आत्मविश्वास

जीवन में खोना व् पाना तो लगा रहता है | जिसके अन्दर आत्मविश्वास होता
है 
उसे खोने का डर नहीं होता | और शायद
इसी कारण कोई आत्मविश्वास के धनी व्यक्ति को कुछ खो जाएगा का डर दिखा कर शोषित नहीं
कर पाता | एक ऐसी ही महिला की कहानी …



                       

                                 आत्मविश्वास

आत्मविश्वास 



बाईस वर्ष की माया सुन्दर तेज तर्रार तीखे नैन नक्श गोरा रंग। पोस्ट गैजुऐट आत्मविशवास से लबरेज युवती ने सीनियर सैं स्कूल मे सीनियर टीचर हेतु आवेदन किया। उसकी कार्य क्षमता से प्र्भावित होकर मुख्याध्यापक ने उसे मनपसंद विषय पढाने को दे दिये। माया भी खुश थी व बडी लगन से अपने काम को कर रही थी। सब कुछ ठीक चल रहा था।


पर…. भीतर ही भीतर मुख्याध्यापक की बुरी नजर माया पर पड़ चुकी थी।




वो उसे अकसर छुट्टी के बाद बहाने से रोकने लगा था। कभी किसी मीटिगं के बहाने अथवा कोई ओर काम,,,। शुरू शुरू मे तो माया उनके कहने से रूक गयी थी। पर एकदिन तो हद हो गयी जब एकान्त का फायदा उठाकर मुख्याध्यापक ने माया को अपनी आगोश मे ले लिया और उसका मुँह चूमने लगा। उसकी इस हरकत से माया आगबबूला हो गयी।




तभी उसने माया से माफी मांग ली।



अब माया चौकंनी हो गयी थी। भीतर ही भीतर वो कुछ फैसला ले चुकी थी। तीसरे दिन फिर मुख्याध्यापक ने जैसे ही माया को अकेला पाया वो फिर सारी हदे पारकर गया।



माया ने आव देखा ना ताव खीचकर एक तमाचा सारे स्टाफ के सामने मुख्याध्यापक के मुंह पर दे मारा। पहले से ही पर्स मे रखे त्यागपत्र को मुख्याध्यापक के मुंह पर दे मारा।


जोर से चिल्लाकर माया बोली….. मै यहां ज्ञान बांटने आयी थी,,,, अपना शरीर नही… कहकर तेजी से बाहर निकल गयी।




रीतू गुलाटी




लेखिका





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