आखिरी मुलाकात

उसकी सूरत जैसे ओस की बूँदें जमीं हो मखमली दूब पर . निश्चल शीशे की मानिंद . सरलता की मूरत…कोई …

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गुमनाम

डिम्पल गौड़ ‘अनन्या‘ अहमदाबाद गुजरात  “आज भी नहीं ठहरोगे ? मालूम है तुम्हारा अक्स मेरे अन्दर पलने लगा है ! “क्या …

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