डूबते को तिनके का सहारा होता है ये सुना तो था पर जब अहसास हुआ तो लगा कि ये छोटी -छोटी कोशिशें बंद नहीं होनी चाहिए |

डूबते को तिनके का सहारा




कहते हैं 'डूबते को तिनके का सहारा होता है |" कई बार हमारी छोटी सी मदद, छोटी सी बात , या छोटा सा सहयोग किसी दूसरे की जिन्दगी बदल सकता है | ये ऐसे होता है कि हमें पता भी नहीं चलता | संभावना इस बात की भी नहीं होती कि अनजाने हमने जिसकी मदद कर दी है वो कभी हमें मिलेगा भी | फिर भी कुछ किस्से ऐसे होते हैं जो दूसरों की मदद कर उनकी जिन्दगी संवारने के हमारे विश्वास को दृण कर देते हैं | 



डूबते को तिनके का सहारा 


कभी-कभी कुछ अप्रत्याशित घटनाएं आपकी सोच को एक दिशा देती हैं | कल भी एक ऐसी ही घटना घटी | घटना का जिक्र करने के लिए दो साल  पीछे जाना पड़ेगा | 

मैं अपनी बेटी के साथ डॉक्टर के यहाँ ब्लड टेस्ट के लिए गयी हुई थी | वहाँ  अन्य महिलाएं भी अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहीं थी | उन्हीं में से वो महिला भी थी | जो अपनी फर्स्ट प्रेगनेंसी के लिए अल्ट्रासाउंड कराने आई थी | वो महिला बहुत खूबसूरत और साधारण परिवार से थी | महिला रंग गहरा साँवला या काला कहा जाए तो ज्यादा उचित होगा, था | बगल में बैठा उसका पति जो काफी गोरा चिट्टा था, लगभग हर गोरी महिला को घूर रहा था | ये घूरना इतना स्पष्ट था की उसे नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता था | बीच –बीच में वो उपेक्षा से अपनी पत्नी से कुछ कह देता जो हम लोग सुन नहीं पा रहे थे पर समझ रहे थे | हालाँकि वो हौले –हौले मुस्कुरा रही थी | क्योंकि हम सब को समय काटना था | तो कोई किताब पढने लगा कोई बातों में व्यस्त हो गया | मेरी बेटी एक कागज़ पर स्केचिंग करने लगी | कुछ फूल पत्ती बनाने के बाद उसने उस महिला का स्केच बनाया | हमारी बारी पहले आई और हम जाने लगे तो बेटी ने वो स्केच उसे देते हुए कहा, “आप बहुत ही खूबसूरत हैं, इसलिए मैं ये स्केच बनाने से खुद को रोक नहीं पायी | आप अपनी स्माइल को हमेशा बनाए रखियेगा |”  उसके चेहरे पर आश्चर्य मिश्रित ख़ुशी के भाव छोड़कर हम घर आ गए |


अभी कल वो अचानक से मिल गयी | दूर से देख कर जोर से हाथ हिलाया | मुझे पहचानने में थोड़ा वक्त लगा, उतने में वो मेरे पास आ कर बोली, “नमस्ते आंटी बेटी कैसी है आपकी ? मेरे भी बेटी हुई है |” मैंने उसे बधाई दी | वो फिर मुस्कुराते हुए बोली, “उस दिन आप की बेटी ने मेरा स्केच बनाया था | उसको धन्यवाद भी नहीं दे पायी | रंग की वजह से मैं अपने को काफी बदसूरत समझती थी | मेरे पति और परिवार वाले भी यही समझते थे |कई बार ताने मिलते थे | मेरा आत्मसम्मान और आत्मविश्वास बहुत लडखडाया हुआ था | उस दिन पहली बार महसूस हुआ कि मैं भी सुंदर लग सकती हूँ | ऐसा ही शायद मेरे पति को भी लगा | उनके ताने कम होने लगे | आज भी वो स्केच मेरे पास है | जब कभी आत्मविश्वास डिगता है तो उसे देख लेती हूँ और “अपने चहेरे पर ये स्माइल बनाए रखियेगा” ये शब्द याद कर लेती हूँ | मेरी तरफ से उसे धन्यवाद दे दीजियेगा |”

कई बार हमारा आत्मविश्वास हमारे अपने तोड़ते हैं | ऐसे में किसी के शब्द बहुत हिम्मत दे जाते हैं | कल से महसूस हुआ कि जब भी जहाँ भी मौका लगे ये तिनका बननेकी कोशिश करनी चाहिए | 

जीना इसी का नाम है ...

वंदना बाजपेयी 


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Atoot bandhan

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1 comments so far,Add yours

  1. अत्यंत उत्कृष्ट विचार।

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