकार नहीं था | उनकी पसंद –नापसंद के स्थान पर उन्हें बस परिवार की पसंद पर मोहर लगानी होती थी | लड़के बोल सकते थे ... पर कितना ?निर्णय वहां भी परिवार का होता था |

                          जमाना बदला | आज विवाह का अर्थ केवल एक साथी नहीं जिसके साथ जीवन काटना है | आज विवाह का अर्थ है दो लोग मिलकर जीवन को बहुत खूबसूरत बनाये | उनमें मानसिक व् वैचारिक स्तर पर भी सामनता हो | लड़कियों की बढती शिक्षा व् आत्मनिर्भरता के साथ के साथ दोनों के बीच में ये समानता मिलाना बहुत जरूरी हो गया है | इसीलिए आज न सिर्फ लड़कों वरन लड़कियों की पसंद को भी तवज्जो दी जा रही हैं | माता – पिता की कोशिश रहती है की लड़का /लड़की आपस में बात चीत करें , एक दूसरे को समझें व् अगर उनमें compatibility हैं तभी marriage के लिए आगे बढें |


                        इतना सब कुछ होने के बाद भी आज विवाह ज्यादा टूट रहे हैं | टूटने वाले विवाहों में arranged marriage ही नहीं कई love marriage भी हैं | इसका कारण ये हैं जब प्रेम सम्बन्ध चल रहा होता है या जब माता – पिता शादी से पहले मुलाक़ात करने को कहते हैं तो लड़का / लड़की केवल बाहरी सौन्दर्य में उलझे रहते हैं | ज्यादा से ज्यादा समय अच्छा दिखने में लगा देते हैं | और स्वयं भी दूसरे की personality, looks, height, colour या salary package के जाल में इतना उलझे रहते हैं की इसी को जीवन साथी बनाने का आधार बना लेते हैं | लेकिन जीवन की खुशियाँ केवल रूप , रंग , पैकेज से नहीं आती है | ये तो एक दूसरे को बेहतर तरीके से समझने से आती हैं |

अगर आप भी जीवन साथी की तालाश में डेटिंग कर रहे हैं तो आप को कुछ ख़ास बातों को चेक करना पड़ेगा | जिससे आगे आप दोनों में compatibility issuses न आये |आप दोनों एक दूसरे का पूरी तरह से साथ दें | आप का आगे का जीवन प्यारके खुश नुमा अहसास से भरा हो |

1)       वो दूसरी महिलाओं के प्रति कैसा व्यवहार रखता है 

                                                   कई  भी पुरुष महिलाओं के साथ कैसा व्यवहार करता है ये जाना इसलिए जरूरी है क्योंकि देर सवेर वो आपके साथ भी वैसा ही बर्ताव करेगा | भले ही आज वो आप पर अपना बेस्ट इम्प्रेशन डालने के लिए बहुत अच्छे से बात कर रहा हो पर कल को वो अवश्य बदलेगा | क्योंकि किसी भी इंसान का बेसिक नेचर कभी नहीं बदलता है | महिलाओं के प्रति उसके व्यवहार को आप तीन तरीके से जज कर सकती हैं |

अ ) जेंडर x के प्रति उसकी भाषा पर धयान दें 

संध्या जब दीपेश से मिली तो उसका उसका दिल खुश हो गया | दीपेश अच्छा पढ़ा – लिखा , नौकरी पेशा लड़का है | देखने में ऐसा की कोई भी फ़िदा हो जाए | पहली डेट उनकी होटल में थी | फिर मूवी में फिर पार्क में | तीनों बार संध्या के प्रति दीपेश का व्यवहार बहुत अच्छा था | ज्यादातर बातों  में वो उसकी हाँ में हां मिला ही देता | लेकिन जब बात  अन्य महिलाओं की आती तो उसके तेवर बदलते देर नहीं लगती | वो बात – बात पर लड़कियों को दोष देता | जैसे ... आखिर वो कपडे ऐसे पहनती हैं तो खुद ही रेप को आमंत्रित करती हैं | अब लड़कियों को घर और बच्चे पालने में कोई रूचि रह नहीं गयी है | उन्हें तो बस बेमतलब पुरुष की बराबरी करनी है | पैसा , पैसा ... आखिर ये पैसा जाता तो पार्लर में ही है ना |

ब) उसके घर की अन्य महिलाओं के प्रति उसके क्या विचार हैं

                        जरा इस भाषा पर गौर करिए | मैं अपनी माँ का बहुत सम्मान करता हूँ क्योंकि उन्होंने अपना पूरा जीवन पिताजी की ख़ुशी को अपनी ख़ुशी समझने में निकाल दिया | वो शिक्षित थी पर उन्होंने कभी अपने बारे में सोंचा नहीं | तुम नहीं जानती ,मेरे जीजाजी अक्सर मेरी बहन पर हाथ उठा देते हैं | पर मेरी बहन बहुत अच्छी है वो रो लेगी लेकिन पलट कर जवाब नहीं देती | बहुत पवित्र प्यार है उसका | मेरी अपनी भाभी से नहीं बनती जब देखो तब भैया की बात काटती रहती हैं | अरे क्या जरूरत है | आखिर वो भी तो समझदार हैं | जो कह दिया वो मान लो |ये उदहारण रेड फ्लैग हैं | अगर कोई औरतों को केवल दबी - कुचली स्थिति में रहने को ही आदर्श मानता है तो शादी के बाद आप से क्या एक्स्पेक्ट करेगा , आप खुद ही समझ सकती हैं | 

स )अनजान महिलाओं के प्रति उसका व्यवहार

                      ये बात जरा ध्यान से देखने की है की अनजान महिलाओं के प्रति उसका व्यवहार कैसा है | क्या वो हम उम्र अजनबी महिलाओं को देखते ही बाल संवारने लगता है या कुछ ऐसा करने लगता है कि वो इम्प्रेस हो | वो अन्य महिलाओं के सामने आते ही अभद्रता भरा व्यवहार करता है | उनसे ठीक से बात नहीं करता | झिड़क कर बात करता है |

                                 महिलाओं के प्रति इस तरह की सोंच या व्यहार रखना आपके लिए रेड फ्लैग है | जितनी जल्दी हो सके ऐसे व्यक्ति से किनारा कर लीजिये |

2)       आप दोनों में कितनी समानताएं हैं

                                                अक्सर  फ़िल्मी दुनिया में जीने वाले लोग " ऑपोजिट अट्रेक्ट" के भुलावे में पड़े रहते हैं | लेकिन सर्वें कहता है की जीवन साथी से जितनी ज्यादा समानताएं होंगी वो रिश्ता उतना ही मजबूत होगा | हालांकि आजकल एक दूसरे को स्पेस देने की बात की जाती है  | इसका मतलब ये होता है की जो चीज एक को नहीं पसंद है वो दूसरा थोड़ी देर कर सकता है | या थोड़ी देर इस सोंच के बिना अपनी इच्छा से जी सकता है कि ये बात उसके जीवन साथी को पसंद नहीं है | परन्तु अगर असमानताएं ज्यादा हो तो स्पेस देते – देते ये रिश्ता स्पेस में खो जाएगा | यानि जब आप दोनों के पास कुछ भी साथ करने लायक होगा ही नहीं तो आप साथ वक्त कैसे बिताएंगे | 

रिश्ता सिर्फ खाना और सोना ही नहीं है |
                      

कुछ मुख्य मुद्दों पर राय समान होनी चाहिए जैसे दोनों कितने आउट गोइंग हैं वर्ना छुट्टी इस बात में झगड़ते हुए ही बीत जायेगी कि घर में पॉपकॉर्न खाते हुए मूवी देखी  जाए या बाहर डिस्को में जाया जाए | अभी कुछ दिन पहले ब्रह्मकुमारी शिवानी जी का वीडियो देख राही थी | उसमें पति - पत्नी के बीच ये विवाद था की पति चाहता था थोडा शहर के आउटर में रहा जाए जहाँ बहुत शांति हो व् पत्नी चाहती थी की शहर के बीचों - बीच में रहा जाए जहां हर समय शोर हो ताकि अकेलापन न लगे |
             खर्च के मामले में आप दोनों कैसे हैं ,एक दूसरे के कैरियर को सपोर्ट देने में आप के क्या ख्याल हैं | बच्चों के लालन – पालन के बारे में अगर आप के विचार समान होंगे तो आप उनका अच्छे से लालन पालन कर पायेंगे |आंकड़े कहते हैं की जहाँ कपल सिमिलर होते हैं वहां लड़ाई की संभावना 75% तक कम होती हैं |

                  इसलिए जीवन साथी चुनते समय समानताओं पर विशेष ध्यान दे | यहाँ यह मतलब नहीं है कि हम शारीरिक समानता मिलाएं जैसे कि दोनों का रंग , कद – काठी एक सी हो | बेशक हम सब यही मिलाते हैं और कुछ हद तक  मिलाना भी चाहिए | लेकिन जरा सोंचिये अगर आप कविता लिखती हैं और मिस्टर वो भी कविताओं का दीवाना है या आप दोनों हैरी पॉटर के हार्ड कोर फैन हैं | या अप दोनों का फेव्रत शौक सड़क पर गोलगप्पे खाना है तो क्या जिंदगी कुछ और हसीं नहीं हो जायेगी ?

3)   उसके     झगड़े का पैटर्न क्या है


             जब आप दोनों बहुत समय एक दूसरे के साथ बिताएंगे | तो झगडा भी अवश्य होगा | या फिर कोई राजनैतिक बहस भी हो सकती है | देश प्रदेश की किसी बात पर आप दोनों के व्यूज अलग हो सकते हैं | अगर कुछ न भी हो तो जान बूझ कर कुछ ऐसी बात क्रिएट कीजिये जिससे आप लोगों की बहस हो | क्योंकि ये एक लिटमस टेस्ट है यहाँ आप को देखना है कि “ difference of opinion” पर  उसका व्यवहार कैसा होता है |

क्या वो बहुत जोर से चीखने ,चिल्लाने लगता है ?

क्या वो आपके तथ्यों को न सिर्फ नकार देता है बल्कि उनका मज़ाक भी उड़ाता है |

क्या वो चाहता है की आप उसके विचारों को बिलकुल सही मान कर अपने विचारों को बदल लें |

                       अगर उसके झगड़े का पैटर्न ये है तो यह व्यक्ति आप की जिंदगी में बहुत दर्द घोल सकता है | हम सब अपने विचारों से प्यार करते हैं | विज्ञानं कहता है कि हम अपने विचारों के प्रति वैसे ही बायस्ड हो जाते हैं जैसे अपने बच्चों के प्रति | लेकिन अगर किसी में केवल अपने विचारों के स्थान पर दूसरे विचारों के प्रति आदर भाव नहीं है या सामंजस्य भाव नहीं है या वो आपके विचारों को बदलना चाहता है | तो वो कल आपको बदलने की कोशिश करेगा | ये बहुत खतरनाक है | क्योंकि अगर घर के अन्दर आप अपने “ट्रू सेल्फ “ में नहीं रह सकती तो आप कभी खुश नहीं रह पाएंगी | लेकिन अगर वो disagreement को बिना झगडे के स्वीकार करता है | तो उस व्यक्ति के साथ आपका जीवन सुरक्षित है | यहाँ आप दोनों किसी बात पर मतभेद को मनभेद के बिना स्वीकार कर सकते हैं | और आपस में खुश रह सकते हैं |यहाँ यह भी देखने की जरूरत है की झगडे की समाप्ति किस तरह होती है | क्या कभी गलत बोलने पर वो सॉरी कहता है या झगडे के बाद बच्चों की तरह बिलकुल भूल जाता है कि कभी झगडा भी हुआ था | वैसे ये दोनों प्लस साइन हैं तब आप बेशक आगे बढ़ सकते हैं | 

4)सामान विश्वास की रिश्ता चलेगा


                             जब जो लोग शादी के बारे में सामान रूप से सीरियस होंगे तभी रिश्ते के चलने की संभावना है |आज के जमाने में ये चलन शुरू हो गया है जहाँ लोग ये सोंच कर शादी करते हैं कि अगर रिश्ता चला तो ठीक वर्ना तलाक का ऑप्शन तो है ही | यहाँ मैं ये स्पष्ट कर दूँ कि तलाक बुरी चीज नहीं है |ऐसे रिश्ते को ढोने से जिसमें तनाव और घुटन भरी हो कोई फायदा नहीं है | लेकिन जिस तरह से आज बात – बात पर रिश्ते टूट रहे हैं | दोनों तरफ के माता – पिता इस बात के लिए तैयार बैठे रहते हैं | हर माता –पिता को लगता है कि उनका बच्चा बिलकुल सही है | लेकिन "अगर कोई मेरे हिसाब से सही नहीं लग रहा है तो उससे रिश्ता तोड़ कर आगे बढ़ जाओं, भी हमेशा समस्या का समाधन नहीं होता | रिश्ता टूटना गहरे दर्द देता है | dating का concept इसीलिये आया की रिश्ता न टूटे | इसलिए ये जानने का प्रयास करें कि शादी को चलाने के बारे में उसके क्या विचार हैं | अगर उसके विचार हैं की हम प्रयास कर रहे हैं , नहीं चली तो अलग हो जायेंगे , या वो सोंचता है कि जब भी डिस्प्यूट होगी हम मिलकर सुलझाएंगे |यहाँ रिश्ता चलने की उम्मीद है | रिश्ता आनन् – फानन में जरा – जरा से क्रोध में नहीं टूटेगा | यहाँ एक दूसरे की बात को समझने व् सुलझाने का प्रयास किया जाएगा |

5)इमोशनल स्टेबिलिटी


                      किसी से जीवन भर का रिश्ता बनाने से पहले जरूरी है कि उसकी  emotional stability का भी टेस्ट लें  | जिन लोगों में इमोशनल स्टेबिलिटी  नहीं होती है वो मूडी , टची , चिंतित दिमाग और बात – बात पर गुस्सा करने वाले होते हैं | ये व्यक्ति neuroticism ( opposite to emotional stability) के शिकार होते हैं | अकसर ये jealous और न क्षमा करने वाले होते हैं | ऐसे लोगों के साथ निभाना मुश्किल होता है | अगर आप को शुरू में ही लग जाए की व्यक्ति neuroticism वाले लक्ष्ण है तो पहले ही पीछे हट जाए |जो व्यक्ति इमोशनली स्टेबल होगा | वो अवश्य ही किसी समस्या के आ जाने पर आपा  नहीं खो देगा | या आपको बेवजह दोष नहीं देने लगेगा | बल्कि समस्या के आ जाने पर वो शांत दिमाग से उसे सुलझाने का प्रयास करेगा |

  6  ) आप साइलेंस कैसे शेयर करते हो



                    भावी जीवन साथी को बात चीत से जज करने के साथ – साथ यह देखना भी जरूरी है कि आप साइलेंस कैसे शेयर करते हो | क्या उसे आपका साइलेंस बिलकुल भी बर्दाश्त नहीं होता | वो जबरदस्ती कुछ बोलने लगता है , या आप से कुछ बुलवाना चाहता है | तो जरा सोंचिये | अगर आप दोनों एक दूसरे के साथ साइलेंस शेयर कर सकते हैं बिना किसी अपराध बोध के , बिना पछतावे के , बिना इस चिंता के की कहीं इससे हमारा रिश्ता तो खतरे में नहीं पड़ जाएगा |जीवन में शब्द जितने महत्वपूर्ण हैं साइलेंस भी उतना ही महत्वपूर्ण है | साइलेंस आपको आपके इनर वर्ल्ड से जोड़ता है | जब आप अपने से कनेक्ट होते हो | तभी आप की बॉन्डिंग  हर रिश्ते से अच्छी होती है | लेकिन अगर किसी रिश्ते में लगातार बोलना रिश्तों को चलाने की जरूरत बन जाए  या उससे भी ज्यादा की अगला आप के चुप होते ही बोरियत महसूस करने लगे तो इसे रेड फ्लैग समझिये | किसी के मौन को पढना या मौन की भाषा को समझना किसी रिश्ते की compaitility   समझने का सबसे अच्छा जरिया है |

7)  क्या आप अपने वास्तविक रूपमें रह पाती है

                      
                     जरा सोंचिये आप हर सुबह सो कर उठते ही बाथरूम की तरफ भागती हैं क्योंकि आपको मिस्टर वो के  उठने से पहले ही मेकअप करना है | क्योंकि आप नहीं चाहती की वो आप के रीयल चहरे को देख सके | क्योंकि आप जानती हैं की वो आप के मेक अप वाले चेहरे को ही प्यार करता है | वो मेकअप जो आप ने डेटिंग पर उसकी पसंद जान – जान कर लगाना शुरू किया था अब आप को हमेशा उसी लुक में रहना है | कठिन लग रहा है ना .... कठिन नहीं असंभव है | और तब और भी मुश्किल जब  यहाँ मैं मेकअप की नहीं आपके फेक वर्जन की बात कर रही हूँ | जिसे आपने उसे पसंद आने के लिए ओढ़ा है | ये चाहे चाय , कॉफ़ी के प्रति आपका लगाव हो , कुछ टी . वी सीरियल्स , आपकी  की पसंद के कपडे , आपकी पसंद का हास्य बोध कुछ भी हो सकता है | जो इंसान आपको बदल कर आप को प्यार करना चाहता है वो आपको प्यार नहीं करता आपके फेक वर्जन को प्यार करता है | जितनी जल्दी हो जाए आप इस बात को समझ लीजिये क्योंकि आप हमेशा अपने फेक वर्जन में नहीं रह पाएंगी | और अगर रहेंगीं तो आप कभी खुद से प्यार नहीं कर पाएंगी | जो आप के आत्मविश्वास में कमी , असफलताओं व् अवसाद के रूप में साफ़ – साफ़ झलकेगा |
                      तो ये ही वो मुख्य 7 बातें जो आपको अपने भावी जीवन साथी में डेटिंग के दौरान जानना जरूरी है | ताकि आप का विवाह एक सुखद , संबल प्रदान करने वाले अटूट बंधन बने न की उम्र भर रोने सिसकने की वजह |               

 वंदना बाजपेयी 

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atoot bandhan

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