अटूट बंधन
चलो चले जड़ों की ओर : कविता – रश्मि प्रभा
माँ और पिता हमारी जड़ें हैं और उनसे निर्मित रिश्ते गहरी जड़ें जड़ों की मजबूती से हम हैं हमारा ख्याल …
अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर विशेष : चलो चले जड़ों की ओर : वंदना बाजपेयी
जंगल में रहने वाले मानव ने जिस दौर में आग जलाना सीखा , पत्थरों को नुकीला कर हथियार बनाना सीखा …
नाम में क्या रखा है : व्यंग -बीनू भटनागर
नाम की बड़ी महिमा है, नाम पहचान है, ज़िन्दगी भर साथ रहता है। लोग शर्त तक लगा लेते हैं कि …
डिम्पल गौड़ ‘अनन्या ‘ की लघुकथाएं
समझौता “आज फिर वही साड़ी ! कितनी बार कहा है तुम्हें..इस साड़ी को मत पहना करो ! तुम्हें समझ नहीं …
क्षमा पर्व पर विशेष : “उत्तम क्षमा, सबको क्षमा, सबसे क्षमा”
क्या आपने कभी सोचा है की हँसते -बोलते ,खाते -पीते भी हमें महसूस होता है टनो बोझ अपने सर पर। …
बाजारवाद : लेख – शिखा सिंह
बाजरबाद की घुसपैठ ने लोगों को अपना कैदी बना लिया है,जिसमें लोग खुद को भी अनदेखा करने लगे है। आज …
सीमा सिंह की लघुकथाएं
नशा कभी बाएं कभी दायें डोलती सी तेज गति से आती अनियंत्रित गाड़ी मोड पर पलट गई. भीड़ जमा हो …
जिंदगी का सबक
जो सबक हमें जिंदगी सिखाती है वो किताबों में नहीं मिलता क्योंकि जिंदगी के सबकों के आधार पर किताबें लिखी …
ब्याह :कहानी -वंदना गुप्ता
ब्याह नैन नक्श तो बडे कंटीले हैं साफ़ सुथरे दिल को चीरने वाले गर जुबान पर भी नियन्त्रण होता …