सेल्फ आइसोलेशन के 21 दिन – हम कर लेंगे

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हमारे देश के प्रधानमंत्री मोदी जी ने घोषणा करी है कि covid-19 महामारी के खतरे से देश को बचाने के लिए 25 मार्च 2020 से 14 अप्रैल 2020 तक 21 दिनों के लिए India lockdown किया जाएगा | WHO के अनुसार बिमारी के संक्रमण की तीसरी स्टेज के लिए ये 21दिन बहुत महत्वपूर्ण हैं |इस दौरान सभी को अपने घरों में रहने की हिदायत दी गयी है | ये 21 दिन देश के और देश के नागरिकों के की परीक्षा के दिन हैं |समय कठिन है पर साथ में विश्वास है कि हम कर लेंगे |

आज से चैत्र नवरात्र शुरू हो गए हैं| पूजा करके माता के आगे घी का दीपक जला दिया है और एक आशा का दीप अपने मन के आगे जला  लिया है| आज रह-रह कर “बीरबल की खिचड़ी” कहानी का वह धोबी याद आ रहा है जो ठंडे पानी में रात भर खड़े रहने की हिम्मत दूर महल में जलते उस दीपक को देखकर जुटाए रहा | उसके मन में विश्वास था, शायद इसी लिए वो ऐसा कर सका| विश्वास में शक्ति होती है | इस कठिन समय में हम सब को भी इसी विश्वास के सहारे आगे बढ़ना है |  अपने पर संयम  रख कर ही हम इस बिमारी को हरा सकते हैं | हम सब को दिहाड़ी मजदूरों की, बिखारियों  की बहुत चिंता है | आशा है सरकार उनको भोजन उपलब्द्ध करायेगी | दिल्ली सरकार के कुछ वीडियो देखे हैं जिसमें पुलिस वाले भिखारियों को भोजन दे रहे हैं | लंगर में खाना मिल रहा है|आशा है और शहरों में भी यही किया जाएगा |बाकी कई किराना स्टोर्स अपने अपने एरिया में हेल्प लाइन नंबर दे रहे हैं जो घर आ कर सामान पहुंचा सकेंगे |

कोरोना और ट्रॉली प्रॉब्लम

बहुत पहले एक विश्व प्रसिद्द ट्रॉली  प्रॉब्लम की विश्व  पहेली के बारे में सुनती थी|  शायद आपने भी सुना हो …ये पहेली आज भी अनुत्तरित ही है | पहेली हैं कि आप ट्रॉली चला रहे हैं |  उसके ब्रेक फ़ैल हो गए | आपके सामने दो पटरियां हैं | एक पर एक व्यक्ति है दूसरी  पर ६ व्यक्ति हैं | ट्रॉली एक पटरी पर अवश्य जायेगी |  आप किसे बचायेंगे …एक को या छ: को ? इसमें बहुत सारे समीकरण बनते हैं| मैं अभी दो की बात करुँगी | जाहिर है अभी ज्यादातर लोग कहेंगे कि हम ६ को बचायेंगे | दूसरा समीकरण देखिये …दूसरी पटरी पर जो अकेला व्यक्ति खड़ा है वो हमारा अपना प्रियजन है | तब ?

 

पूरा विश्व आज इसी ट्रॉली प्रॉब्लम से गुज़र रहा है | इटली में डॉक्टर रोते हुए वृद्धों को मौत के मुँह में जाने दे कर जवान व्यक्ति को बचा रहे हैं |क्योंकि उनके जिन्दा रहने की अधिक सम्भावना है |  ये उनकी चाही हुई परिस्थिति नहीं है | उनके द्वारा खायी हुई कसम के भी विपरीत है पर विकट समय में उनको ये निर्णय करना पड़ रहा है |

नकारात्मक सोचने  का नहीं है समय 

ये समय नकारात्मक सोचने  का नहीं है | मैं जानती हूँ कि हम सब कम खा के कम सुविधाओं में जी सकते हैं पर आहत है उनके लिए जो गरीब है, दिहाड़ी मजदूर हैं, अपने बुजुर्ग रिश्तेदारों के लिए जो अकेले रहते हैं, अपने उन रिश्तेदारों के लिए जो इस समय कई शारीरिक दिक्कतों को झेल रहे हैं, या जो दूसरे शहरों में कहीं फंस गए हैं |कोशिश करें कि अगर आप के घर के आस -पास ऐसे कोई लोग हैं तो सोशल डिस्टेंसिंग बनाते हुए ही सही उनकी मदद करें | उन्हें हेल्पलाइन नंबर दें | अपने घर से खाना बना कर उन्हें दे सकते हैं | फोन पर बात कर हालचाल ले सकते हैं | दिहाड़ी मजदूरों भिखारियों के लिए पास की पंसारी की दुकान में कुछ धन दे कर एक बड़े अभियान में मदद कर सकते हैं | क्योंकि कई पंसारी स्टोर ऐसी लंगर योजना में निजी धन लगा कर आगे आ रहे हैं |  ना हो तो उपाय है कि हम स्वयं को बचा कर उन सब को बचाएँ | आशा है हम और वो सब भी इस कठिन  समय को झेल कर इस परीक्षा को पार कर लेंगे |

 

पहले तो जीवन को बचाने  की फिर नौकरी /व्यवसाय , देश की अर्थव्यवस्था बचाने की बहुत सारी आशंकाओं के बीच एक दिया आशा का जालाये रखें | सकारात्मक रहने की कोशिश करें पर दिमाग पर बहुत ज्यादा बोझ डाल कर नहीं |

मानसिक स्वास्थ्य का भी रखें ख्याल 

शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी उतना ही बचाए रखने की जरूरत है | क्योनी ये समय डर, आशंका और निराशा का है |बार -बार हाथ धोने और सोशल डिस्टेंसिंग की नयी आदत हमें डालनी है | ऐसे में मन घब्राना स्वाभाविक है |  जब मन बहुत घबराए तो सब तरफ से मन हटा कर अपनी साँसों पर ध्यान दीजिये | इसे चाहें मेडिटेशन मान कर करें, चाहें व्यायाम | वही हवा (प्राण वायु)जो मेरी साँसों में जा रही है वही आपकी में भी वही संसार में सबकी | हम सब इस कदर जुड़े हुए हैं | यही समझ, यही  जुड़ाव ही हमें हर समस्या से पार ले जाएगा | यही हमारी शक्ति है |इसी शक्ति के सहारे हम ये 21 दिन पार कर लेंगे |

नियमों का पालन करें, स्वस्थ रहे प्रसन्न रहे

माँ जगदम्बा सब पर कृपा करें

वंदना बाजपेयी

Covid-19:कोरोना पैनिक से बचने के लिए सही सोचें

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