दूर किसी अनागत में- काव्यात्मक भाषा में ठोस कहानियाँ

  वंदना गुप्ता जी कविता के क्षेत्र में जाना माना नाम हैं। “सरे बाजार कथा बाँचती स्त्रियाँ” से उन्होंने आलोचना …

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खरगांव का चौक- मृत्यु के हाहाकार से सहकारिता की किलकारी तक खेत, खलिहान, किसान

खरगांव का चौक

    “अन्नदाता” शब्द किसानों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। अन्न जिससे हम सब …

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हंस सम्मान से सम्मानित कहानी तलईकूतल पर विस्तृत प्रतिक्रिया

हंस सम्मान से सम्मानित कहानी तलईकूतल पर विस्तृत प्रतिक्रिया

हंस सम्मान से सम्मानित युवा कथाकार आलोक रंजन की “तलईकूतल” कहानी दक्षिण भारत की एक अमानवीय प्रथा पर केंद्रित मार्मिक …

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मेरे नक्शे के मुताबिक- लोक, शिक्षा, और साहित्य पर गहन दृष्टि सम्पन्न संस्मरण 

mere nakshe ke mutabik

“हम सब का जीवन एक कहानी है पर हम पढ़ना दूसरे की चाहतें हैं”        दुनिया की हर कहानी, जो …

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आप जैसा कोई – स्त्री -पुरुष समानता की बात करती फिल्म

आप जैसा कोई

आख़िरकार स्त्री विमर्श के मुद्दे पर बनी “आप जैसा कोई” फिल्म का मुख्य उद्देश्य ये स्थापित करना है कि प्रेम बराबर …

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दो चाकों के बीच

दो चाकों के बीच

औरत हूँ मगर सूरत-ए-कोहसार खड़ी हूँ इक सच के तहफ़्फ़ुज़ के लिए सब से लड़ी हूँ वो मुझ से सितारों …

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मिसेज़ चटर्जी वर्सस नॉर्वे और लीड्स में हुई हिंसा

मिसेज़ चटर्जी वर्सस नॉर्वे और लीड्स में हुई हिंसा

लंदन से प्रकाशित पुरवाई के संपादकीय कई मुद्दों पर सोचने को विवश कर देते हैं। ‘प्रवासी हिंसा और दंगे” ऐसा …

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गीत अटपटे-बड़े चटपटे

गीत अटपटे बड़े चटपटे

लगभग 50 वर्षों पूर्व हिन्दी के बालसाहित्यकारों का एक बड़ा जमावड़ा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुआ था। जमावड़ा …

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