हम उसी देश के वासी हैं जहाँ कभी कहा जाता था कि ,”यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता” आज उसी देश में हर १५ मिनट पर एक बलात्कार हो रहा है | ये एक दर्दनाक सत्य है कि आज के ही दिन निर्भया कांड हुआ था | बरसों से उसकी माँ अपराधियों को दंड दिलालाने के लिए भटक रही है | उसके बलात्कारी “अपराध से घृणा करो, अपराधी से नहीं’ जैसे प्रवचन देते हुए यह सिद्ध कर देते हैं कि उनमें आज भी अपराध बोध नहीं है | हाल ही का प्रियंका कांड हो या उन्नाव का, बिहार का या कठुआ का किसी भी अपराधी को इस बर्बरता के लिए छोड़ा नहीं जाना चाहिए | देवी बना के ना पूजो, इंसान बन कर तो जीने दो |स्त्री सुरक्षा के लिए जरूरी हैं कठोर कानून और उनका तुरंत क्रियान्वन | पढ़िए निर्भय काण्ड की बरसी पर ये आक्रोश से भरी कविता …
बलात्कार के खिलाफ हुँकार
नारी सर्वत्र पूज्यते की
अब बात खोखली लगती है
नित-नित चीर हरण होता
हर बात दोगली लगती है
चारों ओर प्रवृत्ति आसुरी
बढ़ता जाता है व्यभिचार
पूजा तो अति दूर,निरन्तर
बलात्कार हो बारम्बार
हवस पूर्ति करके औरत को
अग्नि हवाले यह करते
कलियुग के पापाचारी
हैं दुराचार के घट भरते
जिन कोखों से जन्म लिया है
उन्हे लजाते शर्म नहीं
बहन , बेटियों की मर्यादा
करें भ॔ंग ; कोई धर्म नहीं
जहाँ जानकी ,राधा,काली ,
दुर्गा हैं पूजी जाती
राम,कृष्ण के देश भला
क्योंकर जन्मे ये कुलघाती?
इन्सानों का भेष
जानवर से बद्तर इनकी करनी
खोद रहे अपनी ही कब्रें
कुटिल , निकम्में , दुष्कर्मी
उषा अवस्थी
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