emotional management यानि भावनात्मक संतुलन सफलता के लिए बहुत जरूरी है चाहे वो रिश्तों की हो कैरियर की या जीवंतता की , प्रस्तुत हैं कुछ टिप्स जिनकी सहायता से आप अपनी भावनाओं को संतुलित कर पायेंगे

                             
सफलता के लिए जरूरी है भावनात्मक संतुलन -Emotional management tips


मनुष्य एक भावुक प्राणी है| ये भावनाएं ही उसे जानवर से इंसान बनती हैं , पर कई बार इन भावनाओं की वजह से ही  हम शोषण का शिकार हो जाते हैं | ये शोषण कभी अपने द्वारा होता है , कभी अपनों द्वारा | जिसकी वजह से हम जिन्दगी में हारते जाते हैं चाहे वो रिश्ते हों , सम्मान हो या सफलता| जरूरी है इन भावनाओं का संतुलन सीखना | जरा इन उदाहरणों पर गौर करें ... 

                                   
                                       एक बच्चा जो पढने में बहुत तेज था| उसे खुद व्  उसके माता-पिता को आशा थी कि वो 10 th बोर्ड में 95% मार्क्स ले कर आएगा |  उसने मेहनत भी खूब करी | पेपर भी अच्छे हुए | रिजल्ट आने  से कुछ दिन पहले उसने अपने नंबर कैलकुलेट किये  , उसके  मुताबिक़ उसके ९२ % आने थे | वो इतना निराश हुआ की उसने आत्महत्या कर ली | कुछ दिन बार रिजल्ट निकला , उस बच्चे के 96 % मार्क्स थे |  वो बच्चा जिसका भविष्य बहुत अच्छा था , संभावित कल्पना को बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसने मृत्यु का वरण कर लिया |


                        राहुल ने  बिजनिस के दो -तीन  प्रयास किये , हर बार असफल रहा | लोगों के ताने उलाहने सुनने के बाद अब उसकी कमरे से निकलने की भी हिम्मत नहीं पड़ती | एक कमरे में बैठे रहना और दीवारों को घूरना ही उसका जीवन हैं | एक और प्रयास के लिए उसके पास धन है पर उसका मन साथ नहीं दे रहा है |


                            सविता जी एक टेलेंटेड लेखक हैं | मैंने उनके कई लेख पढ़े हैं , पर वो सार्वजानिक लेखन में नहीं आना चाहती क्योंकि उनके पति व् परिवार को उनका लिखना पसंद नहीं है , अक्सर उन्हें कलम घिस्सू की उपाधि दे कर हँसी  उड़ाई जाती है | सविता जी को पता है कि उनमें प्रतिभा है ,लेकिन अपने परिवार का तिरिस्कार झेल कर लिखने की हिम्मत वो नहीं जुटा पाती | यही उनकी निराशा व्  कुंठा की वजह है | वो उदास रहती है ठीक से घर का काम नहीं कर पाती , न घर को सजाती संवारती हैं न खुद को |



                                                 और एक उदाहरण जो शायद  आप ने देखा हो , अभी कुछ दिन पहले की बात है मैंने फेस बुक पर एक स्टेटस पढ़ा , " मेरे मित्र जिन्हें मैं बहुत पसंद करती हूँ , उनकी हर पोस्ट लाइक करती हूँ , कमेंट करती हूँ , वो मेरी पोस्ट पढने तक नहीं आते इसलिए मैं फेसबुक छोड़ रही हूँ / कुछ दिनों के लिए बंद कर रही हूँ | ऐसे में किन्हीं दो चार मित्रों की तुलना में उन्हें वो मित्र नज़र ही नहीं आ रहे हैं जो उनकी पोस्ट पर लाइक कर रहे हैं |


                                 ये सारे उदाहरण भावनाओं द्वारा नियंत्रित होने के हैं | इन सब में प्रतिभा है , क्षमता है , दूसरे मौके हैं पर इन सब ने भावनाओं के आधीन हो कर छोड़ देना ज्यादा उचित समझा ... कहीं मौके को कहीं जीवन को और कहीं जीवंतता को |

मैं स्वयं भी बहुत Emotionally weak रहीं हूँ | मैंने इस बात को समझते हुए खुद को बदला है | मेरा ये लेख लिखने  का उद्देश्य भी यही है कि आप भी भावात्मक संतुलन नहीं बना पाते हैं तो आप भी जीवन में बहुत कुछ खो देंगे |
इसलिए मैं आपके साथ ये emotional management tips share कर रही हूँ | जो आपके जीवन में सफलता और जीवंतता लाएगी |

 भावनात्मक संतुलन के नियम  -Emotional management tips (in hindi)


                                                                     जब भी मैं Emotional management कीबात करती हूँ तो मेरे सामने  रथ पर बैठे अर्जुन और उन्हें भगवद्गीता का उपदेश देते हुए कृष्ण आ जाते हैं | अर्जुन एक महान योद्धा थे , सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर थे , फिर भी युद्ध से ठीक पहले वो भावनाओं के शिकार होकर युद्ध छोड़ने की बात करने लगे | वो अपनी भावनाओं को नियंत्रण में नहीं रख पा रहे थे , जिस कारण उनसे धनुष भी नहीं उठाया जा रहा था | क्या उस समय वो द्रोणाचार्य द्वारा दिया हुआ ज्ञान भूल गए थे ? क्या बरसों का उनका अभ्यास एक क्षण में खत्म हो गया था ? नहीं ... बस उनके मन ने साथ देना बंद कर दिया था |

दोनों सेनाओं के बीचोबीच खड़े अर्जुन के पास skill तो था पर will नहीं थी 


                                                                            स्किल यानी हमारा talent, हमारी प्रतिभा , हमारी क्षमता , और विल हमारी इच्छा शक्ति | सफलता के लिए स्किल जरूरी है उससे ज्यादा जरूरी है will. हम कई बार खुद कहते हैं कि फलाने  व्यक्ति में तो इतना talent नहीं था फिर वो इतना successful कैसे हो गया | जाहिर सी बात है कि उसकी सफल होने की इच्छा उस टैलेंटेड व्यक्ति से ज्यादा थी | शुरुआत में सबकी इच्छा ज्यादा होती है परन्तु असफलता ,हार व् आलोचना जो किसी भी सफलता का हिस्सा हैं हर कोई बर्दाश्त नहीं कर पाता, जिसके कारण या तो वो प्रयास ही छोड़ देता है या  आधे मन से करता है |  यहीं पर काम करता है emotional management, जिनके पास ये खूबी होती है वही लोग सफल हुए हैं |

इसी लिए आजकल I.Q से ज्यादा E.Q को महत्व दिया जाता है 


                                                  अगर आप अपने को भावनात्मक रूप से नहीं संभाल पायेंगे तो आप कितने भी टैलेंटेड क्यों न हों , आपका I. Q कितना भी तेज क्यों न हों अप बहुत ज्यादा सफल नहीं हो सकते |

Emotional Management क्या है ?


                                                    अगर साधारण भाषा में कहें तो इमोशन मतलब feelings या भावनाएं और उसका मनेजमेंट मतलब , अपनी फीलिंग्स को जल्दी से जल्दी पहचान लेना, स्वीकार कर लेना और उनको बदल देना | हालांकि ये इतना आसान नहीं है , इसके लिए आपको अपने सोंचने की क्षमता पर पूरा नियंत्रण होना चाहिए | जिससे की आप अपने विचारों को बदल सकें | सौभाग्य से हमारे पास इसके लिए भगवद्गीता हैं | जहाँ भावनात्मक रूप से कमजोर पड़े अर्जुन को ही  कृष्ण उपदेश नहीं देते हैं वो अर्जुन के माध्यम से हम सबको उपदेश देते हैं | हम सब को सिखाते हैं | अगर आप सिर्फ धार्मिक दृष्टि से गीता का पाठ नहीं करेंगे तो पायेंगे कि

गीता का छठा अध्याय इमोशनल मनेजमेंट पर ही है | 



कैसे करे भावनात्मक संतुलन -how तो control your emotions


                                            अगर आप भावनातमक संतुलन नहीं कर पाते हैं तो आप किसी भी क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ सकते ... चाहे वो रिश्ते हों या कैरियर , दोनों ही जगह आप parasite बन जायेंगे, जो दूसरों पर निर्भर रहता है |

                    सबसे पहले तो आप ये समझ लीजिये की आप वो हैं जैसा आप सोंचते हैं यानि  की आपके विश्वास आपका belief system | अगर हम किसी पेड़ का उदाहरण लें तो उसकी जडें आपका विश्वास हैं और ऊपर का भाग जो दुनिया को दिखायी दे रहा है वो विश्वास का प्रतिरूप | अगर आप को खुद को बदलना है तो जड़ों पर काम करना होगा ... अपने belief system को बदलना होगा | वही जो अर्जुन से कृष्ण ने कराया | अर्जुन का विश्वास था कि गुरु और पितामह पर बाण कैसे चलाये तो कृष्ण ने बताया कि जो गलत हैं वो चाहे कितने भी अपने क्यों  न हों उनसे युद्ध तो करना ही पड़ेगा | कृष्ण ने अर्जुन के बिलीफ सिस्टम को बदला |

                                  ऊपर के उदाहरण में देखिये ... अगर वो बच्चा अपने बिलिफ सिस्टम को बदल लेता कि दो प्रतिशत कम आने से पूरी जिंदगी नहीं हारी जा सकती | सविता जी अपने बिलीफ को बदलती की पति का प्यार सिर्फ घर का उत्तरदायित्व निभाने या शारीरिक प्रेम में ही नहीं है वो पत्नी की इच्छाओं को समझने व् उसे  सम्मान देने व् उसकी प्रतिभा का विकास करने में है तो क्या वो आज निराश व् कुंठित होती | राहुल उन लोगों के तानों से ऊपर उठ कर ( जाहिर है जो उसके अपने थे ) फिर से प्रयास करता तो क्या वो आज कमरे में बंद एकाकी जीवन जी रहा होता | किसी एक की राय को इतना महत्व दे कर क्या हम  अपनी इमोशनल चाभी उसे नहीं पकड़ा देते हैं ?

                             ये युद्ध सिर्फ अर्जुन का नहीं है हम सबका है ... कभी अपनों से ,कभी अपने से 

भावनात्मक संतुलन के लिए अपने belief system को कैसे बदलें ?


                                                                अपने belief सिस्टम को बदलना इतना आसन नहीं है , परन्तु असंभव भी नहीं | अगर आप parasite वाली जिन्दगी से बाहर आना चाहते हैं तो आप को ये करना ही होगा |

स्वीकार करिए -
                           सबसे पहले तो उस समस्या को स्वीकार करिए कि आपकी निराशा कुंठा की आपकी सोंच है |अपना आकलन करिए | आपकी सोंच क्या है ? आप जैसा अपने बारे में सोंचते हैं , दूसरों के बारे में सोंचते हैं , दूसरों को अहमियत देने के बारे में सोंचते हैं या दूसरों की राय आपके कितना  मायने रखती है | गौर करिए ...

क्या आप खुद को कमतर समझते हैं
दूसरों की राय को ज्यादा अहमियत देते हैं
आपको अपने हर काम के लिए अपनों की स्वीकारोक्ति की आशा रहती है , अगर वो नहीं मिलती तो आप काम बीच में छोड़ देते हैं |
क्या आप ने प्यार का मतलब सिर्फ एकतरफा देना समझा है , भावनाओं का सम्मान नहीं |
                                      अगर आप ने अपना सही तरीके से आकलन किया तो आप समझ पायेंगे की आपकी भावनात्मक असंतुलन की वजह क्या है | यही वो वजह है जो आपको हर चीज में पीछे खींच रही है | इसे स्वीकार करिए |

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लिखिए आपको इस दर्द से क्या सीखने  को मिला 


                                               कहते हैं की ये पृथ्वी एक वर्कशॉप है जहाँ हम सीखने के लिए आते हैं | हर दर्द हर तकलीफ हर हार हमें कुछ सिखाने के लिए आती है | जो सीख जाते हैं वो life में आगे बढ़ते जाते हैं | जो दर्द पर अटक जाते हैं वो वहीं पर रुक जाते हैं | याद रहिये ....

every negative incident  has a positive intent


                                                             हर नकारात्मक परिस्थिति का कोई न कोई सकारात्मकता  है | आप कहेंगें कि ऐसा कैसे हो सकता है | हो सकता है , अगर आप इसे समझना सीख जायेंगे | हर दर्द हर तकलीफ भी आपको बेहतर करने के लिए हैं ये आप की जिंदगी में एक question paper की तरह आई है | अगर आपने solve  कर लिया तो जिन्दगी आपकी | इसके लिए आपको छोटी सी टेक्नीक  फॉलो करनी है .... पेन पेपर उठाइए और अपने जीवन की negative situation को लिखिए , फिर लिखिए उससे आपने क्या सीखा | आप इसके लिए तीन पॉइंट्स लिखिए | इनको लिखने के बाद आप उस दर्द से कुछ हद तक निकल जायेंगे या कम से कम आपको कुछ आगे करने की इच्छा होगी |

लिखिए की आपने असफलता से क्या सीखा ?
रिश्ता टूटा या उसमें दूरियाँ बढ़ी तो क्या सीखा ?
दर्द ( शारीरिक )से क्या सीखा ?
तकलीफ से क्या सीखा ?
किसी ने आपका अपमान किया तो क्या सीखा ?
                       याद रखिये हर तकलीफ हमें सिखाती हैं |

ये लिस्ट आपको खुद अपने लिए बनानी है | फिर भी मैं कुछ उदाहरण के लिए बना रही हूँ ...

सविता जी ने अपनी हर व् निराशा से क्या सीखा ?

1) अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए परिवार की स्वीकारोक्ति जरूरी नहीं है | एक बार मैत्रेयी पुष्पा का इंटरव्यू देख रही थी | उन्होंने का था , शुरू -शुरू में मुझे भी आम भारतीय महिलाओं की तरह पति का साथ नहीं मिला था , पर मैं करती गयी और बाद में सब साथ देने लगे | ( क्या ये किस्सा आम भारतीय महिलाओं का नहीं है , जिन्होंने कुछ करने की इच्छा रखी , उन्होंने परिवार के विरोध को सहना किया |)
2) अगर आप अपने जीवन साथी का सम्मान  नहीं देख सकते तो आप उससे प्रेम  नहीं करते हैं |
3) आपको लगता है कि आप की उम्र बड़ी हो गयी है लेकिन बाकी की सारी  उम्र कुंठा में जीने से अच्छा है कि  इस उम्र से ही शुरू करे ( क्या आपको इंग्लिश- विंग्लिश की श्रीदेवी याद है ) अपनी self respect gain करने के लिए आप किसी भी उम्र से काम करना शुरू कर सकते हैं |

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अब मैं एक बहुत ही खराब परिस्थिति लेती हूँ ... जैसे किसी प्रियजन की मृत्यु , लिखिए इससे क्या सीखा ?

1) हर रिश्ता हमारे साथ थोड़े समय का है , जितना हो सके उसे अभी प्यार व् सम्मान दो |
2) पैसा साथ नहीं जाता , आज की छोटी -छोटी खुशियाँ मार के बचत मत करो |
3)बैंक में बैलेंस बढ़ाने के स्थान पर लोगों के दिलों में स्थान बढाने का प्रयास करो |

                                                                         ये एक उदाहरण है | आपकी अपनी समस्याएं होंगी आपने उनसे कुछ अलग सीखा होगा | समस्या लिखिए उसकी शिक्षा लिखिए | हो सके तो कमेंट में लिखिए , जिससे और लोगों के भी काम आये |

emotion को motion में बदलिए 


                                               अगर आप ने समझ भी लिए कि आप के दुखों की वजह ये हैं तो भी आप अगर खुद को कमरे में कैद करे रहे तो कुछ भी होने वाला नहीं | emotions में बहुत ताकत होती है , इनसे आप यूँ ही नहीं निकल सकते | इसके लिए आपको बहुत बड़ा बल विपरीत दिशा में  लगाना पड़ेगा | यानी आपको घर से बाहर निकल कर काम करना पड़ेगा | अपने को काम में व्यस्त करना पड़ेगा | कई लोग सोंचते हैं मनोरंजन करने से सब ठीक हो जाएगा , मन बदल जाएगा .... पर जैसे ही मनोरंजन खत्म हुआ मन फिर उसी दुखी अवस्था में आ जाता है |

मनोरंजन नहीं मनोमंजन करिए 

                                               जितना पावरफुल इमोशन है उतने ही पावरफुल मोशन की जरूरत होती है | आपने स्वीकार कर लिया , कि आप इमोशनली वीक पड़ते हैं , आपने belief system को बदलने का प्रयास किया , जिस कारण आप सफल नहीं हो पाते , आपने जान लिया कि आपने उस दर्द , तकलीफ से क्या सीखा है तो अब अब घर से बाहर निकल कर उस पर काम करना शुरू कर दीजिये | जाहिर है काम आपकी अभी तक की सोंच के विपरीत दिशा में होगा , और उससे ज्यादा ताकत से करना होगा |

1) आपको एक हार पर रुकना नहीं है |
2) अपना वजूद खुद बनाना है |
3) ये ताने एक साल बाद किसी काम के नहीं होंगे पर आप की हारी हुई जिन्दगी हमेशा आप पर बोझ होगी |
4) जिन्दगी चार दिन की है ... इसलिए मर के नहीं जीना है जीके मरना है |
5) रिश्ते जरूरी है पर आत्मसम्मान को कुचल कर नहीं , आत्मसम्मान बढ़ने के लिए कुछ करना है |

                                                                      मित्रों मेरी  कोशिश है कि " अगला कदम" में मैं  आपको अपनी समस्याओं को समझने व् उनसे निकलने में मदद करूँ |  अगर आप  emotionally weak पड़ते हैं तो आपकी जिंदगी की अनेकों समस्याओं की ये मुख्य जड़ होगी | ये emotional management tips आपके अवश्य  काम आयेंगी | इन पर काम कर के देखिये , अगर आप को फिर भी कोई दिक्कत होती है तो आप कमेंट में लिख सकते हैं | मैं उस पर दूसरा लेख लिख कर उन प्रश्नों का उत्तर देने का प्रयास करुँगी |


वंदना बाजपेयी 
                                                                           
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atoot bandhan

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9 comments so far,Add yours

  1. सामयिक, संतुलित एवं आवश्यक पोस्ट.... साधुवाद वंदना जी!

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  2. वंदना जी, सफलता के लिए भावनात्मक संतुलन क्यों जरूरी हैं और इसे कैसे प्राप्त किया जा सकता हैं इस बारे में बहुत ही उपयोगी पोस्ट हैं आपकी।

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    1. शुक्रिया ज्योति जी

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  3. Replies
    1. धन्यवाद डॉ देव जी

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  4. Thanks for sharing such a wonderful list

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  5. Thanks...alot mam what a wonderful post....

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