दूध का हिसाब
लघुकथा– दूध का हिसाब मेरे पडोसी गुप्ता जी शिक्षा विभाग मेँ लिपिक होते हुए बडे सीधे सादे व्यक्ति थे । …
लघुकथा– दूध का हिसाब मेरे पडोसी गुप्ता जी शिक्षा विभाग मेँ लिपिक होते हुए बडे सीधे सादे व्यक्ति थे । …
मैं एक कहानी लिखने की कोशिश में हूँ l घरेलू सहायिका किचन में बर्तन साफ कर रही है l मैं …
सफलता की परिभाषा क्या है ? वास्तव में सफलता को किसी एक परिभाषा में नहीं बांधा जा सकता | …
माँ ही केवल अपने दुखों के बारे में झूठ नहीं बोलती, एक उम्र बाद बच्चे भी बोलने लगते है …
जीवन के मौसम कब बदल जाएँ कहा नहीं जा सकता | कभी प्रेम की बारिशों से भीगता जीवन शुष्क रेगिस्तान …
स्वतंत्रता अनमोल होती है | पर क्या स्त्री कभी स्वतंत्र रहती है | एक सच यह भी है कि तमाम …
क्या बबूल पर गुलाब का रेशमी खुशबूदार फूल उग सकता है | नहीं | पर कहते हैं कि व्यक्ति का …
श्राद्ध पक्ष यानी अपने परिवार के बुजुर्गों के प्रति सम्मान प्रगट करने का समय | ये सम्मान जरूरी भी है …
काजू महँगे होते हैं इसमें कोई शक नहीं | पर क्या अपने नुकसान की भरपाई किसी दूसरे से कर लेना …
बच्चे भगवान् का रूप होते हैं | घर में आने वाले ये नन्हे मेहमान घर को खुशियों से भर देते …
प्रेम कितना खूबसूरत अहसास है , ना ये उम्र देखता है ना जाति -धर्म , लेकिन समाज ये देखता है …