सूखा

इलाके में लगातार तीसरे साल सूखा पडा है अब तो जमींदार के पास भी ब्याज पर देने के लिए रूपये …

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जोरू का गुलाम

राधा आटा गूंधते गूंधते बडबडा रही थी ” पता नहीं क्या ज्योतिष पढ रखी है इस आदमी ने हर बात …

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लघुकथा – सूकून

कुमार गौरव मौलिक एवं अप्रकाशित एक छुट्टी के दिन कोई पत्रकार कुछ अलग करने के ख्याल से जुगाड़ लगाकर ताजमहल …

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