हमारे जीवन की वर्तमान दशा और दिशा ही हमारा भविष्य तय करती हैं. इंसान सोचता मन से है और करता अपने तन से है  यानी जीवन की सरिता तन और मन जैसे दो किनारों के बीच बहती रहती है.मन के अंदर के विचार ही बाह्य जगत में नवीन आकार ग्रहण करते हैं। जो कल्पना चित्र अंदर पैदा होता है, वही बाहर स्थूल रूप में प्रकट होता है। सीधी-सी बात है कि हर विचार पहले मन में ही उत्पन्न होता है और मनुष्य अपने विचार के आधार पर ही अपना व्यवहार निश्चित करता है।
विचारों का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है.सुख-दुःख , हानि-लाभ,उन्नति-अवनति,सफलता-असफलता, सभी कुछ हमारे अपने विचारों पर निर्भर करते हैं। जैसे विचार होते हैं,वैसा ही हमारा जीवन बनता है। संसार कल्पवृक्ष है, इसकी छाया तले बैठकर हम जो विचार करेंगे, वैसे ही परिणाम हमें प्राप्त होंगे। जिनके दिलो-दि
माग सद्विचारों से भरे रहते हैं, वे पग-पग पर जीवन के महान वरदानों से विभूषित होते हैं।
जो अंधकारमय, निराशावादी विचार रखते हैं, उनका जीवन कभी उन्नत और उत्कृष्ट नहीं बन सकता। कुएं में मुंह करके आवाज देने पर वैसी ही प्रतिध्वनि उत्पन्न होती है। संसार भी इस कुएं की आवाज की तरह ही है। मनुष्य जैसा सोचता है एवं विचारता है, वैसी ही प्रतिक्रिया वातावरण में होती है। मनुष्य के विचार शक्तिशाली चुंबक की तरह होते हैं,जो अपने समानधर्मी विचारों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
विचारों में एक प्रकार की चेतना शक्ति होती है। किसी भी प्रकार के विचारों के एक स्थान पर केंद्रित होते रहने पर उनकी सूक्ष्म चेतना शक्ति घनीभूत होती जाती है. प्रत्येक विचार आत्मा और बुध्दि के संसर्ग से पैदा होता है। बुध्दि उसका आकार प्रकार निर्धारित करती है तो आत्मा उसमें चेतना फूंकती है। इन  विचारों का जब केंद्रीयकरण हो जाता है,तो एक प्रचंड शक्ति का उदभव होता है।
 सुन्दर और सकारात्मक विचार, मनुष्य के जीवन को स्वर्ग और शांत बना देते हैं और इसी प्रकार नकारात्मक सोच और निराशा उसके जीवन को नरक बना देते हैं. नकारात्मक और विध्वंसक सोच जब मन में पैदा हो जाती है और मन में फैलने लगती है,तो बहुत तेज़ी से पूरे मन को अपने क़ब्ज़े में ले लेती है और इस स्थिति में हम पूरी तरह से नकारात्मक सोच के चंगुल में फंस जाते हैं। सकारात्मक और सार्थक सोच ऊर्जावर्धक होती है, जो अभ्यास, बार-बार दोहराए जाने और सीखने से मन में पैदा होती  है और मनुष्य के जीवन को दिशा निर्देशित करती है.
 हर व्यक्ति के जीवन में कभी न कभी निराशा के पल आते ही हैं .निराशा के उन पलो में सकारात्मक विचार संजीवनी का काम करते हैं.जो सकारात्मक हैं और आशा की उर्जा से सराबोर हैं,उन्हें सकारात्मक विचार अतिरिक्त उर्जा देते हैं और यही वजह है कि " अटूट बंधन " पहले अंक से ही सकारात्मक विचारों वाले प्रेरणादाई लेखो को प्राथमिकता देता आ रहा है.हमारी हमेशा यही कोशिश रहती है कि इस पत्रिका में प्रकाशित हर रचना पाठको के मन में नवचेतना का संचार करे.निराशा के अन्धकार से लड़ने और आशावाद का उजाला फैलाने की हमारी इस कोशिश को आप सबने अपार स्नेह दिया है और हमें पूरा यकीन है कि भविष्य में भी इस पत्रिका को इसी तरह आपका स्नेह मिलता रहेगा.



















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Atoot bandhan

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