कहानी
क्या मेरी रजा की जरूरत नहीं थी ?
तीन तलाक पर आधारित कहानी उफ़ ! क्या दिन थे वो | जब बनी थी तुम्हारी शरीके हयात | तुम्हारे …
ऐसे थे हमारे कल्लू भईया! (एक सच्ची कहानी)
बात 1986 की है मैं उस समय हाईस्कूल का छात्र हुआ करता था। मेरी दोस्ती हुई राजीव मिश्रा नाम के …
अंधी खोहों के परे
सांझ की धुंध में, रात की स्याही घुलने लगी थी. सर्दहवाओं के खंजर, सन्नाटे में सांय- सांय करते…उनकी बर्फीली चुभन, …
फिर एक बार
फैक्ट्री कासालाना जलसा होना था. तीन ही सप्ताह बच रहे थे. कायापलट जरूरी हो गया;बाउंड्री और फर्श की मरम्मत और …
बेबस बुढापा
उमा के कॉलेज की छुट्टी आज साढे चार बजे ही हो गई। वैसे तो कॉलेज का समय एक से छः …
तबादले का सच
शालिनी का आज दफ्तर में पहला दिन था। सुबह से काम कुछ न किया था बस परिचय का दौर ही …
किट्टी पार्टी
आज रमा के यहाँ किट्टी पार्टी थी। हर महीने होने वाली किट्टी पार्टी का अपना ही एक अलग उत्साह रखता …
भावनाओं की सरहदें कब होंगी
अपना देश हो या विदेश , सुबह की जगमगाहट में कमी नहीं आती । चिड़ियाँ अपने नियत समय पर रोजगार …
चूडियाँ ( कहानी -वंदना बाजपेयी )
न जाने क्यों आज उसका चेहरा आँखों के आगे से हट नहीं रहा है, चाहे कितना भी मन …
मेरा लड़की होना
सुनील और माधवी आज फिर सेंट्रल पार्क में मिले थे। आज शहर के पार्क में एकांत क्षणों में सुनील माधवी …