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Monthly Archives: August 2016

कुछ चुनिन्दा शेर

मेरा मशवरा है यही  की तोड़ दो उसे  जिस आईने में ऐब अपने दिखाई न दें  कहती है मेरे साथ कब्र में भी जायेगी  इतना प्यार करती है...

सच की राहों में देखे हैं कांटे बहुत,

सच की राहों में देखे हैं कांटे बहुत,पर,कदम अपने कभी डगमगाए नहीं।बदचलन है जमाने की चलती हवा,इसलिए दीप हमने जलाए नहीं ।खुद को खुदा मानते...

जिन्दगी कुछ यूं तन्हा होने लगी है

जिन्दगी कुछ यूं तन्हा होने लगी है अंधेरों से भी दोस्ती होने लगी है  चमकते उजालों से लगता है डर हर शमां वेबफा सी लगने लगी है  सच्चाइयों...

विचार मनुष्य की संपत्ति हैं

ओमकार मणि त्रिपाठी प्रधान संपादक – अटूट बंधन एवं सच का हौसला जिस हृदय में विवेक का, विचार का दीपक जलता है वह हृदय मंदिर तुल्य...

लघुकथा – कला

तुम्हारा क्या … दिन भर घर में रहती हो … कोई काम धंधा तो है नहीं … यहाँ बक बक वहां बक बक …...

हमारी ब्रा के स्ट्रैप को देखकर तुम्हारी नसें क्यों तन जाती हैं ”...

अरे! तुमने ब्रा ऐसे ही खुले में सूखने को डाल दी?’ तौलिये से ढंको इसे। ऐसा एक मां अपनी 13-14 साल की बेटी को...

रक्षा बंधन -भाई बहन के प्यार पर हावी बाज़ार

मेरे भैया मेरे चंदा मरे अनमोल रतन तेरे बदले मैं ज़माने की कोई चीज न लूँ                               रेडियो पर बहुत ही भावनात्मक मधुर गीत बज...

जोरू का गुलाम

राधा आटा गूंधते गूंधते बडबडा रही थी " पता नहीं क्या ज्योतिष पढ रखी है इस आदमी ने हर बात झट से मान जाता...

सपेरे की बिटिया

कभी पढ़ने आती थी हमारे स्कूल में, सपेरो की बस्ती से--------------- एक सपेरे की बिटिया। वे तमाम किस्से सुनाती थी साँपो के अक्सर,वे खुद भी साँपो से...

बैरी_सावन

मन के दबे से दर्द जगाने फिर से बैरी सावन आया। सूना आँगन सूनी बगिया माना नहीं है कोई घर में यादें कहती मुझे बुलाकर हम भी तो रहती...

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