जब वसंत ऋतू आती है तो मन उमंग से भर जाता है , मन पुलक कर कहता है ...सखी , देखो तो वसंत आया

सखि , देखो तो , वसन्त आया




सखि , देखो तो , वसन्त आया
नव द्रुम , नव पल्लव , नव सुगन्ध
चहुँ दिशि मधु - उसव का आनन्द
मंजरी मधुर मधुकोष भरित
ये आम्र - कुंज भी बौराया
सखि , देखो तो वसन्त आया


अमराई में कोयल कूजी
वन उपवन ने श्रृंगार किया
वृक्षों , पादप , लतिकाओं की
देही पर यौवन गदराया
सखि , देखो तो , वसन्त आया


सुरभित , पुष्पित , कुसुमकुल पर
भ्रमरों की टोली डोल रही
प्रकृति ने अपनी झोली से
अनगिनत रंगों को बिखराया
सखि , देखो तो , वसन्त आया


मादक बयार की मधुर गंध
मन - प्रांगण में भरती उमंग
तन पोर - पोर है आह्लादित
इक जलतरंग सा खनकाया
सखि , देखो तो , वसन्त आरा


मधुवन में कृष्ण सांवरे की
वंशी स्वर - लहरी गूँज रही
खेतों में फूली सरसों सा
राधा का मन भी हुलसाया
सखि , देखो तो वसन्त आया



उषा अवस्थी
लखनऊ , ( उ0 प्र0 )

लेखिका व् कवियत्री


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Atoot bandhan

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