1 …………..जब -जब धरती पर धर्म की हानि होती है ,ईश्वर अवतार लेते हैं
तभी तो भक्त गा उठते हैं ……………
कभी राम बन के कभी श्याम बन के
चले आना प्रभुजी चले आना
कभी कृष्ण रूप में आना
राधा साथ ले के
बंशी हाथ ले के
चले आना प्रभुजी चले आना
२ …………………द्वापर युग में भादों मास की अष्टमी के दिन श्रीकृष्ण का जन्म कारावास में हुआ |
जब जन्मे कृष्ण भगवान्
जेल दरम्यान वो मुरली वाले
खुल गए जेल के ताले …………………
६ …………. एक और काम प्रिय था …. वो था बांसुरी बजाना
७ …………. पर शरारत करते तो माँ के हाथों से पिटाई तो होती ही थी
चोरी माखन की दें छोड़
कन्हैया
मैं समझे रही तोय
बड़ो नाम है नंद बाबा को
हँसी हमारी होय
८ ………… गोपिकाओ के सर कृष्ण की बांसुरी और प्रेम का नशा चढ़ा रहता |
श्याम रंग रंगी मोरी चूनरी
काहे समझत न तू बावरी ………….
यह प्रेम कृष्ण के द्वारिका में बस जाने के बाद भी कहाँ कम हुआ | तभी तो गोपिकाएं कह उठती हैं ……………
को प्रेम कहौ अलि कैसे करिकै छूटत?
मुसुकानि मंदधुनि गावत।
विनोद गृह बन में आवत।
९ ……….. कृष्ण के मन में बसती थी बस राधा………..
प्रेम भी कोई ऐसा -वैसा नहीं ,राधा रानी कह उठती हैं ………..
आदि मैं न होती राधे कृष्ण की रकार पे
तो मेरी जान राधे कृष्ण आधे कृष्ण रहते
और भक्त भी तो समझदार हैं की तभी तो गाते हैं ………….
राधे -राधे रटो चले आयेंगे बिहारी ……….
अभ्युत्थायदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति
भारत ।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ।।7।।
धर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥७॥
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्र्स्पनार्थाय सम्भवामि युगे युगेश्रीमद्भगवद्गीता, अध्य
११ ………. कृष्ण का विराट रूप देख अर्जुन को उनके ईश्वर होने पर यकीन हो गया
अब लगे घबराने “अरे जिन्हें मित्र समझते थे वो तो ईश्वर निकले ………. फिर क्या क्षमा मांग ली
प्रसभं यदुक्तं
हे कृष्ण हे यादव हे सखेति ।
अजानता महिमानं तवेदं
मया प्रमादात्प्रणयेन वापि ।।41।।
१२ ………… जब जब आततायी बढ़ेंगे श्री कृष्ण शोषित मनुष्यों की रक्षा के लिए भगवान् स्वयं अवतार लेंगे
जय श्री कृष्ण……….
गोविन्द तुम्हीं गोपाल तुम्ही
घनश्याम यशोदा नंदन हो
हे नाथ कहीं योगेश्वर हो
हे नाथ कहीं मन मोहन हो
ब्रज के नंद लाला राधा के सांवरिया
सभी दुःख दूर हुई जब तेरा नाम लिया














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