कूड़ा गाड़ी

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कूड़ा गाड़ी


एक बार की बात है एक यात्री ने एयरपोर्ट जाने के लिए टैक्सी की |

रात का समय था टैक्सी वाला बड़े इत्मीनान से गाडी चला रहा था | वो धीरे
– धीरे गुनगुना रहा था | यात्री आदमी भी निश्चित हो सड़क पर इधर – ऊधर
 देख रहा था | तभी एक मोड़ पर अचानक से तेजी से
गाड़ी आई | टैक्सी वाले ने जल्दी से ब्रेक लगाया | दोनों गाड़ियाँ बस टकराते –
टकराते बची | यात्री को तेज झटका लगा | उसे बहुत गुस्सा आया | नियम के अनुसार मोड़
पर गाड़ियां धीमी ही चलानी चाहिए | वर्ना एक्सीडेंट का खतरा रहता है | इन दो
गाड़ियों का एक्सीडेंट होते-होते ही बचा था |
                 
तभी यात्री
ने देखा की उस गाडी वाले ने भी गाडी रोक ली है | और उतर कर इस तरफ आ रहा है |
क्योंकि सरासर उसकी गलती थी | इसलिए यात्री ने सोंचा कि लगता है वो माफ़ी मांगने आ
रहा है | अब टैक्सी ड्राइवर जरूर उसे खूब सुनाएगा | यह भी कोई तरीका है गाडी चलाने
का |

यात्री को बहुत आश्चर्य हुआ जब वो आदमी सॉरी बोलने के स्थान पर टैक्सी
ड्राइवर को भला बुरा कहने लगा | अपनी गलती होते हुए भी वो दोष उस भले ड्राइवर पर
लगा रहा था | इससे पहले की यात्री उसके पक्ष में कुछ कहता टैक्सी ड्राइवर ने
मुस्कुरा कर हाथ हिलाते बाय – बाय की मुद्रा में आते
 हुए टैक्सी आगे बढ़ा दी |

अब तो यात्री को बहुत गुस्सा आया | उसने ड्राइवर से पूंछा ,” ये भी
कोई बात है की गलती उसकी थी , फिर भी वो आदमी
 
तुमको सुना कर चला गया | और तुमने एक शब्द भी कहने के स्थान पर मुस्कुरा कर
उसे बाय कर दिया |


टैक्सी ड्राइवर  ने मुस्कुरा कर कहा ,” सर वो देखिये वो कूड़ा गाडी है |
वो अगर किसी से टकरा जाए तो अपना कूड़ा ही दूसरों पर डालेगी |अब ये आप की
जिम्मेदारी है की आप उससे बच कर चलें | नहीं तो कूड़ा आप  पर ही गिरेगा | ऐसे ही अगर
कोई व्यक्ति कूड़ा यानी ज़माने भर की नकारात्मकता अपने ऊपर ले कर चलेगा तो वो उसे
दूसरों पर डालेगा |अगर आप उसे डालने देंगे तो आप भी कूड़ा  गाडी बन जायेंगे और
दूसरों  पर वही फेंकते हुए घूमेंगे | इसलिए बेहतर है उन्हें बाय – बाय कर दें और
कूड़े को आगे फैलने से रोकें |

टैक्सी ड्राइवर का उत्तर सुन कर यात्री उसकी समझदारी का कायल हो गया
और मंद – मंद मुस्कुराने लगा |


दोस्तों , उसी टैक्सी ड्राइवर की तरह हम सब को भी समझदार बनना है की
अगर कोई अपनी नकारात्मकता हमारे ऊपर फेंकने की कोशिश करे तो हम वहां न रुके रहे
बल्कि वहां से उठी के चल दे | इससे नकारात्मकता का चक्र रुक जाएगा | या यूँ कहे की
कम से कम हम तो अपने को नकारात्मकता से बचाए रखेंगे और सकारात्मक रहेंगे | 

टीम ABC

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