लोक से जुड़ी मार्मिक कहानियों के कथाकार -प्रेम रंजन अनिमेष
मॉल कल्चर के साथ सरपट दौड़ती दुनिया में बहुत कुछ हाशिये पर छूटने लगा है — हमारा लोक, …
मॉल कल्चर के साथ सरपट दौड़ती दुनिया में बहुत कुछ हाशिये पर छूटने लगा है — हमारा लोक, …
सुपरिचित कथाकार उर्मिला शुक्ल जी का भावना प्रकाशन से प्रकाशित नया उपन्यास ‘मैं बृहन्नला’ अपने नाम से पौराणिक …
वंदना गुप्ता जी कविता के क्षेत्र में जाना माना नाम हैं। “सरे बाजार कथा बाँचती स्त्रियाँ” से उन्होंने आलोचना …
जब बात प्रेम की होती है तो सबसे पहले राधा-कृष्ण का नाम स्मरण में आता है । एक ऐसा प्रेम …
विदुषी साहित्यकार भावना शेखर जी का अपने नाम और कवर पेज से ही आकर्षित करता नया कहानी संग्रह “मोह-मोह के …
“अन्नदाता” शब्द किसानों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। अन्न जिससे हम सब …
सुपरिचित साहित्यकार संपादक नीलिमा शर्मा जी की कविताएँ अपने आस-पास के बिंबों, रूपकों में ढलती सहज अभिव्यक्तियाँ हैं। कभी निराशा …
“विहान की आहट” वंदना बाजपायी जी की नवीनतम कृति है। विहान से तात्पर्य है भोर अथवा सुबह, कहीं कहीं शाब्दिक …
किताब जो स्वयं को पढवाती है : जिस प्रकार लेखन की अपनी प्रक्रिया होती है उसी प्रकार पाठन की …
कहानी कविताओं से इतर आज साहित्य में संस्मरण और जीवनी बहुतायत से पढे जा रहे हैं । इसका एक कारण …
युद्ध किसी के पक्ष में नहीं होते, न जनता के, न सरहदों के, न उन सैनिकों के जो सियासी …
मुक्तक छंद विधा में एक लोकप्रिय विधा है । मुक्तक का शब्दार्थ ही है ’अन्यैः मुक्तमं इति मुक्तकं’ अर्थात …
प्रस्तुत हैं वंदना बाजपेयी की कुंडलियाँ झटपट देने ज्ञान में, एआई का राज चोरी को जिसने दिया, …
हंस सम्मान से सम्मानित युवा कथाकार आलोक रंजन की “तलईकूतल” कहानी दक्षिण भारत की एक अमानवीय प्रथा पर केंद्रित मार्मिक …
कविता क्या है? इस विषय पर विद्वान मनीषी आचार्य रामचंद्र शुक्ल कहते हैं कि, “जब कवि जगत के तमाम भौतिक …
कभी आपने गौर किया है अपने कपड़ों में लगाई गयी चोर जेब पर। जिसमें हम कीमती सामन रखते हैं। वस्तुतः …
न्याय का तराजू हमेशा साम्य पर रहना चाहिए l इस साम्य में ही जीवन का, विकास का, संभावनाओं का …
“हम सब का जीवन एक कहानी है पर हम पढ़ना दूसरे की चाहतें हैं” दुनिया की हर कहानी, जो …
आख़िरकार स्त्री विमर्श के मुद्दे पर बनी “आप जैसा कोई” फिल्म का मुख्य उद्देश्य ये स्थापित करना है कि प्रेम बराबर …
लघुकथा– दूध का हिसाब मेरे पडोसी गुप्ता जी शिक्षा विभाग मेँ लिपिक होते हुए बडे सीधे सादे व्यक्ति थे । …