सोहन अक्सर झूठ बोल कर स्कूल जाने से बचता था | पर माँ - पापा की योजना के कारण उसका झूठ उसे ही महंगा पड़ा

                                                                         
बाल कहानी -जब झूठ महंगा पड़ा


आज हम आपके लिए लेकर आये हैं एक बाल कहानी | ये बाल कहानी है उस नन्हे बच्चे के बारे में जिसका पढने में बिलकुल मन नहीं लगता था | इसलिए उसका होम वर्क कभी पूरा ही नहीं हो पाता था | होम् वर्क न पूरा होने की वजह से  उसको डर  लगता की स्कूल जाने पर टीचर की मार खानी पड  सकती है | इसलिए वो रोज कोई न कोई झूठी  कहानी बना कर स्कूल जाने से मना  कर देता | कई दिन तक तो मम्मी - पापा उसके बहानों  पर विश्वास करते रहे | पर धीरे - धीरे उन्हें भी विश्वास हो गया की ये झूठ बोल रहा है | फिर क्या था उन्होंने ऐसी चाल चली की बच्चे को सच बोलना ही पड़ा | आइये पढ़ते हैं

बाल कहानी - जब झूठ महंगा पड़ा 

ये कहानी है दो जुड़वां बच्चों की | एक का नाम था मोहन और दूसरे का नाम सोहन |वैसे तो दोनों जुड़वां थे पर दोनों के स्वाभाव में बहुत अंतर था | जहाँ मोहन गंभीर प्रकृति का व् अपना काम समय से पूरा करने वाला था | वहीँ सोहन खिलंदड़ा व् आलसी प्रकृति का | माँ - पापा सोहन को बहुत समझाते पर वो तो बदलने का नाम ही नहीं लेता | 

दोनों साथ - साथ स्कूल जाते ... पर लौटते साथ नहीं | कारण सोहन को होम वर्क पूरा न करने के कारण सजा मिल जाती | और उसे वहीँ पिछले दिन का होम् वर्क  पूरा कर के लौटने को मिलता | अब उसके ऊपर घर में जा कर आज का होम वर्क  करने का प्रेशर होता | जहाँ एक और मोहन स्कूल से आ कर खाना खा कर होम वर्क करने बैठ जाता | वहीँ सोहन घर आ कर बिना खाना खाए खेलने में लग जाता | माँ दस बार बुलातीं तब आता | खाना खा कर झटपट फिर खेलने लग जाता | माँ कहती ही रह जाती सोहन बेटा  होम वर्क कर लो | पर सोहन को नहीं सुनना था तो नहीं सुनना था | 

अब क्योंकि होम वर्क किया नहीं होता | इसलिए सुबह जहाँ मोहन जल्दी से उठ कर नहा धो कर नाश्ता कर के स्कूल चला जाता | वहीँ सोहन धीमे - धीमे काम करता ... इतना धीमे की  स्कूल बस आ कर मोहन को ले कर चली जाए और वो घर में ही रह जाए | जब माँ उसे जल्दी करने को कहती तो कोई न कोई बहाना बना देता | कभी सर में दर्द तो कभी पेट में तो कभी हाथ में | उसके इन बहांनों को सुन पहले तो माँ भी उन पर विश्वास कर लेती और स्कूल न जाने को मान जाती | पर माँ हमेशा देखती कि जैसे ही स्कूल बस मोहन को ले कर चली जाती | सोहन बिलकुल ठीक हो जाता | और सारा दिन घर में खेलता कूदता और ऊधम करता | माँ को शक होने लगा | उन्होंने ये बात पिताजी को बताई | पिताजी ने दो - तीन दिन सोहन पर नज़र रखी उन्हें भी विश्वास हो गया कि सोहन झूठ  बोल रहा है | 

अब प्रश्न ये था कि सोहन से सच कैसे उगलवाया जाए | आखिरकार पिताजी ने एक योजना बना ली | उन्होंने माँ को योजना बता कर कहा कि अब तुम्हे ध्यान रखना है | माँ ने हामी भर दी | 


अगले दिन जब माँ ने सोहन , मोहन से स्कूल जाने को कहा तो मोहन तो हमेशा की तरह उठ गया और तैयार होने लगा पर सोहन जोर - जोर से रोते हुए बोला .. आआआअ , मम्मी मेरे पेट में बहुत दर्द हो रहा है | मैं स्कूल नहीं जा सकता | माँ ने कहा ," ठीक है बेटा तुम घर पर आराम करो | हमेशा की तरह स्कूल बस जाते ही सोहन बिस्तर से उठ बैठा और उधम करने लगा | 


शाम को पिताजी   आये तो उनके हाथ में बड़े - बड़े थैले थे | उन्होंने दोनों बच्चों को बुलाया | और कहा आज स्कूल कौन - कौन गया था |
 मोहन बोला ," मैं गया था पिताजी | 
सोहन बोला ," मैं नहीं गया क्योंकि मेरे पेट में दर्द था | आप क्या लाये हैं ?

पिताजी बोले ," हाँ हाँ तुम्हारे पेट में दर्द था | खैर  कोई बात नहीं | आज् मेरे  बॉस ने उन बच्चों  को इनाम दिया है जो रोज स्कूल जाते हैं | अब तुम तो बिमारी के कारण जा नहीं पाते तो ये इनाम मोहन को मिलेगा |  उन्होंने चमचमाती हुई कार जो रिमोट से चलती थी मोहन को दे दी | सोहन मन मसोस के रह गया | यही वो कार  थी जिसके लिए वो पिछले ६ महीने से जिद्द कर रहा था | 

अब पिताजी ने  एक घडी मोहन की कलाई पर बांधते हुए कहा ," तुम्हारे स्कूल के प्रिंसिपल ने उन बच्चों को दी है जिनकी १०० % अटेंडेंस है | अब सोहन की आँखों में तो आंसू भर आये |  फिर भी उसे आशा थी की अगले थैले में कुछ उसके लिए भी होगा |उसने पूंछा ," पिताजी उस थैले में क्या है ?


बेटा  इसमें मैं केक लाया था | अब तुम्हारे पेट में दर्द है तो मोहन को ही दे देते हैं | और हाँ मम्मी  से कह कर तुम्हारे लिए खिचड़ी बनवा देते हैं | 


केक तो सोहन को बहुत पसंद था | वो रोने लगा और बोला ," पापा मैं खिचड़ी नहीं खाऊंगा |" मैं भी केक खाऊंगा | 
नहीं बेटा  हम इतने तंगदिल नहीं हैं जो केक  खिला कर तुम्हारा पेट खराब करवाएं | न न , हम तुम्हें केक नहीं खाने देंगे | बल्कि केक खरीदने के बाद तुम्हारी माँ का फोन आया | वो बहुत परेशान थी कि मेरा बेटा  हमेशा बीमार रहता है अप कुछ करते क्यों नहीं | इसीलिए मैं डॉक्टर के पास चला गया | उन्होंने बहुत अच्छा उपाय बताया है | जिससे तुम हमेशा स्वस्थ  रहोगे | वो ... बस तुम्हें एक हफ्ते तक रोज इंजेक्शन लगवाने पड़ेंगे | पहला इंजेक्शन लगाने वो अभी आते होंगे | 

इंजेक्शन नहीं हीहीही ... सोहन जोर से चीखा | 

पर बेटा तुम बबिमार रहते हो और इसी कारण  अक्सर स्कूल नहीं जा पाते हो , पिताजी बोले | 

अब सोहन से नहीं रहा गया और बोल ही पड़ा ," पापा मैं झूठ बोल कर , बिमारी के बहाने बना कर स्कूल नहीं जाता था | मैं बिलकुल ठीक हूँ | 


पिताजी बोले ," बेटा  अब तुम समझ गए की स्कूल  न जाने से तुमको कितनी चीजों का नुक्सान हुआ है | लेकिन अभी भी अगर तुम नहीं बदले तो और ठीक से पढ़ाई  नहीं की तो इतना कुछ का नुक्सान हो जाएगा जिसको तुम जिंदगी में कभी भर नहीं सकते | 

सोहन ने हां में सर हिलाया | उसने वादा किया की अब वो रोज स्कूल जायेगा , होम वर्क करेगा और मन लगा कर पढाई करेगा | 

अब सोहन को भले ही झूठ महंगा पड़ा हो ... पर सच को स्वीकार करके भूल सुधारने का इनाम उसे जिंदगी अवश्य देगी | 

नीलम गुप्ता 

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