अनार से महंगा टमाटर खा रहा हूं ( हास्य – व्यंग कविता )



रंगनाथ द्विवेदी
अनार से महंगा टमाटर खा रहा हूं।
आ गये अच्छे दिन———
मै इलू-इलू गा रहा हूं,
अनार से महंगा टमाटर खा रहा हूं।

मार्केट से सभी सब्ज़ियाँ तो ले ली,
पर टमाटर को लेने मे लग गये घंटो,
क्योंकि सभी एक से भाव मे बेच रहे थे,
यहाँ तलक कि टमाटर को बिना मतलब छुने से रोक रहे थे,
थक-हार एक ठेले वाले को पटा रहा हूं——
बड़ी मुश्किल से घर टमाटर ला रहा हूं,



अनार से महंगा टमाटर खा रहा हूं।


बीबी भी सबसे पहले सब्ज़ियो के झोले से,
टमाटर टटोल कर निकालती है,
और पुछती है क्या भाव पाये,
कैसे कहु कि हे!भाग्यवान तुम अपने टमाटर खाने का शौक,
काश सस्ते होने तलक टाल पाती,
लेकिन नही,तुम नही टाल पाओगी,
तुम्हारे इसी न टालने के नाते,
अपनी एक महिने की सेलरी का तीस पर्सेंट खर्च कर,
बस मै तुम्हारे लिये टमाटर ला रहा हूं।


आ गये अच्छे दिन——-
मै इलू-इलू गा रहा हूं,
अनार से महंगा टमाटर खा रहा हूं।

@@@रचयिता—–रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)।


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