अजय चन्द्रवंशी की लघु कवितायें

2
37







#तटस्थ#
वह कशमकश में है
वह किस तरफ है
क्योकि उसे मालूम है
वह किस तरफ है
#गाली और क्रांति#
वह सब को गाली देता है
व्यवस्था को
समाज को
खुद को भी
उसके लिये
गाली ही क्रांति है
#एक……#
वह मंच पर
दहाड़ता है
और जमीन पर
हांफता है
#ज़मीनी कवि#
उसकी रचना में
सिर्फ जमीन होती है
कविता कही नही
#आलिंगन#
उसने गले लगाया
मै सिहरा नही
चीख उठा!!

#सत्यवादी#
वह हमेशा
सच बोलता है
इसलिये
कभी बोलता नही
#सच्चे वीर#
वे सच्चे वीर थे
उन्होंने
केवल पुरुषों की
हत्या की
स्त्रियों और बच्चों को
छोड़ दिया
#दर्द#
मेरे दिल में उठा
मैंने ही महसूस किया
मै ही तड़पा
मुझी से खत्म हुआ
#खुद्दार#
वह रोज ऐलान करता है
वह बिका नही है
इस तरह
रोज़ बेचता है
अपने ‘न बिकने’ को
#देशभक्त#
वह देशभक्त है
इसलिये
कुछ नही करता
सिवा देशभक्ति के
अजय चन्द्रवंशी
  छत्तीसगढ़ 

2 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here