कितने जंगल काटे हमने, कितने वृक्ष गिराए हैं
कितने जंगल काटे हमनेकितने वृक्ष गिराए हैंनीड़ बिना बेघर पंक्षीमौसम ने मार गिराए हैंकितने—चारों ओर कोलाहल भारीजहर घुल गया सांसों …
कितने जंगल काटे हमनेकितने वृक्ष गिराए हैंनीड़ बिना बेघर पंक्षीमौसम ने मार गिराए हैंकितने—चारों ओर कोलाहल भारीजहर घुल गया सांसों …
प्रस्तुत हैं उषा अवस्थी जी की दो कवितायें शिवोहम व् चाँदनी कितनी सुहानी चाँदनी शिवोहम ब्रम्हांड बने जब तन कोई …