धर्म , मजहब , रिलिजन नहीं स्वाभाविक संवेदना से आती है सही सोंच

कभी किसी खाली वक़्त में गौर से अपने आस पास के मज़हबी लोगों को देखिएगा….अजब हैरान परेशान से आत्मसंतोष का …

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सवाल का जवाब

जेब में पड़ा आखिरी दस का नोट निकाल उसे बड़े गौर से निहार रहा था, ये सोचते हुए की अभी …

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