नीलिमा शर्मा की कविताएँ
सुपरिचित साहित्यकार संपादक नीलिमा शर्मा जी की कविताएँ अपने आस-पास के बिंबों, रूपकों में ढलती सहज अभिव्यक्तियाँ हैं। कभी निराशा …
सुपरिचित साहित्यकार संपादक नीलिमा शर्मा जी की कविताएँ अपने आस-पास के बिंबों, रूपकों में ढलती सहज अभिव्यक्तियाँ हैं। कभी निराशा …
युद्ध किसी के पक्ष में नहीं होते, न जनता के, न सरहदों के, न उन सैनिकों के जो सियासी …
विदर्भ के किसानों की जीवंत दास्तान आशा पाण्डेय का उपन्यास ‘खरगाँव का चौक’ विदर्भ के किसानों की जिजीविषा, सपनों, अपने …
किरण सिंह जी से रेखा भारती मिश्रा का साक्षात्कार ग्रृहणी अर्थात् ऐसी कार्यशक्ति जो परिवार और समाज में उच्च कोटि …
अंत हीन दुख, निराशा, पीड़ा अवसाद की ओर धकेलते हैं और अगर घनघोर निराशा की बीच आस की अंतिम किरण …
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥ परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् । धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे …
चाहें ना धन-संपदा, ना चाहें पकवान l पितरों को बस चाहिए, श्रद्धा और सम्मान ll आश्विन के …
कुछ पढ़ा, कुछ गुना :शीर्षक के अंतर्गत अटूट बंधन में उन लेखों कहानियों पर विस्तार से बात रखी जाएगी जो …
साहित्य अकादेमी में डॉ. जगमोहन शर्मा की पुस्तकों का लोकार्पण में वक्ताओं ने कहा, आजादी के अमृत महोत्सव के …
अगर आप बुरा न मानें तो मैं एक और बिअर लूँगा। कुछ देर में यह पब बन्द हो जाएगी …
लिव इन जैसे सम्बंधों को भले ही कानूनी मान्यता मिली हो, मगर सामाजिक मान्यता नहीं मिली है।पश्चिमी सभ्यता से प्रभावित …
एक स्वाभिमानी, कर्मठ, स्त्री थी सुकन्या, जिसे इतिहास च्यवन ऋषि की पथअनुगामिनी भार्या के रूप में जानता है l …
हमेशा की तरह करवाचौथ से एक दिन पहले काकी करवाचौथ का सारा सामान ले आयीं| वो रंग बिरंगे करवे, चूड़ी, …
अभी 28 जनवरी 2023 को जेन ऑस्टिन (jane austen) के लोकप्रिय उपन्यास “प्राइड एण्ड प्रेजुडिस” को 210 साल पूरे हो …
–‘मुझे लगा, पियानो का हर नोट चिरंतन खामोशी की अँधेरी खोह से निकलकर बाहर फैली नीली धुंध को काटता, तराशता …
ऐसा ही होता आया है एक ऐसा वाक्य है जिसके आवरण तले ना जाने कितनी गलत बाते मानी और मनवाई …
नया हो या पुराना, हर साल समय का एक टुकड़ा ही तो है l और जाते हुए साल रूपी …
लड़कियों के लिए तो माता-पिता की मर्जी से ही शादी करना अच्छा है l प्रेम करना तो गुनाह है और …
संवेद में प्रकाशित प्रज्ञा जी की एक और शानदार कहानी है “जड़ खोद”l इस कहानी को प्रज्ञा जी की कथा …