अभिशाप

    “कम आन मम्मा!कब तक यूं ही डर के साथ जीती रहोगी। अब साइंस ने बहुत प्रोग्रेस कर ली है …

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नई बहू (लघुकथा )

   सेठानी के गुस्से की कोई सीमा ही नहीं थी। वह बड़बड़ाये जा रही थी “अब कंगले भिखरियों की भी इतनी …

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भूमिका

रचना व्यास  चातुर्मास में साध्वियों  का दल पास ही के भवन में ठहरा था।  महिमा नित्य अपनी सास के साथ प्रवचन …

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वक़्त की रफ़्तार

रचना व्यास हालाँकि  वह  उच्चशिक्षिता  थी  पर  आशंकित  हो  उठी  जब  पति  के  साथ दिल्ली  में  शिफ्ट  हुई ।   आँखे  भर  …

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ममता

ममता यूँ  तो  शीतल  को  अपने  ससुराल  में  सभी  भले  लगे  लेकिन  उसकी  बुआ सास की  लड़की  हर्षदा  न  जाने  क्यों  …

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