जीत भी हार भी
परिमल सिन्हा यूँ ही टेलीविजन का रिमोट पकडकर बैठे थे. कहीं से भी मतलब का कार्यक्रम नहीं आ रहा था. …
परिमल सिन्हा यूँ ही टेलीविजन का रिमोट पकडकर बैठे थे. कहीं से भी मतलब का कार्यक्रम नहीं आ रहा था. …
सांझ की धुंध में, रात की स्याही घुलने लगी थी. सर्दहवाओं के खंजर, सन्नाटे में सांय- सांय करते…उनकी बर्फीली चुभन, …
फैक्ट्री कासालाना जलसा होना था. तीन ही सप्ताह बच रहे थे. कायापलट जरूरी हो गया;बाउंड्री और फर्श की मरम्मत और …
गीतांजलि एक्सप्रेस धीरे धीरे पटरियों पर सरकने लगी थी। देखते ही रंजन अपने फटीचर सूटकेस के संग दौड़ पड़ा। दौड़ते …