निर्मल वर्मा की कहानी परिंदे का सारांश व समीक्षा
–‘मुझे लगा, पियानो का हर नोट चिरंतन खामोशी की अँधेरी खोह से निकलकर बाहर फैली नीली धुंध को काटता, तराशता …
–‘मुझे लगा, पियानो का हर नोट चिरंतन खामोशी की अँधेरी खोह से निकलकर बाहर फैली नीली धुंध को काटता, तराशता …
रोज रोज वही काम l हर रोज सुबह से लेकर शाम तक एक आम गृहिणी की जिंदगी में वही काम …
कुछ शब्द हैं, जो मैंने आज तक नहीं कहे. पुराने सिक्कों की तरह वे जेब में पड़े रहते हैं. …