ब्रेकअप के बाद जिन्दगी खत्म सी लगती है पर निराश होने की जगह जिन्दगी की गाडी वापस पटरी पर लायी जा सकती है |


अगला कदम -ब्रेकअप के बाद  जिन्दगी


ब्रेकअप यानि किसी रिश्ते का खत्म होना , ये प्रेम का खत्म होना बिलकुल भी नहीं है |  अक्सर लोग निराश हो जाते हैं और जिंदगी ही खत्म करने की सोचने लगते हैं | एकता के साथ भी ऐसा ही हो रहा था फिर ऐसी क्या समझदारी दिखाई एकता ने ब्रेकअप के बाद....

ब्रेकअप के बाद  जिन्दगी 


इलाहाबाद में पली बढ़ी  एकता की साँसों में इलाहाबादी अमरूदों की खुशबु मिली हुई थी और    और जुबान में अमरुद् सी मिठास  | माँ -बाबूजी के प्यार का  संगम  , घर में रोज ढेर सारे रिश्तेदारों का आना -जाना , दीदी . भैया से रूठना , मनाना , खट्टे -मीठे झगडे और उनके पीछे छिपा ढेर  सारा प्यार और अपनापन  जीवन की यही परिभाषा जानती थी एकता | दुःख तो दूर से भी नहीं छू गया था उसे |


नटखट चंचल एकता पढाई में भी शुरू से बहुत होशियार थी | एक दिन उसकी मेहनत रंग लायी और उसका चयन मुंबई के मेडिकल कॉलेज में हो गया | घर में ख़ुशी की लहर दौड़ उठी | दूर -दूर से रिश्तेदारों के फोन आने लगे | खुशियाँ जैसे खुद ही उसके दामन में भर जाना चाहती थीं |


पर यही वो समय था जब उसे अपने परिवार से दूर जाना था | स्नेह के आंचल में पली -बढ़ी एकता घबरा तो बहुत रही थी परिवार से दूर रहने के नाम पर | लेकिन अपने कैरियर के लिए जाना तो था ही |


उसका  का सामान बांधा जाने लगा | माँ ने ढेर सारे लड्डू , आचार , पंजीरी आदि भी बाँध दिए | क्या पता उनकी लाडली को वहां का खाना पसंद आये या ना आये | बाबूजी ढूँढ -ढूंढ के सामान ला कर ले जाने वाले सामानों के साथ रखने लगे | कई सामानों को ढूँढने में तो उन्होंने सारा इलाहाबाद छान मारा था | कितना हँसी  थी वो , " अरे  आप लोग तो ऐसे तैयारी कर रहे हैं जैसे ससुराल जा रही हूँ , हॉस्टल ही तो जा रही हूँ |"


जवाब में माता -पिता के साथ खुद उसकी आँखें भी गीली हो गयी थीं |


मुंबई नया शहर ,नयी पढाई , नया जीवन | कभी माँ के खाने की याद आती , कभी भाई -बहनों के साथ की शरारतों की , तो कभी पिता का विश्वास , " परेशांन  क्यों होती हो , मैं हूँ ना " मन को भिगो देता था | धीरे -धीरे उसने खुद को संभाल  ही लिया | कुछ लड़कियों से दोस्ती भी हुई | सबकी आँखों में एक ही सपना था पढने का , आगे बढ़ने का |


हॉस्टल में तो नहीं , हाँ कॉलेज में उसे थोड़ी दिक्कत आती थी | को. एड. जो था | अभी तक तो गर्ल्स स्कूल में ही पढ़ी थी वो | फिर इलाहाबाद शहर भी तो ऐसा था , जहाँ खुलापन इतना नहीं था , भाई लोग भी थे जिनके साथ आना -जाना हो ही जाता था | लड़कों को भैया के अतिरिक्त दोस्त भी समझा जा सकता है ये उसकी परिभाषा में नहीं था | लड़कों से बात करने में एक स्वाभाविक हिचक से गुज़रती थी वो |



उसी के क्लास में एक लड़का था सौरभ | अपने नाम की तरह अपनी हँसी की खुशबु  लुटाता हुआ |  सौरभ ने ही उसके आगे दोस्ती का हाथ बढाया था , पर उत्तर में अपने में ही सिमिट गयी थी वो | समय के साथ वो लड़कों से थोडा -थोडा बात करने लगी पर सौरभ के सामने आते ही हकला जाती |


इसी तरह पूरे दो साल बीत गए | सौरभ रोज उससे मिलना और बात करना नहीं भूलता | क्लास में उनके दबे -छुपे चर्चे होने लगे | खुद उसका मन भी प्रेम के रेशमी अहसास से खुद को कहाँ मुक्त कर पा रहा था | अब तो अकेले कमरे में भी सौरभ हमेशा साथ रहता , भले ही यादों के रूप में |


थर्ड इयर के फाइनल सेमिस्टर के बाद  जब सौरभ ने उससे  साथ में कॉफ़ी पीने को कहा तो वो इनकार ना कर सकी | बातों  ही बातों में सौरभ बोला , " अरे मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा तुम ने मुझ से I Love You कहा |" एकता ने हतप्रभ होते हुए कहा , " अरे , ऐसा कैसे , मैंने ऐसा तो  नहीं कहा |"
सौरभ मुस्कुराया , "तो अब कह दो ना !!!"


एक दिलकश हँसी के साथ प्रेम की पहली बयार की खुशबु वातावरण में फ़ैल गयी |


अगले दो साल .... प्रेम के दिन थे और प्रेम की रातें | वो एक दूसरे से घंटों बातें करते | साथ -साथ घूमने जाते | एक दूसरे  की तस्वीरे खींचते , प्रेम पत्र लिखते | कॉलेज में उनके प्रेम की किस्से सब को को पता थे | कॉलेज के फेयर वेल  के बाद जब उन्हें अपने -अपने घर जाना था तो उन्होंने एक दूसरे से वादा किया कि जल्द ही अपने माता -पिता को मना लेंगे और हमेशा के लिए एक दूसरे के हो जायेंगे |



इलाहाबाद लौट तो आई थी वो पर मन सौरभ के ही पास रह गया था | उसने सौरभ से कह रखा था , पहले तुम अपने माता -पिता से बात कर लेना , फिर मैं कर लूंगी | सौरभ ने भी तो हामी भरी  थी पर मुंबई से कलकत्ता जाने के बाद ना जाने क्यों वो इस सवाल को टालने लगा था | धीरे -धीरे उसके फोन ही आने कम हो गए |



एकता के हिस्से में केवल इंतज़ार था |


नटखट चंचल एकता मौन हो गयी | गुलाब के फूल सा चेहरा मुरझाने लगा | माँ -पिताजी पूंछते तो काम का प्रेशर बता कर बात टालती थी | हालांकि कि वो जानती थी कि हॉस्पिटल के लम्बे घंटों की ड्यटी भी उसे उतना नहीं थकाती , जितना एक पल का ये ख्याल कि कहीं सौरभ उसे भूल तो नहीं गया |उसका फोन सौरभ उठाता नहीं था , खुद उसका फोन आता नहीं था | मन अनजानी आशंकाओं से घिरने लगा था | सौरभ ठीक तो है ना ?



लम्बे इंतज़ार के बाद वो दिन भी आया जब एकता को मेडिकल कांफ्रेस के लिए कलकत्ता जाना था | उसे लग रहा था कि ईश्वर ने आखिरकार उसकी दुआएं कबूल कर ली हैं | उसने सौरभ की पसंद के कपड़े  और ढेर सारे गिफ्ट्स  पैक किये और कलकत्ता की और रवाना हो गयी | पल -पल इंतज़ार को खत्म  करने वाला वो सफ़र बेहद हसीं था |


वो सोच -सोच के खुश हो रही थी कि मेडिकल कांफ्रेस में वो सौरभ के लिए कितना बड़ा सरप्राइज़ होगी | वो कितना खुश हो जाएगा | खुद ही रूमानी कल्पनाएँ करती और खुद ही रोमांचित हो जाती |  कलकत्ते पहुँचने तक रात ज्यादा हो गयी थी , उस दिन वो होटल में रुक गयी | अगले दिन  सौरभ से  मिलने की सोच उसके मन की वीणा के तार बज रहे थे | कांफ्रेस दूसरे दिन  थी | सुबह जल्दी  तैयार हो कर होटल लॉबी  में उतरी ही थी की वहाँ  सौरभ बैठा दिखाई दिया | उसे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ |


पर ये क्या उस के साथ बैठी औरत मांग में सिंदूर , हाथ में चूड़ा , गले में मंगलसूत्र और ... गोद में ६ महीने का बच्चा | क्या .... सौरभ ने शादी कर ली | मन आशंकाओं से काँप उठा | नहीं नहीं , ऐसा नहीं हो सकता , ये उसका भ्रम ही होगा, ये उसकी कोई रिश्तेदार होगी ,  ये सोच कर उसने खुद ही अपने मन को दिलासा दी |


तभी सौरभ का एक दोस्त उसके पास आया | सौरभ ने उससे धीमे से कुछ कहा | प्रतिउत्तर में उसने जोर से  उस औरत की तरफ देख कर कहा , यार सारी दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की से तो तूने शादी कर ली , अब मुझे तो कुवारा ही रहना पड़ेगा | उनकी तेज हँसी में एकता की हिचकी की आवाज दब गयी | हँसी की आवाज़ से सोता हुआ बच्चा कुनमुनाया | शायद वो भूँखा था , बच्चे को लेकर सौरभ की पत्नी टॉयलेट की तरफ चली गयी |


एकता के जी में आया कि अभी जाकर सौरभ से पूंछे कि उसने उसके साथ धोखा क्यों किया है ? तभी  सौरभ के शब्द उसके कानों में पड़े | जानते हो सुमित सर्वमिष्ठा मेरे बचपन का प्यार है | हम बगल ही बगल रहते थे | आंठ्वी तक साथ पढ़ें | फिर उसने ह्यूमैनिटी चुना और मैंने विज्ञान  | पर उसको पाने की एक तमन्ना हमेशा दिल में रही | हालांकि हम दोनों में से किसी ने इज़हार नहीं किया था | पर जब डिग्री ले कर यहाँ आया और माँ ने शादी के लिए पूछा तो मेरे दिमाग में पहला ख्याल सर्वमिश  का ही था |


"अच्छा , और वो एकता जिससे साथ तुम्हारे प्यार के चर्चे मेडिकल कॉलेज पार कर हमारे इंजिनीयरिंग कॉलेज में भी तैर रहे थे ?"सुमित ने आश्चर्य करते हुए कहा |

" यार , वो तो बस टाइमपास था | तुम तो जानते ही हो कि मेडिकल कॉलेज की लाइफ कितनी बोरिंग होती है | बस यूँ ही उसके साथ कट ही गयी | मैंने कोई कमिटमेंट नहीं किया था पर वो थोडा सीरियस हो रही थी लिहाजा यहाँ आने के कुछ समय  बाद से मैंने फोन भी नहीं उठाया | क्या पता अब वो भी किसी के बच्चे की माँ बन अपनी गृहस्थी में व्यस्त हो | "कहते हुए सौरभ के चेहरे पर गर्व था |

फिर से एक जोरदार ठहाका गूंजा |


अब आगे कुछ भी सुनना उसके लिए बर्दाश्त से बाहर था | अपने रूम के बिस्तर पर आ कर वो गिर पड़ीं |  रोते -रोते तकिया गीला हो गया | उसे अपना जीवन बेमानी लगने लगा | क्यों जी रही है वो | वो क्या है एक टाइम पास | इतना अपमान वो सह नहीं सकेगी | नहीं .... अब उसे ये जीवन नहीं चाहिए |


उस दिन उसने पहली बार शराब पी | बेतहाशा पी | नशे की हालत में चल दी अपने जीवन को खत्म करने | बड़कातल्ला की एक व्यस्त सड़क पर उसके लड़खड़ाते कदम जैसे भागती गाड़ियों से उसे कुचल देने की गुहार कर रहे हों | पर मौत  उससे पिछले १० मिनट से आँख मिचौली खेल रही थी | गाड़ियाँ खुद उससे बच के उसके पास से सर्र से निकल जातीं | तभी एक तेज रफ़्तार टैक्सी  जो ठीक उससे दो अंगुल दूर थी | तेज ब्रेक लगाया |

उससे एक 34 -35  साल की औरत उतरी | एकता अपना संतुलन खो कर सड़क पर गिर चुकी थी | उस औरत ने एकता को उठाया | उससके पास से आती शराब की गंध से मामला समझ एक जोर का तमाचा एकता के गाल पर मारा ," मरने चली है , मतलबी लड़की , माँ -बाप भाई -बहन किसी का ख्याम नहीं है तेरे को , खुद तो मर जायेगी पर उनको रोने के लिए छोड़ देगी |


अचानक से एकता को ये ख्याल आया , " ओह , वो ये क्या करने जा रही थी | उसके लिए जान देने जा रही थी , जिसको उसके होने ना होने से कोई फर्क नहीं पड़ता | और वो .... उसके माँ -बाप भाई बहन , वो तो उसके लिए रोते - रोते मर जायेंगे | शायद , जिन्दगी में कभी सामान्य ना हो पाएं | परिवार का ख्याल आते ही शर्मिंदा हुई एकता उस औरत से लिपट  रोने लगी | और आँसुओं के बीच अपनी कहानी  सुना दी | वो औरत उसे अपने साथ गाडी में बिठा कर अपने घर ले आई |


एक चाल नुमा मकान  में उसका भी एक कमरा था , जिसे वो घर  कह रही  थी | नीम्बू पानी देते हुए उसने कहा , " बहुत प्यार करती थी मैं अपने मर्द से , उडीसा से भाग कर आई थी उसके साथ यहाँ , वो भी मुझसे बहुत प्यार करता था , पर मुझसे कहीं ज्यादा शराब से | यही किराए की गाड़ी चलाता था वो | एक दिन ..... ये शराब उसको लील गयी | वो मेरे साथ अपने बच्चों को भी छोड़ कर भाग गया | दो जुडवाँ बच्चे , जिनमें से एक पोलियो से अपाहिज ,पैसे -पैसे को मोहताज जिन्दगी | क्या करती मैं ... ख़ुदकुशी कर लेती ?बच्चों के साथ ले चली जाती दूसरे लोक  | बड़ा आसान लग रहा था | एक झटके में सब परेशानियां खत्म | पर नहीं मैंने जिन्दगी की लड़ाई को चुना |


मैं तो चली जाती पर बच्चों का सास -ससुर का क्या होता ? मैं उसी किराए की गाड़ी को चला कर अपने बच्चे पालती हूँ | सास -ससुर की सेवा करती हूँ | कभी भर पेट नहीं खाया पर तसल्ली है जब ईश्वर के पास जाउंगी तो आँख मिला कर बात करुँगी , तूने जो जिन्दगी दी थी ना उसको पूरी मेहनत से जी के आई हूँ .... मुंह चुरा कर भाग  कर नहीं आई रे तेरे पास | और तू .... तू क्या कहेगी ? एक प्यार के धोखे में , सारे रिश्ते , सारे कर्तव्य से अधूरे छोड़ के आ गयी |


एक अनपढ़ स्त्री से जीवन की सच्चाई जान कर एकता शर्म  से पानी -पानी होने लगी | ओह, वो ये क्या करने जा रही थी | उसे अपने माता -पिता , भाई बहन परिवार नाते -रिश्तेदार सबके आँसुओं  से भरे चेहरे दिखाई देने लगे | सब की आँखों में एक ही सवाल था , " एकता तूने ऐसा क्यों किया ? आखिर हमारे प्यार में क्या कमी थी ? सारा क्रोध अपमान आंसुओं में बहने लगा |

वो होटल लौट आई | दूसरे दिन कांफ्रेस के लिए अच्छे से तैयार हुई | वहां उसने सौरभ की ओर बस एक हल्की सी परिचय वाली मुस्कान बिखेरी और अपने काम में लग गयीं | कॉलेज के शुरुआती दिनों की तरह एक बार फिर सौरभ उससे बात करने के लिए बेताब था , पर उसने ज्यादा तवज्जो नहीं दी और अपने काम में डूबी रही |  उसके डिस्कशन सुन कर सीनियर डॉक्टर्स बहुत प्रभावित हुए |कई ने तो अपनी दलीलों में उसके पॉइंट्स भी शामिल कर लिए | मेडिकल कॉलेज का सामान्य स्टूडेंट सौरभ बस सुनता ही रहा | 


शाम के डिनर में भी वो   सौरभ से अकेले मिलने से कतराती रही | लेकिन  जब वो , सुमित व् कुछ अन्य दोस्तों के साथ खड़ा था | तो एकता अपने एक दोस्त से मिलने के बहाने वहाँ  पहुँची | बातों ही बातों में उसने जता दिया कि उसे अपनी पसंद का जीवनसाथी मिल गया है और कुछ समय बाद वो उससे शादी कर लेगी |


"अरे , हमने तो सौरभ के साथ आपके रोमांस के बड़े किस्से सुने थे " सुमित ने चुटकी ली |
"ओह वो "एकता ने सौरभ की और देखकर हँसते हुए कहा , " वो तो टाइम पास था , आप तो जानते ही हैं मेडिकल कॉलेज की लाइफ कितनी बोरिंग होती है | घर -परिवार से दूर इतनी सारी  पढाई करने के लिए थोडा सा सॉफ्ट टच तो जरूरी है |"

"लो जी , तो मैडम का भी टाइम पास था |" सुमित ने फिर चुटकी ली |

हँसते हुए एकता आगे बढ़ गयी | थोड़ी  दूर जा कर उसने पलट कर देखा | सारे दोस्त अभी भी हँस रहे थे |

और सौरभ के चहरे पर कलके गर्व मिश्रित भाव के स्थान पर अपमान का भाव था | जैसे किसी ने जोरदार तमाचा उसके गाल पर मार दिया हो | उसकी आशा के विपरीत ... अचानक |

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*शराब पीना सेहत के लिए हानिकारक है | * आत्महत्या किसी समस्या का हल नहीं | 


ये वैलेंटाइन वीक चल रहा है | चारों  तरफ हवाओं में प्यार की खुशबु फैली हुई है | पर सबके नसीब में अपने प्यार को पा लेना नहीं होता | कुछ का ब्रेक अप हो जाता है | कई बार प्यार में धोखा भी मिलता है | इसी  में कुछ लोग आत्महत्या जैसा कदम भी उठा लेते हैं |  इस कहानी का मुख्य सूत्र एक ऐसी ही बच्ची है   जिसने प्रेम में निराश हो कर आत्महत्या कर ली | उसका प्रेमी आज अपने घर परिवार के साथ सुखी है पर उसके माता -पिता आज भी उसकी याद में तड़प रहे हैं |

ये कहानी एक प्रयास है ये समझाने का कि ब्रेकअप के बाद भी जिन्दगी होती है | जीवन से निराश हो कर अपनों को छोड़ कर जले जाने स्थान पर अपनों के लिए जीना ज्यादा बेहतर फैसला है | किसी की गलती की सजा दूसरों को देना खासकर कि अपने माता -पिता को देना गलत है |


 हमारे हिन्दू धर्म में आत्महत्या को पाप बताया गया है | 



क्या करें ब्रेकअप के बाद ...

ब्रेकअप या प्यार में धोखे के बाद जीवन में नकारात्मकता छा जाती है | ऐसा लगता है सब कुछ खत्म हो गया पर  ब्रेकअप के बाद भी जिन्दगी है | यहीं पर रुक नहीं जाना है ..... उस जिन्दगी को तलाशना है |


आइये जानते हैं ब्रेक अप के बाद क्या करे..

स्वीकार करें -

          स्वीकार करें की ब्रेकअप हो गया है | अक्सर मन इस बात को स्वीकार नहीं करना चाहता कि ब्रेक अप हो गया है | उसे लगता है कुछ दिनों बाद सब ठीक हो जाएगा | इसलिए बार -बार फोन करना , पीछा करना , मिलने की कोशिश करना जारी रहता है | ये चीजे हर बार दिल तोड़तीं हैं | हर बार उसी दर्द से गुज़रना पड़ता है |जिस समय आप ये मान लेते हैं कि ब्रेक अप हो गया है | हीलिंग प्रोसेस शुरू हो जाता है | इसलिए  सबसे पहले इस बात को दिलके अंतिम कोने से स्वीकार करना होगा कि ब्रेकअप हो गया है |

उन लोगों से बात करें जो इससे गुजरें हैं ...
                                       दुनिया में आप से पहले भी बहुत लोगों का ब्रेकअप हो चूका है और वो इस समस्या से उबर चुके हैं | कोशिश करिए कि उनसे बात करें | आप को अहसास होगा ब्रेकअप से जूझते या उबरते आप अकेले नहीं हैं | साथ ही आप को कुछ टिप्स भी  मिलेंगी अपनी जिन्दगी की गाडी को दुबारा पटरी पर लाने की |


सेल्फ केयर है जरूरी -

                         ब्रेकअप के बाद खाना न खाना , नहाना -धोना भूल जाना , अवसाद में चले जाना आम बात है |जरूरी है कि इस समय अपनी सेहत का ख्याल रखें | शराब बिलकुल ना पियें  , ये समस्या को उलझा देगी | मानसिक दुःख झेलता हुआ शरीर जल्दी ही शारीरिक रोग की गिरफ्त में आ जाता है | अपने खाने का ध्यन रखें | व्यायाम करें , हल्का संगीत सुनें |

जल्दी दूसरे रिश्ते में ना पड़ें -

                                 अक्सर लोगों से ये गलती हो जाती है | अपने एक्स को दिखने के लिए लोग जल्दी से जल्दी नया प्यार ढूंढना चाहते हैं |  कुछ लोग गम गलत करने के लिए भी ऐसा करते है | दोनों रास्ते गलत हैं | क्योंकि इतनी जल्दी कोई राईट पार्टनर मिल जाए , ऐसा होता नहीं है | फिर एक के बाद एक ब्रेकअप की सीरिज शुरू हो जाती है और निकलना उतना ही  मुश्किल |


सोशल मीडिया पर करें ब्लॉक -

                                आप को भले ही अटपटा लगे पर उसी को  बार -बार देखना आपके हित में नहीं हैं | इसलिए सोशल मिडिया पर उसे ब्लाक कर  दें | फोटो , चैट जो भी आपके पास है उसे डिलीट कर दें | यकीन मानिए इससे उसकी सपनों में आवाजाही भी कम हो जायेगी |


कैरियर पर करें  फोकस -

                            ब्रेकअप से  जल्दी से जल्दी आगे निकलने के लिए आप अपने कैरियर पर फोकस करें |  कैरियर  पर फोकस हर बात से आपका ध्यान  हटा सकता है | वैसे भी सफलता के नशे से बेहतर कुछ भी नहीं होता | प्रेम विवाह भी आगे उतने रूमानी नहीं रह जाते हैं पर  सफलता का रोमांच कभी कम नहीं होता | इसलिए जितनी जल्दी हो अपना फॉक्स शिफ्ट करें |


खुद को दोष ना दें -

                           ब्रेक अप के बाद लोग खुद को दोष देने लगते हैं | मैंने उसके कहने पर काफी पीनी शुरू कर दी होती , या उसके दोस्त से बात ना की होती वैगेरह वगैरह तो रिश्ता नहीं टूटता | याद रखिये इतनी छोटी -छोटी बातों पर रिश्ता नहीं टूटता | अगर टूट रहा है तो वो प्यार था ही नहीं | रिश्ते टूटने की वजह गहरी होती हैं | जो दो लोगों के बीच हमेशा होती हैं पर हम शुरू में उसे नज़रअंदाज कर देते हैं | इसलिए खुद को दोष मत दीजिये वो रिश्ता टूटना ही था |


रिश्ता खत्म होने के बाद दोस्त ना बनें -

                               जिससे भी रिश्ता खत्म हुआ है उसे पूरी तरह से रिश्ता खत्म करें , दोस्त ना बने | ये वैसे ही दुःख देता है जैसे हठी निकल गया और पूछ पकड ली |  ये ज्यादा दुःख देता है | कई बार वो व्यक्ति वापस लौटता भी है | लेकिन अगर आप दोस्ती में नहीं रहेंगे तो आप फिर से अपनी प्राथमिकताएं तय कर सकते हैं |


                                  मित्रों हर टूटता हुआ रिश्ता दर्द देता है | अगर आप भी ब्रेकअप के बाद जिन्दगी फिर फिर से शुरू करने की  समस्या से गुज़र रहे हैं तो ए लेख आपके लये अवश्य उपयोगी होगा | अपने सवालों को आप कमेन्ट बॉक्स में पूछ सकते हैं |

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filed under- Breakup, Love, Valentine day, Sucide, how to move on

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atoot bandhan

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1 comments so far,Add yours

  1. रोचक, हृदय स्पर्शी और शिक्षाप्रद।

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