बीनू भटनागर जी की कवितायें भावनाओं का सतत प्रवाह है | किसी नदी की भांति यह अपना आकार स्वयं गढ़ लेती हैं |बीनू जी यथार्थ को यथार्थ की तरह रखती हैं वह उसे अनावश्यक बिम्बों का जामा नहीं पहनाती | इसीलिए पाठक किसी मानसिक द्वंद से गुज़रे बिना उन कविताओं से सीधे जुड़ जाता है | कहीं कहीं कविताओं में लयात्मकता भी दृष्टिगोचर होती है | जो कविताओं को और अधिक प्रभावशाली बना देती है | बीनू जी का यह प्रथम काव्य संग्रह है | जो उनकी शब्दों और भावों पर पकड़ के कारण अनुपम बन गया है |इसमें उन्होंने दर्शन और आध्यात्म,पीड़ा,प्रकृति और प्रदूषण, पर्यटन,ऋतुचक्र,हास्य और व्यंग्य,समाचारों की प्रतिक्रिया आदि अनेकों विषयों को अपनी सजग लेखनी से कलमबद्ध किया है | कुछ रचनाएँ उनके काव्य संग्रह ” मैं सागर में एक बूँद सही ” से
कुछ रचनाएँ बीनू भटनागर जी के काव्य संग्रह
” मैं सागर में एक बूँद सही” से
कुछ अनसोचा सा,
कुछ अनदेखा सा,
कुछ अप्रिय सा,
जब घट जाता है,
तो मन कहता है नहीं…
ये नहीं हो सकता,
दर्द और टीस का कोहरा,
छा जाता है सब ओर।
पर नियति है…
स्वीकारना तो होगा
थोड़ा मुश्किल है,
पर करना तो होगा..
ये स्वीकारना ही एक ऐलान
है,
उस अनचाहे से लड़ने का,
अपनी शक्ति समेटने का,
फिर विजयी होने की
संभावना के साथ जीना,
पल पल हर पल,
विजय मिले या आधी अधूरी
ही मिले,
पर कोशिश पूरी है,नहीं आधी अधूरी है।
पुकारो,
जायेगा,
आयेगा,
है
बनाकर
ही।
इन्सान ही,
लियें,
लियें,
उठ जायेगा।
तुम्हारी,
करायेगा,
खिड़कयाँ खोलो,
को धोलो,
नहीं बनेगा,
जयेगा।
दीवाली
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