नयी -नयी दुल्हन के रूप लावन्य पर मोहित दुल्हे की कहानी

कहानी -मेरी दुल्हन


लाली -लाली डोलिया में लाली रे दुल्हनिया ... नयी नयी दुल्हन का क्रेज ही कुछ ज्यादा होता है | सोचने की बात ये हैं कि जब घर परिवार को इतना होता है तो दुल्हे मियाँ को कितना होता होगा, पर ये लम्बी -लंबी उबाऊ परम्पराएं ..आखिर धीरज रहे भी तो कैसे ?


कहानी -मेरी दुल्हन 



आज मेरी शादी का दिन था!सारा घर मेहमानों से भरा पडा था!मेरी शादी मे सबसे पहले मां भगवती का जागरण हुआ,बाद मे अन्य रस्मे।मेरी शादी मे आये मेरे चचेरे भाई भी ठिठोली से बाज नही आये,और मुझे छेड रहे थे!चचेरी बहने अलग से चुहलबाजी करती रही। खूब धमाल-चौकडी लगी थी।सभी प्रकार के रीति-रिवाजो को करके मेरी शादी ठीक  से सम्पन्न हो चुकी थी। रिवाज के हिसाब से तारो की छांव मे मै अपनी दुल्हन की डोली लेकर अपने घर लौट आया था।


दिसम्बर माह की बर्फानी राते थी।ठंड अपने पूरे शबाब पर थी। मेरी मां ने मेरी दुल्हन को आराम करने के लिये एक कमरे मे सुला दिया,थकी हुई वो जल्द ही नींद की आगोश मे समा गयी।विदाई संग आया भाई भी बहन के कमरे मे ही था। अपनी दुल्हन से बात करने को अधीर था मै,और वो शर्म से निगाहे नीची किये थी।तीखे नैन-नक्श,सुराही दार लम्बी गर्दन,व गोरा मुखडा,जिस पर शर्मीली झुकी हुई आंखे,माथे पर खेलती कटी जुल्फे!सौन्दर्य की साक्षात मूरत मेरे सामने थी पर मै बात नही कर सकता था क्योकि संयुक्त परिवार की कुछ मर्यादा थी।

पढ़िए -स्वाद का ज्ञान 


बाहर अंधेरा था,सभी रिश्तेदार दो घंटे के लिये आराम करने लगे।और मेरी दुल्हन भी सो गयी थी। सूरज निकल आने पर दुल्हन का भाई तो चला गया वापिस अपने घर।तभी मेरी बडी भाभी ने मेरी दुल्हन को तैयार कर दिया था!और नाश्ते हेतु डाईनिंग रुम मे बैठा दिया था! मेरी मां ने बडे प्यार से नाश्ता परोसा।


दही संग आलू के परोठे देख मै खुश हो गया था!पर ये क्या,दुल्हन ने जरा सा खाते ही छोड दिया!मुझसे रहा नही गया!पूछ ही बैठा:- क्या हुआ?खाना अच्छा नही क्या?
दुल्हन :-नही,नही, भूख नही है!शर्माते हुए कहा। 
फिर मैने जोर देकर कहा:-कुछ तो खाओ! 
इस पर दुल्हन ने साफ कह दिया:-इन पराठों मे तो मिर्चें बहुत तेज है,मै नही खा सकती। और जल्द ही व उठ गयी वहां से।

घर मे और रिश्तेदार भी घूम रहे थे,और मै मायूसी से चुप रह गया।। इसी बीच नाश्ते के बाद हमे पग फेरे की रस्म के लिये ससुराल जाना था। वहां जाकर दुल्हन अपने भाई बहनो मे रम गयी,मुझे उससे बात करने का मौका भी नही मिल पा रहा था, रात को हम लोग वहां से वापिस लौट आये। 


हां इतना जरुर था कि वहां से लौटते समय मै उसके संग ही बैठा था तो मै ठंड से बचने के लिये एकाएक अपने दोनो हाथ रगडने लगा,तो उसने धीरे से पूछा:-"आप ये क्या कर रहे हो"? मैनै हंस कर कहा:-"हीट ले रहा हूं"। और फिर वो चुपचाप हो गयी। तभी मै रात होने का इन्तजार करने लगा और कल्पना करने लगा,कि जब रात होगी,तो वो तारो को अपने आंचल मे समेटे मेरी राह देखेगी और मेरे भीतर उफनते मादक प्रेम को अपने कोमल हाथो के स्पर्श से पुलकित कर देगी!उसके यौवन के भार से लदे अप्रतिम सौन्दर्य का रसपान करने के लिये मै व्याकुल हो उठा।


इतनी सुन्दर,कोमलांगी,दुल्हन को पाकर मै खुशी से फूला नही समा रहा था!अपने सपनो मे,अपनी कल्पना मे, जिसकी मूरत बना रखी थी,वो तो उससे भी ज्यादा सुन्दर थी,प्यारी थी,!उसक़ो देखते-देखते मैने अपने प्रेम की उस मीठी अनुभूतियो को बडी शिद्दत से महसूसा।ज्योहि मैने उसे अपनी बाहो मे भरना चाहा,तभी बडी भाभी ने इशारे से अपने पास बुला लिया और मुझे घूमने भेज दिया। सबके सो जाने के बाद,मुझे मेरे कमरे मे जाने की इजाजत मिली।

पढ़िए -सही इलाज़

 रात काफी हो चुकी थी,इधर मेरी दुल्हन मेरा इन्तजार करते-करते कब सो गयी,उसे खुद भी पता नही चला। एक बार तो मेरी दुल्हन को सोता देख मुझे उस पर प्यार भी आया और गुस्सा भी, पर.....मै कुछ सोचने लगा। मेरे सामने अतुलनीय रूप की मल्लिका आंखें मीचे सो रही थी,उसका अंग-अंग प्रेम की अठखेलियां खेलने को तैयार था,मुझे पल पल कामुकता से सरोबार कर रहा था,और मै मौन था। जब काफी समय गुजर गया,मेरे सब्र का प्याला छलकने लगा,तो मुझसे रहा नही गया!मैने उस सोती हुई अपनी दुल्हन को अपने बाहुपाश मे ले लिया।


तभी वो अलसायी सी कुछ बोली:-मुझे सोने दो,बडी नींद आ रही है,!तभी मैने उसके गालो पर चुम्बनो की बोछार कर दी,हंसते हुऐ कहा-आज की रात तुम्हारे मेरे मिलन की रात है,आज की रात जीवन मे एकबार ही आती है,जागो और मुझे प्रेम कर लेने दो,मै तुम्हारे प्रेम का पुजारी हूं,मुझे जी भर कर रसपान कर लेने दो।खैर,मेरी शर्मीली दुल्हन जाग गयी और वो मेरी बाहो मे समा गयी।उसका सामीप्य पाकर मै खिल उठा और सारी रात एक दूसरे से बाते करते गुजर गयी

!एक दूसरे का गीतो का आदान प्रदान करते हुऐ मिलन की रात कब उजाले मे बदल गयी,पता ही नही चला।एक नयी भोर का आगाज हो चुका था,जो संग लायी थी,ढेरो खुशियां.-समर्पण व सहयोग की भावना व जीवन भर साथ देने की कसमे।।।
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रीतू गुलाटी 

लेखिका -रीतू गुलाटी





                                                              हामिद का तोहफा



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Atoot bandhan

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