एग्जाम विद्यार्थी जीवन का एक अहम् हिस्सा हैं | प्रश्नपत्र के उत्तर उसका भविष्य तय करते हैं पर क्या झूठे उत्तर दे कर एग्जाम पास किया जा सकता है ?

प्रश्नपत्र


                                        स्टूडेंट्स ने साल भर कितनी पढाई की है और उस पढाई से उन्होंने क्या ज्ञान हासिल किया है इसे परखने का तरीका है परीक्षा , जिसमे प्रश्नपत्र में पूछे  गए प्रश्नों को पढ कर उत्तर देना होता है उसी के आधार पर उत्तीर्ण या अनुत्तीर्ण किया जाता है | परन्तु क्या कोई ऐसा प्रश्न पत्र हो सकता है जिसमें आप कुछ भी लिखे आपका अनुतीर्ण होना निश्चित हो | आइये  जानते हैं ...


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चार दोस्त थे, सुधीर , दीपक , मोहित और अजय | सारा साल वो लग कर पढाई करने के स्थान पर अपना समय खेल कूद और इधर -उधर बर्बाद करते रहे | अर्धवार्षिक परीक्षा में कई विषयों में उनके नंबर इतने कम थे कि अगर वार्षिक परीक्षा में नंबर कम आये तो उनका फेल होना निश्चित था | वार्षिक परीक्षाएं सर पर थी |  वो चारों  बहुत भयभीत थे , सवाल एक ही था कि कैसे पास हुआ जाए | अन्तत : उन्होंने एक योजना बना ली |


जिस दिन उनका इम्तिहान था , उन्होंने खुद को मिटटी में लपेटा | सर में बालों में खूब मिटटी लगाईं और एग्जाम से आधा घंटा लेट कॉलेज पहुंचे | वे सीधे कॉलेज के डीन  के कमरे में गए और उनसे बोले ," सर ,  हम सही समय पर एग्जाम देने आ रहे थे |  हमारे एरिया के पास एक दलदल वाला स्थान है वहां एक बुजुर्ग की कार  फंस गयी | हमने जा  कर देखा , वो कार की सीट पर बैठे तेजी से अपना दिल दबा रहे थे | हमें समझते देर नहीं लगी कि उनको हार्ट अटैक आया है |  उनको हॉस्पिटल तक पहुँचाने के लिए भी कोई और सवारी आस -पास नहीं थी | हमने पूरी ताकत लगा कर  कार को दलदल से निकाला , और  पास रहने वाले लोगों से उन्हें हॉस्पिटल पहुंचाने की गुहार लगायी | क्योंकि वो बस्ती गरीब लोगों की है ज्यादातर लोगों को कार चलाना नहीं आता हैं , इसलिए कोई ड्राइवर नहीं मिला |  तब तक हमने अंकल को फर्स्ट ऐड दिया , तभी एक व्यक्ति उन्हें कार चला कर ले जाने के लिए तैयार हो गया | हमारा एग्जाम था इसलिए हम उस व्यक्ति को कार  की चाभियाँ दे कर एग्जाम देने चले आये | फिर भी ऐसी मानसिक स्थिति में हम एग्जाम देने में असमर्थ हैं |



डीन ने थोड़ी देर तक उन्हें देखा , फिर उन्हें एक हफ्ते बाद एग्जाम देने को कहा | डी न  ने ये भी कहा कि आपका प्रश्न पत्र फिर से सेट होगा |


चारों ने हाँ कर दी | वो बहुत खुश थे , उनकी योजना सफल हुई थी |

हफ्ते भर चारों ने दिन -रात एक कर खूब पढाई की | वो नियत समय पर कॉलेज पहुंचे | सब को पास  होने की पूरी उम्मीद थी |


वो संडे का दिन था | वैसे भी पूरा कॉलेज खाली था | डीन  ने उनको अलग -अलग कमरों में भेज दिया | सबके सामने प्रश्न पात्र रखे गए |

प्रश्नपत्र देख कर चारों के होश उड़ गए |


प्रश्न पत्र इस प्रकार था ...


परीक्षार्थी का  नाम -

पहला प्रश्न - कार किस रंग की थी ?

दूसरा प्रश्न - कार के कौन से पहिये दलदल में फंसे थे ?

तीसरा प्रश्न -कार  चलाने वाल्रे बुजुर्ग ने कौन से रंग की शर्ट पहनी थी ?

चौथा प्रश्न -क्या कार में कोई फर्स्ट ऐड किट थी |

पांचवाँ प्रश्न - जो व्यक्ति उस बुजुर्ग को ले कर गया था , क्या आपने उसका नाम पूंछा था |



और चारों महज इसलिए फेल हो गए क्योंकि उन्होंने प्रश्नों के उत्तर अलग -अलग दिए थे |


                       ये जिंदगी एक परीक्षा ही है , जो झूठ के सहारे नहीं पास की जा सकती |


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Atoot bandhan

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1 comments so far,Add yours

  1. झूठ का भंडाफोड़ करती बहुत प्रेरणादायक कहानी।

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