नीलम गुप्ता 

शिक्षक दिवस अपने शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करने का दिन है |क्यों न हो आखिर उन्हीं ने तो हमें ज्ञान का मार्ग दिखाया है  ऐसे में अपनी एक टीचर के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आपसे अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण किस्सा शेयर करना चाहती हूँ | 

                    बात तब की है जब मैं बहुत छोटी थी | अपने पापा -मम्मी की एकलौती बेटी होने के कारण शैतान और नकचिढ़ी  भी थी | जिद्दी इतनी की जो मांगू जब तक मिल न जाए तो खैर नहीं | पढ़ाई से तो मेरा दूर -दूर तक नाता ही नहीं था | हर बार पी टी ऍम में माँ -पापा को मेरी ढेरों शिकायतें सुनने को मिलती | घर में आ कर माँ मुझे पढने के लिए कहती , डांटती  ,मारती पर मेरे कान पर जूँ भी नहीं रेंगती |




बात शायद फोर्थ क्लास की है जब मेरी रोज -रोज होम वर्क न करने की आदत से परेशांन  हो कर  मेरी टीचर ने माँ को समझाया की इसी किसी ईनाम का लालच दीजिये जिससे ये पढ़े व् अच्छे नंबर लाये | मेरे पापा बड़े व्यवसायी हैं ,घर में कोई कमी कभी देखी  नहीं |फिर भी माँ ने टीचर की बात पर अमल करते हुए     मेरा मनपसंद कैमरा देने की पेशकश की | उन्होंने कहा " अगर मैं इस बार अच्छे नंबर लायी तो वो मुझे गिफ्ट में कैमरा देंगी
| पर  मेरे दिमाग में कैमरा घूम गया ,मैं इतना सब्र कहाँ कर सकती थी|  मैं उसी रात पापा से उस कैमरे की जिद कर बैठी , मैंने खाना भी नहीं खाया |पापा की लाडली होने के कारण एक दो दिन में  कैमरा मेरे हाथ में था | फिर किसको पढना था | बस दिन भर क्लिक ,क्लिक ,क्लिक |


नतीजा मेरी कक्षा में सबसे पिछली रैंक आई | बस यूँ कहिये की फेल होने से बच गयी | माँ -पापा चाहते थे की मैं अच्छी पढाई  करू ....पर  मैं तो मैं ही रही| अगले साल क्लास ५ में स्कूल की तरफ से बंगलौर टूर गया | जाहिर हैं मैं भी गयी | हमने बहुत मजा किया | 

एक दिन यूँ ही घुमते -घुमते हम इंडियन इंस्टीट्युट ऑफ़ साइंस के बाहर से निकले | मेरी टीचर ने " नीलम देखो , इसके अन्दर हर कोई नहीं घुस सकता , केवल अपनी योग्यता को सिद्ध करके ही यहाँ प्रवेश मिल सकता है | पैसे के दम पर तुम दुनिया में चाहे जहाँ घूम लो पर यहाँ तुम्हारे पापा का पैसा काम नहीं आएगा | मैं एक टक  देखती रही |

 उस दिन से मैंने प्रण किया कि मुझे बहुत पढना है आई .आई .एस में  जाना है | मेरी शैतानियाँ थम गयी | टीचर ,माँ -पापा सब हैरान की मुश्किल  से पास होने वाली नीलम ९९ % नंबर कैसे ले आई | तब से आज तक मैं लगातार फर्स्ट  फाइव में आती रही | न  जाने कितने इंटर स्कूल क्विज कॉम्पटीशन जीते  | एक छोटे से वाक्य ने मेरे जीवन की दिशा बदल दी |


टीचर की प्रेरणा से ही एक  शैतान  पढ़ाकू में बदल गयी ,पर जिद्दी अभी भी हूँ और यह जिद्द ही मुझसे  सफलता के नए नए अध्याय लिखवा रही है | मुझे ये सफलता  मिली है ....अपनी प्रतिभा के दम  पर | अपने पापा के पैसे के दम  पर नहीं |

आज अपने टीचर को याद करते हुए मन भावुक हो रहा है | एक सलाम मेरी टीचर के नाम 




अटूट बंधन

टीचर से संबंधित  पोस्ट ....
कहानी - फिर हुई मुलाकात

लघुकथा - प्रतिशत

शिक्षक दिवस पर विशेष - मैं जानता था बेटी ( संस्मरण )

गुरु चरण सीखें ( कविता )

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Atoot bandhan

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2 comments so far,Add yours

  1. बहुत ही प्रेरक कहानी सुंदर भाव और एक लक्ष्य भी।

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    1. धन्यवाद स्वेता जी

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