अनार से महंगा टमाटर खा रहा हूं ( हास्य – व्यंग कविता )

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रंगनाथ द्विवेदी
अनार से महंगा टमाटर खा रहा हूं।
आ गये अच्छे दिन———
मै इलू-इलू गा रहा हूं,
अनार से महंगा टमाटर खा रहा हूं।

मार्केट से सभी सब्ज़ियाँ तो ले ली,
पर टमाटर को लेने मे लग गये घंटो,
क्योंकि सभी एक से भाव मे बेच रहे थे,
यहाँ तलक कि टमाटर को बिना मतलब छुने से रोक रहे थे,
थक-हार एक ठेले वाले को पटा रहा हूं——
बड़ी मुश्किल से घर टमाटर ला रहा हूं,



अनार से महंगा टमाटर खा रहा हूं।


बीबी भी सबसे पहले सब्ज़ियो के झोले से,
टमाटर टटोल कर निकालती है,
और पुछती है क्या भाव पाये,
कैसे कहु कि हे!भाग्यवान तुम अपने टमाटर खाने का शौक,
काश सस्ते होने तलक टाल पाती,
लेकिन नही,तुम नही टाल पाओगी,
तुम्हारे इसी न टालने के नाते,
अपनी एक महिने की सेलरी का तीस पर्सेंट खर्च कर,
बस मै तुम्हारे लिये टमाटर ला रहा हूं।


आ गये अच्छे दिन——-
मै इलू-इलू गा रहा हूं,
अनार से महंगा टमाटर खा रहा हूं।

@@@रचयिता—–रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)।


5 COMMENTS

  1. टमाटर के चढ़ते दाम व्यंगकार को भी प्रभावित कर गए। इसी साल जनवरी में शहरी शो रूम में टमाटर 40 रुपये प्रति किलो बिक रहा था वहीँ छत्तीसगढ़ में किसानों को 1 रुपये प्रति किलो का भी भाव न मिलने से उन्होंने अन्य ख़र्चे बचाने के फेर में और आक्रोश दिखाने के लिए कई ट्रक टमाटर सड़कों पर फैला दिए गए। जून में महाराष्ट्र और म. प्र. में फल ,सब्ज़ियां और दूध सड़कों पर किसानों द्वारा बिखेरे गए। अवसर का लाभ उठाने वाले कहाँ चूकते हैं ,चढ़ा दिया टमाटर का दाम आसमान पर…..
    बहुत ख़ूब। सामान्य जान की पीड़ा को अभिव्यक्ति देती आपकी रचना व्यंग के माध्यम से सार्थक संवाद करती है।

  2. टमाटर का खर्चा ज्यादा है हमारा भी पर क्या करें लेना पड़ रहा है मजबूरी में।

  3. मेरे ख्याल से सरकार को टमाटर के लिये लोन स्किम निकालनी चाहिये जिससे टमाटर पर ज्यादा से ज्यादा ब्जाज सरकार के खाते मे जमा हो और ज्यादा खरीदने पर लोन लेगा उसपर जी एस टी भी लगा सकते है

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