बेस्ट सेलर ऑथर , चेतन भगत को कौन नहीं जानता | इस लेख में प्रस्तुत हैं उनके स्टूडेंट्स को दिए गए कुछ टिप्स , जिससे वो बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं |

                                     
बेस्ट सेलर ऑथर



आज चेतन भगत को लोग एक "बेस्ट सेलर " लेखक के रूप में जानते हैं , वो फिल्में भी बना रहे हैं , इसके अलावा वो लोगों को motivate करने के लिए बहुत सारे सेमीनार भी  अटेंड करते हैं , स्पीच देते हैं ,लोग उन्हें बुलाते हैं , सुनना चाहते हैं  ये सब सिर्फ एक बेस्ट सेलर लेखक या फिल्म मेकर की वजह से की वजह से नहीं है ,ये उस सफलता की वजह से है जो उन्हें हर क्षेत्र में मिली है | एक लेखक , फिल्म मेकर के अलावा  चेतन भगत के पास IIT व् IIM की डिग्री है |  ये वो डिग्रियां है जिनके पीछे आज देश के आधे से ज्यादा युवा भाग रहे हैं , यानि वो आल राउंडर हैं | इसीलिये  सब चेतन भगत को सुनना चाहते हैं उनसे टिप्स लेना चाहते है कि वो जीवन में सफल कैसे हो | लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि चेतन भगत के हाई स्कूल में केवल 76 % मार्क्स आये थे | 76 % से IIT , IIM, बेस्ट सेलर ऑथर और फिल्म मेकर तक का सफ़र करने वाले चेतन भगत अपने को जीनियस नहीं मानते , वो अपने को मेडियोकर स्टूडेंट ही मानते हैं | उनका कहना है कि उनके जैसा हर स्टूडेंट अपने जीवन में सफल हो सकता है , बस उसे अपनी स्ट्रेटजी पर ध्यान देना होगा | ऊपर  से देखने में I.I.T, नावेल लिखना , माउंट अवेरेस्ट पर चढ़ना , मैराथन जीतना या वजन घटाना अलग -अलग लगे , पर इन सभी लम्बी रेस को जीतने के टिप्स सामान है , इसलिए उनकी नज़र में सफलता कैसी भी हो उसके सूत्र एक ही हैं | आज हम चेतन भगत के कुछ ऐसे ही स्टडी टिप्स स्टूडेंट्स के लिए लाये हैं | अगर आप किसी और क्षेत्र में प्रयास कर रहे हैं तो उस क्षेत्र में भी इन्हीं टिप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं |

चेतन भगत की स्टूडेंट्स के लिए स्टडी टिप्स 

motivational speech for students by chetan bhagat


                                                         चेतन भगत अक्सर वो किस्सा शेयर करते हैं जो उनके 76 % मार्क्स हाई स्कूल में आने के बाद हुआ | चेतन भगत घर आये , उनकी माँ व् मामा बैठे हुए थे | दोनों दुखी थे , जैसे की कोई बहुत बड़ा शोक का माहौल हो | कुछ देर उसे देखने के बाद मामा बोले , " दीदी ये कुछ न कुछ तो कर  ही लेगा , जिन्दगी तो चला ही लेगा |" फिर उन्होंने चेतन भगत की ओर देखते हुए कहा "क्यों , कुछ तो कर लेगा न "? चेतन भगत ने हाँ  में सर हिलाया फिर वो अपने कमरे में आ गए | उस दिन उन्हें पहली बार लगा कि उनकी " औकात " केवल जैसे -तैसे कुछ न कुछ कर लेने की है | उन्हें समझ में आ गया की वो अपनी जिंदगी में कुछ भी बड़ा नहीं कर पायेंगे | अब क्या करें ?.... बहुत देर तक सोंचने के बाद उनके दिमाग में ख्याल आया कि वो एसटीडी बूथ खोल लेंगे , उस समय एसटीडी बूथ बहुत चलते थे , घर फोन करने के लिए लाइन लगा कर लोग खड़े होते थे | सुबह उठ कर उन्होंने मामा को यही बता दिया कि वो एसटीडी बूथ खोलेंगे | मामा ने उनकी बात का समर्थन करते हुए कहा ," ठीक है , इतना तो तुम कर ही लोगे |"


ये एक  वाक्य चेतन भगत के मन में बैठ गया , उन्हें लगा कि उन् पर ठप्पा लग गया है , बेटा तुम इससे ज्यादा कुछ कर ही नहीं सकते |" उसी समय उनके दिमाग में दूसरा ख्याल आया कि अगर उन्हें इस ठप्पे को हटाना है तो उन्हें एक्स्ट्रा एफर्ट लगाने होंगे | उन्होंने अपने दोस्तों से बात की पता चला IIT का एग्जाम बहुत  प्रतिष्ठित है , पर इसके लिए दो साल तक कड़ी तैयारी करनी पड़ती है | चेतन भगत ने मन बना लिया कि अपनी औकात का लेवल बदलने के लिए मुझे ये एग्जाम पास करना ही है | उन्होंने मेहनत की और वो सफल हुए ... उस दिन मामा फिर आये | वो बहुत खुश थे | उन्होंने कहा , " मुझे पता था कि ये लड़का एक न एक दिन जरूर कुछ बड़ा करेगा |

चेतन भगत कहते हैं कि हम सब जीवन में जब कभी असफल हो जाते हैं तो लोग , परिवार  समाज हमारे ऊपर ठप्पा लगा देता है कि "ये नहीं कर सकता "| अब हमारे पास दो रास्ते होते हैं -
1) हम ये मान लें कि हमसे नहीं हो सकता ... इससे हम अपने कम्फर्ट ज़ोन में रहेंगे , ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी , ज्यादा सफल भी नहीं होंगे |
2) जब लोग कहे कि इसकी औकात इतनी ही है तो ज्यादा एफर्ट लगा कर अपनी औकात बदल लें | ये वैसा ही है जैसे  इलेक्ट्रान ... हाई एनर्जी में जाने के लिए एनर्जी अब्सोर्ब करनी पड़ती है | आपको मेहनत  में खुद को अब्सोर्ब कर देना होगा |

चेतन भगत की स्टूडेंट्स के लिए स्ट्रेटजी प्लान 


                                      चेतन भगत कहते हैं कि कोई भी सफलता किसी लम्बी मेहनत का नतीजा होती है | इसके लिए एक स्ट्रेटजी प्लान करनी पड़ती है |

हम दिन में बहुत सारे छोटे -छोटे काम करते हैं , जैसे आज कमरा साफ़ करना है , या सब्जी लानी है या आज कोई खास डिश बनानी है | कई बार इन कामों को करने का मन होता है , कई बार नहीं होता है ... अमूमन ये हर काम दो -तीन घंटे ले लेता है | ऐसे में जब मन नहीं होता है तो हम खुद को मोटिवेट करते हुए कहते हैं ... अरे यार कर लेते हैं, कल अपना ही प्रेशर कम हो जायेगा , या कल मूवी देख लेंगे आज निपटा लें  | चेतन भगत इसे "धक्का मार " योजना कहते हैं | दैनिक चर्या के ये छोटे -छोटे काम तो धक्का मार योजना से पूरे हो जाते हैं लेकिन इस योजना से आप बड़े संकल्प पूरे नहीं कर सकते | उसके लिए वो इन ६ बातों पर जोर देते हैं ...


सोंचिये आप क्यों ये  करना चाहते हैं 


                                                   सबसे पहले तो स्टूडेंट्स को देखना होगा कि वो ये पढाई  क्यों करना चाहता है | जैसे ...
1) मम्मी का मन है कि मैं IIT क्रैक करूँ
2) पड़ोस की आंटी का बेटा जबसे IIT में आया है बड़ा शान मारता है , मैं भी उसी की तरह शान मारूंगा बस एक बार आ जाऊं |
3) और कर भी क्या सकता हूँ ... कोई ऑप्शन है क्या ? सब यही कर रहे हैं ... करना ही पड़ेगा |

                                                     अगर आप इसमें से किसी कारण की वजह से पढाई कर रहे हैं तो आप सफल नहीं होंगे | याद रखिये मम्मी की इच्छा आपको ज्यादा दिन तक लम्बी लड़ाई लड़ने के लिए मोटिवेट नहीं रह पाएगी , न ही सब कर रहे है या रौब दिखने की भावना , लंबी मेहनत तभी हो पाएगी जब आप के अंदर  से वो फीलिंग आ रही हो |

इसलिए सबसे जरूरी है की आप वही पढाई करें जिसकी भावना आप के अन्दर से आ रही हो |

गोल सेट करिए .

                      जब आपने ये डिसाइड कर लिया कि आपको क्या करना है तो  अब आप गोल सेट करिए | आप क्या बनना चाहते हैं वो एक सपना है , इसलिए  गोल के साथ टाइम जोड़िये  ...

ये  तैयारी आप दो साल , तीन साल , चार साल में कर सकते हैं | जब आप टाइम सेट कर लेते हैं तो आप को एक डेड लाइन दिखने लगती है , उसके हिसाब से आप अपना एक्शन प्लान तैयार कर सकते हैं |

जैसे आप  किसी एग्जाम  के लिए दो या तीन साल की डेड लाइन ले सकते हैं |
नावेल लिखने के लिए दो साल ले सकते हैं |
कोई  कोर्स करने के लिए अपनी क्षमता के अनुसार साल ले सकते हैं | यहाँ ये ध्यान देने की जरूरत है कि गोल के साथ टाइम जोड़ना ही गोल सेट करना होता है |
जैसे अगर आप कहें इस IIT में पढना है तो ये गोल नहीं है
वेट लूज करना है गोल नहीं है
नावेल लिखना है गोल नहीं है

                                    ये सब गोल नहीं हैं , बस मन चलाना है, सपना है  क्योंकि इसमें टाइम नहीं जुड़ा  है
कब IIT या फलाना कॉलेज में पढना है ... दो साल बाद या दस साल बाद ?
कब वेट लूज करना है ... दो महीने बाद या २५ साल बाद
कब नावेल लिखना है ... अगले ६ महीने में या ८० की उम्र में
                                                     जिस गोल के साथ टाइम नहीं जुड़ा होगा वो गोल कभी पूरा नहीं होगा | क्योंकि मन को संभालना मुश्किल हो जाएगा | मन कहेगा ... आज और मस्ती कर लेते हैं , समोसा खा लेते हैं , दोस्तों से गप्प कर लेते हैं कल से करेंगे | जब आप के पास टाइम पीरियड  निश्चित होगा तो मन को कसना आसान होगा |

काम नामुमकिन कहने के स्थान पर कहें ," इस काम में इतने साल की मेहनत है "

                                                        किसी ने हमारे साथ शुरू किया वो आज हमसे मीलों आगे हैं इसका कारण ये नहीं है कि उसका भाग्य अच्छा है , उसने इतने सालों की मेहनत  इन्वेस्ट करी है | जो मेहनत लगातार इन्वेस्ट करता रहता है उसको ब्याज में सफलता जरूर मिलती है | इसलिए गोल बनाने के बाद टाइम पीरियड सेट करके देखो इस गोल को पूरा करने में इतने साल की मेहनत का इन्वेस्टमेंट है क्या मैं उसके लिए तैयार हूँ ?




एक्शन प्लान तैयार करिए 


                           अब आपने गोल सेट कर लिया | अब आपको एक्शन प्लान बनाना है |

चेतन भगत अक्सर पूंछते हैं कि हाथी को कैसे खाओगे ?
   जवाब है- छोटे -छोटे पीस करके , एक साथ पूरा खाना संभव नहीं |

                   यही काम एक्शन प्लान में है|  आपका गोल सेट हो गया | टाइम पीरियड सेट हो गया अब आप को काम को छोटे छोटे  हिस्सों में बांटना है | मतलब अगर फिजिक्स की तैयारी  में ५ महीने लगेंगे तो आप बांटिये की एक महीने में कितना तैयार करना है , एक हफ्ते में कितना पढना है | अब अगर एक हफ्ते में दो चैप्टर पढने हैं तो हर दिन कितना पढना है | मान लीजिये आता है हर दिन दो या चार  घंटे फिजिक्स पढना है | अब यहाँ पर आप धक्का मार योजना लगा सकते हैं | कि चलों इतना तो पढ़ा ही जा सकता है | अगर आपको नावेल लिखना है तो हर दिन ४ पेज तो लिखने ही लिखने हैं |

एक्शन प्लान में ख़ास बात ये है कि चार घंटे दसे ज्यादा भी मत पढ़िए , थोडा देर मनोरंजन भी करिये | कुछ लोग पहले दिन १५ घंटे पढ़ लेते हैं , दो दिन बाद १० घंटे फिर हफ्ते भर बाद पांच घंटे फिर छोड़ देते हैं | लम्बी तैयारी  में बीच में में मनोरंजन को स्थान देना बहुत जरूरी है , नहीं तो आप बीच में ही छोड़ देंगे |

बाधाओं के लिये तैयार रहिये 


                                आपने कमाल का एक्शन प्लान बनाया , आप पूरे मन से उसे पूरा करने में लगे हैं तब भी कुछ बाधाएं आयेगीं ...
कजन की शादी हो सकती है
आप बीमार पड़ सकते हैं
                         मान लीजिये इसमें आपके १० दिन खराब हो जाते हैं | ऐसे में अक्सर व्यक्ति काम छोड़ देता है , वो सोंचता है कि टारगेट तो अचीव नहीं हो रहा छोडो , मुझसे नहीं होगा | यहीं पर रुक कर सोंचने की जरूरत है कि छोड़ना नहीं है उस दस दिन के काम को आने वाले दस दिन में थोडा -थोडा डिवाइड कर देना है | इसके लिए शुरू का एक्शन प्लान इतना टाईट न बनाएं कि कुछ और करने की गुंजाइश ही न बचे |

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सही संगति करिए 


                               आपने गोल सेट कर लिया , एक्शन प्लान भी शुरू कर लिया , लेकिन संगति अच्छी नहीं करी तो आप अपना गोल अचीव नहीं कर पायेंगे | क्योंकि ये लम्बी मेहनत में बाधा डालेंगे |
मान लीजिये आप पढना कहते हैं और आप के साथी रोज नयी फिल्म की बात करते हैं तो आप कितने दिन मन को कंट्रोल  कर पायेंगे |
आप वजन कम करना चाहते हैं और आप के घर में सब बहुत ऑयली खाना खाते  हैं ... आप कैसे मन को रोक  पायेंगे ?
आप नावेल लिखना चाहते है और आप के सारे दोस्त रोज़ -रोज़ आप को पार्टी में बुला कर गप्पे लगवाते हैं ... तो आप मन के अन्दर उतर कर लेखन का  काम कैसे कर पायेंगे ?

                     अब यहाँ पर ऐसे ग्रुप की  जरूरत होती है जो आपके सामान ही उस गोल से प्यार करता हो , उसके लिए लम्बी मेहनत को करने को तैयार हो | यहाँ थोड़ी बहुत कॉम्पटीटिव फीलिंग रहेगी तब भी चलेगा , क्योंकि इससे सबका विकास हो रहा है |

विश्वास 

                 जब हम किसी लम्बी मेहनत के रास्ते पर होते है तो कई बार चिंता हो जाती है ... मैं ये काम कर तो पाऊंगा , मैं जीत तो पाऊंगा , मैं कॉम्पटीशन क्रैक तो कर लूँगा |  ये भय दिमाग का स्वाभाव है |  अब इससे बचना के लिए आपको फेथ या विश्वास होना जरूरी है | ये विश्वास ईश्वर  पर , खुद पर , यूनिवर्स पर किसी पर भी हो सकता है | विश्वास आपको धैर्य देता है कि आप  मेहनत कर रहे है तो वो आपको अच्छा परिणाम देगा | आप इस बात पर भी विश्वास कर सकते हैं कि 90 % पैटर्न यही है कि जो मेहनत  करता है वो सफल होता है | तो मैं भी मेहनत कर रहा हूँ , सफल होऊंगा |

                                           ये थे वो ६ स्टेप्स जो चेतन भगत खुद भी फॉलो करते हैं व् अपनी स्पीच में भी फॉलो करने को कहते हैं | चेतन भगत के अनुसार केवल जीनियस व्यक्ति ही सफल हो ऐसा नहीं है , कोई भी सफल हो सकता है बस उसकी स्ट्रेटजी सही होनी चाहिए |

स्मिता शुक्ला
( ये लेख चेतन भगत के एक सेमीनार में दिए गए भाषण से तैयार किया गया है )



फोटो क्रेडिट -विकिमीडिया कॉमन्स 


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atoot bandhan

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