प्रेरक कथा : जैसी करनी वैसी भरनी

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प्रेरक कथा : जैसी करनी वैसी भरनी


दोस्तों  कहावत है न की कर्मों
का फल भोगना ही पड़ता है | इस जन्म में नहीं तो अगले जन्ममें | इसलिए हमें अपने
कर्मों यानी अपने द्वारा कोए गए छोटे – छोटे कामों का वोशेष ध्यान रखना चाहिए | ये
बात परलौकिक जगत में तो सच है ही लैकिक जगत में भी अपनी गलतियों की सजा हमें स्वयं
भुगतनी पड़ती है | कैसे ?
इसके लिए एक छोटी सी प्रेरक कथा सुनाता हूँ ..

motivational hindi story – jaisee karni vaisee bharnee 

बहुत समय पहले की बात है एक राज्य में एक मक्खन बेंचने वाला रहता था |
उसकी खूब बिक्री होती थी उसी की दूकान के पास एक बेकरी शॉप भी थी | उस शॉप का मालिक्
रोज  मक्खन वाले से आधा किलो मक्खन ले जाता
| उसे शक था की उसे  वह तौल् में  कम मक्खन देता है | बात आई – गयी हो जाती | एक
दिन उसने मक्खन तोलने का निश्चय किया | तौल में मक्खन कम निकला | अब तो बेकरी वाले
कोबहुत गुस्सा आया कि ये मक्खन वाला रोज उसे कम तौल का मक्खन दे कर धोखा दे रहा था
| उसने मक्खन वाले को सजा दिलवाने के लिए राजा से शिकायत कर दी |
मक्खन वाले को राजा के दरबार में बुलाया गया | मक्खन वाला डरता- डरता
वहां जा कर एक तरफ खड़ा हो गया | वहां बेकरी वाला व् अन्य दूकान दार भी खड़े थे |
उनको देखकर मक्खन वाला आश्वस्त हुआ कि वो अकेला नहीं है | उसकी बिरादरी के लोग भी
खड़े हैं |
तभी राजा के सलाहकार के आरोप पर पढ़ा ” मक्खन वाले पर आरोप है  की वो तौल्में कम मक्खन देता है |इस तरह से धोखा
दे कर वह ग्राहकों का लूटता है |अगर उसे पर आरोप सही सिद्ध हुआ तो उए कड़ी से कड़ी
सजा दी जायेगी | लेकिन इससे पहले उसे सफाई का एक मौका दिया जायेगा |फिर उसने मक्खन
वाले की ओर मुखातिब होकर कहा ,’ कृपया अपना बाँट दिखाए ,जिससे आप मक्खन तौलते हैं
|
मक्खन वाला बोला ,” माई बाप मैं पढ़ा लिखा नहीं हूँ | मेरे पास कोई
बाँट नहीं है |
राजा – फिर तुम मक्खन की तौलते हो ?


मक्खन वाला – हुजूर मैं इस बेकरी शौप वाले किदुकान से रोज एक किलो
ब्रेड लेता हूँ | उसे आधा – आधा कर के दो बाँट बना लेता हूँ | सारा दिन उसी से
मक्खन तौलता हूँ | इसमें मेरा कोई दोष नहीं है |
सरे दुकानदार जानते थे की मक्खन वाला सही बोल रहा है | उन्होंने उसकी
बात का समर्थन किया | अब बेकरी वाले को कातोतो खून नहीं की स्थिति हो गयी | एक तरफ
उसे अपने ही बेईमानी के कारन रोज कम मक्खन मिल रहा था दूसरे अब राजा के दरबार में
भी वो ही दोषी सिद्ध होरहा था | पर उसके पास सर झुकाने के आलावा कोई चारा भी नहीं
था | आखिर ये उसी के कर्मों का फल था |
राजा ने अपना फैसला सुनाया | उसने मक्खन वाले को बाइज्ज़त  बरी कर दिया व् बेकरी वाले को कारावास में डाल
दिया | उसे अपनी करनी का फल मिल गया | सही ही कहा गया है ….
जैसी करनी वैसी भरनी

तो देखा आपने दोस्तों बेकरी वाले को उसकी करनी का फल मिल गया | हम सब
को भी अपने कर्मों पर विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि अच्छे फल प्राप्त हों |


 टीम  ABC
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