ये कहानी है अलवर के महाराज जयसिंह की जब उन्होंने रोल्स रायस के मालिकों को दिखा दिया की हम भारतीय भी किसी से कम नहीं

हम किसी से कम नहीं


कुछ लोग अपने को बहुत बड़ा समझते हैं वो किसी की इज्ज़त नहीं कर पाते | ऐसे लोगों की बेईज्ज़ती करके ही उन्हें सही राह दिखानी पड़ती है | पर आज हम बात किसी व्यक्ति की नहीं देश की कर रहे हैं | जहाँ एक देश के लोग दूसरे देशों को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ते | जी हां , आप बिलकुल सही समझे ये वाकया तब का है जब हमारा देश अंग्रेजों का गुलाम था | उस समय अंग्रेज भारतीयों को ब्लडी इन्डियन , या कंगाल आदि जाने क्या –क्या कह कर संबोधित करते थे | आम भारतीय इस अपमान का गरल चुपचाप पीते रहते थे | करते भी क्या बेचारे |


पर एक बार उनका पाला एक ख़ास आदमी से पड़ा | वो अपमान पर चुप नहीं बैठा | उसने नहले पर दहला मारा | जानते हैं वो ख़ास आदमी कौन था | वो थे महाराजा जय सिंह |

Moral story on self esteem


बात तब की है जब महाराजा जय सिंह इंग्लैण्ड गए हुए थे | वो सादे कपड़ों में शाम को लंदन  में घूम रहे थे | वहां उन्होंने रोल्स रायस का शो रूम देखा |और कार का भाव जानने  अन्दर चले गए | शो के मालिक ने उन्हें कंगाल भारत का कंगाल आदमी कह कर अपमानित किया और कार दिखाए  बिना "GET OUT " कह  कर बाहर निकाल दिया |

अपमानित हो कर माहाराज होटल लौट आये और उसी शो रूम में फोन लगवाया कि अलवर के महाराज रोल्स रायस देखना चाहते हैं | कुछ समय बाद महाराज अपनी राजसी पोशाक में पूरे दल बल के साथ उसी शो रूम में पहुंचे | तब तक उनके स्वागत के लिए वहां रेड कारपेट बिछाया जा चुका था |

महाराज ने 6 रोल्स रायस खरीदी | वापस देश  आने पर उन्होंने वो गाड़ियां नगर महापालिका को  कूडा उठवाने के लिए दे दी | अब उन पर दिन भर अलवर राज्य का कूडा उठवाया जाता |

विश्व की नंबर वन मानी जाने वाली रोल्स रायस कार का इस तरह कूडा उठवाने में उपयोग होने का समाचार विश्व भर में फ़ैल गया | अब  कोई रोल्स रायस खरीदने की सोंचता तो लोग हंस कर कहते की अच्छा , अच्छा वही रोल्स रायस जिससे इंडिया में कूड़ा  उठवाया जाता है | रोल्स रायस की बहुत बदनामी होने से उसकी बरसों की बनायीं इज्ज़त तार – तार होने लगी |कारों की बिक्री घट गयी |मालिकों को बहुत ज्यादा आर्थिक नुक्सान होने लगा | 
  

चारो तरफ हुई किरकिरी से  घबरा कर रोल्स रायस के मालिक के महाराजा को तार भेज कर माफ़ी मांगी व् उनसे अनुरोध  किया की वो इसका उपयोग कूड़ा उठाने में न करें | इसके एवज उसने उन्हें ६ नयी रोल्स रोयस कारे भेजीं |


 महाराजा को जब विश्वास हो गया की उन्हें सबक मिल गया है तो उन्होंने कारों से कूडा उठवाना बंद कर दिया | इस तरह उन्होंने अपमान का जवाब नहेले पर दहला मार कर दिया | और दिखा दिया कि हम किसी से कम नहीं | 

कोई किसी से कम नहीं 



दोस्तों , महाराजा को छोटा समझ कर उनका अपमान करने की जो भूल रोल्स रायस के शो रूम के मैनेजर ने की थी | उसका दंड उसे भारी आर्थिक नुक्सान व् अपनी साख खो कर चुकाना पड़ा | माहाराज ने उसको जाता दिया की हम किसी से कम नहीं

लेकिन बात सिर्फ इतनी नहीं हैं | ये  कहानी प्रेरणा देती है की  जरूरी है की हम सबका सम्मान करे किसी की आर्थिक , शारीरिक या मानसिक कमी के कारण उसका मजाक न उडाये | 

अब यहाँ आप कह सकते हैं की वो तो महाराजा थे | वास्तव में अमीर थे | वो तो केवल सादे कपड़ों में जाने के कारण अपमानित हुए थे | उनके पास तो बहुत पैसा था इसलिए उन्होंने अपने अपमान का बदला ले लिया | आम आदमी के अपमान का बदला कौन लेगा | 

तो मैं यहाँ ये कहना चाहूंगी कि आम आदमी के अपमान का बदला समय लेगा | समय किसी का एक समान नहीं रहता | हो सकता है आज जिसे आप कमजोर समझ कर अपमानित कर रहे हैं कल को वो या उसके बच्चे बहुत ताकतवर बन कर आपके सामने आये | और आप को दिखा दें की हम किसी से कम नहीं | फिर आपके पास मुँह छिपाने का भी मौका नहीं होगा | बेहतर है समय रहते समझ लें की "कोई किसी से कम नहीं " | इसलिए किसी का भी शारीरिक , मानसिक या आर्थिक कमी के कारण अपमान न करें | 

दीप्ति दुबे 

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Atoot bandhan

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